श्री श्री १००८ परम् पूज्य बाबा अमित जी महाराज का नवीन डिप्लोमैटिक जीवन मंत्र
देखो सुनो सोचो विचारो, ज़रूरत हो तो ही कुछ उच्चारो
पाकिस्तानी हॉकी टीम के कोच शाहिद अली खान साहब चिंतित हैं कि नई दिल्ली में हो रहे हॉकी विश्वकप में उनकी टीम को संतोषजनक सुरक्षा नहीं दी जा रही है (यहाँ पढ़िए)। मन में ऐसा आता है कि पूछें कि जनाब आपको सुरक्षा की काहे आवश्यकता, अब अल-कायदा या आपके कोई अन्य बंधु बम वगैरह फोड़ेंगे तो आपको तो पहले से इत्तला कर देंगे, आपको थोड़े ही न टेन्शन लेने की आवश्यकता है!!

फिर मन में आता है कि नहीं ऐसा सोचना उचित नहीं होगा, अब सभी पाकिस्तानी थोड़े ही आतंकवादी हैं, उधर भी बम वगैरह फटते हैं, आतंकवादी पुलिस चौकियों आदि पर कब्ज़ा कर लेते हैं, तो ऐसा कहना तो ज़्यादती होगी। फिर मन में ख्याल आता है कि पूछ लें कि जनाब क्या आपको वैसी सुरक्षा दी जाए जैसी बेचारी श्रीलंका की क्रिकेट टीम को दी गई थी, क्या वह आपके हिसाब से माकूल रहेगी?!
ऐसा क्यों? इसलिए क्योंकि खान साहेब तुलना कर रहे थे कि जैसी सुरक्षा उनको दी जा रही है वैसी टंटपुंजियों वाली सुरक्षा तो पाकिस्तान में भी देते हैं। मेरे ख्याल से खान साहेब सुरक्षा या अन्य किसी विषय पर अहमकाना टिप्पणी करने के स्थान पर अपनी टीम और उसके खेल पर ध्यान दें तो बेहतर होगा, देखा नहीं भारतीय टीम ने कैसे पहले मैच में कल उनको धोया, ऐसे तो धोबी भी कपड़े नहीं धोता!!
फोटो साभार CORE-Materials, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत

एक अरसा हुआ, रवि जी ने कहा था कि मैं अपने पसंदीदा लेखों की सूचि सार्वजनिक करूँ ताकि वे भी देख सकें कि मैं क्या पढ़ता हूँ। उस समय मैं ब्लॉगलाइन्स (bloglines) का प्रयोग करता था और अभी तक करता आ रहा था, उसमें लेख पसंद कर उनकी फीड आदि सार्वजनिक करने का कोई जुगाड़ नहीं है इसलिए रवि जी के कहे अनुसार करना संभव न था। ब्लॉगलाइन्स की काफ़ी समय से आदत पड़ी हुई थी, वही प्रयोग करता आ रहा था इसलिए गूगल रीडर पर पलायन करने को मन न मानता था। कुछेक सुविधाएँ दोनों में ही एक्सक्लूसिव सी हैं; जिस प्रकार गूगल रीडर की भांति ब्लॉगलाइन्स में पसंदीदा लेखों की फीड को साझा नहीं किया जा सकता उसी प्रकार गूगल रीडर में ब्लॉगलाइन्स की भांति किसी लेख को सेव करने का जुगाड़ नहीं है। वैसे मैं आशा कर रहा हूँ कि गूगल रीडर में किसी भी लेख को स्टॉर करने का जो विकल्प है वह अमुक लेख को रीडर में ही रखता होगा चाहे लेख कितना ही पुराना क्यों न हो, जैसे कि ब्लॉगलाइन्स में किसी भी लेख को पिन करने का विकल्प होता है।
बहरहाल, पिछले लगभग दो वर्ष से ब्लॉगलाइन्स के बीटा संस्करण का प्रयोग करता आ रहा हूँ, यह पिछले दो वर्ष से बीटा में है और पता नहीं इस पर आज भी काम हो रहा है या फिर काम रुका हुआ है क्योंकि यह गाहे-बगाहे डाऊन रहता है, सर्वर में एरर आ जाता है या लोड नहीं होता, सर्वर से संबन्ध नहीं हो पाता, यानि कुल मिलाकर बीटा के पूरे अर्थ को सार्थक करता है। इसी से आखिरकार तंग आकर गूगल रीडर पर पलायन करने का मन बनाया और अब पिछले दो दिन से वहीं ब्लॉग आदि पढ़े जा रहे हैं। अब जब गूगल रीडर पर आना हो गया है तो ज़ाहिर है कि पसंदीदा लेखों की सूचि भी साझा की जा सकती है।
बस इसी नेक मनसूबे के तहत जीतू भाई के ब्लॉग से आईडिया उठा के अपने यहाँ एक पन्ना इसी के लिए बना लिया है जहाँ पसंदीदा लेखों की सूचि विराजमान रहे।
यह पन्ना यहाँ उपलब्ध है, मौजूदा सूचि अपने आप अपडेट होती रहेगी जैसे-२ मैं अन्य पसंदीदा लेखों के लिंक साझा करता जाऊँगा, पढ़ने के लिए आप कभी भी यहाँ पधार सकते हैं।