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	<title>Comments on: स्वयमेव जयते!!</title>
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	<description>the world from my eyes in my language - दुनिया मेरी नज़र से मेरी भाषा में</description>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-31</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 Sep 2006 08:22:06 +0000</pubDate>
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		<description>बताने का धन्यवाद अनुनाद जी। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बताने का धन्यवाद अनुनाद जी। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: Anunad Singh</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-30</link>
		<dc:creator>Anunad Singh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 Sep 2006 07:26:18 +0000</pubDate>
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		<description>बन्धुवर, &#039;स्वयंमेव&#039;  गलत है और स्वयमेव( = स्वयम् + एव ) सही है।

 ( स्वयम् = स्वयं )</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>बन्धुवर, &#8216;स्वयंमेव&#8217;  गलत है और स्वयमेव( = स्वयम् + एव ) सही है।</p>
<p> ( स्वयम् = स्वयं )</p>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-29</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Feb 2006 14:33:41 +0000</pubDate>
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		<description>धन्यवाद रजनीश जी। :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धन्यवाद रजनीश जी। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: रजनीश मंगला</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-28</link>
		<dc:creator>रजनीश मंगला</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Feb 2006 15:30:30 +0000</pubDate>
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		<description>भाई अमित, तुम बहुत अच्छा लिखते हो, कई बार सोचा तुम्हारी पोस्ट पर लिखने को लेकिन आज ही समय निकाल पाया हूं। ये पोस्ट खास कर मुझे अच्छी लगी। मेरा ज्ञान तो इन मामलों में ना के बराबर है, लेकिन इस नोकझोंक में एक दूसरे के ख़्याल पढ़ने को मिलते हैं जो विषय को बहुत मज़ेदार बना देते हैं। इस पोस्ट को टिप्पणियों के साथ मैंने &lt;a href=&quot;http://www.geocities.com/rajneesh_mangla/narad_05.doc&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt; पांचवे प्रिंटड नारद &lt;/a&gt;के लिए चुना है। सुविधा के लिए कालीचरण जी की टिप्पणी को देवनागिरी में लिख दिया है। ये अभी अधूरा है, बाकी की जगह भरने के लिए कोई अच्छी पोस्ट ढ़ूंढ़ रहा हूं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भाई अमित, तुम बहुत अच्छा लिखते हो, कई बार सोचा तुम्हारी पोस्ट पर लिखने को लेकिन आज ही समय निकाल पाया हूं। ये पोस्ट खास कर मुझे अच्छी लगी। मेरा ज्ञान तो इन मामलों में ना के बराबर है, लेकिन इस नोकझोंक में एक दूसरे के ख़्याल पढ़ने को मिलते हैं जो विषय को बहुत मज़ेदार बना देते हैं। इस पोस्ट को टिप्पणियों के साथ मैंने <a href="http://www.geocities.com/rajneesh_mangla/narad_05.doc" rel="nofollow"> पांचवे प्रिंटड नारद </a>के लिए चुना है। सुविधा के लिए कालीचरण जी की टिप्पणी को देवनागिरी में लिख दिया है। ये अभी अधूरा है, बाकी की जगह भरने के लिए कोई अच्छी पोस्ट ढ़ूंढ़ रहा हूं।</p>
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	<item>
		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-27</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jan 2006 13:00:21 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-27</guid>
		<description>सिद्धार्थ, आपको हिन्दी ज्ञान की अत्यधिक आवश्यकता है क्योंकि आपको यह नहीं पता कि किस शब्द का किस तरह संधिविच्छेद करना चाहिए और करना चाहिए या नहीं!! इसलिए पहले अपने ज्ञान को बढ़ाओ, व्यंगात्मक भाव प्रकट करना बंद करो, फ़िर हम बात करेंगे!! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>सिद्धार्थ, आपको हिन्दी ज्ञान की अत्यधिक आवश्यकता है क्योंकि आपको यह नहीं पता कि किस शब्द का किस तरह संधिविच्छेद करना चाहिए और करना चाहिए या नहीं!! इसलिए पहले अपने ज्ञान को बढ़ाओ, व्यंगात्मक भाव प्रकट करना बंद करो, फ़िर हम बात करेंगे!! <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	<item>
		<title>By: siddharth</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-26</link>
		<dc:creator>siddharth</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Jan 2006 05:23:47 +0000</pubDate>
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		<description>स्वयं+एव=स्वयमेव&#124; what is स्वयंमेव then? :roll:</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>स्वयं+एव=स्वयमेव| what is स्वयंमेव then? <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_rolleyes.gif' alt=':roll:' class='wp-smiley' /> </p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-25</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Wed, 21 Dec 2005 20:56:39 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-25</guid>
		<description>पहले तो मैं यह कहना चाहूँगा कि या तो हिन्दी ठीक से देवनागरी लिपि में लिखो या फ़िर अपनी टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में दो, यह अंग्रेज़ी में लिखी हिन्दी वैसे ही पल्ले नहीं पड़ती। ;)

अब जितना मैं तुम्हारी टिप्पणी को समझा हूँ तो ऐसा है भईये तुम कैसे कह सकते हो कि &quot;निजी स्वार्थ&quot; नाम की कोई चीज़ नहीं होती? ठीक है कि &quot;स्वार्थ&quot; का अर्थ ही &quot;अपना भला&quot; होता है, परन्तु &quot;स्वार्थ&quot; शब्द का प्रयोग उसके शुद्ध रूप में न होकर ज्यादातर &quot;हित&quot; या &quot;भले&quot; के समानार्थक शब्द के रूप में किया जाता है। तो इसलिए &quot;स्वार्थ&quot; के साथ &quot;निजी&quot; का प्रयोग निराधार या बेकाम नहीं है। :) दूसरे यह कि यह वाक्यांश नया भी नहीं है। &lt;a href=&quot;http://www.google.com/search?hl=en&amp;q=%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;गूगल&lt;/a&gt; पर यदि खोजोगे तो बहुत जगह इसका प्रयोग पाओगे। ;)

रही बात एक संयुक्त भारत की, तो मैं यही कहूँगा कि तुम्हारा यह सोचना कि हिन्दुओं के बारह बज जाते, सिरे से ही निराधार है। माना कि ईस्लामी रूढिवाद एक समस्या है और वे लोग अत्यधिक कट्टरपंथी हैं पर विचारणीय बात यह है कि मुस्लिम समाज यहाँ भी है और कोई (बड़ी)समस्या नहीं है। पाकिस्तान और बंगलादेश के हाल इस मामले में बुरे इसलिए हैं कि ईस्लामी राज है और जब सत्ता किसी धर्म के प्रभाव में हो तो वहाँ उसी धर्म की चलती है। उदाहरण तुम किसी भी अरबी देश(ईस्लाम) या योरोपीयन देश(ईसाई) या अमेरिका का ले सकते हो जहाँ राष्ट्रीय पशु, झंडे इत्यादि के साथ साथ राष्ट्रीय धर्म भी है जिसे अंग्रेज़ी में state religion कहा जाता है। क्योंकि भारत की रचना एक धर्मनिर्पेक्ष राष्ट्र के रूप में हुई थी, इसलिए मैं नहीं समझता कि ईस्लामी रूढिवाद या कोई अन्य रूढिवाद यहाँ इतना प्रभावशाली हो पाएगा कि वह राष्ट्र की धारा ही बदल दे।

और विश्व आतंकवाद से जहाँ तक भारत का नाता है, तो उसकी मुख्य जड़ पाकिस्तान ही है जो कि सब जानते हैं। पाकिस्तान के आकाओं को यह बात कभी नहीं खरी कि वह कश्मीर पर कब्ज़ा करने में नाकामयाब रहा और कश्मीर भारत में आ मिला। और 1971 की लड़ाई ने कोढ में ख़ाज का काम किया क्योंकि पाकिस्तान को पूर्वी पाकिस्तान से हाथ धोना पड़ा जोकि बंगलादेश के रूप में एक स्वतंत्र देश बन गया। उनके लिए इस देश विभाजन का जिम्मेदार भारत था और यह बात तो कोई सहन नहीं कर सकता। दो बार के हमले के बाद पाकिस्तान के आकाओं को यह बात समझ आ गई कि वे सीधी लड़ाई में तो जीत नहीं सकते, यदि किसी तरह जीत भी गए तो खुद भी बरबाद हो जाएँगे, और फ़िर 1971 के बाद हमला करना आसान भी नहीं रहा क्योंकि उन्हें अंतराष्ट्रीय समप्रदाय का अपने ख़िलाफ़ होने का भी डर था। तो इसलिए उन्होने गुप-चुप घुसपैठ का रास्ता चुना जो कि आतंकवाद के रूप में विकसित हुआ। इसमें उसे चीन और उत्तर कोरिया के रूप में बड़े मददगार मिले जो कि नहीं चाहते कि भारत कभी इतना विकसित हो कि वह उन दोनो के लिए खतरा बन सके और ऐशिया में जिसकी प्रभुता बढे। चीन और उत्तर कोरिया, दोनो ही को पाकिस्तान के उद्देश्य से कोई सरोकार नहीं है, वे तो सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए उसके साथ हैं। यदि पाकिस्तान की भारत के साथ पुरानी रंजिश न होती तो अंतकवाद भारत की कदाचित इतनी बड़ी समस्या न होता।

और बुश तो एक बेवकूफ़ है, उसकी बातें ध्यान देने के लिए नहीं होती, सिर्फ़ सुनकर(पढकर) हंसने और भूल जाने के लिए होती है। और कोई अमरीकी नेता सर्व कुशल की नहीं सोचता, उनकी सोच अमरीका तक ही सीमित होती है और असल मकसद तो विश्व में अमरीकी लंगोट घुमाने का होता है। और जिस अमरीका की तुम बात कर रहे हो, वह अपने पर हुए आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए खुद तो दूसरे देशों पर आक्रमण कर सकता है, वो भी संयुक्त राष्ट्र संघ की खिलाफ़त करके, पर यदि कोई और ऐसा कर दे(जैसे कि भारत), तो वह अपना डंडा घुमाता हुआ आ जाएगा। और यही वह अमरीका है जो कि पाकिस्तान को तो हथियार बेच सकता है, पर भारत को नहीं। 1965 और 1971 में भारत के ख़िलाफ़ अमरीकी हथियार ही लड़े थे, और यह कहना भी कोई अतिश्योक्ती न होगा कि विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा सौदागर अमरीका ही है और आज विश्व में ज्यादातर हथियार अमरीकी ही हैं। :roll:</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पहले तो मैं यह कहना चाहूँगा कि या तो हिन्दी ठीक से देवनागरी लिपि में लिखो या फ़िर अपनी टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में दो, यह अंग्रेज़ी में लिखी हिन्दी वैसे ही पल्ले नहीं पड़ती। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /><br />
अब जितना मैं तुम्हारी टिप्पणी को समझा हूँ तो ऐसा है भईये तुम कैसे कह सकते हो कि &#8220;निजी स्वार्थ&#8221; नाम की कोई चीज़ नहीं होती? ठीक है कि &#8220;स्वार्थ&#8221; का अर्थ ही &#8220;अपना भला&#8221; होता है, परन्तु &#8220;स्वार्थ&#8221; शब्द का प्रयोग उसके शुद्ध रूप में न होकर ज्यादातर &#8220;हित&#8221; या &#8220;भले&#8221; के समानार्थक शब्द के रूप में किया जाता है। तो इसलिए &#8220;स्वार्थ&#8221; के साथ &#8220;निजी&#8221; का प्रयोग निराधार या बेकाम नहीं है। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> दूसरे यह कि यह वाक्यांश नया भी नहीं है। <a href="http://www.google.com/search?hl=en&amp;q=%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%9C%E0%A5%80+%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5" rel="nofollow">गूगल</a> पर यदि खोजोगे तो बहुत जगह इसका प्रयोग पाओगे। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_wink.gif' alt=';)' class='wp-smiley' /><br />
रही बात एक संयुक्त भारत की, तो मैं यही कहूँगा कि तुम्हारा यह सोचना कि हिन्दुओं के बारह बज जाते, सिरे से ही निराधार है। माना कि ईस्लामी रूढिवाद एक समस्या है और वे लोग अत्यधिक कट्टरपंथी हैं पर विचारणीय बात यह है कि मुस्लिम समाज यहाँ भी है और कोई (बड़ी)समस्या नहीं है। पाकिस्तान और बंगलादेश के हाल इस मामले में बुरे इसलिए हैं कि ईस्लामी राज है और जब सत्ता किसी धर्म के प्रभाव में हो तो वहाँ उसी धर्म की चलती है। उदाहरण तुम किसी भी अरबी देश(ईस्लाम) या योरोपीयन देश(ईसाई) या अमेरिका का ले सकते हो जहाँ राष्ट्रीय पशु, झंडे इत्यादि के साथ साथ राष्ट्रीय धर्म भी है जिसे अंग्रेज़ी में state religion कहा जाता है। क्योंकि भारत की रचना एक धर्मनिर्पेक्ष राष्ट्र के रूप में हुई थी, इसलिए मैं नहीं समझता कि ईस्लामी रूढिवाद या कोई अन्य रूढिवाद यहाँ इतना प्रभावशाली हो पाएगा कि वह राष्ट्र की धारा ही बदल दे।</p>
<p>और विश्व आतंकवाद से जहाँ तक भारत का नाता है, तो उसकी मुख्य जड़ पाकिस्तान ही है जो कि सब जानते हैं। पाकिस्तान के आकाओं को यह बात कभी नहीं खरी कि वह कश्मीर पर कब्ज़ा करने में नाकामयाब रहा और कश्मीर भारत में आ मिला। और 1971 की लड़ाई ने कोढ में ख़ाज का काम किया क्योंकि पाकिस्तान को पूर्वी पाकिस्तान से हाथ धोना पड़ा जोकि बंगलादेश के रूप में एक स्वतंत्र देश बन गया। उनके लिए इस देश विभाजन का जिम्मेदार भारत था और यह बात तो कोई सहन नहीं कर सकता। दो बार के हमले के बाद पाकिस्तान के आकाओं को यह बात समझ आ गई कि वे सीधी लड़ाई में तो जीत नहीं सकते, यदि किसी तरह जीत भी गए तो खुद भी बरबाद हो जाएँगे, और फ़िर 1971 के बाद हमला करना आसान भी नहीं रहा क्योंकि उन्हें अंतराष्ट्रीय समप्रदाय का अपने ख़िलाफ़ होने का भी डर था। तो इसलिए उन्होने गुप-चुप घुसपैठ का रास्ता चुना जो कि आतंकवाद के रूप में विकसित हुआ। इसमें उसे चीन और उत्तर कोरिया के रूप में बड़े मददगार मिले जो कि नहीं चाहते कि भारत कभी इतना विकसित हो कि वह उन दोनो के लिए खतरा बन सके और ऐशिया में जिसकी प्रभुता बढे। चीन और उत्तर कोरिया, दोनो ही को पाकिस्तान के उद्देश्य से कोई सरोकार नहीं है, वे तो सिर्फ़ अपने स्वार्थ के लिए उसके साथ हैं। यदि पाकिस्तान की भारत के साथ पुरानी रंजिश न होती तो अंतकवाद भारत की कदाचित इतनी बड़ी समस्या न होता।</p>
<p>और बुश तो एक बेवकूफ़ है, उसकी बातें ध्यान देने के लिए नहीं होती, सिर्फ़ सुनकर(पढकर) हंसने और भूल जाने के लिए होती है। और कोई अमरीकी नेता सर्व कुशल की नहीं सोचता, उनकी सोच अमरीका तक ही सीमित होती है और असल मकसद तो विश्व में अमरीकी लंगोट घुमाने का होता है। और जिस अमरीका की तुम बात कर रहे हो, वह अपने पर हुए आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए खुद तो दूसरे देशों पर आक्रमण कर सकता है, वो भी संयुक्त राष्ट्र संघ की खिलाफ़त करके, पर यदि कोई और ऐसा कर दे(जैसे कि भारत), तो वह अपना डंडा घुमाता हुआ आ जाएगा। और यही वह अमरीका है जो कि पाकिस्तान को तो हथियार बेच सकता है, पर भारत को नहीं। 1965 और 1971 में भारत के ख़िलाफ़ अमरीकी हथियार ही लड़े थे, और यह कहना भी कोई अतिश्योक्ती न होगा कि विश्व में हथियारों का सबसे बड़ा सौदागर अमरीका ही है और आज विश्व में ज्यादातर हथियार अमरीकी ही हैं। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_rolleyes.gif' alt=':roll:' class='wp-smiley' /> </p>
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		<title>By: kali</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2005/12/19/self-gain-first/#comment-24</link>
		<dc:creator>kali</dc:creator>
		<pubDate>Tue, 20 Dec 2005 13:29:49 +0000</pubDate>
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		<description>kafi josh akrosh se likhe ho bhaduvaar. Sahi hai, woh khun hi kya jisme ravaani na ho type entry chape ho.
Bhaiye ek point jo mujhe dikha to bata dun ki &quot;निजी स्वार्थ&quot; naam ki koi cheez nahi hoti.  स्वार्थ = Swa + Arth matlab khub ka aarth tarna so निजी is redundant there you see.
Dusra content per yahi kehna hai ki aaj agar pakistan + hindustan + bangladesh ek entity hote to hinduon ki to barah baaj jati aur desh ki jo thodi bahut arthvyavastha bani hai woh bhi nahi banti.
Problem is that Islamic fundamentalism and global terrorism is a very disruptive force as told by the leader of the free world and protector of democracy Mr. Bush :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>kafi josh akrosh se likhe ho bhaduvaar. Sahi hai, woh khun hi kya jisme ravaani na ho type entry chape ho.<br />
Bhaiye ek point jo mujhe dikha to bata dun ki &#8220;निजी स्वार्थ&#8221; naam ki koi cheez nahi hoti.  स्वार्थ = Swa + Arth matlab khub ka aarth tarna so निजी is redundant there you see.<br />
Dusra content per yahi kehna hai ki aaj agar pakistan + hindustan + bangladesh ek entity hote to hinduon ki to barah baaj jati aur desh ki jo thodi bahut arthvyavastha bani hai woh bhi nahi banti.<br />
Problem is that Islamic fundamentalism and global terrorism is a very disruptive force as told by the leader of the free world and protector of democracy Mr. Bush <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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