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	<title>Comments on: द सौरव कॉन्सपिरेसी!!</title>
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	<description>the world from my eyes in my language - दुनिया मेरी नज़र से मेरी भाषा में</description>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2006/02/02/the-sourav-conspiracy/#comment-138</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Feb 2006 20:56:41 +0000</pubDate>
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		<description>भईये, मूर्खों की कोई जात नहीं होती न ही कोई पहचान होती है, वे हर आकार और प्रकार में मिलते हैं, चाहे वह अपने स्टार कोच ग्रेग चैपल हो या मूर्खों के सरताज किरण मोरे, जो खुद तो कभी कुछ कर नहीं पाए, और अब सौरव से न जाने कौन सी ज़ाती खुंदक निकाल रहे हैं!!

और लोग भी इतने पागल नहीं हैं। भारत पाकिस्तान के मैच तो अत्यधिक भावुकता में लिपटे तनावपूर्ण माहौल की रचना कर देते हैं, हारना किसी भी तरफ़ के लोगों को पसन्द नहीं आता। अब भारत की हार के बाद यहाँ के लोगों का बौखलाना स्वभाविक है, लोग सचिन पर उंगली उठा रहे हैं तो राहुल द्रविड़ को भी उन्होंने बख्शा नहीं है और यदि ग्रेग चैपल को लोगों के हवाले कर दिया जाए तो वे उसकी तिक्का बोटी अलग कर देंगे।

अभी मैं ज़ी न्यूज़ पर दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास हो रहे चैट शो &quot;कमज़ोर कड़ी कौन&quot; को देख रहा था जिसमें सलिल अंकोला और अब्दुल कादिर को लोगों के सवालों का उत्तर देने के लिए बुलाया गया है। कादिर साहब का तो समझ में आता है पर क्या &quot;ज़ी&quot; वालों को अंकोला से अच्छा कोई नहीं मिला? बहरहाल, यह बात कादिर साहब ने कही कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले कोई अनाड़ी नहीं होते कि उन्हे कोच की आवश्यकता हो। इस स्तर पर कोच को महज़ एक सलाहकार होना चाहिए, न कि इससे ज्यादा। और यदि कोच की इतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है जितनी कि हम लोग बना देते हैं, तो क्यों नहीं कोई कोच केन्या, बंग्लादेश या संयुक्त अरब अमीरात की टीम को विश्वकप जितवा देता!! और मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ।

हमारे पिछले कोच जॉन राईट इस मामले में सही थे, वे अपने काम से मतलब रखते थे, बेवजह के विवादों में नहीं पड़ते थे। और हमारे स्टार कोच ग्रेग चैपल अपने काम के सिवाय सब कुछ करते हैं। जैसे कि बेवजह के विवादों में रहना, खुदा का किरदार निभाना। अभी शोएब अख्तर की गेन्दबाज़ी के ऐक्शन पर सरेआम टिप्पणी कर इन्होंने एक और विवाद खड़ा कर दिया है, पाकिस्तान बोर्ड को यह बात चुभ गई है!! पता नहीं क्यों हम इस नाकारा और बकवास कोच को झेल रहें हैं जोकि सब कुछ करता है पर वह काम नहीं करता जिसके लिए उसे रखा गया है और जिसके उसे पैसे दिए जा रहे हैं। अरे भई, यदि यह इतना ही बढ़िया कोच है तो आस्ट्रेलिया ने इसे क्यों नहीं रख लिया? कोई आवश्यक नहीं कि जो बढ़िया खिलाड़ी रहा हो वह बढ़िया कोच भी हो। कपिल देव बढ़िया खिलाड़ी थे पर कोच के तौर पर वे कामयाब नहीं रहे, जॉन राईट कोई खासे बढ़िया खिलाड़ी नहीं थे पर बतौर कोच वे अत्यधिक सफ़ल रहे!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>भईये, मूर्खों की कोई जात नहीं होती न ही कोई पहचान होती है, वे हर आकार और प्रकार में मिलते हैं, चाहे वह अपने स्टार कोच ग्रेग चैपल हो या मूर्खों के सरताज किरण मोरे, जो खुद तो कभी कुछ कर नहीं पाए, और अब सौरव से न जाने कौन सी ज़ाती खुंदक निकाल रहे हैं!!</p>
<p>और लोग भी इतने पागल नहीं हैं। भारत पाकिस्तान के मैच तो अत्यधिक भावुकता में लिपटे तनावपूर्ण माहौल की रचना कर देते हैं, हारना किसी भी तरफ़ के लोगों को पसन्द नहीं आता। अब भारत की हार के बाद यहाँ के लोगों का बौखलाना स्वभाविक है, लोग सचिन पर उंगली उठा रहे हैं तो राहुल द्रविड़ को भी उन्होंने बख्शा नहीं है और यदि ग्रेग चैपल को लोगों के हवाले कर दिया जाए तो वे उसकी तिक्का बोटी अलग कर देंगे।</p>
<p>अभी मैं ज़ी न्यूज़ पर दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर के पास हो रहे चैट शो &#8220;कमज़ोर कड़ी कौन&#8221; को देख रहा था जिसमें सलिल अंकोला और अब्दुल कादिर को लोगों के सवालों का उत्तर देने के लिए बुलाया गया है। कादिर साहब का तो समझ में आता है पर क्या &#8220;ज़ी&#8221; वालों को अंकोला से अच्छा कोई नहीं मिला? बहरहाल, यह बात कादिर साहब ने कही कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले कोई अनाड़ी नहीं होते कि उन्हे कोच की आवश्यकता हो। इस स्तर पर कोच को महज़ एक सलाहकार होना चाहिए, न कि इससे ज्यादा। और यदि कोच की इतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है जितनी कि हम लोग बना देते हैं, तो क्यों नहीं कोई कोच केन्या, बंग्लादेश या संयुक्त अरब अमीरात की टीम को विश्वकप जितवा देता!! और मैं इस बात से पूरी तरह सहमत हूँ।</p>
<p>हमारे पिछले कोच जॉन राईट इस मामले में सही थे, वे अपने काम से मतलब रखते थे, बेवजह के विवादों में नहीं पड़ते थे। और हमारे स्टार कोच ग्रेग चैपल अपने काम के सिवाय सब कुछ करते हैं। जैसे कि बेवजह के विवादों में रहना, खुदा का किरदार निभाना। अभी शोएब अख्तर की गेन्दबाज़ी के ऐक्शन पर सरेआम टिप्पणी कर इन्होंने एक और विवाद खड़ा कर दिया है, पाकिस्तान बोर्ड को यह बात चुभ गई है!! पता नहीं क्यों हम इस नाकारा और बकवास कोच को झेल रहें हैं जोकि सब कुछ करता है पर वह काम नहीं करता जिसके लिए उसे रखा गया है और जिसके उसे पैसे दिए जा रहे हैं। अरे भई, यदि यह इतना ही बढ़िया कोच है तो आस्ट्रेलिया ने इसे क्यों नहीं रख लिया? कोई आवश्यक नहीं कि जो बढ़िया खिलाड़ी रहा हो वह बढ़िया कोच भी हो। कपिल देव बढ़िया खिलाड़ी थे पर कोच के तौर पर वे कामयाब नहीं रहे, जॉन राईट कोई खासे बढ़िया खिलाड़ी नहीं थे पर बतौर कोच वे अत्यधिक सफ़ल रहे!!</p>
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		<title>By: Pratik Pandey</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2006/02/02/the-sourav-conspiracy/#comment-137</link>
		<dc:creator>Pratik Pandey</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Feb 2006 15:41:37 +0000</pubDate>
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		<description>मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ। कहते भी हैं कि &#039;फ़ॉर्म&#039; अस्थायी होती है, लेकिन &#039;क्‍लास&#039; स्थायी होती है। सौरव गांगुली के पिछले प्रदर्शन के आंकड़े ही यह बयान कर देते हैं, कि वे किस स्तर के खिलाड़ी हैं। यूं ही हर कोई ऐरा-ग़ैरा दस हज़ार से ज़्यादा रन नहीं बना लेता।

अगर यह बात सौरव के लिये ठीक है, तो सचिन के लिये और भी अधिक सही है। वह टीम-प्रबन्धन और वे चयनकर्ता शायद महामूर्ख ही होंगे, जो सचिन तेन्‍दुलकर जैसे स्तरीय खिलाड़ी को टीम से निकालने पर विचार करेंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ। कहते भी हैं कि &#8216;फ़ॉर्म&#8217; अस्थायी होती है, लेकिन &#8216;क्‍लास&#8217; स्थायी होती है। सौरव गांगुली के पिछले प्रदर्शन के आंकड़े ही यह बयान कर देते हैं, कि वे किस स्तर के खिलाड़ी हैं। यूं ही हर कोई ऐरा-ग़ैरा दस हज़ार से ज़्यादा रन नहीं बना लेता।</p>
<p>अगर यह बात सौरव के लिये ठीक है, तो सचिन के लिये और भी अधिक सही है। वह टीम-प्रबन्धन और वे चयनकर्ता शायद महामूर्ख ही होंगे, जो सचिन तेन्‍दुलकर जैसे स्तरीय खिलाड़ी को टीम से निकालने पर विचार करेंगे।</p>
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		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2006/02/02/the-sourav-conspiracy/#comment-136</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Feb 2006 13:23:39 +0000</pubDate>
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		<description>चलो, आपकी बात मानी कि अपनी इज्ज़त अपने हाथ होती है, परन्तु यह कह देना कि चूँकि सौरव सचिन आदि ३० से ऊपर के हो गए हैं इसलिए अब उन्हें अवकाश ले लेना चाहिए, यह मात्र निरी बकवास है। बुरा समय हर किसी का आता है, खराब फ़ार्म हर किसी की होती है, इसका यह तात्पर्य नहीं कि वे बेकार हो गए। यही बात अगर है तो वह कप्तान द्रविड़ पर क्यों नहीं लागू होती? ऐसा है तो आस्ट्रेलिया वाले क्यों नहीं अपनी पूरी टीम को निलंबित कर देते, उनके यहाँ भारतीय टीम से ज्यादा बूढ़े खिलाड़ी हैं। ब्रायन लारा का भी कुछ समय पहले यही हाल था, वेस्ट इंडीज़ बोर्ड ने उनकी हालत भी कुछ कुछ सौरव जैसी ही कर रखी थी, पर फ़िर क्या हुआ? वही लोग बाद में हाथ जोड़े आगे पीछे घूमे कि नहीं? इंज़माम का भी कुछ समय पहले(कप्तान बनने से पहले) हाल ऐसा ही था, अब वही बोर्ड चिन्तित है उनकी कमर की तकलीफ़ को लेकर, कि यदि वह जल्द ठीक नहीं हुई तो क्या होगा!! मैं ऐसे कई उदाहरण दे सकता हूँ। खराब फ़ार्म हर किसी की आती है भईये, यह कोई नई बात नहीं, गवास्कर भी हर मैच में शतक या अर्ध शतक नहीं मारता था!! :)</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>चलो, आपकी बात मानी कि अपनी इज्ज़त अपने हाथ होती है, परन्तु यह कह देना कि चूँकि सौरव सचिन आदि ३० से ऊपर के हो गए हैं इसलिए अब उन्हें अवकाश ले लेना चाहिए, यह मात्र निरी बकवास है। बुरा समय हर किसी का आता है, खराब फ़ार्म हर किसी की होती है, इसका यह तात्पर्य नहीं कि वे बेकार हो गए। यही बात अगर है तो वह कप्तान द्रविड़ पर क्यों नहीं लागू होती? ऐसा है तो आस्ट्रेलिया वाले क्यों नहीं अपनी पूरी टीम को निलंबित कर देते, उनके यहाँ भारतीय टीम से ज्यादा बूढ़े खिलाड़ी हैं। ब्रायन लारा का भी कुछ समय पहले यही हाल था, वेस्ट इंडीज़ बोर्ड ने उनकी हालत भी कुछ कुछ सौरव जैसी ही कर रखी थी, पर फ़िर क्या हुआ? वही लोग बाद में हाथ जोड़े आगे पीछे घूमे कि नहीं? इंज़माम का भी कुछ समय पहले(कप्तान बनने से पहले) हाल ऐसा ही था, अब वही बोर्ड चिन्तित है उनकी कमर की तकलीफ़ को लेकर, कि यदि वह जल्द ठीक नहीं हुई तो क्या होगा!! मैं ऐसे कई उदाहरण दे सकता हूँ। खराब फ़ार्म हर किसी की आती है भईये, यह कोई नई बात नहीं, गवास्कर भी हर मैच में शतक या अर्ध शतक नहीं मारता था!! <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
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	<item>
		<title>By: sanjay &#124; जोग लिखी</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2006/02/02/the-sourav-conspiracy/#comment-135</link>
		<dc:creator>sanjay &#124; जोग लिखी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Feb 2006 12:50:14 +0000</pubDate>
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		<description>मैं आपकी भावनाओं को समझ सकता हूं और यकीन मानीये मैं भी सौरभ गांगुली का सम्मान करता हूं. वे सफल कप्तान रहे हैं और क्रिकेट जगत में  हमारे देश का सम्मान बढाया हैं. लेकिन मित्र यह भी एक सच्चाई हैं कि अपनी इज्जत अपने हाथ होती हैं, हरेक खिलाङी को सम्मान के साथ विदा लेना सिखना चाहिए फिर चाहे आप सचिन ही क्यों न हो. ऐसा न हुआ तो नये सौरभ और सचिन कैसे आ पायेंगे.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>मैं आपकी भावनाओं को समझ सकता हूं और यकीन मानीये मैं भी सौरभ गांगुली का सम्मान करता हूं. वे सफल कप्तान रहे हैं और क्रिकेट जगत में  हमारे देश का सम्मान बढाया हैं. लेकिन मित्र यह भी एक सच्चाई हैं कि अपनी इज्जत अपने हाथ होती हैं, हरेक खिलाङी को सम्मान के साथ विदा लेना सिखना चाहिए फिर चाहे आप सचिन ही क्यों न हो. ऐसा न हुआ तो नये सौरभ और सचिन कैसे आ पायेंगे.</p>
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