हम हैं इस पल यहाँ …..
बहुत दिनों बाद कुछ लिख रहा हूँ। क्यों? यूँ ही, खुरक मच रही थी कि काफ़ी दिन हो गए कुछ लिखा नहीं, सो इसलिए कुछ लिख डालते हैं। पिछली बार जब कुछ लिखा था तो हंगामा हो गया था!! विषय कुछ शीघ्रग्राही था, या यूँ कहें कि समाज के एक वर्ग ने इसे ऐसा बना रखा है। बहरहाल अब उस बवाल से उठी धूल बैठ चुकी है। पर इस बीच न लिखने का कारण यह नहीं था। बल्कि कोई एक कारण न होकर कई कारण हैं जिनका थोड़ा थोड़ा योगदान रहा है, जैसे कि एकाएक मेरा कुछ अधिक व्यस्त हो जाना, फ़िर इस सप्ताह के आरम्भ में वर्डप्रैस डॉट कॉम पर हुई समस्या के कारण इस ब्लॉग की ऐसी की तैसी फ़िर जाना(जिसे कि हांलाकि बाद में सुलटा लिया गया था)। साथ ही एक ऊब सी होने लगी थी, मैंने अपने किसी अन्य ब्लॉग पर भी काफ़ी अरसे से कुछ नहीं लिखा है। अगर इतना पर्याप्त नहीं था तो एक बड़ा कारण था कि कुछ अन्य चीज़ों की ओर ध्यान केन्द्रित हो गया था(है) और उस समय ब्लॉग पर कुछ लिखना समय की बर्बादी लगा। मेरे साथ ऐसा अक्सर होता है कि किसी नई चीज़ की ओर आकर्षण बढ़ता है और फ़िर उस पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए किसी मौजूदा क्रिया का बलिदान देना पड़ता है, भई अब समय तो आखिर अपनी अंटी में उतना ही है न, आकर्षण के साथ साथ वो थोड़े ही बढ़ता है!!
इधर लोग बाग़ बराबर अपनी अपनी छतियाने में लगे हुए थे(फ़िलहाल रूक गए, भई आखिर कितना छतियाएँगे)। एकबारगी तो मुझे लगा कि कही यह बर्ड फ़्लू की तरह न फ़ैल जाए, क्योंकि उस हाल में अपने को इसके टलने तक नारद दर्शन के लिए जाना बन्द करना पड़ता, नहीं तो अपने बीमार होने का खतरा होता। वैसे तो अपन इससे पूरी तरह निरापद हैं पर फ़िर भी क्या भरोसा, जाने कब क्या हो जाए!!
बस अब बहुत हुआ, सुबह हो रही है(६ बजने को हैं), सप्ताहांत है(सारा का सारा यहाँ ही थोड़े न बिताना है) और एक लंबी नींद लेने की इच्छा है(इच्छा ही रहेगी), इसलिए अब बक-बक बंद करते हैं। खुरक उतर चुकी है, तो इसलिए अभी कुछ और समय तक नहीं उठने वाली, अभ्यास हो गया है लंबे समय तक दबाने का(खुरक को, और किसे!!), इसलिए न जाने अब फ़िर कब हों हम यहाँ …..



7 Comments
राम चन्द्र मिश्र
बिलकुल सही!
vijay wadnere
हे भगवान!!
१ बुरी खबर और १ अच्छी खबर!!
…यूँ ही, खुरक मच रही थी कि काफ़ी दिन हो गए कुछ लिखा नहीं, सो इसलिए कुछ लिख डालते हैं।…
…खुरक उतर चुकी है, तो इसलिए अभी कुछ और समय तक नहीं उठने वाली, अभ्यास हो गया है लंबे समय तक दबाने का(खुरक को, और किसे!!)…
अब कौन-सी अच्छी है और कौन-सी बुरी ये आपके उपर!!
Amit
भई अपने लिए तो इसमे से न कोई अच्छी खबर है और न ही कोई बुरी खबर। आपको जैसे ठीक लगे वैसे वर्गीकृत कर लो।
Readers-cafe
मेरे साथ ऐसा अक्सर होता है कि किसी नई चीज़ की ओर आकर्षण बढ़ता है और फ़िर उस पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए किसी मौजूदा क्रिया का बलिदान देना पड़ता है
ये आदत तो अपनी सी लगती है……
Amit
भई जो व्यक्ति व्यस्त रहता है, उनमें यह आदत आम बात होती है, ऐसा मेरा सोचना है, क्योंकि सारा समय तो पहले से ही भिन्न भिन्न क्रिया-कलापों में बंटा होता है, तो नई क्रिया के लिए समय निकालना लगभग असंभव हो जाता है।
Anil
I have come across your blog for the first time, and also the first time I have seen a blog in Hindi.
I have such a bad Hindi, can just read it , forgotten all the alphabets of Hindi.
Felt nice visting your blog
-ATG
Amit
कोई बात नहीं। आप पुनः शुरूआत कर सकते हैं। लिखना कोई कठिन कार्य भी नहीं है, सहायता के लिए यहाँ देख सकते हैं।
धन्यवाद। आपका ब्लॉग भी जाना पहचाना सा लगा, फ़िर याद आया कि अल्का जी के ब्लॉग से आपके ब्लॉग की कड़ी मिली थी!!