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ग्लोबल वायसिस में हिन्दी


January 8th, 2007 at 06:12 pm | 12 Comments

ग्लोबल वायसिस हॉर्वर्ड लॉ स्कूल के बर्कमैन सेन्टर फ़ॉर इंटरनेट एण्ड सोसाईटी द्वारा स्थापित एक अव्यवसायिक संस्था है जिसका उद्देश्य(कम शब्दों में) दुनिया के अलग अलग कोनों से लोगों के विचार ब्लॉग, पॉडकॉस्ट आदि द्वारा सभी तक पहुँचाना है। विश्व के अलग अलग हिस्सों के अलग अलग संपादक और लेखक हैं जो अपने अपने प्रांतों में हो रहे ब्लॉग संवाद आदि को अंग्रेज़ी में ग्लोबल वायसिस के ब्लॉग द्वारा बताते हैं।
(अब मैं उनके बारे में पूर्ण जानकारी का हिन्दी में अनुवाद नहीं कर पाऊँगा, इसलिए अंग्रेज़ी में उसे यहाँ पढ़ें)

अभी तक हिन्दी ब्लॉग जगत का इसमें प्रतिनिधित्व नहीं था, परन्तु मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि आज से यह कमी पूरी हो गई है। जिस प्रकार अनूप जी, जीतू भाई तथा अन्य बंधु हिन्दी में चिट्ठाचर्चा पर नियमित चिट्ठे बाँचते हैं उसी प्रकार मैं अंग्रेज़ी में हिन्दी चिट्ठे बाँच कर सभी को हिन्दी ब्लॉग जगत में चल रहे संवादों से परिचित करवाऊँगा। :) इसका लाभ हिन्दी चिट्ठों को बढ़े हुए ट्रैफ़िक और पाठकों के रूप में मिलेगा। बेशक ग्लोबल वायसिस का ब्लॉग पढ़ने वाले सभी हिन्दी के जानकार नहीं हैं परन्तु जो हैं और जो हिन्दी चिट्ठों के बारे में अधिक नहीं जानते वे तो पाठक बनेंगे!! ;)

पहले प्रयास के रूप में मेरी पहली पोस्ट यहाँ है। :)

12 Comments

आशीष


अमीत एक सराहनीय प्रयास है यह! साधुवाद !


sanjay bengani


साधू साधू


Jitu


बहुत सही अमित भाई, एक अच्छा कार्य, इसकी प्रशंसा और सराहना की जानी चाहिए। इस कार्य से हिन्दी ना जानने वाले भी हिन्दी ब्लॉग लेखकों के विचारों को जान सकेंगे। दुनिया मे कई लोग ऐसे है जो हिन्दी पढ लेते है लेकिन लिख नही सकते। ऐसे लोग हमारे भावी पाठक बन सकते है। साधुवाद!


सृजन शिल्पी


सराहनीय प्रयास। निश्चित ही इससे हिन्दी चिट्ठाकारों को नए पाठक मिल सकेंगे।


Shrish


वाह बहुत सराहनीय प्रयास। सिर्फ पाठक ही नहीं मेरा विचार है कि इससे कई नए लोग हिन्दी चिट्ठाजगत से जुड़ेगें।


जगदीश भाटिया


यह तो बहुत ही बढ़िया है। तुसी तो छा गये। :)


उन्मुक्त


यह हिन्दी चिट्ठेकारी को नया आयाम देगी


रवि


झकास!
हिन्दी की एक और उपलब्धि!!

बधाई व शुभकामनाएँ.


Debashish


बढ़िया शुरुवात अमित! आप बाज़ी मार गये। जैसा कि मैंने चिट्ठा चर्चा पर लिखा था ग्लोबल वायसेस भले ही हिट्स के रूप में हमें लाभ न दें पर हिन्दी ब्लॉगजगत की बात मुख्यधारा के मीडिया तक पहुंचाने का यह अच्छा जरिया सिद्ध होगा। बधाई और शुभकामनायें!


Amit


सभी का धन्यवाद। :)
देबू दा, मेरी भी 16 दिसंबर की ग्लोबल वायसिस सम्मेलन के बाद से ही नेहा जी से बात चल रही थी लेकिन मैंने उनसे निवेदन किया था कि मैं शुरुआत नव वर्ष में 3 तारीख के बाद से ही करूँगा। रही बात हिट्स की तो पक्के तौर पर तो मैं कह नहीं सकता परन्तु जैसा जीतू भाई ने कहा, हिन्दी पढ़ सकने वालों की तादाद बहुत है, फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि बहुतों को हिन्दी ब्लॉगजगत के बारे में पता नहीं। ग्लोबल वायसिस से हिन्दी चिट्ठों की पहुँच बढ़ेगी और नए पाठक मिलने की पूरी आशा है। और मुख्यधारा मीडिया तक बात पहुँचने की आपकी बात भी सही है, जितना exposure मिले उतना बढ़िया। :)


afloo


समाज और इन्टरनेट की बाबत यह केन्द्र कई सार्थक बहस,शोध,गोष्ठियाँ आयोजित करता रहा है।The Filter नाम से यह रोचक समाचार और टिप्पणियां ई-पत्र द्वारा भेजते हैं।http://www.globalvoicesonline.org पर क्षेत्रीय सम्पादक के नाते अमितजी की चिट्ठाचर्चा पढ़ना रुचिकर होगा ।


Amit


अजी नहीं अफ़लातून जी, क्षेत्रीय संपादक नहीं बने हैं। अभी तो महज हिन्दी चिट्ठों पर नज़र रखने वाले लेखक के रूप में जुड़े हैं, दक्षिण एशिया की संपादक तो नेहा जी हैं। :)


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