क्या मेरा अनुभव ही ऐसा रहा है या वाकई में कॉल सेन्टर वाले और तकनीकी सपोर्ट वाले सभी लगभग मूर्ख होते हैं? कुछ सप्ताह पूर्व मैंने किसी पत्रिका में महानगर टेलीफोन निगम का विज्ञापन देखा था कि उनके जिन मोबाइल सेवा ग्राहकों ने जीपीआरएस सुविधा ले रखी है उनको एज्ज(EDGE) सेवा पर मुफ़्त अपग्रेड किया जाएगा। तो पहले तो मैं इस बारे में कुछ खास उत्साहित नहीं था क्योंकि मुझे लगा कि मेरे नोकिआ एन70 में यह तकनीक है ही नहीं, बेशक महानगर टेलीफोन निगम यह सुविधा प्रदान करने वाली भारत में पहली कंपनी होती। लेकिन कुछ दिन पहले मैंने नोकिआ की वेबसाइट पर देखा कि नोकिआ एन70 म्यूज़िक एडिशन(Nokia N70 Music Edition) में यह तकनीक है और मेरा फोन भी यही है, तो मैंने महानगर टेलीफोन निगम के कॉलसेन्टर में फोन लगाया यह पूछने के लिए कि यह सुविधा अपने आप चालू होती है या करवानी पड़ती है।
( कॉलसेन्टर में फोन लगते ही बेकार संगीत सुनाई देता है, अब तक मुझे भी रट चुका मेनू को पूरा सुने बिना हिन्दी भाषा और ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करने का विकल्प चुना। )
( आपकी कॉल कतार में है….. प्रतीक्षा समय 35 सेकन्ड…..
प्रतीक्षा करते हुए 2 मिनट बीतते हैं
4 मिनट…..
5 मिनट…..
आखिरकार बन्दा लाइन पर आता है )
अधिकारी: नमस्कार, मैं पोजिशन नंबर दस से बोल रहा हूँ, आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ?
मैं: मुझे आपकी एज्ज सर्विस के बारे में पूछना है। क्या वह अपने आप चालू हो जाती है या करवानी पड़ती है?
अधिकारी: जी एज्ज?
मैं: हाँ, E-D-G-E, एज्ज।
( फोन काट दिया जाता है )( आश्चर्य, मैं चार गालियाँ देता हूँ उस अधिकारी को और फिर फोन मिलाता हूँ )
( पुनः बेकार संगीत सुनाई देता है, मेनू को पूरा सुने बिना हिन्दी भाषा और ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करने का विकल्प चुना। )
( आपकी कॉल कतार में है….. प्रतीक्षा समय 50 सेकन्ड…..
प्रतीक्षा करते हुए 4 मिनट बीतते हैं
5 मिनट…..
8 मिनट…..
आखिरकार एक मोहतरमा लाइन पर आती हैं )
अधिकारी: नमस्कार, मैं पोजिशन नंबर पैंतालीस से बोल रही हूँ, आपकी क्या सहायता कर सकती हूँ?
मैं: मुझे आपकी एज्ज सर्विस के बारे में पूछना है। क्या वह अपने आप चालू हो जाती है या करवानी पड़ती है?
अधिकारी: जी क्या?
मैं: एज्ज सुविधा, E-D-G-E, एज्ज। जैसे जीपीआएस होता है वैसे एज्ज होता है।
अधिकारी: हाँ जी बोलिए?
मैं: यह सुविधा क्या अपने आप चालू हो जाती है या करवानी पड़ती है?
( फोन पुनः काट दिया जाता है )( आश्चर्य, मैं चार गालियाँ इसको भी देता हूँ और फिर फोन मिलाता हूँ )
( इस बार मेनू में अंग्रेज़ी भाषा और ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करने का विकल्प चुना। )
( युअर कॉल इज इन क्यू….. युअर वेट टाईम इज 20 सेकन्ड…..
प्रतीक्षा करते हुए 2 मिनट बीतते हैं
4 मिनट…..
7 मिनट…..
9 मिनट…..
आखिरकार बन्दा लाइन पर आता है )
अधिकारी: हैलो, आई एम XXX फ्राम पोजिशन नंबर थर्टी टू। हाऊ में आई हेल्प यू?
मैं: आई वांट टू नो अबाउट युअर एज्ज सर्विस। डू यू नो अबाउट एज्ज?
अधिकारी: येस सर?
मैं: इज दिस सर्विस एक्टिवेटिड बाई यू ऑटोमैटिकली और डू आई हैव टू आस्क फॉर इट?
अधिकारी: सर दिस सर्विस इज नॉट अवेलेबल येट।
मैं: बट आई रैड अबाउट दिस सर्विस इन एन ऐड ऑफ़ युअर्स एंड इट सैड दैट फॉर मोर इन्फोरमेशन आई नीड टू कॉन्टेक्ट कस्टमर केअर।
अधिकारी: यस सर बट दिस सर्विस हैज़ नॉट बीन स्टार्टिड यैट। वी ऑल्सो हैव नॉट गॉट मोर इन्फोरमेशन अबाउट इट येट।
मैं: ओके, थैंक्स।
अधिकारी: थैंक यू फॉर कॉलिंग कस्टमर केअर सर, हैव अ गुड डे।
( फोन इस बार मैंने बात समाप्त कर काटा )
इस सारे प्रकरण में मैंने चार बार हिन्दी का विकल्प लिया(यहाँ केवल दो बार के बारे में ही लिखा है), कई मिनट होल्ड करने के पश्चात फोन उठाया गया और हर बार मेरा फोन काट दिया गया। पाँचवीं बार अंग्रेज़ी का विकल्प लिया और उस बार के ग्राहक सेवा अधिकारी को वो बात मुझे बताने में केवल एक मिनट लगा जो बाकी चार के पल्ले ही नहीं पड़ी। उन चार में से तीन को तो यही नहीं पता था कि जीपीआरएस कौन सी सेवा है(तो यदि उसमें कोई समस्या होती तो क्या खाक सपोर्ट देते)।
बहरहाल यहाँ तक तो ठीक है, अज्ञान और बद्तमीज़ी का मामला है(ग्राहक की पूरी बात सुने बिना फोन काट देना और क्या है?), लेकिन आज एक ऐसा वाक्या हुआ जिसमें मेरा पाला एक मूर्ख से हुआ जो अपने को बहुत समझदार बन रहा था।
पिछले दो दिन से मेरे दूसरे फोन(जिसमें आईडिया का कनेक्शन है) में जीपीआरएस में दिक्कत थी, कोई वेबसाइट खुल नहीं रही थी। तो इसके लिए मैंने कल आईडिया केअर में फोन कर अपनी समस्या बताई। उन्होंने मेरे फोन आदि के बारे में जानकारी लेकर कहा कि मेरी समस्या नोट कर ली है, जल्द ही उनका कोई तकनीकी बन्दा मेरे को फोन करेगा। आज सुबह आईडिया वालों का फोन आया, बन्दे ने मेरे से मेरे फोन का मॉडल आदि कन्फ़र्म किया और फिर पूछा कि मैं कौन सी वेबसाइट खोलने की कोशिश कर रहा हूँ। मैंने कहा कि कोई भी वेबसाइट नहीं खुल रही, न ही गूगल न कोई और। तो उसने कहा कि मेरा फोन आम एचटीएमएल(HTML) वाली वेबसाइट नहीं खोल सकता, सिर्फ़ वैप(WAP) वाली खोल सकता हूँ।
मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और मैंने कहा कि दो दिन पहले तो खुल रही थी, अब क्या फोन में भूत घुस गया। वो मेरे से ऐसे बात कर रहा था कि जैसे कोई समझदार किसी मूढ़ की मूढ़ता पर खीज के बात करता हो, जबकि था इसके ठीक विपरीत, झेल उसे मैं रहा था। मैंने आगे कहा कि उनको अपनी जानकारी अपडेट करनी चाहिए और वह नोकिआ की वेबसाइट खोल के देख ले, यदि वहाँ लिखा है कि नोकिआ 7250i फोन में एक्सएचटीएमएल(xHTML) ब्राउज़र नहीं है तो जो वो बोले वो मन्जूर। ऐसा सुन उसने खीज के कहा कि अपनी जानकारी वो अपडेट कर लेंगे और फिर बात पलटते हुए बोला कि एचटीएमएल(HTML) हो न हो, लेकिन उनके यहाँ से मेरे फोन के लिए एचटीएमएल सपोर्ट नहीं है। मैंने कहा कि उनके यहाँ से सपोर्ट क्या करेगा, दो दिन में बदल गया है क्या, जब दो दिन पहले खुल रही थी तो अब क्यों नहीं खुलेगी। मैंने आगे कहा कि मैं भी एक तकनीकज्ञ हूँ(और कदाचित् उससे अधिक ही समझ रखता हूँ)। कलप के वो बन्दा बोला कि मैं बेशक तकनीकज्ञ रहूँ, दो दिन पहले वेबसाइट खुल रही थी कि नहीं वह अभी नहीं देखा जा सकता, अभी की बात यह है कि मेरे फोन के लिए उनके पास सिर्फ़ वैप की सैटिंग है, क्या वो दोबारा भेजे। मैंने सोचा कि इस मूर्ख से झक मारने का कोई लाभ नहीं है, पता इसको कुछ नहीं है और खामखा अपनी तले जा रहा है। तो मैंने कहा कि भेज दे भई, जो है उसी को भेज दे।
थोड़ी देर में ही सैटिंग आ गई, मैंने फोन में सेव कर फोन बंद कर दोबारा चालू किया और आईडिया वालों की वैप साईट खोली। खुल गई तो फिर मैंने गूगल की आम एचटीएमएल(HTML) वेबसाइट ट्राई मारी और बिना किसी टेन्शन के कुछ मिनट में खुल गई।
अब उस मूढ़ पर खुन्नस इतनी आ रही थी कि यदि सामने होता तो दस गालियाँ सुना उससे पूछता कि ये वेबसाइट अब कैसे खुल गई!! यह अभी कोई नया अनुभव नहीं है, पहले भी अधिकतर अलग-२ कंपनियों के झल्ले कॉल सेन्टर वालों और मूढ़ तकनीकी सपोर्ट वालों से पाला पड़ चुका है। कॉल सेन्टर वालों की तो छोड़ो खैर, अधिकतर वहाँ अर्ध-शिक्षित युवा क्विक मनी(जल्दी पैसे कमाने) के लिए भर्ती होते हैं, लेकिन तकनीकी सपोर्ट वालों का यह हाल देख बहुत कोफ़्त होती है, ये लोग आईटी इंडस्ट्री का कबाड़ हैं जिनको इस इंडस्ट्री में रहने का कोई अधिकार नहीं!!!



9 Comments
श्रीश शर्मा
हे हे बेचारे टैक सपोर्ट वाले। इतना ही ज्ञान इन्हें होता तो ये वहाँ न होकर किसी आईटी कंपनी में होते। खैर आपकी फर्शटेशन जायज है, इन कथित टैक सपोर्ट वालों को लगभग हम सब भुगत चुके हैं।
समीर लाल
कॉल सेन्टर का हाल तो यही है. बस, कौन सा बंदा पकड़ में आता है, उस पर डिपेंड करता है.
RC Mishra
“बेशक महानगर टेलीफोन निगम यह सुविधा प्रदान करने वाली भारत में पहली कंपनी होती।”
EDGE सुविधा भारत मे HUTCH ने 2004 के Last Quarter से दे रखी है, उन दिनों Nokia 3220 फोन पर यह सुविधा उपलब्ध थी।
MTNL और BSNL का तो भगवान ही मालिक है, HUTCH के Customer Care के साथ मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा है, जब MMS और GPRS service मुफ़्त थी तब तो वे Phone No. की Location बताने में भी नही हिचकते थे :)।
नीरज दीवान
साधन पर ध्यान दे बंधु साध्य को पकड़ो. कॉल सेंटर वाले ठेके पर काम करते हैं. खानापूर्ती की करने की देसी आदत यूं थोड़े ही जाती है. आपको कष्ट हुआ इस मसले पर मेरी सहानुभूति आपके साथ है.
RC Mishra
EDGE in India:
http://press.nokia.com/PR/200402/933677_5.html
सागर
अमित भाई आगे से ऐसा हो तब कॉल को टेप कर लिया करें और बाद में अधिकारियों को और या अपने नीरज भी को वह टेप भेज दें। आगे का काम नीरज भाई कर लेंगे
पंकज बेंगाणी
भाई क्या दोष दें, ऐसे मुर्खों से हर समय पाला पडा हुआ ही रहता है. क्या किया जाए.
कोल सेंटरों में 700 800 लोग युँ ही भरे जाते हैं.. और ये लोग कितना दक्ष होते हैं तथा कितने अपडेट होते हैं वो तो राम ही जाने.
Amit
बात वो नहीं है, बात यह है कि आपको जिस काम के लिए रखा गया है यदि आपसे वही ठीक ढ़ंग से नहीं हो रहा तो फिर आप उस पद/नौकरी के लायक नहीं हैं। इन तकनीकी सपोर्ट वालों को कोई कम पैसे नहीं मिलते, ठीक-ठाक कॉल सेन्टर में इनको तकरीबन 12000-17000 के बीच मासिक वेतन मिलता है। बहुत से लोग जो सॉफ़्टवेयर कंपनियों में प्रोग्रामर की हैसियत से काम करते हैं इतना ही वेतन कमाते हैं।
हाँ, त्रुटि सुधारने के लिए धन्यवाद, वाकई उन्होंने यह सुविधा पहले से दे रखी है और अब तो एज्ज लगभग सभी महानगरों में उनके नेटवर्क पर चलता है।
अब यह खबर आज की तारीख़ में गलत है क्योंकि आईडिया का कनेक्शन मेरे पास भी है और यकीन मानिए वे एज्ज सर्विस नहीं प्रदान कर रहे हैं नहीं तो वह मेरे पास अवश्य होती(कंपनी बिल दे रही है तो क्या टेन्शन है)।
कौन सी कॉल टेप कर लूँ सागर जी?
Sandy
some people are very nice,
but everybody are very bad.
I am very nice man,