हर मूर्ख आज ब्लॉगर सिर्फ इसलिए बनना चाहता है ताकि ग्लोबल स्टेज का लाभ उठाए, सबको बताए कि वह कितना मूर्ख है! जय हो मूर्खता!!!
haa haa haa, very funny. cool of u to start cartoons now.
हम तो जाने क्या सोच कर अपने ब्लॉग का डंका पीटे जा रहे थे. महाराज!! आपने आँखें खोल दी, जय हो!!
Hmm!
[...] here is a take by Amit in form of a cartoon. Linked by [...]
सही कहा सरजी
सही कहा, पर ये ज्ञान आपको आज प्राप्त हुआ गुरुदेव
मेरा भी यही कहना है जो समीर जी कह रहे हैं -
हमारी भी आँखे खुल गई. जय मूर्खता की.
ऐल्लो, कल्लो बात। मैं तो कै रिया था कि हर मूर्ख भी आजकल बिलाग बनान में लगा है, और आप सब्ब ये सोच रिये हो कि बिलाग सिर्फ़ मूर्ख बना रिये हैं!!!
साईं पता तो मेरे को बोत पेले से था नी, पन टून बनाने में मेरे को बोत आलस आ रिया था, तो अब जब एक सई जुगाड़ का पता चला तो मैं अपने को रोक नई सका वडी।
यार बिना आज्ञा लिए पहले चित्र में आपने हमारी जो फोटो छापी है उसके लिए हम आप पर मुकद्दमा करेंगे। हद हो गई हमारी पोल खोल कर रख दी।
अब छोडिये भी श्रीश जी, कोर्ट-कचहरी का चक्कर क्या लगाइएगा. कुछ मिलता नहीं है. अमित भाई से कुछ ले-दे के सुलह कर लीजिए.
अब छाप दी तो छाप दी, जो बन सके उखाड़ लो!
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13 Comments
Aks
haa haa haa, very funny.
cool of u to start cartoons now.
समीर लाल
हम तो जाने क्या सोच कर अपने ब्लॉग का डंका पीटे जा रहे थे. महाराज!! आपने आँखें खोल दी, जय हो!!
प्रत्यक्षा
Mridula
Hmm!
Why do We Blog? at Blogbharti
[...] here is a take by Amit in form of a cartoon. Linked by [...]
neelima
सही कहा सरजी
Manish
सही कहा, पर ये ज्ञान आपको आज प्राप्त हुआ गुरुदेव
raviratlami
मेरा भी यही कहना है जो समीर जी कह रहे हैं -
हम तो जाने क्या सोच कर अपने ब्लॉग का डंका पीटे जा रहे थे. महाराज!! आपने आँखें खोल दी, जय हो!!
संजय बेंगाणी
हमारी भी आँखे खुल गई.
जय मूर्खता की.
Amit
ऐल्लो, कल्लो बात। मैं तो कै रिया था कि हर मूर्ख भी आजकल बिलाग बनान में लगा है, और आप सब्ब ये सोच रिये हो कि बिलाग सिर्फ़ मूर्ख बना रिये हैं!!!
साईं पता तो मेरे को बोत पेले से था नी, पन टून बनाने में मेरे को बोत आलस आ रिया था, तो अब जब एक सई जुगाड़ का पता चला तो मैं अपने को रोक नई सका वडी।
Shrish
यार बिना आज्ञा लिए पहले चित्र में आपने हमारी जो फोटो छापी है उसके लिए हम आप पर मुकद्दमा करेंगे। हद हो गई हमारी पोल खोल कर रख दी।
Isht Deo Sankrityaayan
अब छोडिये भी श्रीश जी, कोर्ट-कचहरी का चक्कर क्या लगाइएगा. कुछ मिलता नहीं है. अमित भाई से कुछ ले-दे के सुलह कर लीजिए.
Amit
अब छाप दी तो छाप दी, जो बन सके उखाड़ लो!