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मुहिम….. नारद के खिलाफ़…..


July 24th, 2007 at 07:07 am | 14 Comments

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14 Comments

Pramendra Pratap SIngh


bahut achchachha :)


अनूप शुक्ल


:)


sanjay tiwari


स्माईल प्लीज.


sanjay bengani


जब आप सफल होते है आप पर उँगलिया उठती ही है. वैसे अच्छा व्यंग्यात्मक जवाब.


Sanjeet Tripathi


बहुत सही!!


Amit


जब आप सफल होते है आप पर उँगलिया उठती ही है.

हा हा हा, ये तो आपने बिलकुल वैसे ही कहा जैसे “गुरू” फिल्म में अभिषेक ने कहा था कि “जब लोग तुम्हारे खिलाफ़ बोलने लगें, समझ लो तरक्की पर हो”!! ;)


Aks


cha gaye guru, good reply. :)


ज्ञानदत पाण्डेय


चलो रंग रोगन की बात करो. होने की बजाय दिखना ज्यादा जरूरी है. चाहे चुड़ैल का हो या स्वामी का या नारद का. :-)


pankaj बेंगाणी


chudail hai kaun miya!!


Shrish


हे हे, बहुत खूब!


समीर लाल


हा हा, यह कहाँ आ गये हम!!!!!!!!! :)


सागर चन्द नाहर


बेकग्राऊंड का कलर काला क्यों है, आका का कलर केसरी क्यों है। पारदर्शक क्यों नहीं है?
जरूर कोई ना कोई साजिश रची जा रही है।


सागर चन्द नाहर


अरे स्माईली लगना रह गया भाई अब दो लगा देते हैं :) :)


Amit


chudail hai kaun miya!!

बूझो तो जानें!! ;)

आका का कलर केसरी क्यों है

“आका” का रंग केसरी कहाँ है सागर जी, वो तो काला लबादा ओढ़े है!! हा हा हा!! ;)


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