अमेरिका….. अमेरिका….. ओऽऽ अमेरिका ऽऽऽऽ
जीतू भाई ने इस बार की अनुगूँज में हिस्सा लेते हुए पाँच बातें लिखी हैं कि यदि हिन्दुस्तान अमेरिका बन जाए तो कैसा होगा। कुछ बातें जो उजागर होती हैं:
तो क्या बच्चे आज ऐसे नहीं हैं? बिलकुल हैं, महानगरों में उच्च-मध्यमवर्गीय और उच्च वर्गीय परिवारों में तो क्या, छोटे शहरों में भी ऐसे बच्चे मिल जाएँगे। पहचाना नहीं? ये राज-दुलारे हैं, लाड़ले, ज़रूरत से अधिक लाड़ किए हुए लाड़ले!!
क्या ऐसे बालक आज नहीं हैं? कुछ वर्ष पहले अपने कॉलेज के समय में वहाँ तो ऐसे लोग देखे थे, प्रगति के दर को यदि मद्देनज़र रखा जाए तो क्या इस सब की आज स्कूलों में आशा करना ज़रूरत से अधिक पॉजिटिव थिंकिन्ग है? अब याद आ रहा है कि अपने स्कूल के आखिरी के 2 वर्षों में भी ऐसे उन्नत और मॉडर्न छात्र देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था मुझे, तो आज तो उनके पद-चिन्हों पर चलने वाले कई होंगे!!
अपनी माताजी से पता करने पर यह तो पक्का हो गया है कि अभी रेट तो इतने ऊपर नहीं पहुँचे हैं, लेकिन अपने सामान्य ज्ञान की बदौलत यह भी पता है कि ऐसे तकनीकी उपकरण भी पीछे नहीं हैं, आज बहुतया घरों में इनकी घुसपैठ हो चुकी है; डिश-वॉशर और वैक्यूम क्लीनर न सही लेकिन वॉशिंग मशीन तो टीवी-फ्रिज की भांति आम बात होती जा रही है।
तो क्या अमेरिका में सिर्फ़ बुराईयाँ ही हैं? अगर नहीं तो लोगों को अच्छाई दिखाई क्यों नहीं दे रही? वैसे ऐसी बात नहीं है कि अच्छाई दिखाई नहीं देती। कुछ समझदार लोगों को दिखाई देती है, जिनके लिए अमेरिका सपनों का देश होता है। क्यों सपनों का देश होता है? वह इसलिए क्योंकि लगभग 3 करोड़ की आबादी वाला संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व में तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, हर तरह का मौसम है, विश्व में सबसे अधिक जीडीपी(GDP) वाला देश है, उच्च कोटि के विश्वविद्यालय हैं जैसे हारवर्ड, स्टैनफोर्ड, एमाआईटी(MIT) आदि। इतना ही नहीं, न्यू यार्क अमेरिका में है, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग न्यू यार्क में है, हॉलीवुड अमेरिका में है, सबसे अधिक टीवी देखने वाले अमेरिकी होते हैं। इन सब खूबियों के कारण अमेरिका एक ड्रीम डेस्टिनेशन है!!
अब ऐसे लेख देख और ऐसे ड्रीम पढ़ तरस आता है अमेरिका पर, पहले ही बुद्धिजीवियों की कमी नहीं है वहाँ, यहाँ से और चले जाएँगे तो क्या होगा?? लेकिन फिर मन स्वार्थी हो जाता है, सोचता है कि चलो अच्छा है, इसी बहाने अपने देश की सफाई तो होगी, हालात सुधरेंगे!!
मैं कभी अमेरिका नहीं गया हूँ, अभी तक जाने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ है, लेकिन दोस्तों आदि से इस बात का एहसास मिला है कि अमेरिका में मशीनी मानव बसते हैं, आपस में आत्मीयता नहीं है, रिश्तों में वो गर्माहट नहीं है जो एशियाई देशों में मिलेगी, चाहे वो भाई-बंधुत्व में हो या दुश्मनी में। सुना है कि वहाँ की आबो-हवा ऐसी है कि यदि यहाँ से भी कोई व्यक्ति वहाँ जाए तो एक सप्ताह में ही उसके व्यवहार में अंतर आने लगता है जिसको पीछे रह गए उसके घर वाले और मित्र आदि महसूस कर सकते हैं। होता होगा जी, अपन कभी गए तो फर्स्ट हैन्ड एक्सपीरियंस(first hand experience) बता देंगे। अनुगूँज में इसी के तहत भाग नहीं लिए हैं कि जब जिस जगह के बारे में जानना ही नहीं हुआ है उस बारे में अपने विचार व्यक्त कर काहे खामखा विद्वान बनें!!






12 Comments
समीर लाल
कार्टून बेहतरीन हैं. बाकि जैसा तुम चाहो.
अब हम क्या कहें सिर्फ यह कहने के कि एक बार हमारे पास घूम जाओ.
Pramendra Pratap SIngh
अच्छा लिखा है।
कार्टून भी मस्त है। खास कर अन्तिम वाला
अरुण
बढिया कार्टून बढिया विचार,बस पकड लो समीर भाइ को वाया कनाडा अमेरिका घूम ही आओ,जरा कोशिश करो टिकट भी भेज ही देगे..:)
sanjay bengani
मस्त. बाकि अपने भी सुनी सुनाई बातो के आधार पर, कुछ सिनेमा व किताबो में जो पढ़ा उसके आधार पर लिखा था.
बाकी मुझे लगता है, अमरीका वाले हमसे ज्यादा हँस मूख होते है.
जीतू
अब तुम भाग तो ले ही चुके हो, चाहे तुम मानो या ना मानो।
ये तो एक कल्पना है, कोरी कल्पना। अपने अपने हिसाब से उड़ान भरो, और छोड़ने मे किसी से पीछे ना रहो, समीरला से भी नही, क्योंकि वो तो उड़नतश्तरी पर बैठकर छोड़ता है।
कार्टून अच्छे है…पसन्द आए। यार कार्टून बनाने के लिए ट्यूटोरियल लिख दो, इमेज सही, बहुत लोग पूछते है।
paramjitbali
अमित जी बहुत बढिया लिखा है\कार्टूनो का तो जवाब नही । हम तो आप के कार्टून टून डू में अकसर दॆखते रहते हैं।
Amit
सभी का धन्यवाद।
बिलकुल, आपके यहाँ भी एक बार चक्कर लगाया जाएगा। निमंत्रण के लिए धन्यवाद!
हा हा हा!!
सिनेमा तो खैर जो दिखाता है वह अधिकतर अतिश्योक्ति की सुपर डोसेज होती है!!
हा हा, अपन तो नहीं मानते!
हा हा हा!!
धन्यवाद
ट्यूटोरियल के लिए श्रीश को पकड़ो, अपने से नहीं होता ये काम, धैर्य चाहिए!!
DR PRABHAT TANDON
कार्टून तो बिल्कुल मस्त हैं , बस अपने बनाये सारे कार्टूनों के लिंक साइड बार मे दें दीजिये , जैसे फ़िल्कर आदि के आपने दिये हैं ।
Amit
अब सभी कार्टूनों के लिंक साइडबार में देना तो दिक्कत वाला काम है प्रभात जी, फ्लिकर के लिए तो यहाँ वर्डप्रैस में RSS फीड का जुगाड़ है जो अभी टूनडू में नहीं है। मैं टूनडू वाले साहब को ईमेल कर देता हूँ सुझाव, बाकी उनके ऊपर कि वो मानते हैं कि नहीं!
अनूप शुक्ल
बहुत खूब! कार्टून अच्छे लगे। अंत की लाइने बेहतरीन!
Amit
धन्यवाद अनूप जी।
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