चार महीने हुए जब पिछली बार कहीं घूमने फिरने गया था, मन व्याकुल हो रहा था, तो प्रोग्राम बना पालमपुर जाने का। जी, यह वही पालमपुर है जहाँ जाने का कार्यक्रम जुलाई में मैंने प्रस्तावित किया था लेकिन वह यात्रा उस समय हो नहीं पाई थी!! बहरहाल, उस समय न सही तो अब सही, पिछले सप्ताहांत का कार्यक्रम बना और हम 6 लोग निकल लिए अगस्त के आखिरी दिन की रात्रि को अपनी चौदह घंटे की ड्राईव पर!!
[ हमारे होटल टी-बड(Tea Bud) से निकलते ही थोड़ा आगे बाज़ार के रास्ते में स्थित पुराना मकान ]
[ थोड़ा आगे जाने पर दिखा यह ईसाई कब्रिस्तान ]
[ परमवीर चक्र से (मरणोपरांत)सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति, मेजर सोमनाथ शर्मा, की मूर्ति। इत्तेफ़ाक की बात है कि परमवीर चक्र के तमगे का डिज़ाइन श्रीमति सावित्री खानोलंकर ने बनाया था जो कि मेजर सोमनाथ शर्मा की सास थीं। ]
[ क्रिकेट बसा है देश की नस-२ में ]
[ यह नाम है होटल टी बड के मौजूदा सहायक मैनेजर का, इस नाम ने याद दिलाई फिल्म लगान। ]
[ बैजनाथ मंदिर ]
[ बैजनाथ मंदिर ]
[ बैजनाथ मंदिर की पिछली दीवार पर चहलकदमी कर रही थी एक गिरगिट ]
[ बैजनाथ मंदिर के परिसर में दोपहर का भोजन करता एक बंदर ]
[ अब यूँ ही तो पालमपुर को हिमांचल का दार्जीलिंग नहीं कहते ना!! पालमपुर में मौजूद चाय बाग़ान जहाँ पैदा होती है कांगड़ा चाय। ]
[ वापसी में हम रूके आनंदपुर साहिब जहाँ रात्रि भोज किया लंगर में। ]
पालमपुर कांगड़ा वादी में स्थित एक हरा-भरा शहर है और मानसून के बाद का समय यहाँ जाने के लिए अति उत्तम है जब आपको भरपूर हरियाली देखने को मिलेगी, वैसे यहाँ साल के किसी भी समय जा सकते हैं। रहने के लिए फिलहाल एक ही ठीक-ठाक जुगाड़ है यहाँ, हिमांचल पर्यटन विभाग का होटल टी बड(Tea Bud)। यदि यहाँ जाने का इरादा है तो पहले ही फोन द्वारा हिमांचल पर्यटन विभाग में पता कर लें कि कमरे उपलब्ध हैं कि नहीं। कमरों की उपलब्धता आप एचपीटीडीसी(HPTDC) की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं और यदि चाहें तो ऑनलाईन ही भुगतान कर आरक्षण भी करवा सकते हैं। यदि आप शहर की चिल्लपों से दूर एक-दो दिन बिताना चाहते हैं तो पालमपुर जा सकते हैं, वहाँ वाहन में न घूम पैदल घूमिए, हरियाली और स्वच्छ हवा का आनंद लीजिए। लेकिन यदि आप एक पर्यटक हैं तो यह जगह आपके लिए नहीं है क्योंकि देखने लायक इस जगह पर खास कुछ नहीं है।
इस यात्रा की मेरे कैमरे द्वारा ली गई शेष सभी तस्वीरें यहाँ देखी जा सकती हैं।
क्या बात है सरजी इस बार फोटो मे वो बात नही आई है, कुछ फोटो जरुर थोडा हट के ली है. मुझे तो सिर्फ गिरगिट और बंदर की पसन्द आई, आनंदपुर साहिब की अच्छी फोटो ली है.
हाँ यह मुझे भी लगा। इस बार थोड़ा अलग फोटो लेने की कोशिश की थी, बढ़िया नहीं आई। ऑउटडोर में अभी कैमरे पर हाथ बैठा नहीं है, थोड़े पंगे लूँगा, नई चीज़ें ट्राई करूँगा तब बनेगी बात।
@uttarakhand:
This travelogue is of a place in Himachal Pradesh & not Uttarakhand, just thought I’d let you know in case you thought otherwise!! And you can put an excerpt of this travelogue on your website, linking to this page so that whoever wants to read it in its entirety comes here to read it. And please don’t copy & use my photos.
9 Comments
समीर लाल
बढ़िया तस्वीरें और संक्षिप्त वृतांत…!!
Aks
क्या बात है सरजी इस बार फोटो मे वो बात नही आई है, कुछ फोटो जरुर थोडा हट के ली है. मुझे तो सिर्फ गिरगिट और बंदर की पसन्द आई, आनंदपुर साहिब की अच्छी फोटो ली है.
नीरज दीवान
आनंदपुर साहिब गुरूद्वारा की मनमोहक तस्वीर .. अहा.. सारे चित्र सुंदर है।
Amit
धन्यवाद समीर जी, अक्स, नीरज दादा!
हाँ यह मुझे भी लगा। इस बार थोड़ा अलग फोटो लेने की कोशिश की थी, बढ़िया नहीं आई। ऑउटडोर में अभी कैमरे पर हाथ बैठा नहीं है, थोड़े पंगे लूँगा, नई चीज़ें ट्राई करूँगा तब बनेगी बात।
RC Mishra
अच्छा रहा, पालमपुर भी निपटा दिया
Amit
जी, इसको तो निपटाना ही था, एक बार किसी चीज़ का मन बना लिया तो बना लिया, देर-सवेर अवश्य हो जाए लेकिन वो चीज़ होकर रहती है!!
DR PRABHAT TANDON
चलिये हम भी घूम आये आपकी बदौलत
uttarakhand
Hi ,
Many thanks for sharing your wonderful experience with us. I wish to put this article on the our website giving you due credit.
Would you mind?
Amit
@uttarakhand:
And you can put an excerpt of this travelogue on your website, linking to this page so that whoever wants to read it in its entirety comes here to read it. And please don’t copy & use my photos.
This travelogue is of a place in Himachal Pradesh & not Uttarakhand, just thought I’d let you know in case you thought otherwise!!