दिल्ली का तीसरा बारकैम्प और कदाचित् पहला ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर कैम्प(open source software camp) यानि कि मुक्त स्रोत सॉफ़्टवेयर का असम्मेलन इस सप्ताहांत, 8 तथा 9 सितंबर 2007, को नोएडा में इंपेटस इन्फोटेक के कार्यालय परिसर में होने जा रहा है। इसमें भिन्न-२ विषयों पर सत्र होंगे जिनको अलग-२ कैम्प का नाम दिया गया है, जैसे माईसीकुअल कैम्प(MySQL Camp), पीएचपी कैम्प(PHP Camp), द्रुपल कैम्प(Drupal Camp), जूमला कैम्प(Joomla Camp), ओपन सोर्स टेक्नॉलोजी कैम्प(Open Source Technologies Camp), ओपन सोर्स टूल्स कैम्प(Open Source Tools Camp), पाईथन कैम्प(Python Camp), वेब 2.0 कैम्प(Web 2.0 Camp), आदि। देश भर से तो प्रोग्रामर, डेवेलपर, डिज़ाईनर आदि आ ही रहे हैं, कुछेक विदेशों से भी आ रहे हैं। यदि आप भी इसमें भाग लेना चाहते हैं तो इसकी विकि(wiki) में यहाँ अपना नाम अवश्य जोड़ दें। इसमें भाग लेने की कोई फीस/शुल्क वगैरह नहीं है, निश्चित स्थान पर पहुँचने और वहाँ से वापस जाने का जुगाड़ आपको स्वयं करना होगा। यदि आप दिल्ली या राजधानी क्षेत्र(नोएडा/गुड़गाँव) के बाहर से आ रहे हैं तो अपने रहने आदि की व्यवस्था आदि भी आपको स्वयं करनी होगी।
बारकैम्प सम्मेलन(conference) की तरह ही होते हैं लेकिन सम्मेलनों की तरह इनमें औपचारिकता नहीं होती, इसलिए इनको असम्मेलन(unconference) कहते हैं। यह एक समुदायिक प्रयास होता है एक दूसरे से सीखने का, कोई भी व्यक्ति संबन्धित विषयों में से किसी पर भी प्रस्तुतिकरण(presentation) दे सकता है तथा भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सिर्फ़ हाज़िरी न भर कुछ न कुछ अवश्य करेंगे, चाहे किसी सत्र में प्रस्तुतिकरण करें अथवा असम्मेलन के आयोजन में हाथ बंटाएँ। इस तरह के असम्मेलनों का खर्च प्रायः प्रायोजक(sponsors) उठाते हैं जैसे पिछली बार के दिल्ली बारकैम्प में इंपेटस और ओपरा प्रायोजक थे और इस बार इंपेटस असम्मेलन के लिए स्थान, भाग लेने वाले सभी व्यक्तियों के लिए भोजन आदि और असम्मेलन के लिए वायरलेस इंटरनेट(wi-fi) और अन्य साजोसामान उपलब्ध करवा रहा है।
मेरा इस असम्मेलन में जाना लगभग तय है(सप्ताहांत खराब नहीं जाएगा, मेरी कंपनी मुझे इसके लिए 2 अतिरिक्त छुट्टियाँ दे रही है)। क्या आप इस असम्मेलन में आ रहे हैं?
चार महीने हुए जब पिछली बार कहीं घूमने फिरने गया था, मन व्याकुल हो रहा था, तो प्रोग्राम बना पालमपुर जाने का। जी, यह वही पालमपुर है जहाँ जाने का कार्यक्रम जुलाई में मैंने प्रस्तावित किया था लेकिन वह यात्रा उस समय हो नहीं पाई थी!! बहरहाल, उस समय न सही तो अब सही, पिछले सप्ताहांत का कार्यक्रम बना और हम 6 लोग निकल लिए अगस्त के आखिरी दिन की रात्रि को अपनी चौदह घंटे की ड्राईव पर!!
[ हमारे होटल टी-बड(Tea Bud) से निकलते ही थोड़ा आगे बाज़ार के रास्ते में स्थित पुराना मकान ]
[ थोड़ा आगे जाने पर दिखा यह ईसाई कब्रिस्तान ]
[ परमवीर चक्र से (मरणोपरांत)सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति, मेजर सोमनाथ शर्मा, की मूर्ति। इत्तेफ़ाक की बात है कि परमवीर चक्र के तमगे का डिज़ाइन श्रीमति सावित्री खानोलंकर ने बनाया था जो कि मेजर सोमनाथ शर्मा की सास थीं। ]
[ क्रिकेट बसा है देश की नस-२ में ]
[ यह नाम है होटल टी बड के मौजूदा सहायक मैनेजर का, इस नाम ने याद दिलाई फिल्म लगान। ]
[ बैजनाथ मंदिर ]
[ बैजनाथ मंदिर ]
[ बैजनाथ मंदिर की पिछली दीवार पर चहलकदमी कर रही थी एक गिरगिट ]
[ बैजनाथ मंदिर के परिसर में दोपहर का भोजन करता एक बंदर ]
[ अब यूँ ही तो पालमपुर को हिमांचल का दार्जीलिंग नहीं कहते ना!! पालमपुर में मौजूद चाय बाग़ान जहाँ पैदा होती है कांगड़ा चाय। ]
[ वापसी में हम रूके आनंदपुर साहिब जहाँ रात्रि भोज किया लंगर में। ]
पालमपुर कांगड़ा वादी में स्थित एक हरा-भरा शहर है और मानसून के बाद का समय यहाँ जाने के लिए अति उत्तम है जब आपको भरपूर हरियाली देखने को मिलेगी, वैसे यहाँ साल के किसी भी समय जा सकते हैं। रहने के लिए फिलहाल एक ही ठीक-ठाक जुगाड़ है यहाँ, हिमांचल पर्यटन विभाग का होटल टी बड(Tea Bud)। यदि यहाँ जाने का इरादा है तो पहले ही फोन द्वारा हिमांचल पर्यटन विभाग में पता कर लें कि कमरे उपलब्ध हैं कि नहीं। कमरों की उपलब्धता आप एचपीटीडीसी(HPTDC) की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं और यदि चाहें तो ऑनलाईन ही भुगतान कर आरक्षण भी करवा सकते हैं। यदि आप शहर की चिल्लपों से दूर एक-दो दिन बिताना चाहते हैं तो पालमपुर जा सकते हैं, वहाँ वाहन में न घूम पैदल घूमिए, हरियाली और स्वच्छ हवा का आनंद लीजिए। लेकिन यदि आप एक पर्यटक हैं तो यह जगह आपके लिए नहीं है क्योंकि देखने लायक इस जगह पर खास कुछ नहीं है।
इस यात्रा की मेरे कैमरे द्वारा ली गई शेष सभी तस्वीरें यहाँ देखी जा सकती हैं।