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पाँच इंद्रियों का बाग़ – भाग १


October 15th, 2007 at 04:07 pm | 6 Comments

बीते दिनों में एक रविवार सुबह संतोष के साथ कुतुब मीनार के पास स्थित पाँच इंद्रियों के बाग़ यानि कि गॉर्डन ऑफ़ फाईव सेन्सेस (garden of five senses) जाना हुआ और वहाँ रंग-बिरंगे फूलों और तितलियों के साथ ही देखने को मिले अमूर्त कला (abstract art) के बढ़िया नमूने।

एक फूल के मध्य का मैक्रो

एक नन्ही तितली

एक टूटा झूला
( इस फोटो को कंप्यूटर पर सेपिआ [sepia] किया गया है, मूल फोटो यहाँ है )

एक ततैया
( इस फोटो को कंप्यूटर पर श्वेत-श्याम किया गया है, मूल फोटो यहाँ है )

एम्फीथियेटर
( बढ़िया सैटिंग में बना हुआ एक एम्फीथियेटर [amphitheater] )

अगले भाग में जारी…..

6 Comments

sanjay bengani


सुन्दर तस्वीरें उतारी है.


सागर चन्द नाहर


मैने एक बार आपसे कहा था आपमें प्रदर्शनी लगाने लायक फोटो खींचने की लायकात है, आज एक बार फिर से कह रहा हूँ खासकर तितली और कीड़े के फोटो को देखने के बाद।
कब मन बना रहे हैं फिर….?


समीर लाल


अरे वाह, एक से बढ़ कर एक तस्वीरें ले आये हैं. बेहतरीन. बधाई.


Amit


धन्यवाद संजय भाई, सागर जी और समीर जी।

मैने एक बार आपसे कहा था आपमें प्रदर्शनी लगाने लायक फोटो खींचने की लायकात है, आज एक बार फिर से कह रहा हूँ खासकर तितली और कीड़े के फोटो को देखने के बाद।
कब मन बना रहे हैं फिर….?

सागर जी, तितली और ततैये की फोटो दो ही तो हैं! एकाध तुक्का तो सभी का चल जाता है। ;) वाकई मैं अभी इस बात से सहमत नहीं हो पाया हूँ, अभी काफ़ी सुधार करना है अपनी फोटोग्राफ़ी में उस मुकाम तक पहुँचने से पहले जहाँ मैं प्रदर्शिनी लगाने की सोच बनाऊँ। :) आपने फोटो और मेरे हुनर को इस लायक समझा इसके लिए आपका आभार। :)


प्रत्यक्षा


बढ़िया !


Amit


धन्यवाद प्रत्यक्षा जी। :)


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