सर्वव्यापी अवतार यानि कि ग्लोबली रिकोग्नाईज़्ड अवतार उर्फ़ ग्रावतार(gravatar) को वर्डप्रैस सॉफ़्टवेयर बनाने वाली कंपनी ऑटोमैट्टिक ने खरीद लिया है। यह ऑटोमैट्टिक वही कंपनी है जो वर्डप्रैस.कॉम, अकिसमट जैसी वेब सेवाओं के पीछे है।
ग्रावतार एक तीन साल पुरानी वेब सेवा है जिसके तहत आप अपने एक ईमेल के साथ अपना एक अवतार/फोटो जोड़ते थे और फिर जब भी आप किसी ग्रावतार सपोर्ट करने वाले ब्लॉग पर अपने उसी ईमेल को प्रयोग कर टिप्पणी करते थे तो आपका अवतार/फोटो आपके नाम के साथ नज़र आता था। यह ठीक वैसा ही है जैसे ऑनलाईन चर्चा मंचों(जैसे परिचर्चा) में आप अपने खाते के साथ एक अवतार/फोटो जोड़ सकते हैं और वह फिर आपकी प्रत्येक पोस्ट के साथ नज़र आती है। यदि ठीक आकार के हों तो नाम से अधिक अवतार/फोटो से टिप्पणीकर्ता आदि की पहचान जल्दी होती है, वे एक तरह से आपके पहचान पत्र का कार्य करता है।
अब ऑटोमैट्टिक के इस वेब-सेवा को खरीदने से यह तो ज़ाहिर हो ही गया कि वर्डप्रैस.कॉम पर भी ग्रावतार सपोर्ट आ जाएगा, साथ ही यह संभावना भी व्यक्त की जा सकती है कि वर्डप्रैस सॉफ़्टवेयर में भी ग्रावतार के लिए सपोर्ट लगा-लगाया आएगा।
ग्रावतार सेवा में सुधार तो होना आरंभ हो ही गया है, जैसा कि ऑटोमैट्टिक के पहले कदम से ज़ाहिर होता है, क्योंकि उन्होंने ग्रावतार की प्रीमियम सेवा को भी सबके लिए फ्री कर दिया है(और पिछले 60 दिनों में जिन्होंने पैसे दिए हैं उनके पैसे लौटाए जा रहे हैं) जिसके तहत अब आप अपने खाते में एक से अधिक ईमेल जोड़ सकते हैं और प्रत्येक ईमेल के लिए अलग ग्रावतार लगा सकते हैं!!
आगे देखते हैं कि ऑटोमैट्टिक इस वेब-सेवा को किस ऊँचाई तक पहुँचाता है!!



9 Comments
समीर लाल
आगे आगे देखिये होता है क्या. जानकारी के लिये आभार.
sanjay bengani
मुझे आशा थी की ब्लोगर के बाद गुगल इसे खरीदेगा. वर्डप्रेस वाले बाजी मार ले गए.
श्रीश शर्मा
वाह अच्छी जानकारी दी आपने, हम भी ग्रावतार पर खाता खोल फोटू डाल दिए हैं।
ये ग्रावतार और ओपन आईडी जैसी सेवाएँ समय की मांग हैं। जितना अधिक वैब सेवाएँ इन्हें सपोर्ट करें, अच्छा है।
Amit
बिलकुल

संजय भाई, ब्लॉगर को खरीदे हुए तो गूगल को काफ़ी टैम हो गया, मेरे ख्याल से गूगल वालों को या तो इसमें रूचि नहीं थी अथवा वे निश्चय नहीं कर पाए होंगे कि इससे उनको क्या लाभ होगा। ऑटोमैट्टिक वालों ने इसमें कुछ देखा होगा तभी खरीदा है। अभी कहीं पढ़ रहा था तो पता चला कि इस समय ऑटोमैट्टिक की बाज़ार में कीमत का आंकलन पंद्रह करोड़ अमेरिकी डॉलर किया गया है।
श्रीश, बात से सहमत हूँ।
श्रीश शर्मा
एक बात बताओ यार वर्डप्रैस.कॉम के कई ब्लॉगों पर मेरी टिप्पणी में फोटो भी दिखती है जबकि मैं वर्डप्रैस.कॉम में बिना लॉगइन किए टिप्पणी करता हूँ। ऐसा कैसे होता है, क्या वर्डप्रैस.कॉम मेरा ईमेल पता अपने डैटाबेस से मिलाकर फोटो दिखता है?
Amit
कब की बात है? यदि अभी हाल ही की बात कर रहे हो तो हो सकता है कि ग्रावतार के कारण तुम्हारी फोटो दिखती हो।
श्रीश शर्मा
नहीं बहुत पहले से है ऐसा।
श्रीश शर्मा
और फोटो ग्रावतार वाली नहीं है।
Amit
तो हो सकता है कि ईमेल अपने डाटाबेस से मैच करता हो, मुझे पक्का नहीं पता इस विषय में इसलिए विश्वास के साथ नहीं कह सकता।