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	<title>Comments on: क्या ब्लॉगों पर नियंत्रण होना चाहिए?</title>
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	<description>the world from my eyes in my language - दुनिया मेरी नज़र से मेरी भाषा में</description>
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		<title>By: जीतू</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1681</link>
		<dc:creator>जीतू</dc:creator>
		<pubDate>Sun, 20 Jan 2008 18:43:49 +0000</pubDate>
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		<description>ब्लॉगिंग के बारे मे बरखा की जानकारी बहुत कम है, ये उसकी बातों से झलक रहा था। बरखा शुरु से आखिरी तक ब्लॉग्स मे निगेटिव कंटेन्ट की ही बात करती रही। अधकचरी जानकारी के साथ, किसी अनजान विषय पर प्रोग्राम करेंगे तो ऐसा ही होगा। रही बात पाबंदी की, तो भई इस नादानी पर, हम तो बस सिर्फ़ मुस्करा ही सकते है।

अलबत्ता रवीश ने अच्छी बातें की, हालांकि कम की, लेकिन एकदम सटीक और निष्पक्ष की।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>ब्लॉगिंग के बारे मे बरखा की जानकारी बहुत कम है, ये उसकी बातों से झलक रहा था। बरखा शुरु से आखिरी तक ब्लॉग्स मे निगेटिव कंटेन्ट की ही बात करती रही। अधकचरी जानकारी के साथ, किसी अनजान विषय पर प्रोग्राम करेंगे तो ऐसा ही होगा। रही बात पाबंदी की, तो भई इस नादानी पर, हम तो बस सिर्फ़ मुस्करा ही सकते है।</p>
<p>अलबत्ता रवीश ने अच्छी बातें की, हालांकि कम की, लेकिन एकदम सटीक और निष्पक्ष की।</p>
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	<item>
		<title>By: ghughutibasuti</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1687</link>
		<dc:creator>ghughutibasuti</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 23:05:07 +0000</pubDate>
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		<description>नियन्त्रण , पाबन्दी ! लगता है कि जब तक ये ना हों समाज के बहुत से लोगों को कठिनाई होती है । शायद उनका जीवन दर्शन ही यह है । शायद यदि उन्हें खुली हवा में साँस लेने का अवसर मिले तो उनका दम घुट जाए ।
घुघूती बासूती</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>नियन्त्रण , पाबन्दी ! लगता है कि जब तक ये ना हों समाज के बहुत से लोगों को कठिनाई होती है । शायद उनका जीवन दर्शन ही यह है । शायद यदि उन्हें खुली हवा में साँस लेने का अवसर मिले तो उनका दम घुट जाए ।<br />
घुघूती बासूती</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Amit</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1684</link>
		<dc:creator>Amit</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 17:34:21 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;अभी तो बच्चा जन्म ले रहा है और अभी से पहरा?&lt;/blockquote&gt;
अनिल जी, बात हिन्दी ब्लॉगिंग की नहीं हो रही वरन्‌ ब्लॉगिंग की हो रही है। ब्लॉगिंग तकरीबन उतनी ही पुरानी है जितना पुराना वर्ल्ड वाइड वेब (world wide web) है। जन्म लेने बात छोड़िए, ब्लॉगिंग को आए हुए तकरीबन चौदह वर्ष हो चुके हैं, जिस ब्लॉगर.कॉम की सेवा पर आपका ब्लॉग है उसी को आए हुए नौ वर्ष हो चुके हैं!!

&lt;blockquote&gt;हमने पूरा नही देखा था सिर्फ शुरुआत मे थोडा देखा था।&lt;/blockquote&gt;
चाहें तो अब देख सकती हैं ममता जी, शो के वीडियो का लिंक मैंने अपनी पोस्ट के अंत में दिया है। :)

&lt;blockquote&gt;लेकिन उसदिन हमारे टीवी पर एनडीटीवी लगा ही नहीं&lt;/blockquote&gt;
प्रवीण जी, आप इसको ऑनलाईन देख सकते हैं, वीडियो का लिंक ऊपर मेरी पोस्ट के अंत में है। :)

&lt;blockquote&gt;दो तीन बार सबमिट करने पर भी जब यह टिप्पणी सबमिट नहीं हुई तो माथा ठनका कि कहीं अभी से ही यह कंट्रोल शुरू तो नहीं हो गया…चलो, एक बार फिर से ट्राई मारता हूं।&lt;/blockquote&gt;
आपकी टिप्पणी मॉडरेशन की कतार में चली गई थी, अभी देखी तो निकाली वहाँ से। :)

&lt;blockquote&gt;आपने एकदम सही प्रश्न उठाया है. ब्लाग का मतलब ही व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की आजादी है.&lt;/blockquote&gt;
लेकिन शास्त्री जी, साथ ही मैंने यह भी कहा है कि &quot;जब तक किसी पर उँगली उठा कुछ कह नहीं रहा&quot;। अभिव्यक्ति की आज़ादी की भी एक सीमा है। किसी को अंट-शंट कहना उसके अंतर्गत नहीं आता और यह कार्यक्रम में बैठे एक वकील साहब ने बताया भी कि ऐसा करने पर मानहानि का दावा किया जा सकता है। :)

&lt;blockquote&gt;mujhe to lagta hai chunkar aise blogs ka jikra kiya gaya hai jo is talk show ki rating baraye&lt;/blockquote&gt;
सही सोच रहे हो तरूण भाई। ब्लॉगिंग पर कीचड़ उछालना और चुनकर ऐसे ब्लॉगों पर ही चर्चा वह भी ऐसे लोगों के जो कि इतने लोकप्रिय भी नहीं जितने कि कुछ अन्य ब्लॉग हैं, वाकई विचारणीय है। लेकिन बात वही है कि ये ब्लॉग ही कार्यक्रम की थीम से मेल खाते थे, अन्य लोकप्रिय ब्लॉग कहीं से भी कार्यक्रम में फिट न बैठते!!</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>अभी तो बच्चा जन्म ले रहा है और अभी से पहरा?</p></blockquote>
<p>अनिल जी, बात हिन्दी ब्लॉगिंग की नहीं हो रही वरन्‌ ब्लॉगिंग की हो रही है। ब्लॉगिंग तकरीबन उतनी ही पुरानी है जितना पुराना वर्ल्ड वाइड वेब (world wide web) है। जन्म लेने बात छोड़िए, ब्लॉगिंग को आए हुए तकरीबन चौदह वर्ष हो चुके हैं, जिस ब्लॉगर.कॉम की सेवा पर आपका ब्लॉग है उसी को आए हुए नौ वर्ष हो चुके हैं!!</p>
<blockquote><p>हमने पूरा नही देखा था सिर्फ शुरुआत मे थोडा देखा था।</p></blockquote>
<p>चाहें तो अब देख सकती हैं ममता जी, शो के वीडियो का लिंक मैंने अपनी पोस्ट के अंत में दिया है। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>लेकिन उसदिन हमारे टीवी पर एनडीटीवी लगा ही नहीं</p></blockquote>
<p>प्रवीण जी, आप इसको ऑनलाईन देख सकते हैं, वीडियो का लिंक ऊपर मेरी पोस्ट के अंत में है। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>दो तीन बार सबमिट करने पर भी जब यह टिप्पणी सबमिट नहीं हुई तो माथा ठनका कि कहीं अभी से ही यह कंट्रोल शुरू तो नहीं हो गया…चलो, एक बार फिर से ट्राई मारता हूं।</p></blockquote>
<p>आपकी टिप्पणी मॉडरेशन की कतार में चली गई थी, अभी देखी तो निकाली वहाँ से। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>आपने एकदम सही प्रश्न उठाया है. ब्लाग का मतलब ही व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की आजादी है.</p></blockquote>
<p>लेकिन शास्त्री जी, साथ ही मैंने यह भी कहा है कि &#8220;जब तक किसी पर उँगली उठा कुछ कह नहीं रहा&#8221;। अभिव्यक्ति की आज़ादी की भी एक सीमा है। किसी को अंट-शंट कहना उसके अंतर्गत नहीं आता और यह कार्यक्रम में बैठे एक वकील साहब ने बताया भी कि ऐसा करने पर मानहानि का दावा किया जा सकता है। <img src='http://hindi.amitgupta.in/wp-content/plugins/smilies-themer/ig_cool/icon_smile.gif' alt=':)' class='wp-smiley' /> </p>
<blockquote><p>mujhe to lagta hai chunkar aise blogs ka jikra kiya gaya hai jo is talk show ki rating baraye</p></blockquote>
<p>सही सोच रहे हो तरूण भाई। ब्लॉगिंग पर कीचड़ उछालना और चुनकर ऐसे ब्लॉगों पर ही चर्चा वह भी ऐसे लोगों के जो कि इतने लोकप्रिय भी नहीं जितने कि कुछ अन्य ब्लॉग हैं, वाकई विचारणीय है। लेकिन बात वही है कि ये ब्लॉग ही कार्यक्रम की थीम से मेल खाते थे, अन्य लोकप्रिय ब्लॉग कहीं से भी कार्यक्रम में फिट न बैठते!!</p>
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	<item>
		<title>By: Tarun</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1683</link>
		<dc:creator>Tarun</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 16:10:30 +0000</pubDate>
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		<description>mujhe to lagta hai chunkar aise blogs ka jikra kiya gaya hai jo is talk show ki rating baraye.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>mujhe to lagta hai chunkar aise blogs ka jikra kiya gaya hai jo is talk show ki rating baraye.</p>
]]></content:encoded>
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		<title>By: शास्त्री जे सी फिलिप्</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1682</link>
		<dc:creator>शास्त्री जे सी फिलिप्</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 15:49:30 +0000</pubDate>
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		<description>आप ने कहा:
&quot;एक बात जो मुझे यह समझ नहीं आई वह यह कि आखिर बर्खा क्या चाह रही थीं, और यह कार्यक्रम के मुद्दे से कैसे संबन्धित है? &quot;

हरेक माडरेटर  हर विषय पर चर्चा नहीं चला सकता. उसे विषय का मर्म भी थोडाबहुत आना चाहिये.

आपने कहा:
&quot;क्या किसी का ब्लॉग इसलिए नियंत्रण के तहत आना चाहिए कि वह व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत बातें दुनिया के सामने रख रहा है? व्यक्तिगत ब्लॉग जब तक किसी पर उँगली उठा कुछ कह नहीं रहा तो उसमें किसी को तो कोई आपत्ति होनी ही नहीं चाहिए। और यदि है तो फिर वह मुख्यधारा मीडिया पर क्यों नहीं लागू होती?&quot;

आपने एकदम सही प्रश्न उठाया है. ब्लाग का मतलब ही व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की आजादी है.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आप ने कहा:<br />
&#8220;एक बात जो मुझे यह समझ नहीं आई वह यह कि आखिर बर्खा क्या चाह रही थीं, और यह कार्यक्रम के मुद्दे से कैसे संबन्धित है? &#8221;</p>
<p>हरेक माडरेटर  हर विषय पर चर्चा नहीं चला सकता. उसे विषय का मर्म भी थोडाबहुत आना चाहिये.</p>
<p>आपने कहा:<br />
&#8220;क्या किसी का ब्लॉग इसलिए नियंत्रण के तहत आना चाहिए कि वह व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत बातें दुनिया के सामने रख रहा है? व्यक्तिगत ब्लॉग जब तक किसी पर उँगली उठा कुछ कह नहीं रहा तो उसमें किसी को तो कोई आपत्ति होनी ही नहीं चाहिए। और यदि है तो फिर वह मुख्यधारा मीडिया पर क्यों नहीं लागू होती?&#8221;</p>
<p>आपने एकदम सही प्रश्न उठाया है. ब्लाग का मतलब ही व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की आजादी है.</p>
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	<item>
		<title>By: dr parveen chopra</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1686</link>
		<dc:creator>dr parveen chopra</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 14:38:45 +0000</pubDate>
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		<description>अनिल रघुराज जी की बात बहुत अच्छी लगी कि अभी तो बच्चा पैदा ही हुया है और अभी से पहरा। अभी उसे थोड़ी मस्ती करने दे, मिट्टी से खेलने दो, हाथ-पैर गंदे करने पर मां से प्यार भरी झिड़कियां तो खाने दो, थोड़ी नटखट अट्ठखेलियां तो करने दो......सीधी सी बात है, क्या यह नियंत्रण -वियंत्रण ......क्या बाकी सब नियंत्रण वाली चीज़े ठीक चल रही हैं.......मैं तो उसी दिन से ब्लोग लिखनी  ही बंद कर दूंगा....यह जो ब्लोगर्स हैं इन्हें खेलने दो शब्दों के साथ......यही बलोग का सही अर्थ लगता है जो मैं समझ पाया हूं......बाकी जहां पर उस टीवी प्रोग्राम का सवाल है किसी बलागर बंधु ने पहले अपनी बलाग पर बता भी दिया था लेकिन उसदिन हमारे टीवी पर एनडीटीवी लगा ही नहीं...लेकिन आप सब दोस्तो से काफी कुछ सुन लिया है। सो, अभी यह नियंत्रण व्यंत्रण की बात ही न करें....मेरी तो सांस अभी से ही घुटने लगी है। बस, कुछ ज्यादा ही लिख दिया है।
दो तीन बार सबमिट करने पर भी जब यह टिप्पणी सबमिट नहीं हुई तो माथा ठनका कि कहीं अभी से ही यह कंट्रोल शुरू तो नहीं हो गया...चलो, एक बार फिर से ट्राई मारता हूं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>अनिल रघुराज जी की बात बहुत अच्छी लगी कि अभी तो बच्चा पैदा ही हुया है और अभी से पहरा। अभी उसे थोड़ी मस्ती करने दे, मिट्टी से खेलने दो, हाथ-पैर गंदे करने पर मां से प्यार भरी झिड़कियां तो खाने दो, थोड़ी नटखट अट्ठखेलियां तो करने दो&#8230;&#8230;सीधी सी बात है, क्या यह नियंत्रण -वियंत्रण &#8230;&#8230;क्या बाकी सब नियंत्रण वाली चीज़े ठीक चल रही हैं&#8230;&#8230;.मैं तो उसी दिन से ब्लोग लिखनी  ही बंद कर दूंगा&#8230;.यह जो ब्लोगर्स हैं इन्हें खेलने दो शब्दों के साथ&#8230;&#8230;यही बलोग का सही अर्थ लगता है जो मैं समझ पाया हूं&#8230;&#8230;बाकी जहां पर उस टीवी प्रोग्राम का सवाल है किसी बलागर बंधु ने पहले अपनी बलाग पर बता भी दिया था लेकिन उसदिन हमारे टीवी पर एनडीटीवी लगा ही नहीं&#8230;लेकिन आप सब दोस्तो से काफी कुछ सुन लिया है। सो, अभी यह नियंत्रण व्यंत्रण की बात ही न करें&#8230;.मेरी तो सांस अभी से ही घुटने लगी है। बस, कुछ ज्यादा ही लिख दिया है।<br />
दो तीन बार सबमिट करने पर भी जब यह टिप्पणी सबमिट नहीं हुई तो माथा ठनका कि कहीं अभी से ही यह कंट्रोल शुरू तो नहीं हो गया&#8230;चलो, एक बार फिर से ट्राई मारता हूं।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: mamta</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1685</link>
		<dc:creator>mamta</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 11:33:04 +0000</pubDate>
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		<description>हमने पूरा नही देखा था  सिर्फ शुरुआत मे थोडा देखा था।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>हमने पूरा नही देखा था  सिर्फ शुरुआत मे थोडा देखा था।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: kakesh</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1690</link>
		<dc:creator>kakesh</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 04:52:27 +0000</pubDate>
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		<description>पूरा शो फालतू था. रवीश जी का हिन्दी बोलना अच्छा लगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पूरा शो फालतू था. रवीश जी का हिन्दी बोलना अच्छा लगा.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: अनिल रघुराज</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1689</link>
		<dc:creator>अनिल रघुराज</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 03:23:06 +0000</pubDate>
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		<description>आत्मनियंत्रण ही यहां चलेगा। वैसे अभी तो नियंत्रण की बात ही नहीं की जानी चाहिए। अभी तो बच्चा जन्म ले रहा है और अभी से पहरा? वैसे बरखा का कार्यक्रम बहुत ही घटिया था। ये भी साफ दिखा कि बरखा ने इसके लिए कोई होमवर्क नहीं किया था। पूरा शो फालतू बातों में निकल गया।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>आत्मनियंत्रण ही यहां चलेगा। वैसे अभी तो नियंत्रण की बात ही नहीं की जानी चाहिए। अभी तो बच्चा जन्म ले रहा है और अभी से पहरा? वैसे बरखा का कार्यक्रम बहुत ही घटिया था। ये भी साफ दिखा कि बरखा ने इसके लिए कोई होमवर्क नहीं किया था। पूरा शो फालतू बातों में निकल गया।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: दिनेशराय द्विवेदी</title>
		<link>http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1688</link>
		<dc:creator>दिनेशराय द्विवेदी</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 18 Jan 2008 02:08:49 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://hindi.amitgupta.in/2008/01/18/should-blogs-be-regulated/#comment-1688</guid>
		<description>इस चर्चा की एक उपलब्धि यह भी कि मीडिया ने ब्लॉग जगत पर चर्चा तो की। बदनामी से नाम तो होगा। बद को स्किप करने का काम भी हो ही जाएगा।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>इस चर्चा की एक उपलब्धि यह भी कि मीडिया ने ब्लॉग जगत पर चर्चा तो की। बदनामी से नाम तो होगा। बद को स्किप करने का काम भी हो ही जाएगा।</p>
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