आपने काला-बाज़ार के बारे में तो सुना ही होगा कि कैसे किसी वस्तु की माँग बढ़ती दिखती है तो साहूकार अपने गोदाम भर लेते हैं और जब बाज़ार में माल मिलना बंद हो जाता है तो वे मन-माफ़िक दामों पर बेचते हैं। साथ ही दो नंबर वाले प्रॉपर्टी डीलरों के बारे में भी सुना होगा जो कि उस प्रॉपर्टी पर आपसे पहले कब्ज़ा कर लेते हैं जिस पर आपकी निगाह होती है और फिर आपको ऊँचे दाम पर बेचने की पेशकश करते हैं।

इंटरनेट की वर्चुअल दुनिया में एक ही प्रकार की प्रापर्टी होगी है, डोमेन नाम। यह ठीक वैसे ही है जैसे आपने किसी शहर-गाँव में कोई ज़मीन खरीद ली या लंबी अवधि के लिए किराए पर ले ली। डोमेन नाम को आप खरीदते नहीं हैं वरन्‌ सालाना लीज़(lease) पर लेते हैं जिसके तहत आप प्रति वर्ष उसका भाड़ा चुकाते हैं ताकि वह डोमेन आपके पास बना रहे और आप उसका जैसे चाहें वैसे प्रयोग करते रहें। डोमेन नाम एक भू-खंड की तरह है और जो आप उस पर वेबसाइट बनाते हैं वह किसी इमारत की तरह जिसमें चाहे तो आप स्वयं रहें या उस इमारत को होटल या ऑफिस आदि में बदल उससे नोट कमाएँ।

ज़मीन खरीदने से पहले आप देखते हैं कि आपको कहाँ ज़मीन लेनी है, कौन सी जगह लेना सही रहेगा, कहाँ सस्ती और अच्छी मिलेगी। और फिर आप या तो सीधे ज़मीन के मालिक से खरीदते/किराए पर लेते हैं अथवा किसी दलाल के द्वारा। डोमेन लेने में भी कुछ-२ ऐसा ही होता है, आप ढूँढते हैं कि आपके मनपसंद नाम वाला डोमेन उपलब्ध है कि नहीं; यदि उपलब्ध है तो आप किसी एक दलाल(रजिस्ट्रार – registrar) से उसको किराए पर ले लेते हैं और यदि डोमेन उपलब्ध नहीं तो उसके मौजूदा मालिक से संपर्क कर उसको पाने का प्रयास करते हैं। यहाँ तक तो ठीक है, यह सामान्य प्रक्रिया है। यदि आपका वांछित डोमेन उपलब्ध है तो आप किसी भी रजिस्ट्रार से उसको ले सकते हैं और कोई बंदिश नहीं कि आपने जिस रजिस्ट्रार के द्वारा डोमेन ढूँढा उसी से आपको लेना होगा, परन्तु यदि जिस रजिस्ट्रार के द्वारा आपने डोमेन ढूँढा वह आपके ढूँढते ही उस डोमेन पर कब्ज़ा कर ले तो आपके पास फिर सिर्फ़ उसी रजिस्ट्रार से डोमेन लेने का विकल्प होगा। और इस बात की कोई गारंटी नहीं कि आपने यदि तुरंत डोमेन नहीं लिया और एकाध दिन बाद लेने आए तो वह रजिस्ट्रार उस डोमेन के आपसे ज़्यादा पैसे नहीं माँगेगा।

डोमेन नाम बेचने के धंधे में वैसे भी रजिस्ट्रारों यानि कि दलालों की उतनी कमाई नहीं रह गई है जितनी पहले हुआ करती थी। आज बहुत की कम मार्जिन पर रजिस्ट्रार डोमेन आगे ग्राहकों को दे रहे हैं क्योंकि गला-काट प्रतियोगिता है बाज़ार में। इसी के चलते ऐसे बहुत से रजिस्ट्रार हैं जो पहले बाज़ार के बड़े खिलाड़ी होते थे और आज जिनको पूछने वाला कोई नहीं क्योंकि उन्होंने अपने को बाज़ार में बनाए रखने के लिए अपने दाम कम नहीं करे हैं और पहले जैसे ही ऊँचे दाम बनाए रखे हैं। ऐसे ही गिरते रजिस्ट्रारों में से एक है नेटवर्क सॉल्यूशन्स जो कि शुरुआती दिनों में बहुत बड़ा फन्ने खाँ हुआ करता था लेकिन आज इसको कोई नहीं पूछता। क्यों? अरे जब दुनिया भर के रजिस्ट्रार पाँच-पाँच सौ रूपए में डोमेन दे रहे हैं तो कोई इससे तीन गुणा से अधिक दाम पर क्यों लेगा? आप कहेंगे कि सर्विस क्वालिटी तो जनाब इससे काफ़ी बेहतर सर्विस देने वाले रजिस्ट्रार इसके दाम के एक-तिहाई में डोमेन दे रहे हैं!! यह रजिस्ट्रार बाकी रजिस्ट्रारों की तरह आपको पाँच सौ रूपए प्रति वर्ष का भाव तब देगा जब आप इससे सौ वर्षों का अनुबंध करेंगे और पूरा भुगतान एडवांस में करेंगे। यदि आंकड़े कुछ कहते हैं तो यह देखिए:

निम्न है सूचि जो दर्शाती है अभी तक सबसे अधिक डोमेन बेचने वाले रजिस्ट्रार

इसमें नेटवर्क सॉल्यूशन्स तीसरे नंबर पर सिर्फ़ इसलिए बना हुआ है क्योंकि यह सबसे पुराने रजिस्ट्रारों में से एक है और शुरुआती दिनों में इसके द्वारा बहुतों ने डोमेन लिए थे। लेकिन अन्य कुछ आंकड़े तस्वीर साफ़ करेंगे।

निम्न सूचि दर्शाती है आज के समय के तेज़ी से बढ़ते शीर्ष 15 रजिस्ट्रार और उनके लाभ और हानि को

अब यह सूचि में आपको गोडैडी और इनोम रजिस्ट्रार शीर्ष पर ही दिखेंगे क्योंकि ये बाज़ार के साथ चलते हैं और सेवा की गुणवत्ता के साथ-२ अपने दाम भी बाज़ार के अनुसार रखते हैं इसलिए लोग इनसे लेना पसंद करते हैं। गोडैडी सीधे ग्राहक को बेचने में यकीन रखता है जबकि इनोम से आप सीधे खरीदें तो महँगा पड़ेगा लेकिन इसके विक्रेता दुनिया भर में हैं जिनसे आप काफ़ी सस्ते में खरीद सकते हैं। नेटवर्क सॉल्यूशन्स की खामी यह है कि उससे सीधी खरीद तो महँगी है ही, उसके विक्रेता भी उतने ही महँगे हैं क्योंकि वह विक्रेताओं को इतना मार्जिन नहीं देता कि विक्रेता खुद उसके रेट से कम में बेच सकें। अब यदि नेटवर्क सॉल्यूशन्स का हाल इस सूचि में देखना है तो वह निम्न है।

853वें स्थान पर मौजूद नेटवर्क सॉल्यूशन्स घाटे में है, यानि कि बाज़ार में उसका हिस्सा कम होता जा रहा है और उसके द्वारा रजिस्टर हुए डोमेन संख्या में कम होते जा रहे हैं। अधिक जानकारी हमको निम्न सूचि देती है।

इस आखिरी सूचि से अंदाज़ा होता है इस गिरते हुए रजिस्ट्रार के हाल का।

तो अब आप सोचेंगे कि यहाँ तक तो ठीक है, ऊपर-नीचे तो धंधे में लगा ही रहता है लेकिन इसका काला-बाज़ारी आदि से क्या लेना देना जिसका ज़िक्र मैंने पोस्ट के शुरु में किया था!! है, उसका ही संबन्ध लगता है अपने को तो। हर आईकान(ICANN) द्वारा सर्टिफाईड रजिस्ट्रार किसी भी डोमेन नाम को फोकट में अपने पास 3-4 दिन रख सकता है। वह चाहे तो इस अवधि के पश्चात डोमेन पर अपना हक छोड़ सकता है और इस तरह उसको कोई पैसे नहीं देने होंगे परन्तु यदि इस अवधि के बाद भी वह डोमेन नहीं छोड़ता तो डोमेन रजिस्ट्री को उसे उस डोमेन का शुल्क देना होगा। तो नेटवर्क सॉल्यूशन्स गेम यह खेल रहा है कि यदि आप कोई डोमेन नाम उसके पास ढूँढते हैं तो यदि वह उपलब्ध है तो नेटवर्क सॉल्यूशन्स उसको पकड़ लेता है जिस स्थिति में यदि आपको ढूँढे हुए नामों में से कोई नाम चाहिए तो वह आपको नेटवर्क सॉल्यूशन्स से ही लेना होगा और अन्य किसी रजिस्ट्रार से नहीं ले सकते!! यह नाम नेटवर्क सॉल्यूशन्स पूरे चार दिन तक पकड़ के बैठेगा और उसके बाद छोड़ देगा। और यदि आप एकाध दिन बाद ढूँढे गए नामों में से किसी को रजिस्टर कराने पहुँचते हैं तो यह इस बात का संकेत है कि वह डोमेन आपके लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए नेटवर्क सॉल्यूशन्स उसके ऊँचे दाम भी माँग सकता है। साथ ही इस बात की कोई गारंटी नहीं कि वह इस तरह पकड़े गए नामों की सूचि आदि आगे किसी को नहीं बेच रहा।

डोमेन नामों की स्पेक्यूलेशन आदि और पकड़ के खरीद-फरोख्त करोड़ों रुपए सालाना का बाज़ार है। यह ठीक वैसा है जैसे भूमि व्यापार या कह लीजिए शेयर बाज़ार जहाँ आप अंदाज़ा लगाते हैं कि कौन सी जगह पर कौन सा भूमिखंड अथवा कौन सी कंपनी का शेयर ऊँचा उठेगा और कितना उठेगा और उसके अनुसार आप खरीद-फरोख्त करते हैं ताकि दाम ऊँचा होने पर बेच सकें। डोमेन का व्यापार भी कुछ ऐसा ही है, डोमेन व्यापारी दम-खम रखने वाले अच्छे नामों को खोजते हैं और उनको रजिस्टर कर लेते हैं और फिर उनको ऊँचे दामों में बेचते हैं और जब-तक अपने पास रखते हैं तब तक उनसे विज्ञापनों आदि द्वारा कमाई भी करते हैं।

अभी तक नेटवर्क सॉल्यूशन्स पर सिर्फ़ शक जा रहा था कि वह अपने यहाँ ढूँढे गए नामों को पकड़ के बैठ रहा है लेकिन अब साफ़ हो गया है जब वह सीधे ही सीना ठोक के हामी भरता है कि वह ऐसा कर रहा है (अंग्रेज़ी में खबर यहाँ पढ़ें)। इस तरह 4-5 दिन के लिए डोमेन पर कब्ज़ा करने के बारे में आईकान(ICANN) की फिलहाल कोई स्पष्ट नीति नहीं है जो इस रजिस्ट्रार को या ऐसे किसी अन्य रजिस्ट्रार को रोक सके। कहने को तो इस विषय पर नेटवर्क सॉल्यूशन्स के नीति बनाने वाली समिति के उप-अधिपति(Vice President of Policy), जॉनथन नेवेट्ट, ने कहा कि उनका इरादा सिर्फ़ इतना है कि यदि कोई ग्राहक अपने लिए डोमेन खोजता है और एकाध दिन बाद आकर उसको पाने की कोशिश करे तो उसको वह प्राप्त हो सके और कोई अन्य उसको न ले उड़े (अंग्रेज़ी में खबर यहाँ पढ़ें) लेकिन यह महज़ एक बकवास के अतिरिक्त और कुछ नहीं है। डोमेन रजिस्ट्रेशन पहले आया पहले ले गया (First Come First Served) की तर्ज पर होता है, यदि आपके किसी ट्रेडमार्क का डोमेन नहीं है तो आपके खोजने भर से ही आपका उस पर हक नहीं हो जाता कि कोई और न ले सके। और नेटवर्क सॉलूशन्स की ओर से यह बकवास ही है कि वे अपने ग्राहक के लिए डोमेन सुरक्षित कर रहे हैं ताकि दोबारा आने पर उनको मिल सके, क्योंकि कोई गारंटी नहीं है कि कोई अन्य व्यक्ति आकर उनसे डोमेन नहीं ले जाएगा!! वे सिर्फ़ अनैतिक तरीके से अपनी दलाली सुरक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं; डोमेन चाहे कोई ले जाए लेकिन उन्हीं से लेकर जाए और रोकड़ा उनकी जेब में ही आए!!

यह तो सीधे-२ अपनी ताकत का गलत लाभ उठा बाज़ार में अपनी दलाली जबरन हासिल करने का एक टुच्चा तरीका है जो कि एक तरह से इस ओर लोगों का विश्वास मज़बूत ही करता है कि नेटवर्क सॉल्यूशन्स वाकई तेज़ी से नीचे जा रहा है और इसी के चलते तरह-२ के हथकंडे अपनाने से परहेज़ नहीं करेगा। साथ ही वह ग्राहकों पर से अपना विश्वास समाप्त कर रहा है, इस बात की क्या गारंटी रह जाएगी कि कल को वह किसी के डोमेन में घपला नहीं कर देगा? आईकान(ICANN) की नीतियों में बहुत लफ़ड़े हैं बहुत झोल हैं और कोई भी समझदार उनके दाएँ-बाएँ जाकर अपना उल्लू सीधा कर सकता है। और जो एक बार गलत कार्य कर सकता है वह पुनः भी कर सकता है, नेटवर्क सॉल्यूशन्स ने यह तो दिखा ही दिया कि वह एक गलत कार्य कर रहा है और सीना ठोक के कर रहा है क्योंकि कानूनी रूप से उसको फिलहाल कोई रोक नहीं सकता!!