RSS

आज पुरानी राहों से …..


February 12th, 2008 at 07:07 am | 5 Comments

कल रात यूँ ही एमटीएनएल (MTNL) प्लेट्यून वेबसाइट देख रहा था कि कोई ढंग का गाना वहाँ आ गया हो तो उसको अपनी रिंग बैक टोन (Ring Back Tone) के तौर पर सैट कर लूँ। रिंग बैक टोन वह होती है जो आपको तब सुनाई देती है जब आप किसी फोन नंबर को डायल करते हैं और कॉल मिलाए गए नंबर से कनेक्ट होती है। यह टोन फोन मिलाने वाले को अपने रिसीवर में तब तक सुनाई देती है जब तक दूसरे छोर पर फोन रिसीव नहीं किया जाता। अब मोबाइल ऑपरेटर आदि काफ़ी समय से डिफॉल्ट टोन की जगह गाना आदि सैट करने की सुविधा दे रहे हैं। मुझे कुछ ही समय पहले पता चला था कि मेरे मोबाइल सेवा प्रदाता, एमटीएनएल (MTNL), ने भी यह सेवा चालू कर दी है तो मैंने भी उस समय उपलब्ध सीमित सूचि में पसंद आए ओम शांति ओम के गाने “आँखों में तेरी अजब सी अजब सी अदाएँ हैं” सैट कर लिया था।

हाँ तो अब कल रात मैं देख रहा था कि कोई ढंग के गाने उपलब्ध हुए हैं कि नहीं तो सुनते-२ दो गाने ढंग के दिखे; स्व. किशोर कुमार द्वारा गाया “हम बेवफ़ा हरगिज़ न थे” और स्व. मो.रफ़ी द्वारा गाया “आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे”। गाने तो दोनों ही बढ़िया, किशोर कुमार द्वारा गाया गीत तो मैंने पहले भी कई बार सुना हुआ है लेकिन रफ़ी साहब द्वारा गाए गाने के जब मैंने बोल सुने तो मैं मोहित हो गया। हालांकि एमटीएनएल (MTNL) की वेबसाइट पर इस गाने की टोन सिर्फ़ एक मिनट की थी लेकिन वो गाने के मुखड़े ने ही मोह लिया। उसको तो खैर मैंने अपने मोबाइल के लिए सैट कर लिया कि अब कोई मुझे फोन मिलाएगा तो उसको यह गाना सुनाई दे, और मैं खोजने लगा कि यह पूरा गाना कहीं सुनने को मिल जाए तो आखिरकार यह गाना मिल गया। जब इस गाने को पूरा सुना तो शकील बदायुनी के लिखे इस गीत पर मुँह से अपने आप ही वाह-वाह निकल गया। पूरा गाना इसलिए यहाँ लिख रहा हूँ:

आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे,
दर्द में डूबे गीत न दे, ग़म का सिसकता साज़ न दे। – २

बीते दिनों की याद थी जिनमें, मैं वो तराने भूल चुका,
आज नई मंज़िल है मेरी, कल के ठिकाने भूल चुका,
ना वो दिल ना सनम,
ना वो दीन धरम,
अब दूर हूँ सारे गुनाहों से।

आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे…..

टूट चुके सब प्यार के बंधन, आज कोई ज़ंजीर नहीं,
शीशा-ए-दिल में अरमानों की आज कोई तस्वीर नहीं,
अब शाद हूँ मैं आज़ाद हूँ मैं, कुछ काम नहीं है आहों से।

आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे,
दर्द में डूबे गीत न दे, ग़म का सिसकता साज़ न दे।

जीवन बदला दुनिया बदली,
मन को अनोखा ज्ञान मिला,
आज मुझे अपने ही दिल में एक नया इंसान मिला,
पहुँचा हूँ वहाँ नहीं दूर जहाँ, भगवान भी मेरी निगाहों से।

आज पुरानी राहों से कोई मुझे आवाज़ न दे…..

बहुत खूबसूरत गीत लिखा था और रफ़ी साहब ने गीत की पूरी इज़्ज़त रखते हुए उतनी ही खूबसूरती के साथ इसको गाया था। यह गाना सन्‌ 1968 में आई दिलीप कुमार की फिल्म आदमी का है।

यदि आप यह गीत सुनना चाहते हैं तो इसे आप यहाँ सुन सकते हैं:) इसका वीडियो यूट्यूब पर यहाँ उपलब्ध है परन्तु लगता है कि यह वीडियो बीच में से कटा हुआ है या फिर हो सकता है कि इतना ही गाना फिल्माया गया हो और मूल गीत में से बीच के दो पैरा न फिल्माए गए हों। खैर, अब यह फिल्म सेवन्टीएमएम पर अपनी कतार में लगा दी है, जब आएगी तो देख के ही पता चलेगा कि फिल्म में पूरा गीत है कि नहीं। :)

5 Comments

समीर लाल


सुन रहा हूँ…:)


RC Mishra


Ring back tune —> Caller tune

वैसे ये भी हो सकता है, कि कॉल करने वाला ये गीत सुनकर, कुछ और मूड मे आ जाये और सोचे अभी क्या आवाज दें बन्दे को..फ़िर कभी सही :D।


Amit


सुन रहा हूँ…

:)

Ring back tune —> Caller tune

जी वही होता है, बस मार्केटिंग के फंडे हैं जो अलग नाम से बेच रहे हैं। ;)

वैसे ये भी हो सकता है, कि कॉल करने वाला ये गीत सुनकर, कुछ और मूड मे आ जाये और सोचे अभी क्या आवाज दें बन्दे को..फ़िर कभी सही

ही ही ही!! :D


सागर नाहर


यह गाना तो बढ़िया है ही परन्तु रफी साहब मे इस गाने से भी बढ़िया कई गाने गाये हैं। :)


Amit


यह मुझे भी पता है सागर जी कि रफ़ी साहब के इससे भी बढ़िया कई गाने हैं, वह तो बस यह गाना एमटीएनएल की वेबसाइट पर मिला तो उसके बारे में लिख दिया। :)


Leave A Message

name
email
blog
:mrgreen: :twisted: :arrow: :evil: :idea: :oops: :roll: :cry: :lol: :cool: :shock: :sad: :smile: :???: :grin: :razz: :eek: :mad: :neutral: :wink: :!: :?: :tup: :tdown: