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नाम के दीवाने और फैशन के मारे…..


September 10th, 2008 at 07:07 am | 19 Comments

यह आज की बात नहीं है, सालों से ऐसा होता आया है कि सिर्फ़ फैशनेबल लगने के लिए लोग किसी चीज़ का अनुसरण करने लग जाते हैं चाहे वह चीज़ उनकी समझ के दायरे से कोसों दूर हो। लेकिन अभी पिछले कुछ वर्षों में महानगरों में यह चलन कुछ खासा बढ़ते देखा है। जैसे-२ कॉस्मोपॉलिटन (Cosmopolitan) टाइप के समाज का दायरा बढ़ता जा रहा है, जैसे-२ अधिक व्यय करने के सामर्थ्य वाले मध्यम वर्ग का विकास होता जा रहा है वैसे-२ इन भेड़ चाल चलने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। जहाँ पहले एकाध ही कोई नज़र आता था वहीं आजकल ये लोग हर गली नुक्कड़ पर चरने निकले भेड़-बकरियों के झुंड की भांति जुगाली करते मिल जाते हैं।

लेकिन घबराने की कोई बात नहीं, ये आपको नुकसान नहीं पहुँचाते, मात्र अपनी समझ और हरकतों से आपका मनोरंजन करते हैं। हाँ ऐसा अवश्य है कि इनमें से कई स्नॉब (Snob) स्नॉबरी करते भी मिल जाएँगे। लेकिन उन स्नॉब लोगों को यदि एक बार को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए तो बाकी की यह जमात अन्य लोगों के लिए सर्कस के जोकर का कार्य करती है। ऐसा नहीं है कि ये लोग उछल-कूद करते मिल जाएँगे, या किसी जानवर आदि का खेल दिखाते मिलेंगे, इनकी हरकतें कुछ मौन मनोरंजन कराती हैं जिसे आपकी बुद्धि ताड़ जाएगी, आप मन ही मन मुस्कुराएँगे लेकिन अपनी मुस्कुराहट ज़ाहिर नहीं करेंगे क्योंकि ऐसा करना सभ्य न माना जाएगा और दूसरे व्यक्ति को यह भान हो गया तो वह आप पर बरस भी सकता है कि आप उसकी खिल्ली उड़ा रहे हैं जबकि कार्य स्वयं वो ऐसा कर रहा हो। ;)


( फोटो साभार – ताहमिद )

अभी दो-तीन दिन पहले की बात है, मैं घर के पास ही स्थित ज्ञानी के अड्डे (Gianis) पर आईसक्रीम (Ice Cream) लेने गया। वहीं एक युवा जोड़ा आया, नवाब साहब अपनी तूफ़ान-ए-हमदम के साथ चॉकलेट (Chocolate) आईसक्रीम का लुत्फ़ उठाने के तमन्नाई थे। उनकी गुल-ए-गुलज़ार ने कहीं सुना/पढ़ा होगा कि चॉकलेट आईसक्रीम यदि सिनफुल (sinful) न हो तो फिर चॉकलेट आईसक्रीम खाने का लाभ ही क्या। तो बस उन्होंने अपने आफ़ताब-ए-नज़र को अपनी सिन (sin) करने की तमन्ना बताई और साहब आ पहुँचे काऊँटर पर आईसक्रीम के बारे में पूछने। जैसा कि परिचित लोग सभी जानते हैं, खान-पान की जगहों के बारे में और उनके मेनू के बारे में मुझे काफ़ी जानकारी रहती है, कुछ अपने अनुभव से और कुछ साथी लोगों के अनुभव से। तो उन्होंने जब काऊँटर पर बैठे व्यक्ति पर एक असली चॉकलेटी आईसक्रीम की तमन्ना ज़ाहिर की तो आदत से मजबूर मैंने उनको मशवरा थमा दिया कि “बेल्जियन चॉकलेट” आईसक्रीम (Belgian Chocolate Ice Cream) को आज़माएँ, इससे अधिक चॉकलेटी आईसक्रीम ज्ञानी के अड्डे पर नहीं मिलेगी। तो उन साहब और उनकी मल्लिका-ए-जिग़र ने मेरे सुझाव को आज़मा के देखने की चाहत से “बेल्जियन चॉकलेट” आईसक्रीम का सैंपल लिया एक चमच्च में और उसको भी आधा-२ चख के देखा कि जान लें कि आईसक्रीम लेने लायक है कि नहीं। दोनों ने आईसक्रीम को चखते ही ऐसे मुँह बिचका दिया जैसे मानो किसी ने कुनैन की गोली का चूर्ण बना के जबरन उनकी हलक से नीचे उतार दिया हो बिना पानी के!! ;)

क्या हुआ? अब हुआ यूँ कि वे असली चॉकलेटी आईसक्रीम की तमन्ना ज़ाहिर किए थे और मैंने जो आईसक्रीम बताई वह असली चॉकलेट आईसक्रीम माफ़िक ही थी, नाममात्र को मीठा और पूरा चॉकलेट का स्वाद, आहा!! :D गुल ने टिप्पणी दी कि बहुत कड़वी है और गुलबानों से तो कुछ कहते ही न बना और वे सिर हिलाते वापस काऊँटर के पास दीवार पर टंगे बड़े मेनू (menu) की ओर आ गए कोई स्ट्रॉबरी आदि की आईसक्रीम लेने। अंत में उन्होंने कौन सी आईसक्रीम के साथ सिन (sin) किया यह मुझे नहीं पता क्योंकि तब तक मेरी खरीदी आईसक्रीम पैक हो गई थी और मैं वहाँ रुकने का वैसे भी कोई तमन्नाई नहीं था।


( फोटो साभार – डारविन )

ये एक नमूना है उस भेड़चाल वाले वर्ग का जिनका चॉकलेट ज्ञान कैडबरी की डेरी मिल्क (Dairy Milk) तक ही सीमित है और जो अमिताभ बच्चन के समझाए समझते हैं कि मिठाई और चॉकलेट में कोई फर्क नहीं है। वैसे अमिताभ अंकल का कहना भी सही है, जब चॉकलेट डेरी मिल्क हो तो वाकई मिठाई और चॉकलेट में कोई फर्क नहीं होता क्योंकि डेरी मिल्क चॉकलेट कम और चीनी अधिक होती है!! असल में चॉकलेट की छवि डिप्रेशन कम करने वाली है, मन में एक नई आशा जनने वाली है लेकिन डेरी मिल्क खा के तो किसी भी थर्टी प्लस को डिप्रेशन हो जाता है कि कमबख्त डॉयबिटीज़ (Diabetes) न हो जाए!! :twisted:

लेकिन कुछ भी कहो, उस भेड़चाल चलने वाले जोड़े का असली चॉकलेट आईसक्रीम से साक्षात्कार देखना मज़ेदार रहा, अंग्रेज़ी में कहें तो इट वाज़ क्वाइट अम्यूज़िंग। :D इन लोगों के व्यवहार पर हँसी इसलिए आती है कि ये लोग जो नहीं हैं वह होने का दिखावा करते हैं और फिर मुँह के बल सबके सामने गिरते हैं। आवश्यकता ही क्या है आपको भेड़चाल चलने की? जो हैं वह अपने आप को दिखाने में लोगों को शर्म क्यों होती है? कदाचित्‌ अपने प्रति किसी हीन भावना (inferiority complex) के कारण।

कुछ समय पहले ऐसे ही एक साहब मिले थे जिनका मामला कॉन्टीनेन्टल खाने का था, वह किस्सा यहाँ पढ़ें:cool:

19 Comments

bhuvnesh


ज्ञान तो गुरू हमारा भी डेरी मिल्‍क तक ही सीमित है……बकिया आपकी शरण में आ गए हैं तो कुछ तो ज्ञान प्राप्‍त कर ही लेंगे :grin:


संजय बेंगाणी


भई, खाने पीने का ज्ञान तो अमित से ही ले सकते है :grin:


ज्ञानदत्त पाण्डेय


वाह! एक वाकया हमारे साथ भी है। एक फाइवस्टार में मेरे साथी अफसर ने एस्प्रेसो कॉफी मंगवाई। जो विचार उनके मन में था – उसके अनुसार खूब झागदार कॉफी आनी चाहिये थी।
जो आया, वह मोहभंग करने वाला था। मजे की बात है, चुपचाप पीने की बजाय उन्होंने हंगामा भी कर दिया। प्रबन्धक ने आ कर समझा और विनम्रता से बोला – साहब, आपको जो चाहिये वह केपेचिनो (Cappuccino) कॉफी है। वही मंगवा देते हैं! :smile:


amit


भुवनेश बाबू, डेरी मिल्क तक ज्ञान सीमित होना कोई गलत बात नहीं है। ज्ञान सभी का किसी न किसी बिन्दु तक सीमित ही होता है, असीमित ज्ञान किसी के पास नहीं होता। लेकिन बात यह है कि व्यक्ति को अपने ज्ञान की सीमा का भान होना चाहिए और अपने को अधिक ज्ञानी नहीं दिखाना चाहिए किसी दूसरे को देख, क्योंकि सभी का ज्ञान एक सा नहीं होता, किसी का कम होता है किसी का अधिक। बाकी आप टेन्शन न लें, ज्ञान की प्राप्ति अवश्य होगी। :D
 
संजय भाई, आप भी मजे लेने से बाज़ नहीं आते!! ;)
 
ज्ञान जी, वाह, क्या किस्सा बताया है, ही ही ही!! अगर आपके साथी साहब वो एस्प्रेसो पी लेते तो उनकी लाइफ़ बन जाती, मज़ा आ जाता उनको और फिर काफ़ी देर तक अपने को स्फूर्ती से भरा महसूस करते!! :D


Garima


वैसे एक बात तय है कि अब वो कभी भी चॉकलेटी आइसक्रीम नही खायेंगे :razz:


ई-गुरु राजीव


अरे रुको मैं भोजन-मन्त्र भूल गया.


ई-गुरु राजीव


:razz: :wink:


समीर लाल ‘उड़न तश्तरी वाले’


उसे असल चाकलेट कॉफी पर डाल कर पिला देते, तो चाकलेट की स्पेलिंग भी भूल जाता. :grin:

—————-

आपके आत्मिक स्नेह और सतत हौसला अफजाई से लिए बहुत आभार.


amit


गरिमा, यह भी हो सकता है कि अगली बार चॉकलेट आईसक्रीम खाने की उनकी तमन्ना हुई तो लेने से पहले पूछ लेंगे कि आईसक्रीम कड़वी तो नहीं है!! ;)
 
समीर जी, सही कहा आपने, ही ही ही, चॉकलेट को वाकई भूल जाते कि क्या होती है!! :D


RC Mishra


गुल, गुल-ए-गुलज़ार और गुल बानों :lol:


Lovely


रोचक!! ऐसी ही कुछ कॉफ़ी के बारे में भी…. मुझे उसमे नाममात्र चीनी पसंद है,और जब कोई कोई मुह बनाता है तो मैं हँस कर जवाब देती हूँ कॉफ़ी यानि रात की तरह काली और नर्क की तरह गर्म ..आगे वाला किस्सा कब सुना रहें हैं?


amit


लवली जी, अब आपके तर्क की क्या कहें, अपने को इतनी समझ नहीं। मुझे तो यह पता है कि अपने को कॉफी अमूमन फीकी ही पसंद आती है या फिर ज़रा सी गुड़ की शक्कर के साथ। यदि गुड़ की शक्कर न हो तो चीनी भी चल जाती है लेकिन तरजीह गुड़ की शक्कर को दी जाती है क्योंकि उससे मिठास की मात्रा सीमित रहती ही है साथ ही कॉफी थोड़ी स्ट्राँग लगती है! :)

आगे वाला किस्सा देखते हैं कि कब लिखना होता है, अभी कुछेक और बातें मन में थी जो कुछ समय से घूम रही थी, तो पहले उनको निबटाया जाए फिर नंबर लगेगा इस किस्से का। :)


Lovely


“Black as the devil, hot as hell ”
अमित जी राज की बात बताऊँ यह मेरा तर्क नही है ..कहीं पढ़ा हुआ है यानि चोरी का माल ..और एक चीज पढ़ी थी “कोई ब्रितानी एक कप काफ़ी के लिए नर्क भी जा सकता है ” ब्रितानी का पता नही मैं तो पक्का चली जाऊँ.बाकि आपके खाने पिने से सम्बंधित किस्से का इन्तिज़ार रहेगा :-)


amit


जहाँ तक मैंने पढ़ा सुना है उसके अनुसार ब्रितानी (ब्रिटिश) लोग चाय के अधिक शौकीन होते हैं कॉफी के मुकाबले। :) बाकी रही नर्क में जाने की बात तो अपन स्वर्ग और नर्क देख के ही डिसाइड करेंगे कि कौन सी जगह जाने लायक है!! ;)


Lovely


एक बात कहनी बाकि रह गई क्या लिखा है आपने… वो बोले तो मस्त !!गुल.. गुलफाम… गुलबानो जय हो आपने मन प्रसन्न कर दिया हा हा हा


amit


वो बोले तो मस्त

कौन बोले जी? ;) पसन्द करने के लिए धन्यवाद! :)


Lovely


खिंचाई करने की पुरी तैयारी :mad: ..लगे हाँथ यह भी बता दीजिये आपको अपने ब्लॉग रोल पर रख सकतीं हूँ ? :-)


amit


हाँ जहाँ मौका मिलता है वहाँ खिंचाई कर ही लेते हैं! ;)

रही ब्लॉगरोल की बात तो यदि उससे आपका तात्पर्य अपने ब्लॉग के साइडबार में मेरे ब्लॉग का लिंक लगाने से है या अपने फीडरीडर में मेरे ब्लॉग की फीड सब्सक्राइब करने से है तो इस मामले में आप अपनी मर्ज़ी की मालिक हैं, मुझसे पूछने की आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि इसमें मुझे कोई आपत्ति उठाने का अधिकार नहीं, यह पूर्णतया आपकी इच्छा पर निर्भर है। आप किसका लिंक अपने ब्लॉग पर लगाती हैं और किसकी फीड को फीडरीडर में पढ़ती हैं, यह आपका अपना मसला है। :)


Lovely


aajkal ki duniya badi khrab hai ..isliye puchhna thik hota hai :-)..waise pata tha aap mana nahi karne wale to pahle jod kar fir aoupcharikta nibha rahi thi.dhnyawad Amit jee


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