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फोकट का पैसा उड़ाने में माहिर


October 17th, 2008 at 07:07 am | 5 Comments

यह एक इंसानी प्रवृत्ति है, फोकट का माल सभी को अच्छा लगता है। तो कोई आश्चर्य नहीं होता कि भारत में बहुत से सरकारी कर्मचारी, नेता आदि लोग उपलब्ध संसाधनों का बेदर्दी से दुरुपयोग करते हैं, क्योंकि वह उनको फोकट में उपलब्ध होते हैं। टैक्सपेयर्स का पैसा उन सब के लिए बिलकुल मुफ़्त का माल है और वे “माल-ए-मुफ़्त दिल-ए-बेरहम” के सिद्धांत को पूरी श्रद्धा से मानते हैं। लेकिन ऐसा सिर्फ़ भारत के भ्रष्ट सरकारी तंत्र में ही होता है यह सोचने की भूल न करें। मुफ़्त का माल उड़ाने के लिए तो हर कोई हर समय तैयार रहता है।

आजकल अमेरिका में अर्थव्यवस्था की वाट लगी हुई है, दाएँ बाएँ बैंक और कंपनियाँ डूब रही हैं, अपने को दिवालिया घोषित कर रही हैं, या दिवालिया होने से बचने के लिए थोक के भाव मुलाज़िमों को दरवाज़ा दिखा रही हैं। इसी के चलते और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अमेरिकी सरकार ने 700 अरब डॉलर के “अमेरिका बचाओ” गिफ़्ट प्लान को जारी किया जिसमें ज़रूरतमंदों में डॉलर बाँट उनको कंगाल होने से बचाया जा सके क्योंकि इतने गुरुद्वारे नहीं हैं वहाँ कि सब का काम वहाँ लंगर में निपट जाए। तो अमेरिकी टैक्सपेयर्स (taxpayers) के पैसे के इस दान को पाने वाली दुखियारी कंपनियों में से एक कंपनी है एआईजी (AIG) जो कि एक काफ़ी बड़ी बीमा कंपनी है। जानने वाले शायद इसको पहचान जाएँ, कुछ समय पहले तक नसीरुद्दीन शाह टीवी विज्ञापन में टाटा के साथ गठबंधन में बनी इसकी भारतीय बीमा कंपनी टाटा एआईजी (Tata AIG) की बीमा पॉलिसी बेचते नज़र आते थे।

खैर, तो इस कंपनी ने भी अपने हाथ फैला दिए और फेडरल रिजर्व से मिल रहे दान खाते में इस कंपनी को 85 अरब डॉलर कर्ज़े के रूप में मिल गए। तो जानते हैं कर्ज़ा मिलने की खुशी इस कंपनी के बड़े ओहदेदारों (जिनका इस कंपनी की वाट लगाने में बहुत बड़ा हाथ था) ने कैसे मनाई? डॉलर मिलने के दो ही सप्ताह बाद इस कंपनी के बड़े अफ़सर कैलीफोर्निया में एक यात्रा पर चले गए जिस पर उन्होंने लगभग साढ़े चार लाख डॉलर उड़ा दिए।

अब ज़ाहिर सी बात है कि लोग बाग नाराज़गी तो दिखाएँगे ही, भारतीय जनता थोड़े ही है जिसको परवाह ही नहीं होती कि उनकी खून-पसीने की कमाई कैसे इस्तेमाल होती है। लेकिन जनाब अमेरिकी जनता के हल्ले से भी इस बीमा कंपनी के ओहदेदारों को कोई फर्क न पड़ा, उन्होंने पुनः 38 अरब डॉलर के लिए फेडरल रिजर्व बैंक के आगे हाथ फैला दिए और माल मिलने के बाद ये साहबान इंग्लैन्ड में तीतर का शिकार करने के लिए चले गए जहाँ इन्होंने 86 हज़ार डॉलर उड़ाए और यही नहीं, अपने साथ में ये लोग चार मेहमान भी ले गए!! :evil:

जब समाचार चैनल सीएनएन (CNN) ने उनसे इस पर जवाब माँगा तो एआईजी की ओर से उत्तर आया कि उनकी प्राथमिकता कंपनी का व्यापार बढ़ाने और पॉलिसी लिए बैठे ग्राहकों की सुरक्षा है ताकि वे लोग फेडरल रिजर्व बैंक का कर्ज़ा उतार सकें और एक लाभ वाली कंपनी के रूप में उभर सकें।

वाह-२ क्या कहने, यह ठीक वैसा ही टिकाऊ जवाब है जैसे हमारे यहाँ नेता लोग देते हैं। जय हो! कोई आश्चर्य नहीं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वाट लगी हुई है!! :roll:

 
द्वारा

5 Comments

संजय बेंगाणी


हद की हद हो गई :evil:


ज्ञानदत्त पाण्डेय


चारवाक के खानदानी सब तरफ हैं!


समीर लाल ‘उड़न तश्तरी वाले’


अभी दो तीन दिन पहले ही इसकी डिटेल पढ़ रहा था. ४८००० डॉलर का तो जनाब के स्पा की पेमेंट है. क्या ऐश है जनता के पैसे पर.


जीतू


अभी तो ये शुरुवात है भई, अभी आगे देखो होता है क्या। ये सारा संकट, सब-प्राइम संकट की देन है। लेकिन जिस दिन क्रेडिट कार्ड डिफाल्टर का संकट गहराया, उस दिन हर दूसरी कम्पनी बैठने लगेगी।

रही बात कम्पनियों के प्रबंधको की, वो हमेशा ही मौज करते है, परेशानी आम आदमी को होती है, जो गाढी कमाई मे से टैक्स देता है और अपनी जमा पूँजी इन लोगो के हवाले करके निश्चिंत हो जाता है।


sameer yadav


:mad: क्या बात है ?? वह सर्वव्यापी है और रूप बदल-बदल कर हर जगह मौजूद है. जिसके मुख्य संवाहक हम कहलाते हैं. यह सही कुछ लोग :mrgreen: चाँदी का चम्मच मुंह में और दिल-दिमाग में कांटे लेकर ही पैदा होते हैं. :idea: :!:


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