October 19th, 2008 at 05:22 pm | 3 Comments
Posted In: कतरन
वैसे अच्छा हुआ कल कोडमैट्रिक्स में देरी से पहुँचे – गले की हालत खराब है और ज़ुकाम ने बेहाल कर रखा है – इसलिए कल बोलना पड़ जाता तो वाट लग जाती!
वैसे अच्छा हुआ कल कोडमैट्रिक्स में देरी से पहुँचे – गले की हालत खराब है और ज़ुकाम ने बेहाल कर रखा है – इसलिए कल बोलना पड़ जाता तो वाट लग जाती!
3 Comments
समीर लाल
अच्छा है बोल बोल कर लिखते नहीं हो वरना लिख भी न पाते.
pankaj bengani
यार जब से तुम यह मोबाइल से ठोकने लगे और बडा छोटा सा लिखकर छु हो जाते हो… वैसे चलो हमसे तो अच्छे हो कि लिखते तो हो.
मै भी ऐसा कुछ करूं तो सही रहेगा. छोटा का छोटा और मोबाइल से किया का रौब भी.
जुकाम से तो एक महीने से परेशान हुँ… अब तो लगता है इसके साथ ही पैदा हुआ था.
amit
लिखो भई, लिखना महत्वपूर्ण है, कितना लिख रहे हो यह सेकेन्डरी है। इसलिए लिखना तो आरंभ करो!
रही ज़ुकाम की बात, तो अब तो इसका आना इतना नियमित हो गया है बचपन से कि यदि छह माह बीत जाएँ और यह ना आए तो लगता है जैसे कोई पुरानी पहचान वाला मिलने का वायदा कर मुकर गया!!