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तीन साल से चली आ रही बकबक…..


November 19th, 2008 at 07:07 am | 11 Comments

हम्म….. कल, 18 नवंबर 2008, इस ब्लॉग का हैप्पी बड्डे था, बोले तो तीन वर्ष पूर्व यानि कि 18 नवंबर 2005 को मैंने अपने पहले हिन्दी ब्लॉग पर पहली पोस्ट छापी थी। उस समय यह ब्लॉग वर्डप्रैस.कॉम नामक सेवा पर था और मैंने यूँ सोच आरंभ किया था कि ज़रा हिन्दी में भी ब्लॉगिंग आज़मा के देख ली जाए, यानि कि महज़ एक प्रयोग के तौर पर यह ब्लॉग चालू हुआ था जिसका दूसरा मकसद नई नवेली सेवा वर्डप्रैस.कॉम को जाँचना भी था यह देखने के लिए कि उसमें क्या अलग आता है वर्डप्रैस सॉफ़्टवेयर के मुकाबले। और फिर इस वर्ष 2 मार्च को इस ब्लॉग को यहाँ अपने डोमेन पर स्थानांतरित कर दिया

जो चीज़ एक प्रयोग के तौर पर आरंभ हुई थी वह कब ज़िन्दगी का एक नियमित और करीबी हिस्सा बन गई पता ही नहीं चला, बस इसका नशा दिन प्रतिदिन चढ़ता ही चला गया और हुआ यूँ कि मेरे बाकी ब्लॉग जो अंग्रेज़ी में थे वे धीरे-२ सुप्त होते गए लेकिन यह ब्लॉग सदाबहार बना रहा। हिन्दी में अन्य ब्लॉग भी आरंभ किए जैसे मैजिक आई और खान-पान का ग्रुप ब्लॉग स्पाईसी आईस, लेकिन वे भी समयाभाव के कारण सुप्तावस्था में चले गए; अभी हाल ही में डिजिट ब्लॉग का हिन्दी संस्करण आरंभ किया, प्रयास तो यही रहेगा कि यह भी सुप्त न हो जाए।

जब मैंने इस ब्लॉग को लिखना शुरु किया था तब कुछ गिने चुने ही हिन्दी ब्लॉगर थे और सौ से अधिक ब्लॉग न थे। देबू दा का बनाया चिट्ठाविश्व अपडेट होना बंद हो चुका था, नारद ही एकलौता हिन्दी एग्रीगेटर था। उस समय रोज़ाना इतनी कम पोस्ट छपती थीं कि सभी को पढ़ पाना संभव था, सुबह पोस्ट छप गई तो लगभग सारा दिन नारद के मुख्य पृष्ठ पर रहती थी। और आज का यह आलम है कि जितनी पोस्ट एक दिन में छपती हैं उसका दसवां हिस्सा भी पढ़ना संभव नहीं, दो-तीन घंटे में नारद के मुख्य पृष्ठ से पोस्ट खिसक जाती है। उस समय नारद सशक्त एग्रीगेटर था और हिन्दी ब्लॉग जगत का दिल था, आज उसका हाल ऐसा है जैसे तख्ता पलट के बाद किसी बादशाह को वनवास में भेज दिया जाता है, हालांकि सांसे अभी भी चल रही हैं नारद की और प्रयोग में आज भी आता है।

वैसे तो मैंने अभी तक इस ब्लॉग की पिछली दो वर्षगाँठों पर कुछ नहीं लिखा, लिखने का मन ही नहीं किया, लेकिन इस बार सोचा कि लिख दिया जाए। छापना इस पोस्ट को कल चाहिए था लेकिन समय नहीं मिला और फिर बाद में दिमाग से बात खिसक गई तो ऐसा न हो पाया इसलिए यह विलंबित पोस्ट। इस ब्लॉग की उम्र के पिछले तीन वर्षों पर नज़र डालने पर कुछ रोचक आंकड़े (मेरी नज़र के) सामने आते हैं:

  • कुल 362 पोस्ट – यह पोस्ट 363वीं है।
  • 46 विभिन्न श्रेणियों में लिखा (वैसे तो 92 हैं लेकिन आधा इसलिए किया कि श्रेणियों के नाम हिन्दी और अंग्रेज़ी में हैं)।
  • कुल 371 टैग लगाए गए (पुनः आधी की हुई संख्या) – यह संख्या अधिक भी हो सकती थी यदि टैग सिस्टम वर्डप्रैस में पहले आ गया होता।
  • इस ब्लॉग पर तकरीबन 2500 से थोड़ी अधिक टिप्पणियाँ आ चुकी हैं।
  • कुल मिलाकर इस ब्लॉग पर 15000 से अधिक स्पैम टिप्पणियाँ आईं जिनको अकिस्मेट ने धूल चटाई है।
  • पोस्ट संख्या के अनुसार अक्तूबर 2008 का महीना सबसे बढ़िया रहा है जिसमें किसी भी महीने के मुकाबले सबसे अधिक पोस्ट (34) लिखी गई।
  • ऐसे ही पोस्ट की संख्या अनुसार सबसे ढीला महीना जून 2006 का रहा है जिसमें सिर्फ़ 1 पोस्ट लिखी थी।
  • पता नहीं किस सनक में आकर मैंने ढाई वर्ष पूर्व लिखी थी एक कविता वेलेन्टाईन्स डे के उपलक्ष्य में – यह अभी तक इस ब्लॉग पर सबसे अधिक लोकप्रिय पोस्ट रही है जिसको अब तक 7500 बार पढ़ा गया है और अब भी पढ़ा जाता है।
  • वेलेन्टाईन वाली कविता के बाद सबसे अधिक लोकप्रिय पोस्ट रही है फिल्म जोधा अक़बर पर जिसको 3100 बार पढ़ा जा चुका है और उसके बाद सर्वाधिक लोकप्रिय रही है पोस्ट इट्स ऑल अबाऊट सेक्स बेबी जिसको 1740 बार पढ़ा जा चुका है।
  • औसतन इस ब्लॉग पर प्रतिदिन 1530 पन्ने पढ़े जाते हैं और महीने के अंत में आंकड़ा 45000 पार कर जाता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह आंकड़े पन्नों के हैं न कि हिट के जो कि पन्नों के आंकड़े से कहीं अधिक हो सकते हैं।
  • पहले जहाँ सिर्फ़ 10% पाठक सर्च इंजनों से आते थे वहीं पिछले एक वर्ष से यह संख्या धीरे-२ बढ़ रही है।

पिछले सात-आठ महीनों से (लगभग तभी से जब से यह ब्लॉग यहाँ अपने सर्वर पर स्थानांतरित किया है) कुछ खास स्टैट्स (stats) पर नज़र रख रहा हूँ जिसमें यह भी पकड़ में आ जाता है कि कौन सा पाठक कब कौन से ब्लॉग एग्रीगेटर से आया!! तो इसलिए यह पता है कि ज्ञान जी कहाँ से होते हुए आते हैं, संजय भाई कहाँ से आते हैं और समीर जी किधर से होते हुए आते हैं!! :D यह भी पता है कि कौन आता है और पढ़कर आगे बढ़ जाता है बिना टिप्पणी किए, ही ही ही!! :D घबराने की अवश्यकता नहीं है क्योंकि मैंने न कभी किसी को टिप्पणी करने के लिए ज़ोर दिया है और न ही दूँगा, यह पूर्णतया व्यक्ति कि अपनी इच्छा पर होता है जैसा कि मैं अपनी इच्छा अनुसार ही टिप्पणियाँ करता हूँ। :) इन आंकड़ों के लिए और इसके जुगाड़ के लिए न पूछें, मेरा बताने का कोई इरादा नहीं है, यह सिर्फ़ जाँच के तौर पर रखा गया मामला है जिसके नतीजे आम नहीं किए जाएँगे।

एक अन्य जुगाड़ की बदौलत मैं यह भी देख सकता हूँ कि किस समय कौन व्यक्ति इस ब्लॉग पर कौन सा पन्ना पढ़ रहा है और इच्छा होने पर उससे बात करने का भी जुगाड़ है सीधे यहीं इसी ब्लॉग पर। इसके बारे में शीघ्र ही डिजिट ब्लॉग पर लिखूँगा। :tup:

इस ब्लॉग से मुझे खासा लगाव इसलिए भी है क्योंकि यह मेरा पहला हिन्दी ब्लॉग होने के साथ-२ मेरा इकलौता पर्सनल ब्लॉग है जहाँ कोई खास विषय आधारित बात पर लिखने की जगह कैसी भी बक-बक कभी भी कर देता हूँ। साथ ही यह ब्लॉग सबसे लंबे समय तक अनवरत चलता आ रहा मेरा पहला और फिलहाल इकलौता ब्लॉग है। शुरुआत में 1999 में ब्लॉगस्पॉट पर ब्लॉग बनाया, थोड़ा लिखा फिर ब्लॉग मिटा दिया, फिर कुछ समय रुका और फिर शुरु करा का सिलसिला रहा, 2004 में अपना तकनीकी ब्लॉग आरंभ किया था अपने डोमेन पर इस निश्चय के साथ कि इसको नहीं मिटाया जाएगा, 2006 में वह सुप्तावस्था में चला गया क्योंकि इस पर लिखना बंद हो गया, ऐसा ही हाल अन्य ब्लॉगों का रहा जो इतने समय तक लगातार न चले सिवाय इस ब्लॉग के जो कि पिछले तीन वर्षों से नियमित चला आ रहा है और आगे भी चलता रहे ऐसा प्रयास रहेगा। :tup:

11 Comments

जीतू


ढेर सारी बधाईयां है जी। वैसे बधाई तो अलग से भी दे चुके थे, इधर भी स्वीकार कर लो।

तुम्हारे सारे ब्लॉग सुप्तावस्था से सक्रियता मे वापस लौटें(वैसे हम भी सुप्तावस्था मे ही है) इन्ही शुभकामनाओं के साथ।


संजय बेंगाणी


बधाई. तीन साल तक झिलवाना कोई आसान नहीं :grin:

बाकि आँकड़े मस्त दिये है. अच्छा लेखाजोखा. :tup:


ज्ञानदत्त पाण्डेय


तो इसलिए यह पता है कि ज्ञान जी कहाँ से होते हुए आते हैं, संजय भाई कहाँ से आते हैं और समीर जी किधर से होते हुए आते हैं!!
——
करमचन्द जासूस का ब्लॉग संस्करण!
स्टैटकाउण्टर से इतनी जासूसी नहीं हो पाती।
और पाठ्कों/हिट्स के आंकड़े तो अभूतपूर्व हैं! :tup: आपसे गुर सखने होंगे!


अतुल शर्मा


बधाईयाँ! :smile:


amit


धन्यवाद जीतू भाई। वैसे आपको सुप्तावस्था से कोई फर्क नहीं पड़ता, जब आप लिखते हो तो दनादन लिखते हो! अब भी सुप्तावस्था से बाहर आओ बस इसी बात की प्रतीक्षा है। :)
 
धन्यवाद संजय भाई, वाकई तीन साल तक लगातार झिलवाना कोई मामूली बात नहीं है!! :D
 
ज्ञान जी, यह जुगाड़ जो लगाया हुआ है यह अपने सर्वर पर ही लगाया हुआ है वर्डप्रैस से इंटीग्रेट करके। स्टैटकाऊंटर अपन प्रयोग नहीं करते, कई वर्ष पहले प्रयोग किया था, अच्छा नहीं लगा था तो छोड़ दिया था। बाकी आपके आंकड़े तो इस ब्लॉग के आंकड़ों भी बढ़िया होंगे, आपको कहाँ सीखने की आवश्यकता! :)
 
धन्यवाद अतुल जी। :)


Manish Kumar


Waah kamaal ke figures hain. Mujhe nahin lagta ki kisi anya blog ke 45000 visitors monthly hote honge.

Isi terah tarakki karte rahein.


amit


धन्यवाद मनीष जी। इस ब्लॉग से अधिक लोकप्रिय कई अन्य हिन्दी ब्लॉग हैं और यकीनन उनके आंकड़े इन आंकड़ों से भी कहीं अधिक बेहतर होंगे, ऐसा मेरा मानना है! :)


Prabhat Tandon


बहुत-२ बधाइयाँ :mrgreen: , एक अनुरोध है कि ई मेल द्वारा चिठ्ठा पढने का डिब्बा लगा दें ताकि मुझ जैसे आलसी जीवॊं को ब्लाग ढूँढने की जहमत न उठानी पडॆ :) , वर्ड्प्रेस पर आसान था क्योंकि वहाँ वर्ड्प्रेस खोलते ही ताजे चिठ्ठों की जानकारी मिल जाती थी लेकिन aggregator पर जाकर सर्च करना उबाऊ सा लगता है ।


amit


प्रभात जी, ईमेल सब्सक्रिप्शन के लिए डब्बा लगा रखा है, कृपया पन्ने में सबसे ऊपर दायीं ओर देखें तो “Subscribe by Email” का डब्बा दिखेगा! :)


उन्मुक्त


तीन साल पूरे करने की बधाई।


amit


धन्यवाद उन्मुक्त जी।


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