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April 29th, 2009 at 08:00 pm | 6 Comments

हज़ार समझदार देखे, मैककलम भी देखा!! पता नहीं क्या सोचकर गांगुली की जगह उसको कप्तान बनाया। एक तो कोलकाता नाईट राईडर्स टीम वैसे ही माशाल्लाह है जो जीत के निकट पहुँचती नहीं और जो कभी जीत के निकट पहुँच जाए तो कप्तान मैककलम अपने धर्मात्मा होने का परिचय देते हुए विपक्षी टीम को मैच उपहार में दे देते हैं। कुछ दिन पहले सुपर ओवर में मेन्डिस से गेंदबाज़ी करवा के राजस्थान रॉयल्स को मैच उपहार में दे दिया था और अभी रॉयल चैलेन्जर्स बंगलोर की चैम्पियन टीम को मैच क्रिस गेल की मार्फ़त तश्तरी में सजा के दे दिया!! यकीन नहीं आता कि कोई इतना दिलदार भी हो सकता है!! :roll:

और लगता है कोच जॉन ब्यूकैनन अभी ऑस्ट्रेलियाई टीम से हटाए जाने के सदमे से ही नहीं उबरे हैं। वैसे ऐसी चैम्पियन टीम और धर्मात्मा कप्तान के होते कोच क्या कर लेगा यदि वह कुछ करना ही न चाहता हो?!! सारे ऑस्ट्रेलियाई कोच ऐसे घस्सी होते हैं क्या? पहले चैपल और अब ब्यूकैनन!! :roll: गांगुली बाबू भी सोच रहे होंगे कि न जाने उनकी कुंडली में ऑस्ट्रेलिया दोष कब समाप्त होगा, पहले चैपल राहू बन भिनभिनाया और अब ब्यूकैनन केतु बना है!! :roll:

6 Comments

Gyan Dutt Pandey


हम भी क्रिकेटीय अनपढ़ हैं। गूगल रीडर की फीड से लगा कि लॉर्ड मैकाले से सम्बन्धित होगी पोस्ट! यहां तो जिन लोगों के बारे में है उनके बारे में हमारी जानकारी जीरो बटा सन्नाटा है!


समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ वाले


चलो अच्छा है कोई तो आई पी एल फॉलो कर रहा है. :grin:


Aadarsh RAthore


bhai sahi kaha
Shahrukh sabse bada samajhdar hai


संजय बेंगाणी


अज़हर का धन्यवाद, क्रिकेट का कभी दिवाना था….ऐसा नशा उतरा की अब मुक्त हूँ.


amit


यहां तो जिन लोगों के बारे में है उनके बारे में हमारी जानकारी जीरो बटा सन्नाटा है!

ज्ञान जी, अब आपसे ईर्ष्या है कि आप मोह माया से परे हैं!! :D

 
समीर जी, चीज़ बढ़िया है। पिछली बार के मैच झकास थे, किसी टीम को सपोर्ट न करो और पूरा मज़ा लो टाइप। इस बार वो मज़ा नहीं है लेकिन कुछ मैच बढ़िया हो जाते हैं जिनको देख आनंद आता है। :)
 
संजय भाई, दीवानगी अपने को कॉलेज के समय तक ही थी जब इतना समय होता था कि टीवी पर आने वाला हर मैच देख सकें। उसके बाद से तो समय की कमी ने क्रिकेट का शौक छुड़वा दिया, चलते फिरते कभी नज़र मार ली तो मार ली अन्यथा मैच देखना न के बराबर हो गया। लेकिन ये बीस ओवर के खेल बढ़िया होते हैं, कम समय में ज़्यादा मज़ा देते हैं। और वो मैच फिक्सिंग के मामले के बाद से मैंने तो एक बात दिमाग में बिठा ली कि मैच देखो मज़ा लो और भूल जाओ, सेन्टियाने की ज़रूरत नहीं उसमें नुकसान अपना ही होता है! :)


पंकज बेंगाणी


भाई शारूख जो है ना वो टीम ही बेच मारने वाला है.. :evil: :grin: :cool:


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