एक मित्र हैं, वो अपनी पसंद के मामलों में ज़रा टची (touchy) हैं, इसलिए जब मौका लगता है तो उनसे मौज ली जाती है।
उनसे मौज लेने का सबसे बढ़िया तरीका ये है कि पहले किसी तरह बात को एप्पल (apple) और उसके किसी उत्पाद पर ले आया जाए तदोपरान्त उसकी बखिया उधेड़ी जाए। ट्राईड एण्ड टैस्टिड (tried & tested) नुस्खा है और काम करने की 99% गारंटी होती है!!
अब अपन फुरसतिया जी जितने काबिल नहीं हैं मौज लेने में लेकिन काम चलाने भर मौज ले ही लेते हैं!!
कल रात कंप्यूटर बंद कर सोने जा रहा था तो इन्ही मित्र ने रोक लिया, बोले फोन खराब हो गया है, नया लेना है। तो थोड़ी देर हम अलग-२ मोबाइल फोनों पर चर्चा करते रहे, मैं सुझाव देता रहा और वो पूछते रहे। मामला समापन पर आ रहा था कि वो एकदम से आईफोन के बारे में पूछ बैठे!! बस अपने अंदर का शैतान जाग गया, बोला इन्होंने गुनाह किया है इसलिए सज़ा के तौर पर इनसे मौज ली जानी चाहिए। गुनाह इसलिए कि जानते बूझते हुए भी मुझसे आईफोन की सलाह माँग रहे थे!!

Cowon S9
तो मौज लेने की शुरुआत मैंने आईफोन से ही करी, कहा कि आईफोन लेने से बेहतर है किसी गरीब को पैसे दान कर दो वो दुआ तो देगा!! उसके बाद मित्र को कोवोन एस9 (Cowon S9) का लिंक दिखाया और पूछा कि क्या ख्याल है। धीरे-२ बात आईपॉड (iPod) पर आ गई जो इन मित्र की दुखती रग है, इनको अपने आईपॉड से बहुत प्यार है और उसकी खिलाफ़त बर्दाश्त नहीं कर सकते!!
इधर अपने को मौज लेनी थी तो इसलिए आईपॉड की वाजिब (खामखा नहीं) बुराई शुरु!!
इन मित्र और मेरे बीच एप्पल (apple) और आईपॉड (iPod) को लेकर कई बार बहस हुई है, इसलिए ये अब फीचर नहीं गिनाते आईपॉड (iPod) के क्योंकि मैं उससे अधिक फीचर और क्वालिटी किसी और में गिना सकता हूँ। इसी कारण इन मित्र ने पिछले कुछ समय से एक्सक्लूसिविटी (exclusivity) की ढाल थाम रखी है, उसी को हर बार आगे कर देते हैं कि एप्पल और आईपॉड एक्सक्लूसिव (exclusive) चीज़ें हैं, हर कोई अफोर्ड (afford) नहीं कर सकता और वो हर किसी के लिए नहीं बनाते। तो इस पर मैंने सोचा कि अब ये ढाल काट ही दूँ ताकि अगली बार किसी नई ढाल को वो थामें। मैंने कहा कि आईपॉड एक्सक्लूसिव नहीं है, हर राम श्याम और घनश्याम के पास है, आम चीज़ है, जनता की सवारी जैसे “हमारा बजाज”!! और एप्पल के हुक्मरानों से पूछो कि वो बाज़ार में सबसे अधिक हिस्सा नहीं चाहते क्या!!?? एप्पल और उसके उत्पाद रॉल्स रॉयस (Rolls Royce) नहीं हैं। रॉल्स रॉयस एक्सक्लूसिव है, वे लोग सबके लिए गाड़ियाँ नहीं बनाते, वही हैं जो ऐरे गैरों को बेचने से मना कर सकते हैं, वही हैं जो एक समय में सिर्फ़ शाही खानदानों को गाड़ियाँ बेचते थे, रॉयल्टी ओनली!! एप्पल कभी एक्सक्लूसिव नहीं था, वो तो अपनी बेवकूफ़ियों के कारण बाज़ार में ज़्यादा हिस्सा नहीं कब्ज़ा पाए और आज खिसयानी बिल्ली के माफ़िक अपने को एक्सक्लूसिव कहते हैं!!
वैसे भी एक्सक्लूसिविटी का क्या अचार डालना है? एमपी३ प्लेयर (MP3 Player) गाना सुनने के लिए होता है या शो ऑफ़ (show off) के लिए??!!
वैसे मन में आया कि साथ में ये भी जोड़ दूँ – एक्सक्लूसिव तो कचरे का डिब्बा भी होता है, जमादार के अलावा कोई नहीं ले जाता, तो क्या कीजिएगा एक्सक्लूसिविटी का!!
लेकिन फिर यह सोच यह नहीं कहा कि मौज की मात्रा अधिक हो जाएगी, मित्र हैं और टची भी हैं, बुरा मान गए तो कई दिन तक नाराज़ रहेंगे!!
फिर मेरे से मित्र बोले कि तुमने अभी नया आईपॉड टच नहीं देखा है, बढ़िया चकाचक मामला है। मैंने कहा कि आईपॉड टच देखने के तमन्नाई नहीं हैं, बाबा आदम के ज़माने की तकनीक है, आज भी टीएफ़टी (TFT) टच स्क्रीन (touch screen) प्रयोग कर रहा है एप्पल जबकि इस कोवोन एस9 (Cowon S9) को देखो, इसमें ऐएमओएलईडी (AMOLED) स्क्रीन है जो कि बैट्री बहुत कम खाती है और टीएफ़टी (TFT) के मुकाबले बेहतर तस्वीर दिखाती है जो कि अधिक क्रिस्प (crisp) होती है। साथ ही इसमें एक बार बैट्री चार्ज की तो 55 घंटे बेरोकटोक गाने सुने जा सकते हैं, है किसी एप्पल के लाल काले नीले पीले आईपॉड (iPod) में इतना दम?!!
और गाना ही क्यों, इसमें ग्यारह घंटे वीडियो भी देखा जा सकता है, बैट्री के मामले में आखिर कोवोन सबका बाप है!!
तो आखिरकार मित्र खीज से गए, बोले तुम कोवोन एस9 (Cowon S9) ले लो, तो हम बोले ले लिया है, आ जाएगा कुछ दिन में, और यह एक्सक्लूसिव सा भी है क्योंकि हर ऐरे गैरे नत्थू खैरे के पास नहीं होता।
मित्र तपाक से बोले तो क्या तुम एक्सक्लूसिविटी नहीं देखते तो मैंने कहा कि नहीं जनाब, एक्सक्लूसिविटी का क्या करेंगे, एमपी३ प्लेयर गाना सुनने के लिए होता है, इसलिए अपन तो किसी भी चीज़ को लेते हैं तो उसकी यूटिलिटी देखते हैं कि खर्च किए जाने वाले रोकड़े में कौन सी चीज़ अधिक मौज देती है और टिकाऊ होती है। भई अपन आम आदमी हैं, इसलिए वही सोच है, एक्सक्लूसिविटी तो रईस लोग… यानि फिल्थी रिच (filthy rich) या सनकी लोग चाहते हैं, हम जैसे गरीब मिडल क्लॉस लोग क्या करेंगे एक्सक्लूसिविटी का!!
तो इस तरह यह मौज कार्यक्रम समाप्त हुआ, मैंने सोचा कि चलो बहुत दिन बाद मित्र से मौज लेने का मौका मिला और उस मौके को किसी मौकापरस्त की तरह लपक लिया, ज़ाया नहीं जाने दिया!!



16 Comments
anil
भई वाह !
मतलब किसी आईपोड वाले का कचरा करना हो तो आपसे मिलवा दीया जाए वैसे ये कोवोन एस9 दिख तो चोखा रीया है कितनी जेब ढीली करनी पडे़गी इसके लीये ।
अनूप शुक्ल
जय हो। क्या एक्सक्लूसिव मौज ली है।
“एक्सक्लूसिव तो कचरे का डिब्बा भी होता है, जमादार के अलावा कोई नहीं ले जाता, तो क्या कीजिएगा एक्सक्लूसिविटी का!! ”
शानदार!
pankaj bengani
एक्सक्लूसीव की चाह मुझे भी है. एक्सक्लूसीव ब्लाग ही पढता हूँ और कमेंटियाता हूँ.
Gyan Dutt Pandey
मेरे ख्याल से एप्पल का अचार बन सकता है – पर कच्चे एप्पल का।
बाकी, खाना-खजाना में हमारी महारत नहीं है। फिर भी इतना कह सकते हैं कि सेब का अचार भी बनायें तो जल्दी खतम कर लें।
समीर लाल ’उड़न तश्तरी’ वाले
इत्ती मौज लेने के बाद तो नींद अच्छी आ गई होगी!!
amit
अनिल जी, आईपॉड वाले का क्या कचरा करना, वह बेचारा तो पहले ही …. ही ही ही, समझ गए होंगे!!
कोवोन एस9 के भिन्न मॉडल भारत में 11800 (4 GB) से लेकर 18500 (32 GB) के मिलते हैं, अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखिए।


पंकज, क्या बात है, ज़हेनसीब!!
ज्ञान जी, पता करूँगा बाज़ार में मिलता है कि नहीं एप्पल का अचार!
समीर जी, नींद वाकई बढ़िया आई थी इसमें कोई शक नहीं!
प्रवीण त्रिवेदी …प्राइमरी का मास्टर
संजय बेंगाणी
एकाधिकार को अलग कर दें तो एप्पल के प्रोडक्ट अच्छे लगते है. दाम थोड़े ज्यादा लगते है. मगर अपने तो कीमत की पूरी वसुली में विश्वास रखते है.
Prashant (PD)
अपन आई पॉड यूज करते हैं.. मगर एक्सक्लूसिव होने का भ्रम भी नहीं पालें हैं.. हर चीज का एक नियत समय होता है, कल को आप देखेंगे कि कोवोन एस 9 जैसे प्रोडक्ट को भी कोई पूछने वाला नहीं रहेगा कोई और उससे भी बढ़िया और सस्ता-टिकाऊ प्रोडक्ट लेकर बाजार में आ जायेगा..
वो कहते हैं ना, “मोबाईल, कंप्यूटर और बीबी में एक समानता होती है.. हमें लगता है कि कुछ दिन और रूक जाते तो और अच्छी मिल जाती..”
वैसे मौज लेने के लिये ये बढ़िया ऊपाय है..
रंजन
बहुत शानदार मौज ली… और साथ साथ आइपोड का ज्ञान भी बांट दिया… एक्सक्लूसिव का अच्छा कचरा किया…
अतुल शर्मा
मौज तो आपने ले ली, पर भैया अब उनको मनाएंगे कैसे
सिद्धार्थ जोशी
एक्सक्लूजिव टिप्पणी के बारे में आपके क्या विचार हैं।
सागर नाहर
भई अपन आम आदमी हैं, इसलिए वही सोच है, एक्सक्लूसिविटी तो रईस लोग… यानि फिल्थी रिच (filthy rich) या सनकी लोग चाहते हैं, हम जैसे गरीब मिडल क्लॉस लोग क्या करेंगे एक्सक्लूसिविटी का!!
भई ये तो मामला वैसा ही हो गया जैसे किसी बच्ची ने गरीब पर निबंध लिखा हो कि, हम बहुत गरीब हैं , हमारा ड्राईवर, हमारा माली हमारा रसोईया सब बहुत गरीब हैं।
amit
सिद्धार्थ जी, एक्सक्लूसिव टिप्पणी कहीं दिखेगी तभी उस पर विचार प्रकट करेंगे!
सागर जी, मैंने इसलिए “मिडल क्लॉस” यानि मध्य वर्ग लिखा न कि “निम्न वर्ग”!!
प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI
पुनश्च अध्ययन!!
जय हो!!!
ePandit
जय हो महाराज। हमसे भी मौज तो नहीं लेते रहते ज्ञान चर्चा के वक्त?
वैसे अपने राम से मौज लेते भी होंगे तो अच्छा-खासी मेहनत करनी पड़ती होगी, है ना। हे हे