RSS

संपूर्णता…..


August 4th, 2009 at 07:07 am | 7 Comments

कल मैंने नैनोफिक्शन के विषय में लिखा था कि इस विधा में कथा को 55 शब्दों में ही समेटना होता है और उसके कुछ अन्य नियम भी बताए थे। यह नैनोफिक्शन अर्थात्‌ पचपन शब्दिया कथा की विधा में मेरा पहला प्रयास है। एन्सी ने सही कहा था, वाकई कठिन कार्य है पचपन शब्दों में कथा को समेटना।

 

“स्त्री माँ बनने पर ही पूर्ण होती है”, माँ ने युवा होने पर समझाया था। वह माँ नहीं बन सकती थी, जान का खतरा था। पाँच वर्षों से सास उसे ताने दे रही थी।
…..

बेहोश होने से पहले नर्स ने बताया लड़का हुआ है। अब वह संपूर्ण स्त्री थी; चैन से सो सकती थी।

 
 
फोटो साभार paterjt, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत

7 Comments

अनूप शुक्ल


जय हो। हम भी लिखेंगे ये कहानी। नैनो वाली।


संजय बेंगाणी


क्या खूब…पचपनिया कथा. हम भी प्रयास करेंगे…


Aneesha


I have some tough competition now :twisted:


Gyan Dutt Pandey


सास का ताना तो एक निमित्त है, अन्यथा स्त्री शायद स्वयं भी कण्डीशंड है और लड़का जनने में नारीत्व की सार्थकता मानती है।
लिहाजा ९ शब्द (“पाँच वर्षों से सास उसे ताने दे रही थी”)और काटे जा सकते हैं और तब भी कहानी पूर्ण रहेगी!


पंकज बेंगाणी


प्रथम प्रयास!

धांसू प्रयास. उत्तम. :smile:


Reema


nice!!
I had written a post on this topic sometime ago
http://opinionsandexpressions.wordpress.com/2008/12/12/2008/07/18/motherhood-necessity-or-choice/


amit


अनूप जी, अवश्य लिखिए, प्रतीक्षा रहेगी आपकी पचपनिया कथाओं की! :)
 
संजय भाई, अवश्य प्रयास कीजिए, एक तरह से दिमागी कसरत है, व्यक्ति के भाषा ज्ञान की जाँच हो जाती है कि कैसे वह कम शब्दों में अधिक बयान कर पाता है! :)
 
Ansy, you’re jesting me, right? ;)
 
ज्ञान जी, बात तो आपकी सही है! :)
 
धन्यवाद पंकज, रीमा:)


Leave A Message

name
email
blog
:mrgreen: :twisted: :arrow: :evil: :idea: :oops: :roll: :cry: :lol: :cool: :shock: :sad: :smile: :???: :grin: :razz: :eek: :mad: :neutral: :wink: :!: :?: :tup: :tdown: