जब हम दुनिया में आते हैं तो यह सोच रोते हैं कि हम मूर्खों की इस दुनिया में आ गए।
— विलियम शेक्सपीयर
अंधकार से हमें क्या काम, सूर्यमुखी की ही भांति देखें हम भी प्रकाश की ओर कि वही है उन्नति का मार्ग। बस यही है प्रण इस नए वर्ष का।
जब हम दुनिया में आते हैं तो यह सोच रोते हैं कि हम मूर्खों की इस दुनिया में आ गए।
— विलियम शेक्सपीयर
अंधकार से हमें क्या काम, सूर्यमुखी की ही भांति देखें हम भी प्रकाश की ओर कि वही है उन्नति का मार्ग। बस यही है प्रण इस नए वर्ष का।
10 Comments
संजय बेंगाणी
सुरज की देखने की बात में दम है.
बधाई.
sushila puri
janmdin ki hardik badhai………….
pankaj bengani
amit
धन्यवाद संजय भाई, सुशीला जी, पंकज
aditya
janm din mubarak …………………
ज्ञानदत्त पाण्डेय
ओके, हम भी देखने का सतत प्रयास करेंगे जीवन के उजाले पक्ष का नजरिया!
जन्मदिन मुबारक!
amit
धन्यवाद आदित्य बाबू, ज्ञान जी।
Reema
The text is similar to what I had written on my sunflower pic
nice!
SHUAIB
हैप्पी बड्डे
amit
धन्यवाद शुएब मियां