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2009 की आखिरी दो ब्लॉगर भेंटवार्ताएँ …..


January 4th, 2010 at 07:17 am | 14 Comments
Posted In: Blogger Meetups

पिछले वर्ष 19 दिसंबर वाले सप्ताहांत पर अहमदाबाद से बेंगाणी बंधु दिल्ली आए हुए थे। अहमदाबाद से निकलने से पहले पंकज ने बता दिया था कि दोनों भाई दिल्ली आ रहे हैं किसी पुरस्कार समारोह के लिए तो मैंने तुरंत कह दिया था कि भई फोन नंबर तो तुम्हारे पास है ही तो जब भी समय हो बता देना अपन मिलने आ जाएँगे। अब यह नहीं पता था कि रवि जी भी होंगे साथ में, तो यह बढ़िया संयोग रहा। इधर मज़ेदार बात यह रही कि जीतू भाई भी दो-तीन दिन पहले ही भारत आए थे और बता दिए थे कि भई आ गए हैं मिलने का बनाएँगे मामला। तो इधर मैंने उनको भी खबर कर दी कि मामला बनता दिख रहा है अच्छा खासा। तो 19 दिसंबर को हौज़ खास में उसी ऑडीटोरियम में मिलने का प्रोग्राम बना जिसमें पुरस्कार समारोह आयोजित था। उससे पिछली रात को श्रीश से बात हो रही थी तो यह बात निकल गई कि कल मिलने का प्रोग्राम है इतनी बड़ी हस्तियों से, तो वह भड़क गया कि उसे काहे नहीं न्यौता दिया गया। तो मैंने कहा कि अगले दिन स्कूल की छुट्टी मार, सुबह बस में चढ़ और दोपहर तक पहुँच जाएगा यहाँ दिल्ली, तो वह भी राज़ी हो गया।

तो यूँ हुआ मामला सैट इस ब्लॉगर मीट का। निम्न कुछ फोटो उसी मीट से हैं, फोटो कुछ और भी ली थीं लेकिन वह अच्छी न आईं।


बाएँ से दाएँ:  रवि रतलामी, संजय बेंगाणी



बाएँ से दाएँ:  पंकज बेंगाणी, श्रीश



बाएँ से दाएँ:  पंकज बेंगाणी, डॉ. विपुल जैन (चिट्ठाजगत वाले), श्रीश, रवि रतलामी, संजय बेंगाणी, जीतेन्द्र चौधरी (मेरा पन्ना वाले)



यह पुरस्कार समारोह के बाद का फोटो है, इसमें रवि जी और संजय भाई अपने-२ पुरस्कार की ट्रॉफ़ी पकड़े हुए हैं


तो यह था मामला इन महान हस्तियों से सुसज्जित ब्लॉगर मीट का। अब इससे निपटे थे कि 29 सितंबर की रात मिश्रा जी का फुनवा आ गया कि अगले दिन दिल्ली पहुँच रहे हैं, रात को अमरीका के लिए उड़ेंगे तो उससे पहले मिलने का प्रोग्राम बन जाए तो बढ़िया रहेगा। तो मामला लंच का तय हुआ, जीतू भाई को भी आना था। लेकिन अगले दिन जीतू भाई धोखा देकर पतली गली से निकल लिए, बोले बोत काम हैं खामखा तुम पर वेस्ट करने को टैम नहीं है!! :D उधर मिश्रा जी की इलाहाबाद से गड्डी लेट हो गई। ज्ञान जी नोट कीजिए, माल गाड़ियाँ सरपट भगाने का खमियाज़ा पैसेन्जर ट्रेन से न भरवाईये। :D लंच का समय निकल गया और मिश्रा जी निकल गए अपने एक मित्र के साथ, लंच रीस्केड्यूल (re-schedule) होकर डिनर का प्रोग्राम बना। तो शाम को अपन पहुँचे क्नॉट प्लेस और निर्धारित कैफ़े कॉफ़ी डे में पहुँच विराज गए। समय व्यतीत करने के लिए अपन अपने एस९ (S9) पर गाने सुन रहे थे और एक उपन्यास पढ़ रहे थे। मिश्रा जी अपने को आसानी से दिख जाएँ इसलिए मैं नीचे बैठा था (न कि ऊपरी मंज़िल पर) और शीशे के पार पूरी सड़क नज़र आ रही थी, उधर मिश्रा जी शीशे के पार एकदम सामने खड़े होकर मुझे फोन लगाते हैं कि भई कहाँ हो!! :D तो यूँ मिले मिश्रा जी से और उनके साथ आए उनके मित्र माधवेन्द्र शुक्ला से जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय से कोई घणी हाई फाई चीज़ पढ़ रहे हैं अपने को तो समझ भी न आया कि क्या होता है।


मिश्रा जी के मित्र, श्री माधवेन्द्र शुक्ला



मिश्रा जी


कॉफ़ी के बाद हम लोग रात्रि भोज के लिए निकले, मिश्रा जी को चीनी, जापानी, थाई, मेक्सिकन, अमेरिकी, गुजराती, उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय आदि सभी विकल्प गिनवा दिए और उन्होंने दक्षिण भारतीय खाने को तरजीह दी, सो हम लोगों ने सरवण भवन में मामला निपटाया।

संजय भाई नोट कर लें, उनका कैमिकल नमस्ते हमने मिश्रा जी को दे दिया था। :D

14 Comments

संगीता पुरी


देखकर अच्‍छा लगा .. आप सबों को बहुत बधाई !!


suman


nice


संजय बेंगाणी


फोटोमय रपट रोचक रही. विशेष फोटो “कचरे” वाली भी दिखा देते. :)
मजेदार माहौल बना था. किसी घरेलू समारोह में रिश्तेदार मिलते अहि वैसा. मजा आया.

:tup:


pankaj bengani


दिल्ली में यादगार मुलाकात रही.

मैं अमूमन चुप ही था, महानुभावों को सुन रहा था. :grin:


Jitu


भई, दिल्ली वाली मुलाकात तो यादगार रही। कई लोगों से मिलने का मौका मिला। पार्क मे बैठकर गपशप भी की गयी, काफी अच्छा लगा।

रही बात अगली मुलाकात की, तो भैया, अगले दिन सुबह सुबह मेरी वापसी की फ्लाइट थी, अभी अटैची भी अस्त व्यस्त थी (बिना बीबी के आने का यही खामियाजा है), अगर मुलाकात करते तो आधा सामान भारत मे ही रह जाता। इसलिए मुलाकात के लिए मना किए थे। खैर अगली बार मिसिरा जी से मुलाकात जरुर होगी। फोटो शानदार है।


प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI


वाह जी वाह!
बढ़िया रपट रही ….रपटते-रपटते बचे !! :grin:
फोटो बढ़िया है जी ! :idea:
जय हो!!!!


ePandit


मुलाकात यादगार रही जी, एक साथ इतनी महान हम्तियों से मिलने का मौका पाकर मन प्रफुल्लित हो गया। जिन लोगों को हमेशा पढ़ने से ही मित्र बन गये थे उनसे सामने मिलना यादगार था। फोटो शेयर करने के लिये धन्यवाद।

बाकी हाँ जैसा संजय भाई ने कहा कचरे वाली स्पैशल फोटू ना लगाई! :smile:


अनूप शुक्ल


शानदार च जानदार फोटू खैंचते हो जी। हम साल के आखिरी दिन थे उधरिच ,बात भी हुई लेकिन मुलाकात न हो पायी।होती तो हमारी भी इस्मार्ट फोटो खिंच जाती।जीतू से भी बात ही हो पाई।नये साल की पहली पोस्ट के लिये बधाई।


amit


संजय भाई, श्रीश – वो वाली फोटू इसलिए नहीं लगाई कि वहाँ ली गई तीनों फोटों में से एक भी लगाने लायक नहीं आई। अधिकतर फोटो कम रोशनी के कारण ब्लर आई, लाईट कंपनसेशन के लिए सैटिंग बदलना मैं भूल गया था (दिमाग कदाचित्‌ कहीं और था) इसलिए ये मामला हो गया। :( जितनी फोटो ये लगाई हैं इनमें कुछ में भी प्रोसेसिंग के दौरान जुगाड़ कर थोड़ा देखने लायक बनाया है। :)
 
जीतू भाई, कोई नहीं मैं समझ सकता हूँ, वो तो मैं यहाँ यूँ ही मौज ले रहा था। :)
 
अनूप जी, आपसे वाकई इस बार भी बात ही हो पाई मुलाकात नहीं। खैर, देयर इज़ ऑलवेज़ ए नेक्स्ट टाइम। :)


anitakumar


टेकनोलोजी के महारथी सब एक साथ मिले तो पावरपैक्ड मीट रही होगी। रवि जी और संजय जी को ट्राफ़ी की बधाई , रपट मजेदार रही


रवि


फोटो तो एकदम परफ़ेक्शनिस्ट अंदाज से खींचे व प्रोसेस किए हैं आपने.


amit


धन्यवाद संगीता जी, प्रवीण जी, अनीता जी, रवि जी। :)


Nisha


Oh, kuch ke baare mein bas padha he tha lekin yahan in sabse mil kar achha laga ! :smile:


akki


बहोत अच्छी फोटोग्राफी है आप सभी को देख कर अच्छा लगा :tup:


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