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Archive for the ‘इधर उधर की’ Category


पसंदीदा लेखों की सूचि


February 17th, 2010 | 8 Comments

एक अरसा हुआ, रवि जी ने कहा था कि मैं अपने पसंदीदा लेखों की सूचि सार्वजनिक करूँ ताकि वे भी देख सकें कि मैं क्या पढ़ता हूँ। उस समय मैं ब्लॉगलाइन्स (bloglines) का प्रयोग करता था और अभी तक करता आ रहा था, उसमें लेख पसंद कर उनकी फीड आदि सार्वजनिक करने का कोई जुगाड़ नहीं है इसलिए रवि जी के कहे अनुसार करना संभव न था। ब्लॉगलाइन्स की काफ़ी समय से आदत पड़ी हुई थी, वही प्रयोग करता आ रहा था इसलिए गूगल रीडर पर पलायन करने को मन न मानता था। कुछेक सुविधाएँ दोनों में ही एक्सक्लूसिव सी हैं; जिस प्रकार गूगल रीडर की भांति ब्लॉगलाइन्स में पसंदीदा लेखों की फीड को साझा नहीं किया जा सकता उसी प्रकार गूगल रीडर में ब्लॉगलाइन्स की भांति किसी लेख को सेव करने का जुगाड़ नहीं है। वैसे मैं आशा कर रहा हूँ कि गूगल रीडर में किसी भी लेख को स्टॉर करने का जो विकल्प है वह अमुक लेख को रीडर में ही रखता होगा चाहे लेख कितना ही पुराना क्यों न हो, जैसे कि ब्लॉगलाइन्स में किसी भी लेख को पिन करने का विकल्प होता है।

बहरहाल, पिछले लगभग दो वर्ष से ब्लॉगलाइन्स के बीटा संस्करण का प्रयोग करता आ रहा हूँ, यह पिछले दो वर्ष से बीटा में है और पता नहीं इस पर आज भी काम हो रहा है या फिर काम रुका हुआ है क्योंकि यह गाहे-बगाहे डाऊन रहता है, सर्वर में एरर आ जाता है या लोड नहीं होता, सर्वर से संबन्ध नहीं हो पाता, यानि कुल मिलाकर बीटा के पूरे अर्थ को सार्थक करता है। इसी से आखिरकार तंग आकर गूगल रीडर पर पलायन करने का मन बनाया और अब पिछले दो दिन से वहीं ब्लॉग आदि पढ़े जा रहे हैं। अब जब गूगल रीडर पर आना हो गया है तो ज़ाहिर है कि पसंदीदा लेखों की सूचि भी साझा की जा सकती है। ;) बस इसी नेक मनसूबे के तहत जीतू भाई के ब्लॉग से आईडिया उठा के अपने यहाँ एक पन्ना इसी के लिए बना लिया है जहाँ पसंदीदा लेखों की सूचि विराजमान रहे। :cool:

यह पन्ना यहाँ उपलब्ध है, मौजूदा सूचि अपने आप अपडेट होती रहेगी जैसे-२ मैं अन्य पसंदीदा लेखों के लिंक साझा करता जाऊँगा, पढ़ने के लिए आप कभी भी यहाँ पधार सकते हैं। :tup:


दिवाली की आतिशबाज़ी…..


October 16th, 2009 | 7 Comments
Fireworks

कल दीपावली है, दीपों का त्यौहार है। अब इस पर अधिक क्या कहना, बहुत लोग पहले ही बहुत कुछ कह चुके हैं, किताबों में पहले ही छप चुका है। पर इस दिन पर दो तरह के लोग मिल जाते हैं – एक वो जो आतिशबाज़ी के सख्त खिलाफ़ होते हैं और दूसरे वो जो हद से अधिक आतिशबाज़ी के पक्ष में होते हैं। और जब दोनों तरह के लोग अपना प्रोपोगेन्डा (propaganda) मेरे को पढ़ाते हैं तो मैं दोनों ही तरह के लोगों को कहता हूँ कि भाड़ में जाओ।

काहे? क्योंकि दोनों ही एक्सट्रीम एंड (extreme end) वाले केस होते हैं, या तो बिलकुल ही आतिशबाज़ी न करो और यदि करो तो बस करते ही रहो। यह क्या बात हुई? अमां अति हर चीज़ की बुरी होती है, जो भी करो कंट्रोल में रहकर करो जी!!

ऐसे मामले पर कुछ स्टाईलिश स्नॉब टाइप लोग भी मिल जाते हैं अपनी स्नॉबरी करते हुए। एक नॉन रेजीडेन्ट इंडियन साहब को सुना, बोले भारतीय आतिशबाज़ी से दिवाली का सत्यानाश कर देते हैं और इसी कारण वे दिवाली पर भारत नहीं आते। तो अमां मत आओ न, किसी पर एहसान कर रहे हो क्या? हू केयर्स? आपके न आने पर दिवाली नहीं मनाई जाती क्या? आप रहो जहाँ हो, वहाँ जब किसी उत्सव में आतिशबाज़ी हो तो जाना देखने और फोटो खींचने, वही आपको अच्छी लगेगी।

Crackers

लेकिन हमारे यहाँ भी तो लोग कम नहीं, पिले रहते हैं पटाखे चलाते हुए। मेरे मोहल्ले में ही बहुतेरे हैं ऐसे, रात एक-दो बजे तक भी लगे रहेंगे। उनका वश नहीं चलता या यूँ कह लो कि इतना ज्ञान नहीं अन्यथा वे तो कैफ़ीन (caffeine) की गोलियाँ खाकर रात भर जागें और बिना थके सारी रात पटाखे चलाते रहें!!

ठीक है माना बहुत कंसर्न (concern) हैं पर्यावरण इत्यादि को लेकर भी लेकिन किसी भी समस्या का हल एक्सट्रीम एंड पर जाकर नहीं हो सकता। लोग यदि अपने को काबू में रखें, थोड़े ही पटाखे चलाएँ, थोड़ी ही आतिशबाज़ी करें तो इससे पर्यावरण को पहुँचने वाली क्षति भी कम होगी और लोगों की दीपावली भी मन जाएगी।

अब अपन दीपावली पर न ही पटाखे चलाते हैं न ही आतिशबाज़ी छोड़ते हैं, पिछले कई वर्षों से नहीं की है (स्कूल के समय में ही छोड़ दिया था मोह) और आगे भी फिलहाल करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन यह मेरा अपना चुनाव है न कि किसी की जबरन पिलाई घुट्टी। दीपावली कौन कैसे मनाता है यह उस पर निर्भर है, हम तो सिर्फ़ अनुरोध ही कर सकते हैं कि मॉडरेशन रखी जाए, अति न की जाए।

दीपावली के दीप


आप सभी को मंगलमयी शुभ दीपावली। :)

 
 
आतिशबाज़ी की फोटो साभार eyesplash Mikul, पटाखे की फोटो साभार Dilip Muralidaran तथा दीपों की फोटो साभार m4r00n3d – तीनो फोटो क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत


वेन्गर्स की चॉकलेट…..


January 23rd, 2009 | 10 Comments

फोटो साभार – Vintage Home Arts

दिल्ली के क्नॉट प्लेस में भीतर वाले चक्र में एक प्रसिद्ध बेकरी है – वेन्गर्स (Wenger’s)। यह काफ़ी पुरानी बेकरी है, तकरीबन 75 वर्ष पुरानी। इसकी पेस्ट्री आदि तो बढ़िया होती ही हैं, मुझे इसकी बनाई चॉकलेट कुछ खासी पसंद हैं। होता यूँ भी है कि ये लोग चॉकलेट का जैसा नाम रखते हैं उसमें वैसा माल भी डालते हैं, यानि कि बादाम होगा चॉकलेट का नाम तो उसके अंदर कुरकुरे बादाम डले हुए होंगे, काजू नाम होगा तो उसमें काजू डले होंगे!!

अभी पिछले सप्ताहांत मैं उस ओर गया तो वेन्गर्स से कुछ चॉकलेट भी लेने की सोची। तो अपनी पसंदीदा रम रेसिन (Rum Raisin) चॉकलेट तो ले ली, सोचा एक अलग भी ट्राई की जाए। इनकी मिंट चॉकलेट कभी ट्राई नहीं की थी तो थोड़ी सी वह भी ले ली, और बस यहीं पंगा हो गया!! मिंट चॉकलेट का मैं सोच रहा था कि इन्होंने चॉकलेट के अंदर मिंट का स्वाद डाल रखा होगा, लेकिन नहीं, अपनी चॉकलेट को सीरियसली लेने वाले इन लोगों की क्या कहें, इन्होंने चीनी और मिंट की गोली टाइप को चॉकलेट में लपेट रखा है, ऐसा लगता है कि मानो स्ट्रांग मिंट की गोली चॉकलेट में लिपटी हुई है!! तौबा!! :!:

अभी तो भुगत लिया लेकिन आगे से निश्चय कर लिया कि मिंट चॉकलेट से दूर ही रहना है, अपने लिए तो रम रेसिन ही बढ़िया है… .. यम यम!! :D


ट्विट्टर और हिटलर…..


November 22nd, 2008 | 7 Comments

ट्विट्टर कदाचित्‌ सबसे लोकप्रिय माइक्रोब्लॉगिंग सेवा है। साथ ही शुरुआत में घटिया तरीके से बनाई जाने के कारण इसका कोड शापित है और इस वर्ष के शुरुआत से दो-तीन महीने पहले तक यह रोज़ाना बैठ जाती थी। हालात ऐसे हो गए थे कि ट्विट्टर की मैनेजमेन्ट ने अपने चीफ़ टेक्नॉलोजी ऑफिसर को दरवाज़ा दिखा दिया था जिसकी घटिया प्लानिंग के कारण यह सेवा रोगग्रस्त हो गई थी!! तो ट्विट्टर के इन रोज़ाना के डाऊनटाइम से बहुत लोग खफ़ा थे, आए दिन टीका टिप्पणी करती ब्लॉग पोस्ट कई लोकप्रिय तकनीकी ब्लॉगों पर आती रहती थी।

इसी के चलते किसी ने एक बढ़िया सा वीडियो इस पर बना दिया कि कैसे हिटलर को ट्विट्टर पर पोस्ट ठेलनी थी और ट्विट्टर उस समय बैठा हुआ था और इससे हिटलर काफ़ी खफ़ा हो जाता है!! कैसे यह पूरा मामला देखिए निम्न वीडियो पर। इस वीडियो की भाषा जर्मन है जिस पर न जाकर स्क्रीन पर आने वाले सबटाईटल पढ़ें जो कि ट्विट्टर के संदर्भ में हैं!! :D सबटाईटल अंग्रेज़ी में हैं!!

 
 
इतना ही कहाँ, इधर यह वीडियो देखने के बाद हंसी रूकी नहीं थी कि एक और वीडियो मिल गया जिसमें हिटलर अपने ट्विट्टर पर पाठकों को रोक पाने में असमर्थ हैं, पाठक आते हैं लेकिन आते ही भाग खड़े होते हैं और दोबारा कोई नहीं आता!! :D इस वीडियो को देख तो हंसी के मारे बुरा हाल हो गया। यह वीडियो भी ऊपर वाले वीडियो जैसा ही है बस सबटाईटल अलग हैं क्योंकि अलग संदर्भ है। इसके सबटाईटल भी अंग्रेज़ी में हैं!!

 
 
ये दोनों वीडियो एक ही फिल्म से कुछ भाग काट कर बनाए गए हैं। यह फिल्म दर उन्तर्गॉन्ग (Untergang, Der) नाम की जर्मन फिल्म है जो कि चार वर्ष पूर्व 2004 में रिलीज़ हुई थी। फिल्म के शीर्षक का अंग्रेज़ी अनुवाद “द डाऊनफॉल” (The Downfall) है। यह फिल्म द्वितीय विश्वयुद्ध में बर्लिन के बंकर में गुज़रे हिटलर के अंतिम दिनों का वर्णन करती है हिटलर की आखिरी सेक्रेटरी त्राल ज़ूँ (Traudl Junge) की ज़ुबानी।

बाकी सब एक ओर, इन वीडियो को देख वाकई बहुत हंसी आई। आशा है कि इन दोनो वीडियो को देख आपको भी हंसी आई होगी!! :D :tup:


फोकट का पैसा उड़ाने में माहिर


October 17th, 2008 | 5 Comments

यह एक इंसानी प्रवृत्ति है, फोकट का माल सभी को अच्छा लगता है। तो कोई आश्चर्य नहीं होता कि भारत में बहुत से सरकारी कर्मचारी, नेता आदि लोग उपलब्ध संसाधनों का बेदर्दी से दुरुपयोग करते हैं, क्योंकि वह उनको फोकट में उपलब्ध होते हैं। टैक्सपेयर्स का पैसा उन सब के लिए बिलकुल मुफ़्त का माल है और वे “माल-ए-मुफ़्त दिल-ए-बेरहम” के सिद्धांत को पूरी श्रद्धा से मानते हैं। लेकिन ऐसा सिर्फ़ भारत के भ्रष्ट सरकारी तंत्र में ही होता है यह सोचने की भूल न करें। मुफ़्त का माल उड़ाने के लिए तो हर कोई हर समय तैयार रहता है।

आजकल अमेरिका में अर्थव्यवस्था की वाट लगी हुई है, दाएँ बाएँ बैंक और कंपनियाँ डूब रही हैं, अपने को दिवालिया घोषित कर रही हैं, या दिवालिया होने से बचने के लिए थोक के भाव मुलाज़िमों को दरवाज़ा दिखा रही हैं। इसी के चलते और अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए अमेरिकी सरकार ने 700 अरब डॉलर के “अमेरिका बचाओ” गिफ़्ट प्लान को जारी किया जिसमें ज़रूरतमंदों में डॉलर बाँट उनको कंगाल होने से बचाया जा सके क्योंकि इतने गुरुद्वारे नहीं हैं वहाँ कि सब का काम वहाँ लंगर में निपट जाए। तो अमेरिकी टैक्सपेयर्स (taxpayers) के पैसे के इस दान को पाने वाली दुखियारी कंपनियों में से एक कंपनी है एआईजी (AIG) जो कि एक काफ़ी बड़ी बीमा कंपनी है। जानने वाले शायद इसको पहचान जाएँ, कुछ समय पहले तक नसीरुद्दीन शाह टीवी विज्ञापन में टाटा के साथ गठबंधन में बनी इसकी भारतीय बीमा कंपनी टाटा एआईजी (Tata AIG) की बीमा पॉलिसी बेचते नज़र आते थे।

खैर, तो इस कंपनी ने भी अपने हाथ फैला दिए और फेडरल रिजर्व से मिल रहे दान खाते में इस कंपनी को 85 अरब डॉलर कर्ज़े के रूप में मिल गए। तो जानते हैं कर्ज़ा मिलने की खुशी इस कंपनी के बड़े ओहदेदारों (जिनका इस कंपनी की वाट लगाने में बहुत बड़ा हाथ था) ने कैसे मनाई? डॉलर मिलने के दो ही सप्ताह बाद इस कंपनी के बड़े अफ़सर कैलीफोर्निया में एक यात्रा पर चले गए जिस पर उन्होंने लगभग साढ़े चार लाख डॉलर उड़ा दिए।

अब ज़ाहिर सी बात है कि लोग बाग नाराज़गी तो दिखाएँगे ही, भारतीय जनता थोड़े ही है जिसको परवाह ही नहीं होती कि उनकी खून-पसीने की कमाई कैसे इस्तेमाल होती है। लेकिन जनाब अमेरिकी जनता के हल्ले से भी इस बीमा कंपनी के ओहदेदारों को कोई फर्क न पड़ा, उन्होंने पुनः 38 अरब डॉलर के लिए फेडरल रिजर्व बैंक के आगे हाथ फैला दिए और माल मिलने के बाद ये साहबान इंग्लैन्ड में तीतर का शिकार करने के लिए चले गए जहाँ इन्होंने 86 हज़ार डॉलर उड़ाए और यही नहीं, अपने साथ में ये लोग चार मेहमान भी ले गए!! :evil:

जब समाचार चैनल सीएनएन (CNN) ने उनसे इस पर जवाब माँगा तो एआईजी की ओर से उत्तर आया कि उनकी प्राथमिकता कंपनी का व्यापार बढ़ाने और पॉलिसी लिए बैठे ग्राहकों की सुरक्षा है ताकि वे लोग फेडरल रिजर्व बैंक का कर्ज़ा उतार सकें और एक लाभ वाली कंपनी के रूप में उभर सकें।

वाह-२ क्या कहने, यह ठीक वैसा ही टिकाऊ जवाब है जैसे हमारे यहाँ नेता लोग देते हैं। जय हो! कोई आश्चर्य नहीं कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वाट लगी हुई है!! :roll:

 
द्वारा


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