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Archive for the ‘इधर उधर की’ Category


सरकारी समझदारी…..


August 7th, 2008 | 8 Comments

कल अख़बार पढ़ रहा था(बहुत ही दुर्लभ दिन था) तो हिन्दुस्तान टाइम्स के मुख्य पृष्ठ पर सबसे नीचे छपी खबर पर नज़र गई जिसे खेल उप-संपादक इंद्रानिल दास ने लिखा था। उसमें बताया कि परसों जब वे ओलंपिक्स को कवर करने पेइचिन्ग (Beijing) जा रहे थे तो एक तो दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर बोर्डिंग देर से हुई। दूसरे, उनके कैबिन बैगेज (cabin baggage) को विमान में चढ़ने से पहले पुनः स्कैन किया गया। खबर उन तक पहुँची कि पश्चिमी चीन में आतंकवादी हमला हुआ है, इसलिए वह स्कैन तो समझ आया। लेकिन एयर चाईना (Air China) के उस विमान में बाद में घोषणा हुई कि उड़ान के दौरान सुरक्षा कारणों की वजह से यात्रियों को मदिरा नहीं सर्व की जाएगी। और सुरक्षा कारणों के ही चलते उनको सुबह का नाश्ता भी नहीं दिया गया क्योंकि वह उन्होंने दिल्ली हवाई अड्डे से लिया ही नहीं!!

अमां अपना तो मानना था कि अपने यहाँ के सरकारी अधिकारी, एयर इंडिया (Air India) वाले आदि ही समझदार होते हैं, पर अब पता चला कि समझदारी में तो चीन वाले काफ़ी आगे हैं!! सुरक्षा को मद्देनज़र रखते हुए मदिरा सर्व नहीं करी!! यहाँ तक कि नाश्ता भी नहीं दिया यात्रियों को!! वाह!! :roll: ये लोग क्या समझते हैं कि इनकी जनता पिछले साठ सालों से मूर्ख अधिकारियों आदि की परोसी जाती बकवास को हज़म करती आई है तो दुनिया के बाकी लोग भी मूढ़ हैं?? :roll:

मैं दुआ करूँगा कि बाकी एयरलाइन्स वाले जैसे मूर्ख अभी हैं वैसे ही रहें, इनकी तरह समझदार न हो जाएँ!!


द नॉट सो कूल


July 31st, 2008 | 5 Comments

एक नया सर्च इंजन मैदान में आया है, बोला जाता है कूल (Cool) और लिखा जाता है Cuil जो कि आईरिश (Irish) से लिया गया शब्द है। यह नया सर्च इंजन दुनिया में सबसे बड़ा सर्च इंडेक्स होने का दावा करता है और यह भी दावा करता है कि इसका डाटाबेस गूगल से लगभग तीन गुणा बड़ा है। इस नए शगूफ़े के पीछे हैं एन्ना पैटरसन (Anna Patterson) जो कि प्रसिद्ध अमेरिकी विश्वविद्यालय स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) में रिसर्च साइंटिस्ट हुआ करती थीं जब इन्होंने एक ऐसी तकनीक बनाई जिससे कम समय में अधिक वेब पेज क्रॉल (Crawl) किए जा सकते थे और उनकी रैंकिंग की जा सकती थी, और जिस तकनीक को बाद में गूगल ने अपने सर्च इंजन के लिए इनसे खरीद लिया और इनको अपने यहाँ मुलाज़मत दी जहाँ इन्होंने दो वर्ष आर्कीटेक्चर (architecture) और रैंकिंग पर काम किया।

अब ये मोहतरमा अपने पति और कुछ पुराने गूगल मुलाज़िमों के साथ मिलकर एक नई तकनीक की बदौलत यह नया सर्च इंजन लाई हैं जो कि कम कंप्यूटरों प्रयोग करने पर भी ऐसा कमाल दिखाएगा कि गूगल से अधिक दूर तक पहुँच सकेगा, कम से कम कंपनी का तो यही दावा है। और इस बार यह तकनीक बिकाऊ नहीं है(क्या यह हम हर दूसरे से नहीं सुनते?)!!

बहरहाल अपने को इस बात से कोई लेना देना नहीं है कि इनका माल बिकाऊ है कि नहीं है, पर इनका माल बहुत ही घटिया है और किसी को इन पर पहचान हरने और गुमराह करने के लिए मुकदमा ठोकना चाहिए। क्यों? वो हुआ यूँ कि अभी कुछ दिन पहले इसके बारे में जाना, जाकर देखा और सबसे पहले अपने नाम को सर्च किया, जैसा कि अपेक्षित था शुरुआती नतीजों में अपना नाम और ब्लॉग दिख गया परन्तु उसके साथ किसी अजनबी की तस्वीर देख बहुत आश्चर्य हुआ। :sad:

लेकिन अभी आश्चर्य थमा नहीं था, कुछ नीचे सूचि में था मेरा ग्लोबल वॉयसिस की प्रोफाईल का पन्ना और उसके साथ किसी अन्य साहब की तस्वीर लगी हुई थी। मन में आया कि यह क्या बकवास है, ऐसा भी कहीं होता है क्या। तस्वीर दिखा रहे हैं तो दिखाएँ लेकिन मेरी पहचान की वाट काहे लगा रहे हैं, मैं कोई बहुरूपिया थोड़े ही हूँ कि मेरे कई चेहरे होंगे!! :mad:

और देखा तो दूसरे नंबर पर एक और अमित गुप्ता की लिंक्डइन प्रोफाइल वाला पन्ने था और उसके साथ किसी अन्य साहब की तस्वीर जो कि गलत थी। क्यों गलत थी? क्योंकि इन अमित गुप्ता को मैं जानता हूँ, अभी हाल ही में जब ये दिल्ली आए थे तो मिलना भी हुआ था, तो यह तस्वीर तो उनकी बिलकुल भी नहीं है!!

मामला यहाँ तक नहीं था, कल पुनः जाँचा तो इस बार तस्वीरें अगल-बगल हो गई थी, जो तस्वीर पहले कहीं और थी वो अब अपने पन्ने के लिंक के साथ लग गई थी और जो अपने पन्ने के साथ थी वो कहीं और लग गई थी। :mad:


( बड़ा देखने के लिए चित्र को क्लिक करें )


ऐसी फालतू की हरकत कहीं से भी इनका प्रोफेश्नलिस्म (professionalism) नहीं दिखाती। :tdown: सर्च नतीजे इनके हूबहू गूगल जैसे ही दिखते हैं, और जैसा कि रवि जी बता चुके हैं हिन्दी इस पर किसी काम की नहीं, अन्य भाषाओं के होने की भी कोई गारंटी नहीं, जब अंग्रेज़ी का ही मामला ठीक नहीं है तो किसी और भाषा की अपेक्षा करना ही बेकार है। अब यह गूगल किलर कहाँ से है मुझे यह नहीं समझ आता और जो ऐसी बातें करते हैं वे नासमझ ही प्रतीत होते हैं।

पहचान गड़बड़ाने की वाहियात हरकत करके यह कूल तो कहीं से ना दिखे है। और जब खोजने और रैंकिंग का मामला ही गड़बड़ है तो इनके 120 अरब पन्नों के डाटाबेस को कोई सिर में मारेगा क्या? :roll: अभी कहीं पढ़ा था कि गूगल 1000 अरब पन्नों को जाँचता है लेकिन उसमें से सिर्फ़ 40 अरब पन्नों को ही गुणवत्ता के आधार पर रखता है। लोग इस सर्च इंजन के बड़े डाटाबेस का क्या करेंगे, किसी भी सर्च के सौंवे पृष्ठ के आगे कदाचित्‌ ही कोई जाता होगा। और जब रैंकिंग सिस्टम ही गड़बड़ाया हुआ है तो फिर डाटाबेस चाहे तीन गुणा हो या सौ गुणा, क्या फर्क पड़ता है, नतीजे तो झोला छाप ही मिलेंगे ना? :roll:

अब जो लोग यह कहने की सोच रहे हैं “ज़रा टैम तो दो इनको भई, अभी नए-२ हैं सुधार कर लेंगे” तो उनके लिए उत्तर यह है कि बकौल खुद इसी कंपनी के, इनका सर्च इंजन पिछले दो साल से बन रहा है, यानि कि अब तक ऐसे लोचे सुधारने का इनके पास वक्त रहा है। और यह कोई छोटा मुद्दा नहीं है, यह इनको भी पता होगा कि सर्च इंजन बना रहे हैं तो रैंकिंग का मसला निपटाना सबसे अहम है चाहे डाटाबेस थोड़ा छोटा हो ले!! यदि इनको यह नहीं पता था तो इनकी दुकान चार दिन में बढ़ जाएगी। और यदि इनको यह पता था और फिर भी यह नहीं सुधार पाए हैं, जैसा कि दिख रहा है, तो कोई क्यों इनके माल को प्रयोग करेगा! :tdown:


कोई इनको पैसे दे दो …..


July 21st, 2008 | 7 Comments

याहू के हाल खस्ता हैं, यह बात कोई नई नहीं। याहू का बोर्ड किसी ईश्वरीय दूत की राह देख रहा है जो पैसा लगा याहू को इस दलदल से निकाल सके, चाहे उसे उसकी औकात से अधिक दाम देकर या दान देकर! दूसरी ओर याहू के मौजूदा बोर्ड, चीफ़ एक्ज़ेक्यूटिव ऑफिसर (Chief Executive Officer) जैरी यैंग (Jerry Yang) और नई-२ प्रेज़ीडेन्ट बनी सूसन डैकर (Susan Decker) आदि का जीना हराम किए हुए हैं कार्ल आईकॉन (Carl Icahn) एण्ड कंपनी जो कि मौजूदा बोर्ड को पतली गली का रास्ता दिखाने की पुरजोर कोशिश में लगे हैं। :evil:

ठीक है, यह सब बातें तो आप जानते ही हैं, यदि नहीं जानते हैं तो “गुड मॉर्निन्ग”! :) तो बात यूँ है कि एक ओर इनकी वैसे वाट लगी हुई है और दूसरी ओर इनकी ईमेल सेवा के यूज़र इंटरफेस डिज़ाइनरों (User Interface Designers) ने एक नया शगूफ़ा छोड़ दिया है डॉलर उगाही के लिए।

यदि आप याहू की ईमेल सुविधा का नया वर्ज़न प्रयोग कर रहे हैं तो हो सकता है कि दाहिने ओर आने वाले विज्ञापन को दायीं ओर बंद करने पर आपको ऐसा कुछ दिखा हो:


ठीक है, ऐसा नोटिस आता है तो कोई बात नहीं है, वे आपको बता ही रहे हैं कि मुफ़्ती सेवा छोड़ के डॉलर देने पर आपको क्या सुविधाएँ मिलेंगी। इस डब्बे में एक विकल्प भी है कि यदि आप यह संदेश दोबारा नहीं देखना चाहते तो आप उसको चुन कर बटन पर क्लिक करें। अब होना यूँ चाहिए कि उस विकल्प को चुनने और बटन क्लिक के बाद यह संदेश दोबारा नहीं दिखना चाहिए। लेकिन क्या कहें याहू की ईमेल सेवा के डिज़ाईनरों को, ईश्वर उनकी दूसरी कंपनी में जल्दी नौकरी लगवाए(क्योंकि याहू तो यैंग और आईकॉन की लड़ाई के बीच मन्ने डूबता दिखे है), कि यहाँ उन्होंने प्रयोक्ताओं की नाक में दम करने का सामान कर दिया। यह डॉलर उगाही का संदेश किसी ढीठ कर्ज़दार की भांति पीछा ही नहीं छोड़ के देता; और तो और बटन क्लिक करने पर बंद हुए विज्ञापन को पुनः खोल जाता है!! :mad:

एक तो वैसे ही याहू का भाव नीचे गिर रहा है, ऊपर से यदि ऐसे प्रयोक्ताओं को भी परेशान करेंगे तो वे दल बदल करके दूसरे खेमे में चले जाएँगे, गूगल और मॉइक्रोसॉफ़्ट वैसे ही तैयार बैठे हैं। और एक बार प्रयोक्ता जाने शुरु हो गए तो उसके बाद याहू की कीमत रद्दी के भाव हो जाएगी जिसे लेने में फिर कोई कबाड़ी ही रुचि दिखाएगा!! :tdown:


ये फिल्म अभी बाकी है …..


June 10th, 2008 | 4 Comments

पिछले कुछ समय में याहू सुर्खियों में रहा, कारण उसका खस्तेहाल होना, फिर माइक्रोसॉफ़्ट का उसको खरीदने का प्रस्ताव रखना और उसको याहू द्वारा ठुकरा दिया जाना था। माइक्रोसॉफ़्ट की ओर से होस्टाइल टेकओवर (hostile takeover) की अपेक्षा भी की जा रही थी लेकिन माइक्रोसॉफ़्ट ने ऐसी कोई कोशिश न करी और याहू द्वारा खरीद के प्रस्ताव को ठुकरा दिए जाने के बाद आराम से बैठ गई। लोगों ने सोचा कि मामला समाप्त हो गया, अब याहू वाले या तो वापस डॉलर छापना शुरु करेंगे या किसी और के हाथ बिकेंगे।

लेकिन मुझे यकीन नहीं आ रहा था, दमदार किरदारों वाला मामला ऐसे कैसे ठंडे-२ निपट सकता है। जल्द ही शंका सच साबित हुई, यानि कि फिल्म अभी बाकी है!! ;)

याहू - फिल्म अभी बाकी है

इंटरवल के बाद फिल्म में पदार्पण होता है एक अरबपति अमेरिकी फाईनेन्सर और कॉर्पोरेट रेडर (corporate raider) का और फिल्म पुनः चालू हो जाती है। नाम? आईकॉन, कार्ल आईकॉन (Carl Icahn) और इन बहत्तर वर्षीय अमेरिकी अरबपति का नाम दुनिया के पचास सबसे रईस लोगों में शुमार होता है और इनको कंपनियों के मैनेजमेन्ट का तख्ता पलटने में महारत हासिल है। ऐसा ये कैसे करते हैं? टार्गेट कंपनी के कई सारे शेयर खरीद उस कंपनी में वोटिंग अधिकार हासिल कर और उनका प्रयोग कर तथा अन्य शेयरहोल्डरों को अपनी ओर मिलाकर ये कंपनी के मैनेजमेन्ट को निकास द्वार दिखा देते हैं।

अब कुछ ऐसा ही ये याहू के साथ भी करने का इरादा रखते हैं। जहाँ इस वर्ष अप्रैल तक इनके पास याहू का एक भी शेयर नहीं था वहीं आज की तारीख़ में ये याहू के चार प्रतिशत शेयरों पर काबिज़ हैं जो कि काफ़ी अच्छी खासी संख्या है। इनका मानना है कि याहू की मौजूदा मैनेजमेन्ट नाकारा है, कंपनी की दुर्दशा की तो ज़िम्मेदार है ही बल्कि माइक्रोसॉफ़्ट की इतनी अच्छी पेशकश ठुकरा कर मैनेजमेन्ट ने एक निहायत ही अहमकाना हरकत की है और इसका उपाय यही है कि जैरी यैंग एण्ड पार्टी को क्लीन बोल्ड कर दिया जाए। इसलिए उसी इरादे के मद्देनज़र कार्ल साहब की याहू मैनेजमेन्ट से खुल्लम-खुल्ला छिड़ गई है, पत्रों का खुले रुप से आदान-प्रदान हो रहा है, एक क्या कह रहा है इसमें दूसरे की कतई रुचि नहीं है। कार्ल साहब का मकसद शेयरहोल्डरों को अपने प्रभाव में लाना है ताकि वे मौजूदा मैनेजमेन्ट के नीचे से कुर्सियाँ खींच सकें और उन पर अपने बन्दे बिठा सकें जो कि कदाचित्‌ आगे माइक्रोसॉफ़्ट से याहू की डील कर सकें। उधर जैरी यैंग एण्ड पार्टी का मकसद अपनी कुर्सियाँ बचाए रखना है ताकि कार्ल बाबू की मंशा पूर्ण न हो सके। काफ़ी प्रबल संभावना है कि इस उठा-पटक के नतीजे अगस्त में होने वाली याहू के शेयरहोल्डरों की मीटिंग में सामने आ जाएँगे कि इस मुठभेड़ में कौन विजयी रहा – कार्ल आईकॉन या जैरी यैंग एण्ड पार्टी।

साथ ही मुझे पूरा विश्वास है कि माइक्रोसॉफ़्ट ने बेशक याहू से अपनी रुचि हट गई दिखाई है लेकिन ध्यान उनका भी इधर बराबर होगा कि कार्ल आईकॉन और जैरी यैंग एण्ड पार्टी की इस रस्सा-कशी में कौन बाज़ी ले जाता है क्योंकि यदि कार्ल बाबू जीतते हैं तो याहू को पाने के दरवाज़े माइक्रोसॉफ़्ट के लिए खुल जाएँगे। ;)

अपने को भी इस बिल्लियों की लड़ाई में मज़ा आ रहा है, आगे-२ देखिए होता है क्या, क्योंकि फिल्म अभी बाकी है!! ;) :tup:


तलाश है एक डिज़ाइन की…..


June 6th, 2008 | 3 Comments

एक लोगो (Logo) यानि कि प्रतीक चिन्ह सिर्फ़ एक चिन्ह ही नहीं होता, उसमें झलकना चाहिए उस कंपनी/संस्था का प्रतिबिंब, उसकी सोच, उसके विचार। आदर्श और सार्थक प्रतीक चिन्ह वही होते हैं जो अपनी कंपनी/संस्था के पर्यायवाची बन जाएँ, जो लोगों को उस कंपनी/संस्था से जोड़ सकें। वह आकर्षक भी होना चाहिए जो पहली नज़र में ही दर्शक की नज़रों को बाँध दे, वह ऐसा होना चाहिए जिसको कंपनी/संस्था कहीं भी आसानी से प्रयोग कर सके चाहे तो अपनी वेबसाइट पर या बिज़नेस कार्ड पर या अपनी अन्य स्टेशनरी पर या अपने विज्ञापनों में आदि। उसे कंपनी/संस्था की सकारात्मक छवि प्रक्षेपित करना चाहिए, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि वह कंपनी/संस्था की छवि हो; गाड़ियों वाली कंपनी का प्रतीक चिन्ह शीतलपेय का गिलास नहीं हो सकता!! ;)

ह्म्म, कुछ ज़्यादा हो गया? तो काम की बात पर आते हैं; इंडियन ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी के लिए हमें एक प्रतीक चिन्ह दरकार है जो देखने में सुन्दर और आकर्षक हो, जो हमारे विचारों और मकसद को प्रक्षेपित करता हो। रोकड़ा? यह डिज़ाइनर पर निर्भर करता है, लोगो यानि कि प्रतीक चिन्ह के लिए हमारा बजट ज़्यादा नहीं है, 250 डॉलर (तकरीबन दस हज़ार रुपए) तक का ही है। आईबीएनएमएस (IBNMS) एक नॉन प्रॉफिट (non profit) संस्था है जिसे भारत के ब्लॉगिंग और नए मीडिया समाज तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रचार करने के लिए गठित किया गया है, इसलिए इस कार्य में हाथ बँटा आप एक नेक कार्य भी करेंगे। :tup: यदि आप डिज़ाइनर हैं अथवा किसी योग्य डिज़ाइनर को जानते हैं तो आप या वे अपनी अर्ज़ी यहाँ दे सकते हैं। इस कार्य के लिए 15 जून 2008 तक अर्ज़ियाँ स्वीकार की जाएँगी और तकरीबन 28 जून 2008 तक हमें कार्य समाप्त चाहिए।

इस प्रोजेक्ट पर अर्ज़ी देने के लिए आपको लाइमएक्सचेन्ज पर रजिस्टर करना होगा जहाँ पर यह प्रोजेक्ट लिस्ट किया गया है, लाइमएक्सचेन्ज पर रजिस्ट्रेशन एकदम मुफ़्त है। यही नहीं, चूंकि लाइमएक्सचेन्ज आईबीएनएमएस का एक प्रायोजक भी है तो इसलिए 50 डॉलर (तकरीबन ढाई हज़ार रुपए) का एक प्रोमोशन कूपन भी आपको रजिस्टर करने पर मुफ़्त मिलेगा, बस इस लिंक को क्लिक करके आपको रजिस्टर करना होगा। फ्री कूपन पाने के लिए जानकारी यहाँ देखें

हम सस्ती अर्ज़ी की तलाश में नहीं हैं इसलिए यह कतई न समझा जाए कि हम सबसे सस्ती अर्ज़ी को चुनेंगे। चुनाव उसी अर्ज़ी का होगा जिसका कार्य दमदार होगा। इसलिए अर्ज़ी देने वाले सभी से विनम्र अनुरोध है कि अपनी अर्ज़ी प्रस्तुत करते समय इस क्षेत्र में किए गए अपने (कलात्मक) कार्य के नमूने अवश्य दिखाएँ ताकि हम सबसे अधिक योग्य कलाकार का चुनाव कर सकें। :)