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Archive for the ‘Blogger Meetups’ Category


2009 की आखिरी दो ब्लॉगर भेंटवार्ताएँ …..


January 4th, 2010 | 14 Comments
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पिछले वर्ष 19 दिसंबर वाले सप्ताहांत पर अहमदाबाद से बेंगाणी बंधु दिल्ली आए हुए थे। अहमदाबाद से निकलने से पहले पंकज ने बता दिया था कि दोनों भाई दिल्ली आ रहे हैं किसी पुरस्कार समारोह के लिए तो मैंने तुरंत कह दिया था कि भई फोन नंबर तो तुम्हारे पास है ही तो जब भी समय हो बता देना अपन मिलने आ जाएँगे। अब यह नहीं पता था कि रवि जी भी होंगे साथ में, तो यह बढ़िया संयोग रहा। इधर मज़ेदार बात यह रही कि जीतू भाई भी दो-तीन दिन पहले ही भारत आए थे और बता दिए थे कि भई आ गए हैं मिलने का बनाएँगे मामला। तो इधर मैंने उनको भी खबर कर दी कि मामला बनता दिख रहा है अच्छा खासा। तो 19 दिसंबर को हौज़ खास में उसी ऑडीटोरियम में मिलने का प्रोग्राम बना जिसमें पुरस्कार समारोह आयोजित था। उससे पिछली रात को श्रीश से बात हो रही थी तो यह बात निकल गई कि कल मिलने का प्रोग्राम है इतनी बड़ी हस्तियों से, तो वह भड़क गया कि उसे काहे नहीं न्यौता दिया गया। तो मैंने कहा कि अगले दिन स्कूल की छुट्टी मार, सुबह बस में चढ़ और दोपहर तक पहुँच जाएगा यहाँ दिल्ली, तो वह भी राज़ी हो गया।

तो यूँ हुआ मामला सैट इस ब्लॉगर मीट का। निम्न कुछ फोटो उसी मीट से हैं, फोटो कुछ और भी ली थीं लेकिन वह अच्छी न आईं।


बाएँ से दाएँ:  रवि रतलामी, संजय बेंगाणी



बाएँ से दाएँ:  पंकज बेंगाणी, श्रीश



बाएँ से दाएँ:  पंकज बेंगाणी, डॉ. विपुल जैन (चिट्ठाजगत वाले), श्रीश, रवि रतलामी, संजय बेंगाणी, जीतेन्द्र चौधरी (मेरा पन्ना वाले)



यह पुरस्कार समारोह के बाद का फोटो है, इसमें रवि जी और संजय भाई अपने-२ पुरस्कार की ट्रॉफ़ी पकड़े हुए हैं


तो यह था मामला इन महान हस्तियों से सुसज्जित ब्लॉगर मीट का। अब इससे निपटे थे कि 29 सितंबर की रात मिश्रा जी का फुनवा आ गया कि अगले दिन दिल्ली पहुँच रहे हैं, रात को अमरीका के लिए उड़ेंगे तो उससे पहले मिलने का प्रोग्राम बन जाए तो बढ़िया रहेगा। तो मामला लंच का तय हुआ, जीतू भाई को भी आना था। लेकिन अगले दिन जीतू भाई धोखा देकर पतली गली से निकल लिए, बोले बोत काम हैं खामखा तुम पर वेस्ट करने को टैम नहीं है!! :D उधर मिश्रा जी की इलाहाबाद से गड्डी लेट हो गई। ज्ञान जी नोट कीजिए, माल गाड़ियाँ सरपट भगाने का खमियाज़ा पैसेन्जर ट्रेन से न भरवाईये। :D लंच का समय निकल गया और मिश्रा जी निकल गए अपने एक मित्र के साथ, लंच रीस्केड्यूल (re-schedule) होकर डिनर का प्रोग्राम बना। तो शाम को अपन पहुँचे क्नॉट प्लेस और निर्धारित कैफ़े कॉफ़ी डे में पहुँच विराज गए। समय व्यतीत करने के लिए अपन अपने एस९ (S9) पर गाने सुन रहे थे और एक उपन्यास पढ़ रहे थे। मिश्रा जी अपने को आसानी से दिख जाएँ इसलिए मैं नीचे बैठा था (न कि ऊपरी मंज़िल पर) और शीशे के पार पूरी सड़क नज़र आ रही थी, उधर मिश्रा जी शीशे के पार एकदम सामने खड़े होकर मुझे फोन लगाते हैं कि भई कहाँ हो!! :D तो यूँ मिले मिश्रा जी से और उनके साथ आए उनके मित्र माधवेन्द्र शुक्ला से जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय से कोई घणी हाई फाई चीज़ पढ़ रहे हैं अपने को तो समझ भी न आया कि क्या होता है।


मिश्रा जी के मित्र, श्री माधवेन्द्र शुक्ला



मिश्रा जी


कॉफ़ी के बाद हम लोग रात्रि भोज के लिए निकले, मिश्रा जी को चीनी, जापानी, थाई, मेक्सिकन, अमेरिकी, गुजराती, उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय आदि सभी विकल्प गिनवा दिए और उन्होंने दक्षिण भारतीय खाने को तरजीह दी, सो हम लोगों ने सरवण भवन में मामला निपटाया।

संजय भाई नोट कर लें, उनका कैमिकल नमस्ते हमने मिश्रा जी को दे दिया था। :D


क्नॉट प्लेस टू चांदनी चौक …..


June 4th, 2009 | 10 Comments
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उधर इलाहाबाद और आसपास के लोग एक के बाद एक ब्लॉगर मीट ठेले जा रहे थे और इधर मैं सोचने में लगा हुआ था कि ऐसा क्या हुआ कि यहाँ दिल्ली में बेतकल्लुफ़ी वाली कॉफ़ी छाप ब्लॉगर मीट बंद हो गईं??!! दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में फौज है ब्लॉगरों की, एक समय था जब दूसरे शहरों के लोग हमसे ईर्ष्या किया करते थे कि हम लोग आए दिन ब्लॉगर चौपाल लगाए चाय-कॉफ़ी सुड़क रहे होते थे और वे लोग सोचते थे कि हम लोग वेल्ले हैं जो इतना टाइमपास किया करते हैं!! कहाँ गई वो ईर्ष्या? अब कोई क्यों नहीं करता? कोई ईर्ष्या करेगा कैसे, सोवियत यूनियन की ही भांति लोगों के पास फालतू टैम खत्म हो गया, जैसे बर्लिन (Berlin) की दीवार गिरी थी वैसे ही ब्लॉगर मीटों की कतार टूट गई!!

तो मन में बहुत समय से एक तलब उठ रही थी कि ब्लॉगकैम्प आदि तो हम लोग करते ही रहते हैं, अभी तक भारत में सबसे अधिक ब्लॉगकैम्प दिल्ली में ही हुए हैं (पहला और दूसरा), पुणे में दूसरा ब्लॉगकैम्प इसी माह हो रहा है और वह दिल्ली के बगल में आकर खड़ा हो जाएगा। लेकिन इन सब के अतिरिक्त बेतकल्लुफ़ी वाली बिना किसी निश्चित एजेन्डे वाली कॉफ़ी छाप मीट भी होनी चाहिए। इसी को लेकर दिल्ली ब्लॉगर समूह में मान मनौव्वल चल रहा था। इस मीट के लिए मुख्य आकर्षण खान-पान रखा गया कि भई अंट-शंट बकबक तो करेंगे ही लेकिन किसी ऐसी जगह जाएँगे जहाँ कुछ बढ़िया खान-पान संभव हो सके, मुख्य मुद्दा तो वही था। जगह के बारे में एक राय नहीं बन पा रही थी, अधिकतर लोग चांदनी चौक (Chandni Chowk) के लिए ज़ोर दे रहे थे (अब उससे बेहतर स्थान भी तो नहीं कोई इस काज के लिए), तो कुछ लोग इंडिया हैबिटैट सेन्टर (India Habitat Center aka IHC) का सुझाव दे रहे थे। आखिरकार मैंने सोचा कि ऐसे कुछ नहीं होने वाला, तो इसलिए जनमत लेने की सोची, एक पोल (Poll) बनाया, उसमें चांदनी चौक और इंडिया हैबिटैट सेन्टर के विकल्प दिए और बोल दिया मेम्बरान को कि जिसको जो पसंद हो उस विकल्प को मत दे और जिसको अधिक वोट मिले वही जगह तय रहेगी।


फोटो साभार तरूण

अपेक्षित रूप से चांदनी चौक की विजय हुई और मामला सैट हो गया कि क्नॉट प्लेस के एक कैफ़े कॉफ़ी डे (Cafe Coffee Day) में मिला जाएगा और वहाँ एकाध घंटा बैठ मेट्रो में सवार होकर चांदनी चौक पहुँचेंगे जहाँ दही-भल्ले, आलू की टिक्की और फिर परांठे वाली गली के मशहूर परांठों का भोग लगाया जाएगा!! :D अब चूंकि अपन आजकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बंधे हुए हैं इसलिए पहले ऑटोरिक्शा में लद के नज़दीकी मेट्रो स्टेशन तक पहुँचे और वहाँ से मेट्रो में सवार होकर क्नॉट प्लेस नियत समय पहुँच ही गए, समय से दस मिनट पहले तरूण आ चुका था और एक मिनट पहले एक अन्य ब्लॉगर रिशू भी आ गया था। ऑटोरिक्शा का भी मज़ेदार किस्सा रहा, इस विषय में अगली किसी पोस्ट में लिखूँगा।


फोटो साभार तरूण

जिस कैफ़े का मामला तय था वह भरा हुआ था, सप्ताहांत था और शाम हो रही थी, आजकल लोगों की जेब भारी हो गई है कुछ ज़्यादा ही इसलिए पिछले एक वर्ष के वफ्के में यह फर्क आया है कि कॉलेज के लड़के अपनी-२ गर्लफ्रेन्डों के साथ प्रायः सभी कैफ़े कॉफ़ी डे और बरिस्ता (Barista) को भर देते हैं!! ;) बहरहाल, निश्चित कैफ़े के सामने वाले कैफ़े में कुछ जगह खाली मिल गई और हम तीनों वहीं बैठ गए। पहले वाले कैफ़े के मैनेजर को बोल आए कि भई कोई ब्लॉगर मीट के लिए आए तो सामने वाले कैफ़े में भेज देना, एक साहब का लघु संदेश (SMS) आ गया था कि वे पहुँचने वाले हैं तो उनको उत्तर भेज दिया कि सामने वाले कैफ़े में पहुँचें।

ट्विट्टर पर आलोक भाई का समोसा पढ़ा कि वे दिल्ली में हैं तो उनको भी मोबाइल से एक लघु संदेश (SMS) हिन्दी में लिखकर भेज दिया कि ब्लॉगर मीट हो रही है और उसके बाद परांठे वाली गली के परांठों का प्रोग्राम है, वे भी आ जाएँ। इधर एक-एक करके लोग आ गए और हंसी ठठ्ठे के साथ हर तरह की फालतू चर्चा आदि हो रही थी, ब्लॉगर मीट वाज़ इन प्रोग्रेस!! ;) तकरीबन छह बजे चांदनी चौक रवाना होने की बात हुई और इधर आलोक भाई का फोन आया कि वे बस निकल रहे हैं ब्लॉगर मीट में आने के लिए, तो मैंने उनको कहा कि हम लोग भी इधर से निकल रहे हैं इसलिए आप सीधे चांदनी चौक पहुँचों मेट्रो में सवार होकर।


फोटो साभार तरूण



फोटो साभार तरूण

एक ब्लॉगर अपनी पत्नी और छोटे बालक के साथ आए थे, उनको रात्रिभोज पर किसी परिचित के जाना था तो वे क्नॉट प्लेस से ही विदा हुए और बाकी हम लोग चांदनी चौक के लिए रवाना हुए। चांदनी चौक पहुँच दही भल्ले खाने बैठे थे कि आलोक भाई का फोन आ गया कि उनको उनकी ससुराल वालों ने पकड़ के बिठा लिया है, इसलिए वे तो नहीं आ पाएँगे अलबत्ता मैं रात साढ़े नौ बजे जनक पुरी पहुँच जाऊँ, वहीं चिट्ठाजगत वाले डॉ. विपुल भी मिल जाएँगे।


फोटो साभार तरूण

दही भल्ले निपटा के हम लोग परांठे वाली गली पहुँचे और वहाँ सभी ने नींबू, रबड़ी, पनीर, आलू और पुदीने के परांठों का भोग लगाया। वहाँ परांठे तवे पर नहीं सेके जाते जैसा कि आम तौर पर होता है और न ही तंदूर में बनाए जाते हैं। परांठे वाली गली में परांठे कम गहराई की छोटी कढ़ाई में तल के बनाए जाते हैं, कैलोरी का ढेर लेकिन स्वाद एकदम टकाटक। अपने को तो नींबू का परांठा भा गया, बहुत ही लज़ीज़ और अलग स्वाद का था। और तरूण के अनुसार (परांठे वाली गली के लिए अपना गाईड वही था) रबड़ी के परांठे पूरी दिल्ली में सिर्फ़ परांठे वाली गली में ही मिलते हैं। अब अपन ने कहीं और खाए नहीं और न ही देखे, इसलिए मान लिए उसकी बात!! ;)

परांठे निपटा के बढ़िया टकाटक लस्सी से प्यास बुझाई गई। अब साढ़े आठ का समय हो रहा था इसलिए ब्लॉगर एण्ड खान पान मीट बर्खास्त की गई, सभी के चेहरों पर मुस्कान और तृप्ति के भाव थे। तय किया गया कि इस तरह का मामला थोड़े-२ अंतराल के बाद होते रहना चाहिए, हंसी ठठ्ठा भी हो जाए और खान पान इत्यादि भी!! सभी अपनी-२ राह बढ़ गए अपने-२ घरों की ओर लेकिन अपना दिन अभी समाप्त नहीं हुआ था तो अपन मेट्रो में सवार होकर जनकपुरी की ओर चल दिए दूसरी ब्लॉगर मीट के लिए। फोन पर आलोक भाई विपुल जी से सलाह लेकर अपने को बता दिए कि फलाने स्टेशन पर उतर जाना और फलाने गेट से बाहर आ जाना, विपुल जी वहीं मिलेंगे। तो अपन कोई एक घंटे बाद साढ़े नौ बजे फलाने स्टेशन पर उतरकर फलाने गेट से बाहर आ गए और कुछ देर बाद वहाँ आलोक भाई और विपुल जी भी आ गए। विपुल जी की गाड़ी में सवार होकर हम लोग डिस्ट्रिक्ट सेन्टर (District Center) पहुँचे जहाँ के आलीशान (और खाली पड़े) बरिस्ता में हम लोग चौपाल लगाए।



( बाएँ से दाएँ -  डॉ. विपुल, मैं और आलोक भाई )


अब तीन लोग बेतकल्लुफ़ी में बैठें हों और तीनों ही तकनीकी खुरक वाले तो ज़ाहिर है तकनीकी चर्चा अधिक होगी। इधर-उधर की बातें भी हुई और अलग-२ मुद्दों पर तकनीकी चर्चा भी हुई। विपुल जी और आलोक भाई पहले ही भोजन कर आए थे और मैं इस मुगालते में था कि साथ में रात्रि भोजन होगा। समय बीत रहा था और हम लोगों ने सोचा कि कुछ खा लिया जाए, मैंने तो भोजन नहीं किया था आखिर। बस इसी मनसूबे को अंजाम देने हम लोग बरकोस (Bercos) में पहुँचे कि वहाँ थाई (Thai) खाना खाया जाएगा। बरकोस में मैंने विपुल जी से बॉररूम (Bar Room) की ओर रूख करने को कहा तो उन्होंने पूछा कि कुछ पीना है क्या तो मैंने कहा कि नहीं ऐसी कोई तमन्ना नहीं है, वहाँ बैठना इसलिए बेहतर रहेगा कि वहाँ का माहौल अच्छा और शांत होता है तथा बैठने का इंतज़ाम बढ़िया होता है, बोले तो कुर्सियाँ आदि रेस्तरां के मुकाबले अधिक आरामदायक होती हैं, खाना तो वहाँ भी सर्व हो जाता है इसलिए कोई टेन्शन नहीं।

ऐपेटाईज़र और थाई खाना मंगवाया गया, आलोक भाई और विपुल जी ने साथ दिया और बतियाते हुए कब रात्रि के बारह बज गए पता ही नहीं चला। रेस्तरां खाली हो चुका था, वे लोग बंद कर रहे थे और हम लोग बिल का भुगतान कर बाहर आ गए। इस तरह उस संक्षिप्त हिन्दी ब्लॉगर मीट का भी समापन हुआ। तकरीबन साढ़े बारह बजे मुझे मेरे घर के पास छोड़ते हुए विपुल जी आलोक भाई को उनके डेरे पर पहुँचाने निकल लिए।


May 31st, 2009 | 9 Comments

आज दो ब्लॉगर मीट में शिरकत करी। पहली वाली थी दिल्ली ब्लॉगर मीट जो शाम को क्नॉट प्लेस से शुरु होकर चांदनी चौक स्थित परांठे वाली गली के परांठों पर खत्म हुई। दूसरी हिन्दी ब्लॉगर मीट थी जो रात साढ़े नौ बजे आलोक भाई और चिट्ठाजगत वाले डॉ. विपुल के साथ बरिस्ता की चाय/कॉफी से शुरु होकर बरकोस के थाई खाने पर साढ़े बारह समाप्त हुई!


ब्लॉग – समाज के लिए उनका क्या महत्व है?


February 8th, 2008 | 2 Comments

पिछले माह, 12 जनवरी 2008 को, हुई दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society aka DBNMS) द्वारा आयोजित प्रथम ब्लॉगर भेंटवार्ता काफ़ी सफ़ल रही। बहुत से लोगों ने यह भी हमें बताया कि वह भेंटवार्ता उनके लिए काफ़ी ज्ञानवर्धक रही, उनको कई बातों की जानकारी मिली और अन्य ब्लॉगरों से मिलने का अवसर तो मिला ही। दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society) के पीछे एक उद्देश्य यह भी है कि ब्लॉगर भेंट सिर्फ़ चाय-कॉफी और गपशप तक ही न सीमित रहें बल्कि हम ब्लॉगर लोग जब मिलें तो अलग-२ विषयों पर कुछ सार्थक चर्चा भी करें और एक दूसरे से सीखें भी, इसलिए Be Relevant का नारा लगाया गया था। :)

तो इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए इस माह, 14 फरवरी 2008 को, एक और ब्लॉगर भेंटवार्ता आयोजित की जा रही है। यह पिछली बार की तरह लंबा चौड़ा कार्यक्रम न होगा, मात्र दो घंटे का कार्यकरम सांयकाल में होगा जिस पर ब्लॉगों और समाज के लिए उनके महत्व पर चर्चा की जाएगी। सिलसिलेवार जानकारी निम्न है:

चर्चा का विषय: ब्लॉग और समाज के लिए उनका महत्व
स्थान: गुलमोहर हॉल, इंडिया हैबिटाट सैन्टर (India Habitat Center), लोधी रोड, नई दिल्ली
तिथि: 14 फरवरी 2008
समय: सांयकाल 6:30 से 8:30
रूपरेखा: ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों ने विश्व भर में अपनी एक पहचान कायम की है और भारत में भी यह हो रहा है जैसा कि हालिया पिछले समयकाल में विदित हुआ है। अब इसी पर आगे बढ़ते हुए ब्लॉगर/चिट्ठाकार नागरिक पत्रकार(citizen journalists) की अपनी भूमिका निभाने के लिए क्या कर सकते हैं? इसी पर चर्चा की जाएगी एक संवादात्मक सत्र में जिसको निम्न भागों में विभाजित किया गया है:

  1. उन वाकयों के उदाहरण जहाँ ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों के कारण बदलाव आए हैं
  2. पत्रकारिता के श्रेष्ठ सिद्धांत जिनका ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों पालन कर सकें
  3. कैसे ब्लॉगर/चिट्ठाकार इस सब पर एक साथ कार्य कर सकते हैं

आमंत्रित: इस भेंटवार्ता में सभी आमंत्रित हैं, वे भी जो मौजूदा ब्लॉगर/चिट्ठाकार हैं और वे भी जो ब्लॉगर/चिट्ठाकार बनना चाहते हों और वे भी जो ब्लॉग पाठक हैं।

इस भेंटवार्ता और सभा में भाग लेने का कोई शुल्क नहीं है, केवल आपको समय निकाल इसमें पधारना मात्र है और चर्चा में भाग लेना है क्योंकि यह आपकी अपनी भेंटवार्ता है और अपनी चर्चा है।

यदि अपने आने की पुष्टि/कन्फर्मेशन यहाँ टिप्पणी के रूप में दे देंगे तो हम लोगों को भी अंदाज़ा रहेगा कि कितने साथी लोग शिरकत करने वाले हैं। यदि कन्फर्मेशन नहीं भी देंगे तो भी आपका स्वागत है, इस भेंटवार्ता में शिरकत करने और भाग लेने के लिए कन्फर्मेशन देना अनिवार्य नहीं है। :)

तो मिलेंगे 14 फरवरी 2008 को सांयकाल साढ़े छह बजे लोधी रोड(नई दिल्ली) स्थित इंडिया हैबिटाट सैन्टर (India Habitat Center) के गुलमोहर हॉल में। :)

 
अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें
 


ब्लॉगर भेंटवार्ता टेलीविजन पर …..


February 7th, 2008 | 5 Comments

पिछले माह, 12 जनवरी 2008, हुई दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society aka DBNMS) द्वारा आयोजित प्रथम ब्लॉगर भेंटवार्ता काफ़ी सफ़ल रही। बहुत से साथी ब्लॉगरों और ब्लॉग इच्छुकों और उत्सुकों ने इसमें भाग लेकर इस भेंट को सफ़ल बनाया। अपने हिन्दी ब्लॉगजगत से भी कई बंधुओं ने शिरकत कर मेरी इस सोच को मज़बूत किया कि ब्लॉगर चाहे कैसा हो और चाहे किसी भी भाषा में लिखता हो परन्तु होता वह ब्लॉगर ही है इसलिए हम इस ब्लॉगजगत में क्षेत्र अथवा भाषा के मापदंड पर बंटवारा नहीं करेंगे। :)

मीडिया में भी इस ब्लॉगर भेंटवार्ता को काफ़ी कवरेज मिली और ब्लॉगजगत तथा ब्लॉगरों के बारे में खबर दूर-२ तक पहुँची। इससे अपेक्षित है कि ब्लॉगिंग का मर्ज़ बहुतों को अपनी चपेट में लेगा। :)

भेंटवार्ता से एक दिन पहले अंग्रेज़ी के हिन्दुस्तान टाइम्स की अनुपूरक पत्रिका एचटी सिटी(HT City) के मुख्यपृष्ठ पर भेंटवार्ता संबन्धित यह लेख छपा था। हालांकि इसमें पत्रकार/लेखिका से एक त्रुटि हो गई और अंत में वेबसाइट के पते में वो delhi लगाना भूल गई, असल वेबसाइट www.delhibloggers.in है। एनडीटीवी (NDTV) ने इस पूरी भेंटवार्ता को कवर किया था और पत्रकार गरिमा दत्त ने एनडीटीवी (NDTV) की वेबसाइट पर भेंटवार्ता के अगले दिन यह लेख छापा। सिर्फ़ छापे वाले मीडिया में ही नहीं, टेलीविजन पर भी इसकी कवरेज दिखाई गई।

एनडीटीवी 24×7 (NDTV 24×7) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई विस्तृत कवरेज

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

मीडिया में इस कवरेज का लाभ सीधे ही दिखा। जहाँ कई लोग हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले दिन छपे लेख के कारण भेंटवार्ता में आए वहीं कुछ लोग बाद में एनडीटीवी (NDTV) पर इसकी कवरेज देख कर समूह से जुड़े और अपने ब्लॉग बनाए। भेंटवार्ता के अगले ही दिन एनडीटीवी (NDTV) पर प्रसारित बर्खा दत्त के We The People कार्यक्रम का मुद्दा भी ब्लॉग ही थे। मतलब साफ़ है, मीडिया भी अब खुले रूप से ब्लॉगों पर ध्यान दे रहा है, और यह अच्छा भी है क्योंकि इससे जल्द ही यह भ्रम(जो कि बहुत लोग पाले हुए हैं) टूटेगा कि ब्लॉग मुख्यधारा मीडिया की जगह ले सकते हैं, दोनों एक दूसरे के सहायक/पूरक हो सकते हैं लेकिन दोनों की अपनी-२ पहचान और स्थान है।


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