न था कुछ तो खुदा था, कुछ न होता तो खुदा होता।
अस्सी के दशक के अंत में दूरदर्शन पर नसीरूद्दीन शाह का एक धारावाहिक आया था, मिर्ज़ा ग़ालिब, जिसे गुलज़ार साहब ने बनाया था और जगजीत सिंह और चित्रा सिंह ने जिसमें गज़लें गाई थी। पापा के पास इसकी दोनो कैसेट थी (जगजीत सिंह की अन्य सभी एल्बमों की भांति, अभी भी कहीं पड़ी होगी) और जब वे इसको सुना करते तो मुझे इसका सिर्फ़ कवर पसंद आता था, बाकी सब बेकार लगता था, हाल यह था कि मैं जगजीत सिंह को सुन पक गया था, पसंद बिलकुल नहीं था वह गायन लेकिन यह रट गया था कि फलानी गज़ल या गीत फलानी एल्बम में है!!
उस समय इसकी तारीफ़ करने लायक अक्ल नहीं थी, आज एहसास होता है कि यह वाकई सोने जैसी चीज़ है। जगजीत सिंह साहब की आवाज़ और मिर्ज़ा ग़ालिब के लिखे बोल – नशीली चीज़ जिसे सुनकर मज़ा आ जाए।
रात के इस समय उसी को सुना जा रहा है, आहा, आनंदम!!
सप्ताहांत है, नींद नहीं आ रही है। माताजी ने बेशक कामों की लंबी चौड़ी सूचि बना कर दे रखी है लेकिन सप्ताहांत आने पर मूड अपने आप रिलैक्स मोड में आ जाता है, रात को नींद भाग जाती है (दिन में आती है), काम पूरे नहीं होते (और फिर माताजी की फटकार सुनने को मिलती है)!!
अभी भी नींद नहीं आ रही है, इसलिए ए.आर. रहमान साहब द्वारा कृत कुछ पुराने संगीत का शहद कानों में घोला जा रहा है और उपन्यास पढ़ा जा रहा है। आज के संगीत को छोड़ दिया जाए, रहमान साहब पहले बहुत झकास संगीत बनाए हैं। वर्षों पहले सीडी/कैसेट खरीदीं थी, आदतानुसार उनकी एक प्रति कंप्यूटर पर रख ली थी, अब सीडी/कैसेट पता नहीं कहाँ हैं, कोई ले गया या खराब हो गईं लेकिन डिजिटल प्रति एकदम चौकस हैं और अपनी स्कूल/कॉलेज के ज़माने में जेबखर्च जोड़कर की गई इन्वेस्टमेंट सुरक्षित है!
एकाध सप्ताह पहले गुड़गाँव में लैन्डमार्क स्टोर में एक उपन्यास देख रहा था पढ़ने के लिए। उससे एकाध दिन पहले ही एक उपन्यास, रिवर गॉड (River God), पढ़ के समाप्त किया था और उसका अगला भाग, द सेवन्थ स्क्रॉल (The Seventh Scroll), खोज रहा था। परन्तु वह लैन्डमार्क वालों के पास था नहीं तो फिलहाल काम चलाने के लिए मैंने एक अन्य उपन्यास ले लिया।
तभी याद आया कि एक संगीत की सीडी भी लेनी है जो कि शांत और मधुर हो, कुछ शास्त्रीय संगीत की तर्ज़ पर जिसमे मन को शांत करने की कूव्वत हो न कि उसको और उग्र करने की। संगीत सिर्फ़ वाद्य यंत्रों का हो तो बढ़िया, संस्कृत के श्लोक शांत मधुर आवाज़ में गाए हुए हों जिनके साथ वैसा ही शांत मधुर संगीत हो तो और भी बढ़िया। ऐसा संगीत प्रायः मेडिटेशन और योग करते समय भी उपयोगी होता है क्योंकि यह मन को शांत करने वाला शीतल संगीत होता है। लैन्डमार्क के संगीत वाले भाग में योग और मेडिटेशन के नाम पर बनी हुई तमाम सीडी देखी जिनमें लगभग सभी कचरा थीं जो कि आजकल बाज़ार में मौजूद योग तथा मेडिटेशन (Meditation) के फैशन (बहुत लोग सिर्फ़ फैशन के कारण ही इनको करते हैं क्योंकि इनको करने वाला फैशनेबल लगता है) से ग्रस्त लोगों को टार्गेट करके बनाई जाती हैं जिनमें तमाम तरह का कचरा परोसा जाता है।

लेकिन सभी कचरा नहीं था वहाँ, कुछेक अच्छी एल्बम भी थीं, उनमें से कुछ मेरे पास पहले से हैं। कुछ और वहाँ पंडित शिवकुमार शर्मा, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की थीं लेकिन मैं अब थोड़ा ज़ायका बदलने के लिए इनसे अलग कुछ और लेना चाह रहा था। पंडित शिवकुमार शर्मा, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, वनराज भाटिया आदि के तो अपन वैसे ही पंखे हैं।
पंडित जसराज भी दिखे और कुछेक अन्य शास्त्रीय संगीत वाले पंडित भी दिखे लेकिन वह थोड़ा भारी-भरकम टाइप का संगीत लग रहा था। आखिरकार एक हल्के-फुल्के संगीत की सीडी दिखी – मूड्स ऑफ़ योग (Moods of Yoga) शृंखला की – मुद्रा (Mudra)। यह ठीक ठाक लग रही थी तो इसको ले लिया कि आज़मा के देखते हैं कि पंडित शिवकुमार शर्मा के चेले पंडित सतीश व्यास कैसा संतूर (Santoor) बजाते हैं।
उस दिन यह सीडी लाकर रख दी लेकिन सुनना नहीं हो पाया क्योंकि कंप्यूटर में डीवीडी राइटर का ड्राइवर (driver) खराब हो गया था जिस कारण दोनो डीवीडी राइटर बेजान पड़े थे। अभी बीते सप्ताहांत ही फुर्सत मिली मामले को ठीक करने की और कल रात आखिरकार वह सीडी सुनी। सुनकर वाकई मज़ा आ गया, पंडित सतीश व्यास ने वाकई बड़ी नफ़ासत और तबीयत से संगीत दिया है। इस सीडी में छह गीत हैं, जिनमें पहले तीन गीत दोपहर के राग भीमपालसी पर आधारित हैं जो कि मन को शांत करने का काम करता है। यह तीनों गीत कुल मिलाकर तकरीबन 32 मिनट की अवधि के हैं जिसमें यह अच्छे खासे अशांत मन को शांत कर दें। इसके बाद तकरीबन 31 मिनट की अवधि के तीन गीत राग पुरिया धनाश्री पर आधारित हैं जो कि शांत मन को ध्यान की ऊँचाईयों पर ले जाने में पूरी तरह सहायक है।
कुल मिलाकर एक बढ़िया सीडी है, पैसे की पूरी वसूली है। इस शृंखला की सभी एल्बम क्रमवार निम्न हैं:
Asana – The Awakening – [MP3] एमपी३ यहाँ खरीद सकते हैं
Dhyana – Evening Calm – [MP3] एमपी३ यहाँ खरीद सकते हैं
Shakti – Creativity Within – [MP3] एमपी३ यहाँ खरीद सकते हैं
अब तो बस अगला मौका लगने पर इस शृंखला की अन्य एल्बम लेनी हैं।
यदि आपको भी शांत, शीतल, मधुर वाद्य संगीत पसंद है तो पहले इस सीरीज़ की “मुद्रा” एल्बम अवश्य लेकर देखिएगा। यदि आप इस प्रकार की किसी संगीत एल्बम के बारे में जानते हैं तो अवश्य बताईये।
कल 31 जुलाई 2008 को प्रसिद्ध गायक मोहम्मद रफ़ी साहब की 28वीं पुण्यतिथि थी। रफ़ी साहब वैसे तो कहीं नहीं गए, अपने गीतों के रुप में अपनी कभी न मिटने वाली यादें छोड़ गए हैं लेकिन फिर भी कल टीवी चैनलों को उनकी कुछ याद आ ही गई।
वैसे तो रफ़ी साहब ने हर तरह के गाने सफ़लता पूर्वक गाए, चाहे वो शम्मी कपूर की जंगली हरकतों(फिल्म में) पर फिल्माया गया हो या देव आनंद और साधना पर एक बाग में फिल्माया गया हो, लेकिन ज़ाती तौर पर मुझे तो शांत और मेलोडियस (melodious) गाने ही पसंद हैं, शोर शराबे वाले गाने अपने को नहीं भाते खास।
कुछ ऐसे लोग होते हैं जो ऐसे मुकाम पर पहुँच जाते हैं जहाँ उनसे पहले कोई नहीं पहुँचा होता और उनके बाद भी किसी का पहुँचना अत्यधिक कठिन होता है, चाहे वे रफ़ी साहब हों या स्वर्गीय किशोर कुमार या हेमंत दा, सब एक से बढ़कर एक और अपनी अलग मज़बूत पहचान बनाने वाले।
तो इसी पर सुनिए और देखिए मेरी पसंद के गीतों की सूचि में से एक:
गीत: अभी ना जाओ छोड़ के
फिल्म: हम दोनो (1961)
अभिनय: देव आनंद और साधना
गायन: मोहम्मद रफ़ी और लता मंगेशकर
बोल: साहिर लुधियानवी
इस गीत को खूबसूरत बनाने में जितना रफ़ी साहब का योगदान है कम से कम उतना ही मशहूर कवि साहिर लुधियानवी का भी है जिनकी कलम में जादू था, एक से बढ़कर एक जिनकी रचनाएँ थी कि गायक भी उनका गायन कर धन्य हो जाते थे!
अभी परसों मैं खजुराहो की तस्वीरों के स्लाईडशो के बैकग्राउंड में डालने के लिए फोकटी और कानूनी रुप से वैध संगीत खोज रहा था तो एक वेबसाइट पर पहुँचा जहाँ संगीत का अच्छा खासा भंडार है और सब कुछ डाउनलोड के लिए उपलब्ध। और खास बात यह कि संगीत गैरकानूनी रुप से नहीं वरन् पूर्णतया कानूनी रुप से उपलब्ध है, सारा संगीत किसी क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स या उस जैसे अन्य लाइसेन्स के अंतर्गत उपलब्ध है। इस वेबसाइट पर नए और उभरते कलाकारों की कृतियाँ हैं जिन्हें वे सभी को मुफ़्त में उपलब्ध कराते हैं। संगीत आप वेबसाइट पर सुन भी सकते हैं और डाउनलोड भी कर सकते हैं, डाउनलोड कर अपने मित्रों आदि में बाँट भी सकते हैं, बस जिस लाइसेन्स के अंतर्गत संगीत आपको उपलब्ध कराया गया है उस लाइसेन्स का मान आपको रखना होगा। सभी एल्बम एमपी३ (MP3) और ऑगवॉर्बिस (Ogg Vorbis) फॉर्मेट में उपलब्ध हैं, आपको जो चाहिए उस फॉर्मेट में आप डाउनलोड कर सकते हैं, डॉयरेक्ट डाउनलोड भी उपलब्ध है और यदि आप टोरेन्ट द्वारा करना चाहते हैं तो उसके द्वारा भी उपलब्ध है।
वेबसाइट का पता? वेबसाइट है jamendo.com और डाउनलोड आदि के लिए इस पर आपको रजिस्टर आदि करने की आवश्यकता नहीं है। वैसे इस पर रजिस्ट्रेशन मुफ़्त है और आप रजिस्टर करने पर कुछ अन्य सुविधाएँ पा सकते हैं जैसे ऑनलाईन सुनने के लिए अपनी प्लेलिस्ट आदि बना सकते हैं।
इस वेबसाइट कर कई गाने बहुत अच्छे हैं और कलाकारों ने काफ़ी अच्छा काम किया है। सारा संगीत आपको अंग्रेज़ी और अन्य भाषाओं में मिलेगा, लेकिन हिन्दी का मुझे कोई दिखाई नहीं दिया। कुछ फ्रैन्च और स्पेनिश भाषा के गाने भी मैंने यहाँ सुने, उनके बोल तो समझ नहीं आए लेकिन गायन उनमें काफ़ी अच्छा था और संगीत भी बढ़िया दिया हुआ था।