
कल आईस एज 3 (Ice Age 3) अर्थात् “आईस एज: डाएनासोरों का उदय” (Ice Age: Dawn of the Dinosaurs) देखी। इस फिल्म की प्रतीक्षा तो थी लेकिन मन में एक शंका यह भी थी कि कहीं यह दूसरे भाग, यानि कि आईस एज 2 (Ice Age 2), की भांति बेकार न साबित हो क्योंकि दूसरे भाग ने निराश किया था। अधिकतर यही देखा है कि फिल्म के सीक्वेल (sequel) प्रायः बढ़िया नहीं होते, पहली फिल्म की लोकप्रियता का अधिक लाभ उठाने के लिए जबरन बनाए गए होते हैं। लेकिन इस फिल्म ने सारी शंकाओं पर पानी फेर दिया, फिल्म मस्त और चकाचक है। काफ़ी समय बाद ऐसी फिल्म देखी जिसे देख लगा कि टिकट पर खर्च किए गए सवा दो सौ रूपए पूरी तरह वसूल हुए।
तीन सप्ताह पूर्व एन्जल्स एण्ड डीमन्स (Angels & Demons) देखी थी, फिल्म ठीक ठाक थी, कम से कम द डा विन्ची कोड (The Da Vinci Code) से तो लाख टके बेहतर थी क्योंकि इसमें कहानी को भगाया नहीं गया था खामखा, जिसने उपन्यास न भी पढ़ा हो उसको समझ आ जाए ऐसी थी। पिछले सप्ताह टर्मिनेटर सॉल्वेशन (Terminator Salvation) देखी लेकिन उससे पूरी आशा थी कि फिल्म में स्पेशल इफेक्ट्स (special effects) के अतिरिक्त कुछ खास देखने को नहीं होगा, जैसा कि हर टर्मिनेटर (Terminator) फिल्म में अब तक हुआ है, क्रिश्चियन बेल (Christian Bale) की मौजूदगी से कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि अदाकारी के लिए अधिक जगह ही न थी।

लेकिन आईस एज 3 (Ice Age 3) ने मन प्रसन्न किया, फिल्म में एनिमेशन (animation) तो बढ़िया है ही, साथ ही मज़ेदार और हास्यजनक भी है, सीरियस होकर इस फिल्म को देखा ही नहीं जा सकता!! ऐली (Ellie) का किरदार पिछले भाग में भी बढ़िया लगा था और इसमें भी बढ़िया लगा, नए किरदार के रूप में बक (Buck) भी पसंद आया, बाकी आईस एज शृंखला में अपना ऑलटाईम पसंदीदा किरदार तो प्रागैतिहासिक सेबरटुथ्ड बिल्ली (Sabre-toothed Cat) डिएगो (Diego) है!
वैसे यह फिल्म थ्री डी (3D) में देखने की सोच रहा था लेकिन यहाँ आसपास सिर्फ़ गुड़गाँव के पीवीआर एम्बियन्स प्रीमियर (PVR Ambience Premiere) में ही यह लगी थी और मार पड़े पीवीआर (PVR) वालों की वेबसाइट बनाने वाले फटीचर को कि कल वहाँ सीट बुक करवाते समय पंगा पड़ गया और सीट बुक न हुई। पंगे के बारे में एक अलग पोस्ट में ज़िक्र करूँगा।
इस फिल्म की कहानी बहुत जबरदस्त नहीं है, लेकिन इसको फिल्माया इस तरीके से गया है कि फिल्म मस्त बनी है। डॉयलाग, स्क्रीनप्ले तथा ओवरऑल एक्ज़ीक्यूशन (overall execution) मस्त है जिसके कारण फिल्म भी मस्त है। यदि आपने यह फिल्म नहीं देखी है और एक बढ़िया फिल्म देखना चाहते हैं तो इसको देख डालिए।
रेटिंग पूछी जाए तो मैं इसको 4/5 की रेटिंग दूँगा।

क्वानटम ऑफ़ सोलेस (Quantum of Solace) 6 नवंबर को भारत में रिलीज़ हुई, अमेरिका से पहले यह भारत में रिलीज़ हुई इससे कई लोगों की बाछें खिल गई। ऑफिशियली यह जेम्स बांड की बाईसवीं फिल्म है और पिछली फिल्म कसीनो रोयाल (Casino Royale) का अगला भाग है। तो बुकमाईशो पर मॉर्निंग शो की टिकट बुक करवाई (दिन के शो के मुकाबले पचास रूपए कम लगे) और रिलीज़ के अगले ही दिन यानि कि शनिवार 7 नवंबर को पहुँच गए फिल्म देखने।
कसीनो रोयाल के बारे में मैंने लिखा था कि फिल्म की कहानी ठीक ठाक है, सुन्दर जगहों पर फिल्माया गया है लेकिन नए नवेले बांड बने अभिनेता डेनिएल क्रेग का अभिनय कुछ खास न था। इस नई फिल्म क्वानटम ऑफ़ सोलेस में ठीक इसका विपरीत हुआ लगा। इस फिल्म में लोकेशन फालतू सी थीं क्योंकि उनको कहानी में फिट बैठाना था और कहानी का क्या कहें, मैंने इससे वाहियात कहानी वाली शायद ही कोई बांड फिल्म देखी हो (मैंने लगभग सभी बांड फिल्म देख रखी हैं एक-दो को छोड़ जिनको शीघ्र ही देखा जाएगा)!! सिर्फ़ एक बात जो इस फिल्म में अच्छी लगी वह थी डेनिएल क्रेग का अभिनय जो कि पिछली फिल्म के मुकाबले काफ़ी बेहतर लगा, डेनिएल ने काफ़ी मेहनत की है ऐसा साफ़ दिखाई दिया। अभिनय सधा हुआ था और एक खास बात इस फिल्म की यह लगी कि बांड का किरदार शो ऑफ़ (show off) करने की अपेक्षा काम पूरा करने की सोच लिए दिखा। इससे पहले ऐसा मैंने सिर्फ़ बीसवीं बांड फिल्म डाई अनदर डे (Die Another Day) में देखा था जिसमें बांड के किरदार को मेरे अभी तक के सबसे अधिक पसंदीदा बांड अभिनेता पियर्स ब्रॉसनेन ने निभाया था।
खैर, इस फिल्म पर आएँ तो बहुत ही वाहियात सी कहानी लिए हुए है। एक अमेरिकन कंपनी और उसका मालिक दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया के पानी पर कब्जे के चक्कर में होता है ताकि उस देश को ऊँचे दाम पर पानी बेच सके। इसके लिए वह एक तड़ीपार किए गए फौजी जनरल की मदद करता है ताकि जनरल देश की सत्ता पर काबिज़ हो सके और फिर जनरल से पानी खरीदने के करार पर दस्तखत करने को कहता है। जब जनरल आनाकानी दिखाता है तो विलेन जनरल को धमकाता है कि यदि दस्तखत नहीं किए तो जनरल का सहयोगी खुद जनरल को गोली मार देगा और मजबूरन जनरल दस्तखत कर देता है। मुझे यह समझ नहीं आया कि यदि विलेन इतना ही ताकतवर था तो इस जनरल को सत्ता पर बिठाकर क्या लाभ स्वयं अपना ही कोई बंदा क्यों नहीं बिठा दिया जो विलेन की सभी बातें आराम से मानता?? और बोलिविया जैसे फटीचर देश के पानी पर काबिज़ होकर कौन सी दौलत पाने की फिराक में था जब वह देश और उसकी जनता खुद ही गरीबी का शिकार है??
कुल मिलाकर इस फिल्म के बारे में कहने को कुछ नहीं है, मामला एकदम बकवास और पैसे की बर्बादी दिखा। कहानी किसी नौसिखिए फालतू कहानीकार द्वारा लिखी गई जान पड़ी, लोकेशन आदि कहानी के साथ फिट बिठाई हुई थीं। इस फिल्म में भी पिछली फिल्म की ही भांति गैजेट्स आदि नहीं दिखाए गए हैं जिनसे कोई खास फर्क नहीं पड़ता। मुझे याद नहीं इससे पहले किसी बांड फिल्म में बांड गर्ल को कम ग्लैमरस दिखाया गया हो लेकिन इस वाली फिल्म में एक नया यह भी दिखा कि बांड गर्ल बनी यूक्रेनियन सुन्दरी ओल्गा कुरल्येन्को की सुन्दरता को दबा के कम ग्लैमरस दिखाया गया है।
मैंने तो इस बात का शुक्र मनाया कि मॉर्निंग शो देखा और पचास रूपए बचा लिए वर्ना 115 की जगह 160 रूपए खर्च होते दिन वाले शो में। कायदे से तो मॉर्निंग शो वाले 115 रूपए भी बर्बाद ही गए इस फिल्म पर!!
रेटिंग की कहें तो मैं इसको पाँच में से सिर्फ़ एक अंक दूँगा और वह भी डेनिएल क्रेग के सुधरे हुए अभिनय के लिए जो कि इस फिल्म में अकेली अच्छी चीज़ दिखी, अन्यथा यह फिल्म पाँच में से शून्य की ही हकदार है!!
इधर मेरे मित्र अभिषेक ने मुझे अपने मोबाइल पर हिन्दी दिखाई, उधर अपनी उत्सुक्ता बढ़ गई कि क्या उपाय किया, क्या जुगाड़ लगाया जो ऐसा महान कार्य हुआ और विन्डोज़ मोबाइल पर हिन्दी चली!! बहुत कहने पर आखिरकार अभिषेक ने वह राज़ बता ही दिया कि कैसे यह काम किया और साथ ही अपने ब्लॉग पर भी पोस्ट ठेल दी। उपाय पता लगते ही मैंने भी तुरंत सॉफ़्टवेयर डाऊनलोड कर अपने विन्डोज़ मोबाइल वाले फोन पर इंस्टॉल किया और जब सॉफ़्ट रीसेट (soft reset) होकर फोन दोबारा चालू हुआ तो उस पर हिन्दी दिख रही थी, न केवल दिख रही थी बल्कि लिखी भी जा रही थी। ऐसी बढ़िया हिन्दी लिखी जा रही थी कि मैंने एक पोस्ट मोबाइल पर लिखकर ब्लॉग पर ठेल दी।
यानि हिन्दी दिखती भी चकाचक है और लिखी भी मस्त जाती है, जैसा कि आप निम्न स्क्रीनशॉट (screenshot) में देख सकते हैं।



लेकिन इस सॉफ़्टवेयर में अभी कुछ समस्याएँ हैं।
हिन्दी कैसे गड़बड़ा जाती है यह निम्न स्क्रीनशॉट (screenshot) में देखें:


वैसे इस सॉफ़्टवेयर की सैटिंग में हिन्दी निष्क्रिय करने के बाद आप हिन्दी लिख तो सकते हैं लेकिन मात्राएँ ठीक से नहीं लगा सकते, “इ” की मात्रा अक्षर लिखने के बाद लगाने की जगह पहले लगानी होती है। इससे फोन में तो मामला ठीक दिख जाएगा लेकिन तभी तक जब तक इसकी सैटिंग में हिन्दी निष्क्रिय है, क्योंकि यह मात्रा लगाने का सही तरीका नहीं है।
दो अन्य समस्याएँ जो मैंने नोट करी वह हैं:
अब इन दोनों समस्याओं में पहली समस्या का तो पता नहीं कि वह विन्डोज़ मोबाइल की है कि नहीं, लेकिन दूसरी समस्या यकीनन विन्डोज़ मोबाइल की दिखती है कि उसका क्लिपबोर्ड (clipboard) देवनागरी अक्षरों को भ्रष्ट कर देता है।
इस सॉफ़्टवेयर के द्वारा वैसे हिन्दी में लघु संदेश भी भेजे जा सकते हैं लेकिन लघु संदेश लिखने के लिए सॉफ़्टवेयर की सैटिंग में हिन्दी को निष्क्रिय करना पड़ता है क्योंकि इस सॉफ़्टवेयर में मौजूद गड़बड़ के कारण हिन्दी का विकल्प सक्रिय रहने पर लघु संदेश काम नहीं करते जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है। हिन्दी का विकल्प निष्क्रिय करने पर लघु संदेश टूटी-फूटी हिन्दी में लिख भेजा जा सकता है और हिन्दी सपोर्ट करने वाले दूसरे मोबाइल पर यह टूटी-फूटी हिन्दी में दिखता है।


यह संदेश मैंने अपने विन्डोज़ मोबाइल से अपने (Nokia 7250i) नोकिआ 7250आई पर भेजा जिसमें हिन्दी दिखती है और उसमें जैसा कि अपेक्षित था हिन्दी टूटी फूटी नज़र आई। सही हिन्दी भी नज़र आ सकती है और भेजी जा सकती है, लेकिन उसके लिए इस सॉफ़्टवेयर में हिन्दी के विकल्प को निष्क्रिय करके हिन्दी लिखनी होगी और आपको सही कुँजियाँ दबानी होंगी। ऐसा करने से स्क्रीन पर हिन्दी टूटी फूटी नज़र आएगी लेकिन असल में होगी सही और सही संदेश जाएगा।
मैंने इस सॉफ़्टवेयर के निर्माता को ईमेल लिख के इन समस्याओं के बारे में अवगत करा दिया है, देखते हैं कि वे कब इनको ठीक करते हैं।
हाँ तो अब आप सोच रहे होंगे कि सारी रामायण लिख डाली लेकिन सॉफ़्टवेयर का नाम नहीं बताया, तो वह भी बताए देते हैं। सॉफ़्टवेयर है आएरॉन्स हिन्दी सपोर्ट (Eyron’s Hindi Support) और इसको आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं। इस सॉफ़्टवेयर को डाऊनलोड करने से पहले दो बातों का ध्यान रखें:
मज़ेदार बात यह है कि इस सॉफ़्टवेयर को बनाने वाली कंपनी आएरॉन नाम की एक इज़राइली सॉफ़्टवेयर कंपनी है!!
यह सॉफ़्टवेयर इस दिशा में एक अच्छा कदम है, आशा है कि आगे और भी बढ़िया उपाय सामने आएँगे। तब तक यदि आपके पास विन्डोज़ मोबाइल पर चलने वाला टच स्क्रीन फोन है तो इसका प्रयोग कर आप भी अपने मोबाइल में हिन्दी के मज़े लीजिए और हिन्दी में ब्लॉग पोस्ट लिखिए।
एकाध सप्ताह पहले गुड़गाँव में लैन्डमार्क स्टोर में एक उपन्यास देख रहा था पढ़ने के लिए। उससे एकाध दिन पहले ही एक उपन्यास, रिवर गॉड (River God), पढ़ के समाप्त किया था और उसका अगला भाग, द सेवन्थ स्क्रॉल (The Seventh Scroll), खोज रहा था। परन्तु वह लैन्डमार्क वालों के पास था नहीं तो फिलहाल काम चलाने के लिए मैंने एक अन्य उपन्यास ले लिया।
तभी याद आया कि एक संगीत की सीडी भी लेनी है जो कि शांत और मधुर हो, कुछ शास्त्रीय संगीत की तर्ज़ पर जिसमे मन को शांत करने की कूव्वत हो न कि उसको और उग्र करने की। संगीत सिर्फ़ वाद्य यंत्रों का हो तो बढ़िया, संस्कृत के श्लोक शांत मधुर आवाज़ में गाए हुए हों जिनके साथ वैसा ही शांत मधुर संगीत हो तो और भी बढ़िया। ऐसा संगीत प्रायः मेडिटेशन और योग करते समय भी उपयोगी होता है क्योंकि यह मन को शांत करने वाला शीतल संगीत होता है। लैन्डमार्क के संगीत वाले भाग में योग और मेडिटेशन के नाम पर बनी हुई तमाम सीडी देखी जिनमें लगभग सभी कचरा थीं जो कि आजकल बाज़ार में मौजूद योग तथा मेडिटेशन (Meditation) के फैशन (बहुत लोग सिर्फ़ फैशन के कारण ही इनको करते हैं क्योंकि इनको करने वाला फैशनेबल लगता है) से ग्रस्त लोगों को टार्गेट करके बनाई जाती हैं जिनमें तमाम तरह का कचरा परोसा जाता है।

लेकिन सभी कचरा नहीं था वहाँ, कुछेक अच्छी एल्बम भी थीं, उनमें से कुछ मेरे पास पहले से हैं। कुछ और वहाँ पंडित शिवकुमार शर्मा, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया की थीं लेकिन मैं अब थोड़ा ज़ायका बदलने के लिए इनसे अलग कुछ और लेना चाह रहा था। पंडित शिवकुमार शर्मा, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, वनराज भाटिया आदि के तो अपन वैसे ही पंखे हैं।
पंडित जसराज भी दिखे और कुछेक अन्य शास्त्रीय संगीत वाले पंडित भी दिखे लेकिन वह थोड़ा भारी-भरकम टाइप का संगीत लग रहा था। आखिरकार एक हल्के-फुल्के संगीत की सीडी दिखी – मूड्स ऑफ़ योग (Moods of Yoga) शृंखला की – मुद्रा (Mudra)। यह ठीक ठाक लग रही थी तो इसको ले लिया कि आज़मा के देखते हैं कि पंडित शिवकुमार शर्मा के चेले पंडित सतीश व्यास कैसा संतूर (Santoor) बजाते हैं।
उस दिन यह सीडी लाकर रख दी लेकिन सुनना नहीं हो पाया क्योंकि कंप्यूटर में डीवीडी राइटर का ड्राइवर (driver) खराब हो गया था जिस कारण दोनो डीवीडी राइटर बेजान पड़े थे। अभी बीते सप्ताहांत ही फुर्सत मिली मामले को ठीक करने की और कल रात आखिरकार वह सीडी सुनी। सुनकर वाकई मज़ा आ गया, पंडित सतीश व्यास ने वाकई बड़ी नफ़ासत और तबीयत से संगीत दिया है। इस सीडी में छह गीत हैं, जिनमें पहले तीन गीत दोपहर के राग भीमपालसी पर आधारित हैं जो कि मन को शांत करने का काम करता है। यह तीनों गीत कुल मिलाकर तकरीबन 32 मिनट की अवधि के हैं जिसमें यह अच्छे खासे अशांत मन को शांत कर दें। इसके बाद तकरीबन 31 मिनट की अवधि के तीन गीत राग पुरिया धनाश्री पर आधारित हैं जो कि शांत मन को ध्यान की ऊँचाईयों पर ले जाने में पूरी तरह सहायक है।
कुल मिलाकर एक बढ़िया सीडी है, पैसे की पूरी वसूली है। इस शृंखला की सभी एल्बम क्रमवार निम्न हैं:
Asana – The Awakening – [MP3] एमपी३ यहाँ खरीद सकते हैं
Dhyana – Evening Calm – [MP3] एमपी३ यहाँ खरीद सकते हैं
Shakti – Creativity Within – [MP3] एमपी३ यहाँ खरीद सकते हैं
अब तो बस अगला मौका लगने पर इस शृंखला की अन्य एल्बम लेनी हैं।
यदि आपको भी शांत, शीतल, मधुर वाद्य संगीत पसंद है तो पहले इस सीरीज़ की “मुद्रा” एल्बम अवश्य लेकर देखिएगा। यदि आप इस प्रकार की किसी संगीत एल्बम के बारे में जानते हैं तो अवश्य बताईये।
कॉमिक्स पढ़ने वालों, कार्टून अथवा फिल्में आदि देखने वालों में कदाचित् ही ऐसा कोई होगा जिसने बॉब केन (Bob Cane) के प्रसिद्ध शाहकार बैटमैन (Batman) के बारे में न पढ़ा/सुना हो। सुपर हीरो बिरादरी में बहुत ही कम इक्के-दुक्के ऐसे सुपर हीरो हैं जिनके पास कोई सुपर पॉवर नहीं है और बैटमैन उनमें से एक है। यह सुपर हीरो अपनी शारीरिक शक्ति, हाथों की लड़ाई की दक्षता, अपने तेज़ दिमाग और वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से अपराध और अपराधियों के दिलो दिमाग पर हौव्वा बनता है। यही कारण है कि सुपर हीरो जमात में यह मेरा सबसे अधिक मनपसंद सुपर हीरो है।
18 जुलाई को आखिरकार लंबी प्रतीक्षा के बाद क्रिस्टोफर नोलन की बैटमैन शृंखला की अगली फिल्म “द डार्क नाइट” (The Dark Knight) रिलीज़ हुई। यह फिल्म मई में रिलीज़ होनी थी जैसा कि इसके शुरुआती ट्रेलर (trailer) में दिखाया था पर दो माह यह फिल्म लेट हो गई। अब अपने को बहुत बेसब्री से इस फिल्म की प्रतीक्षा थी और इत्तेफ़ाक की बात रही कि जिस दिन यह रिलीज़ हुई उसी दिन दोपहर को लगा कि सांय काल मेरे पास दो-तीन घंटे का खाली समय होगा। तुरंत बुकमाईशो पर देखा कि घर के आसपास यह फिल्म कहाँ लगी है, इत्तेफ़ाक ही रहा कि घर से मात्र 6-7 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित एक सिनेमा पर यह फिल्म लगी थी और सांय काल के प्रथम शो में कुछ सीटें खाली थीं। बस यह देख अपना दिल गार्डन-२ हो गया और तुरंत फिल्म की टिकट बुक करवा ली।

इस कड़ी की पिछली फिल्म के अंत में जोकर (Joker) का वर्णन आ गया था तो अपेक्षित था कि इस फिल्म में विलेन जोकर होगा जैसे कि पिछली फिल्म में रास-अल-घूल (Ra’s-al-Ghul) था। कहानी एक तरह से वहीं से आगे बढ़ती दिखती है जहाँ पिछली फिल्म में छोड़ी गई थी, यानि कि गॉथम शहर (Gotham City) में अपराध का बोलबाला है और बैटमैन तथा पुलिस में उसका साथी लूटेनेन्ट जिम गॉर्डन (Lieutenant Jim Gordon) अपराध के खिलाफ़ जंग छेड़ देते हैं और माफ़िया बॉसों का जीना दुश्वार कर देते हैं; रात में माफ़िया सरगना बैटमैन के खौफ़ के कारण बाहर नहीं निकलते और दिन में गॉर्डन का डर उन्हें बाहर निकलने नहीं देता। इधर ये दोनों लड़ाई के मामले में जंग छेड़े हुए थे उधर नए-२ डिस्ट्रिक्ट एटोर्नी (District Attorney) बने हार्वी डेन्ट (Harvey Dent) और उसकी सहयोगी तथा ब्रूस वेन (Bruce Wayne) यानि कि बैटमैन की बचपन की मित्र रेचल डॉस (Rachel Dawes) ने कानून की भूमि पर माफ़िया बॉसों का जीना दुश्वार कर रखा होता है क्योंकि पहले की तरह कानून की गिरफ़्त से आराम से छूट जाने वाले अपराधी इन दोनों की बदौलत सीधे जेल जा रहे होते हैं। जहाँ कल तक शहर पर माफ़िया बॉसों की हुकूमत चलती थी वहीं आज उनको बैटमैन, गॉर्डन और डेन्ट से तीन तरफ़ा मार ऐसी पड़ रही होती है कि उनके लिए बचने की कोई जगह नहीं रहती। हालात ऐसे हो जाते हैं कि माफ़िया बॉसों की हालत डेस्परेशन तक पहुँच जाती है और तब रोल आता है जोकर का, एक पागल सिरफिरा मसखरा जुनूनी दयाहीन अपराधी, जो माफ़िया बॉसों की आधी दौलत के बदले बैटमैन को ठिकाने लगाने की पेशकश करता है जिसे माफ़िया बॉस ठुकरा देते हैं क्योंकि कोई भी अपनी आधी दौलत नहीं देना चाहता इस काम के लिए। परन्तु कोई अन्य रास्ता न देख आखिरकार माफ़िया बॉस मान जाते हैं और जोकर को बैटमैन की सुपारी दे डालते हैं। फिर खेल शुरु होता है जोकर का जिसमें वह बैटमैन को आत्मसमर्पण पर मज़बूर करने के लिए पूरे शहर में ज़लज़ला ले आता है जिसमें जान और माल दोनो का ही भारी नुकसान होता है, दहशत का ऐसा नंगा नाच होता है जो कि किसी सुपर हीरो फिल्म में शायद ही दिखाया गया हो, आम लोगों के साथ-२ कई पुलिस वालों, यहाँ तक कि पुलिस कमिश्ननर की भी जान चली जाती है।
पूरा शहर बैटमैन के आत्मसमर्पण के लिए चिल्ला रहा होता है, जहाँ हार्वी डेन्ट शहर का हीरो होता है वहीं लोग बैटमैन को कोस रहे होते हैं कि उसकी वजह से उन सबकी जोकर ने वाट लगाई हुई होती है। एक पल ऐसा आता है कि ब्रूस वेन (Bruce Wayne) आत्मसमर्पण करने की ठान लेता है, उसका वफ़ादार नौकर और सहयोगी अल्फ्रेड उसे समझाता है कि बैटमैन को यह सब सहन करना होगा क्योंकि हालात सुधरने से पहले बुराई की चोटी तक तो पहुँचने ही थे और सवेरा अवश्य होगा। इधर हार्वी डेन्ट भी लोगों को समझा रहा होता है कि बैटमैन को जोकर के हवाले कर देने से कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि डेन्ट ना चाहते हुए भी यह मानता है कि इस तुरत फुरत अपराध के नाश में बैटमैन का बहुत बड़ा अद्वितीय योगदान है। सभी माफ़िया बॉसों आदि को जेल में डालने के लिए डेन्ट ने माफ़िया सरगनाओं के जिस अकाउंटेन्ट की सहायता ली होती है उसका हांगकांग से अपहरण करके बैटमैन ने ही गॉथम की पुलिस को सौंपा होता है, एक ऐसा काम जो उनमें से कोई और नहीं कर सकता था।
फिर क्या होता है? यह तो आप फिल्म देखकर ही जानिए। फिल्म के अंत में जब जोकर पकड़ा जाता है तो वो कुबूल करता है कि बैटमैन को वाकई भ्रष्ट नहीं किया जा सकता, उसको कितना ही उकसा लो कितना ही प्रताड़ित कर लो लेकिन वो ज़ाती तौर पर बदला नहीं लेता और जोकर जैसे मुजरिम की भी जान नहीं लेता।
इस फिल्म में बैटमैन के एक बहुत ही करीबी की मृत्यु हो जाती है, उस करीबी व्यक्ति की जिसने ब्रूस वेन को यह समझाया था कि कानून मरा नहीं है और खुद के लिए बदला लेना और इंसाफ़ करना दो अलग-२ चीज़े हैं, ऐसी बातें जिन्होंने आगे चलकर ब्रूस को बैटमैन बनकर अपराध के खिलाफ़ लड़ने और हर मुजरिम को कानून द्वारा सज़ा दिलवाने के लिए प्रेरित किया।
हार्वी डेन्ट एक मुजरिम बन जाता है, जानने वाले जानते होंगे कि हार्वी डेन्ट ही अपराधी टू फेस (Two Face) होता है। लोगों के हौसले हार्वी डेन्ट की काली करतूतों के कारण पस्त न हो जाएँ इसके लिए बैटमैन कमिश्नर गॉर्डन को इस बात के लिए मना लेता है कि वह डेन्ट द्वारा किए गए खून बैटमैन के सिर मढ़ दे ताकि लोगों के विश्वास और हौसले को ठेस न पहुँचे। और इधर गॉर्डन पुलिस मुख्यालय के ऊपर लगे बैट सिग्नल (Bat Signal) (बैटमैन को मदद के लिए बुलाने का एक ज़रिया) को नष्ट करता है उधर बैटमैन को पकड़ने के लिए पुलिस की तलाश शुरु हो जाती है, जिन पाँच लोगों की हत्याओं का दोष बैटमैन ने अपने ऊपर लिया होता है उसमें दो पुलिस वाले भी होते हैं। इधर पुलिस बैटमैन के पीछे निकलती है उधर गॉर्डन का पुत्र पूछता है कि बैटमैन क्यों भाग गया जब उसने कुछ गलत किया ही नहीं, तो उत्तर में गर्व मिश्रित दुख के साथ गॉर्डन कुबूलता है कि पुलिस अब बैटमैन का पीछा करेगी, वह हीरो नहीं है बल्कि गॉथम शहर का एक संरक्षक है, एक चौकस रखवाला, द डार्क नाइट (the dark knight)।
अमूमन होता है कि फिल्मों के ट्रेलर बहुत बढ़िया होते हैं जो कि फिल्म के बारे में अति उत्साहित कर देते हैं और फिल्म बाद में फुस्स ही निकलती है। लेकिन बैटमैन की इस फिल्म के बारे में मैंने उल्टा ही महसूस किया, इसके ट्रेलरों ने फिल्म के बारे में खास उत्साहित नहीं किया था, फिल्म देखने से पहले मन में एक तरफ़ यह भी आशंका घेरे हुए थी कि कहीं फिल्म फुस्स न निकल जाए जब ट्रेलरों में ही कोई खास दम नहीं था। परन्तु फिल्म ने सारी आशंकाओं को चकनाचूर कर दिया और मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि अभी पिछले कुछ वर्षों में बनी सुपर हीरो फिल्मों में यह अभी तक की सबसे बढ़िया फिल्म है। अभी तक सुपर हीरो फिल्मों में स्पाइडरमैन की ही फिल्में टॉप पर थीं लेकिन मैं समझता हूँ कि इस फिल्म ने स्पाइडरमैन की अभी तक की आई तीनों फिल्मों को उठाकर नीचे फेंक दिया है, वे इसके सामने कहीं भी नहीं टिकती। ऑयरन मैन (Iron Man) का तो इससे कोई मुकाबला ही नहीं है और सुपरमैन (Superman) की जो अभी हाल ही में वापसी हुई थी उसका बैटमैन की इस फिल्म से मुकाबला करना इस बैटमैन फिल्म की बेइज़्ज़ती होगी।
कहने की आवश्यकता नहीं कि यह फिल्म दूसरी सुपर हीरो फिल्मों को ही नहीं वरन् अन्य फिल्मों को भी चारों खाने चित्त करती है। और इसका प्रमाण बॉक्स ऑफिस पर इसकी सफ़लता भी है, पहले दिन ही इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के पूर्व रिकॉर्ड तोड़ डाले और पाँच दिन के अंदर-२ बीस करोड़ डॉलर की कमाई कर डाली।
कलाकारों की बात की जाए तो पिछली फिल्म की भांति इस फिल्म में भी क्रिस्टियन बेल (Christian Bale) ने बैटमैन तथा ब्रूस वेन के किरदार में काफ़ी अच्छा अभिनय किया है। अल्फ्रेड (Alfred) बने माइकल केन (Michael Caine) और लूशियस फ़ॉक्स (Lucius Fox) बने मॉर्गन फ्रीमैन (Morgan Freeman) के अभिनय के तो कहने ही क्या, दोनो मास्टर हैं और फिल्म में अपने किरदारों को मिले कम समय में भी दोनों ने शानदार अभिनय किया है। पुलिस लूटेनेन्ट (और बाद में कमिशनर) गॉर्डन (Lieutenant Gordon) को इस फिल्म में पिछली फिल्म के मुकाबले अभिनय का अधिक स्कोप मिला जिसे पिछली बार ही की तरह गैरी ओल्डमैन (Gary Oldman) ने बखूबी अदा किया है, वह एक बढ़िया अभिनेता हैं।
कई लोग इस फिल्म के बारे में इसलिए भी उत्सुक दिखे क्योंकि यह अभिनेता हीथ लेजर (Heath Ledger) की आखिरी फिल्म है, इस वर्ष जनवरी में हीथ की मृत्यु हो गई। लेकिन मुझे जोकर बने हीथ का अभिनय ऐसा कुछ खास नहीं लगा, जोकर का किरदार काफ़ी पॉवरफुल है और हीथ के साधारण अभिनय ने काफ़ी अधिक गुंजाइश छोड़ दी।
एक अन्य किरदार का अभिनय जो मुझे फालतू लगा वह है रेचल डॉस बनी मैग्गी गायलेनहॉल (Maggie Gyllenhaal) जिसने बिलो पार (below par) अभिनय कर पूरे किरदार की वाट लगा दी।
पिछली फिल्म में रेचल डॉस बनी केटी होम्स (Katie Holmes) ने भी कोई खास अभिनय नहीं किया था पर वह फिर भी मैग्गी के अभिनय के मुकाबले ठीक ठाक ही था। मुख्य किरदारों में एकलौता स्री किरदार और उसकी भी ऐसी वाट लगना – वाकई बहुत अफ़सोसजनक है। लेकिन खुशी की बात है कि इनके बेकार अभिनय से ओवरऑल फिल्म की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा और फिल्म एकदम चकाचक बन पड़ी है।
यदि आप एक अच्छी थ्रिलर फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको एक पल के लिए भी चैन से न बैठने दे और पूरे समय उत्सुक और उत्साहित रखे तो यह फिल्म अवश्य देख आईये। मेरे अनुसार यह फिल्म पाँच में से पौने पाँच की रेटिंग की अधिकारी है। जैसे ही इस फिल्म की डीवीडी रिलीज़ होती है वैसे ही तुरंत उसकी एक प्रति मेरे कलेक्शन में जाएगी, यह फिल्म रखने योग्य है।
रेटिंग: 4.75 / 5