सभी लोग हर चीज़ का ज्ञान नहीं रखते, ऑलराऊंडर अति दुर्लभ (या विलुप्त) प्रजाति है, हम जैसे आम जन एक-दो चीज़ों का ही ज्ञान डिटेल में रख पाते हैं।

अभी कुछ दिन पहले एक परिचित बोले कि डिजिटल कैमरा लेने की सोच रहे हैं। अभी तक वे फिल्म वाला कोडेक (Kodak) चला रहे थे, अब डिजिटल होना चाहते हैं, फिल्म में झंझट बहुत है और बारंबार फिल्म डालनी पड़ती है। मुझसे बोले कि यार तुम बड़ा सा औकात वाला कैमरा लिए हुए हो, जानकारी भी रखते हो तो एक कैमरा हमें भी सुझाओ।
मैंने उनसे पूछा बजट कितना है तो वे बोले कि बारह-तेरह हज़ार तक है। मैंने कहा कि कुछ बढ़ाने की गुंजाइश है क्या तो वे बोले कि तुम इतने में ही बढ़िया सा कैमरा करवाओ। तो मैंने उनको समझाया कि कैमरे के साथ एक मेमोरी कार्ड भी लेना होगा (दो ले लें तो बेहतर है) जिसमें फोटो स्टोर होती है, एक बार की इंवेस्टमेन्ट होती है, फिल्म की भांति बार-२ नहीं बदलना होता। उन्होंने पूछा कि यह कितने का आता है तो मैंने कहा आने को तो घस्सी से घटिया ऐं-वैं कार्ड तीन-चार सौ में आ जाते हैं लेकिन सैनडिस्क (Sandisk) का कार्ड लें तो बेहतर होगा, 4GB का अल्ट्रा २ (Ultra II) वाला कार्ड हज़ार-ग्यारह सौ का आ जाएगा और यदि उससे बेहतर एक्सट्रीम ३ (Extreme III) चाहिए तो वह तकरीबन दो हज़ार का आ जाएगा। बाकी रहा कैमरा तो वह स्लिम-ट्रिम छरहरी काया का चाहिए या डील-डौल वाला भी चलेगा। तो इस पर उत्तर मिला कि स्लिम-ट्रिम चाहिए, देखने में भी अच्छा हो और काम भी बढ़िया करे। मैंने पूछा कि कहाँ से ले रहे हैं तो बोले इससे क्या फर्क पड़ता है, तो मैंने बताया कि यहीं से लेंगे तो रिटेल में अमूमन कैमरे आदि महंगे मिलते हैं, अमेरिका या दुबई से लेंगे तो सस्ता मिल जाएगा। तो वे बोले कि अमेरिका में फलाना रिश्तेदार है जो अगले महीने आने वाला है, उसी के हाथ मंगवा लिया जाएगा।

सब बात एनालाइज़ (analyse) करने के बाद मैंने उनसे कहा कि पैनासोनिक ल्यूमिक्स टीज़ेड5 (Panasonic Lumix TZ5) ले लें, बजट के हिसाब से वही सबसे बढ़िया कैमरा है। पिछले साल आया था, बढ़िया कैमरा है और तकरीबन पौने तीन-तीन सौ डॉलर में आ जाएगा। नौ मेगापिक्सल का कैमरा है जिसमें 10x का ऑप्टिकल ज़ूम (optical zoom) है, पैनासोनिक की बढ़िया ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइज़ेशन (optical image stabilization) है और लेएका(leica) का लेन्स लगा है, 28mm वाइड एंगल (wide angle) से लेकर 280mm टेलीफोटो (telephoto) तक जाता है।
पैनासोनिक का नाम सुन के उन्होंने मुँह बिचकाया, बोले उनका एक मित्र प्रोफेशनल फोटोग्राफ़र है, अपना फोटो स्टूडियो चलाता है और उसके अनुसार प्रोफेशनल फोटोग्राफ़र कैनन (canon) और निकोन (nikon) को ही पसंद करते हैं क्योंकि वे ही सबसे बढ़िया कैमरे बनाते हैं। मैंने उनके मित्र की पोल खोलना ठीक न समझा, उनका मित्र है तो कदाचित् उनको अपने मित्र के बारे में ऐसा सुनना अच्छा न लगता अन्यथा ऐसे फोटो स्टूडियो वाले प्रोफेशनल फोटोग्राफ़रों के बारे में मैं क्या राय/विचार रखता हूँ उनसे इन साहब को अवश्य परिचित करवाता।
तो उनको मैंने सिर्फ़ इतना कहा कि आप प्रोफेशनल नहीं हैं वरन् डिजिटल कैमरों के मामले में नए हैं, इसलिए प्रोफेशनल लोग क्या इस्तेमाल करते हैं वो छोड़िए और वह देखिए जो आपके लिए उत्तम है, क्योंकि प्रोफेशनल वालों के प्रोफेशनल कैमरे बहुत महँगे आते हैं और काफ़ी बड़े होते हैं।

दाम और आकार की बात सुन परिचित महोदय सीधे हो गए और लेवल पर आ गए।
पैनासोनिक को लेकर वे अभी भी संशय में थे तो मैंने बताया कि फालतू कंपनी नहीं है, पहले इनके कैमरे कोई अधिक नहीं पूछता था लेकिन पिछले कुछ समय से ये एक के बाद एक हिट और धाकड़ आईटम निकाल रहे हैं। वे पूछ बैठे कि तुमने कौन सा कैमरा लिया हुआ है तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरा भी पैनासोनिक है (Panasonic Lumix FZ50), पिछले दो वर्ष से इस्तेमाल कर रहा हूँ और बढ़िया कैमरा है।
अब उनका संशय दूर हुआ तो वे उस बात पर आए जो मैंने पहले कही थी और वे उसको तभी से पूछने को बेचैन नज़र आ रहे थे। बोले कि दो मेमोरी कार्ड लेने का क्या लाभ जैसा कि तुमने कुछ देर पहले बतलाया। तो मैंने कहा कि दो कार्ड लेने का यह लाभ रहता है कि मानो एक खराब हो गया तो दूसरा तो चलता रहेगा। इस पर वे बोले कि कार्ड की वारंटी तो आती होगी तो उस पर बदल जाएगा। मैंने कहा कि वारंटी में जब बदलेगा तो बदलेगा, लेकिन यदि कार्ड छुट्टियाँ मनाते हुए खराब हो गया तो बाकी के फोटो कैसे खींचे जाएँगे? और यदि कार्ड खराब हो गया और अगले दिन छुट्टियाँ मनाने निकलना है तो कैसे फोटो लेंगे? और यदि कार्ड वारंटी के बाद खराब हुआ तो खड़े पैर कहाँ से दूसरा कार्ड जुगाड़ेंगे? इस पर बात उनके पल्ले पड़ गई और बैकअप कार्ड का महत्व उनको समझ आ गया। साथ ही मैंने कहा कि कोई आवश्यक नहीं है कि दो कार्ड लें, यदि बजट नहीं है तो एक ही ले लें और बैकअप कार्ड बाद में ले लें जब बजट बने, मैंने भी ऐसा ही किया था, शुरुआत में एक कार्ड लिया और बाद में ही दूसरा लिया था।
इतनी चर्चा और ज्ञान के बाद उनको डिजिटल कैमरे की तस्वीर ज़रा साफ़ नज़र आने लगी और धन्यवाद अदा कर वे घर की ओर बढ़ गए, कदाचित् अपने रिश्तेदार को कैमरा खरीदने के लिए कहने!!
यदि आप भी ऐसी किसी दुविधा में हैं कैमरा खरीदने के विषय में तो मैंने कुछ समय पहले डिजिटल कैमरों पर सरल शब्दों में चार भागों में एक लेख लिखा था, कदाचित् उसे पढ़ आपका ज्ञानवर्धन होगा और आप बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
कैमरे का कार्टून चित्र साभार: एवराल्डो कोएलहो
एक मित्र हैं, वो अपनी पसंद के मामलों में ज़रा टची (touchy) हैं, इसलिए जब मौका लगता है तो उनसे मौज ली जाती है।
उनसे मौज लेने का सबसे बढ़िया तरीका ये है कि पहले किसी तरह बात को एप्पल (apple) और उसके किसी उत्पाद पर ले आया जाए तदोपरान्त उसकी बखिया उधेड़ी जाए। ट्राईड एण्ड टैस्टिड (tried & tested) नुस्खा है और काम करने की 99% गारंटी होती है!!
अब अपन फुरसतिया जी जितने काबिल नहीं हैं मौज लेने में लेकिन काम चलाने भर मौज ले ही लेते हैं!!
कल रात कंप्यूटर बंद कर सोने जा रहा था तो इन्ही मित्र ने रोक लिया, बोले फोन खराब हो गया है, नया लेना है। तो थोड़ी देर हम अलग-२ मोबाइल फोनों पर चर्चा करते रहे, मैं सुझाव देता रहा और वो पूछते रहे। मामला समापन पर आ रहा था कि वो एकदम से आईफोन के बारे में पूछ बैठे!! बस अपने अंदर का शैतान जाग गया, बोला इन्होंने गुनाह किया है इसलिए सज़ा के तौर पर इनसे मौज ली जानी चाहिए। गुनाह इसलिए कि जानते बूझते हुए भी मुझसे आईफोन की सलाह माँग रहे थे!!

तो मौज लेने की शुरुआत मैंने आईफोन से ही करी, कहा कि आईफोन लेने से बेहतर है किसी गरीब को पैसे दान कर दो वो दुआ तो देगा!! उसके बाद मित्र को कोवोन एस9 (Cowon S9) का लिंक दिखाया और पूछा कि क्या ख्याल है। धीरे-२ बात आईपॉड (iPod) पर आ गई जो इन मित्र की दुखती रग है, इनको अपने आईपॉड से बहुत प्यार है और उसकी खिलाफ़त बर्दाश्त नहीं कर सकते!!
इधर अपने को मौज लेनी थी तो इसलिए आईपॉड की वाजिब (खामखा नहीं) बुराई शुरु!!
इन मित्र और मेरे बीच एप्पल (apple) और आईपॉड (iPod) को लेकर कई बार बहस हुई है, इसलिए ये अब फीचर नहीं गिनाते आईपॉड (iPod) के क्योंकि मैं उससे अधिक फीचर और क्वालिटी किसी और में गिना सकता हूँ। इसी कारण इन मित्र ने पिछले कुछ समय से एक्सक्लूसिविटी (exclusivity) की ढाल थाम रखी है, उसी को हर बार आगे कर देते हैं कि एप्पल और आईपॉड एक्सक्लूसिव (exclusive) चीज़ें हैं, हर कोई अफोर्ड (afford) नहीं कर सकता और वो हर किसी के लिए नहीं बनाते। तो इस पर मैंने सोचा कि अब ये ढाल काट ही दूँ ताकि अगली बार किसी नई ढाल को वो थामें। मैंने कहा कि आईपॉड एक्सक्लूसिव नहीं है, हर राम श्याम और घनश्याम के पास है, आम चीज़ है, जनता की सवारी जैसे “हमारा बजाज”!! और एप्पल के हुक्मरानों से पूछो कि वो बाज़ार में सबसे अधिक हिस्सा नहीं चाहते क्या!!?? एप्पल और उसके उत्पाद रॉल्स रॉयस (Rolls Royce) नहीं हैं। रॉल्स रॉयस एक्सक्लूसिव है, वे लोग सबके लिए गाड़ियाँ नहीं बनाते, वही हैं जो ऐरे गैरों को बेचने से मना कर सकते हैं, वही हैं जो एक समय में सिर्फ़ शाही खानदानों को गाड़ियाँ बेचते थे, रॉयल्टी ओनली!! एप्पल कभी एक्सक्लूसिव नहीं था, वो तो अपनी बेवकूफ़ियों के कारण बाज़ार में ज़्यादा हिस्सा नहीं कब्ज़ा पाए और आज खिसयानी बिल्ली के माफ़िक अपने को एक्सक्लूसिव कहते हैं!!
वैसे भी एक्सक्लूसिविटी का क्या अचार डालना है? एमपी३ प्लेयर (MP3 Player) गाना सुनने के लिए होता है या शो ऑफ़ (show off) के लिए??!!
वैसे मन में आया कि साथ में ये भी जोड़ दूँ – एक्सक्लूसिव तो कचरे का डिब्बा भी होता है, जमादार के अलावा कोई नहीं ले जाता, तो क्या कीजिएगा एक्सक्लूसिविटी का!!
लेकिन फिर यह सोच यह नहीं कहा कि मौज की मात्रा अधिक हो जाएगी, मित्र हैं और टची भी हैं, बुरा मान गए तो कई दिन तक नाराज़ रहेंगे!!
फिर मेरे से मित्र बोले कि तुमने अभी नया आईपॉड टच नहीं देखा है, बढ़िया चकाचक मामला है। मैंने कहा कि आईपॉड टच देखने के तमन्नाई नहीं हैं, बाबा आदम के ज़माने की तकनीक है, आज भी टीएफ़टी (TFT) टच स्क्रीन (touch screen) प्रयोग कर रहा है एप्पल जबकि इस कोवोन एस9 (Cowon S9) को देखो, इसमें ऐएमओएलईडी (AMOLED) स्क्रीन है जो कि बैट्री बहुत कम खाती है और टीएफ़टी (TFT) के मुकाबले बेहतर तस्वीर दिखाती है जो कि अधिक क्रिस्प (crisp) होती है। साथ ही इसमें एक बार बैट्री चार्ज की तो 55 घंटे बेरोकटोक गाने सुने जा सकते हैं, है किसी एप्पल के लाल काले नीले पीले आईपॉड (iPod) में इतना दम?!!
और गाना ही क्यों, इसमें ग्यारह घंटे वीडियो भी देखा जा सकता है, बैट्री के मामले में आखिर कोवोन सबका बाप है!!
तो आखिरकार मित्र खीज से गए, बोले तुम कोवोन एस9 (Cowon S9) ले लो, तो हम बोले ले लिया है, आ जाएगा कुछ दिन में, और यह एक्सक्लूसिव सा भी है क्योंकि हर ऐरे गैरे नत्थू खैरे के पास नहीं होता।
मित्र तपाक से बोले तो क्या तुम एक्सक्लूसिविटी नहीं देखते तो मैंने कहा कि नहीं जनाब, एक्सक्लूसिविटी का क्या करेंगे, एमपी३ प्लेयर गाना सुनने के लिए होता है, इसलिए अपन तो किसी भी चीज़ को लेते हैं तो उसकी यूटिलिटी देखते हैं कि खर्च किए जाने वाले रोकड़े में कौन सी चीज़ अधिक मौज देती है और टिकाऊ होती है। भई अपन आम आदमी हैं, इसलिए वही सोच है, एक्सक्लूसिविटी तो रईस लोग… यानि फिल्थी रिच (filthy rich) या सनकी लोग चाहते हैं, हम जैसे गरीब मिडल क्लॉस लोग क्या करेंगे एक्सक्लूसिविटी का!!
तो इस तरह यह मौज कार्यक्रम समाप्त हुआ, मैंने सोचा कि चलो बहुत दिन बाद मित्र से मौज लेने का मौका मिला और उस मौके को किसी मौकापरस्त की तरह लपक लिया, ज़ाया नहीं जाने दिया!!
अभी पिछले सप्ताह मैंने पोस्ट किया कि कैसे सात प्रयासों बाद टचफ्लो 2डी (TouchFlo 2D) को मोबाइल सही तरीके से स्थापित कर ही लिया तो समीर जी ने कहा कि उनके समझ में तो नहीं आया पर यह मान के चल रहे हैं कि मैं कह रहा हूँ तो कुछ अच्छा ही होगा। इतना विश्वसनीय समझने के लिए उनका बहुत आभार प्रकट करने पर मैंने कहा कि बताएँगे ही नहीं दिखा भी देंगे कि क्या मामला है।
तो यह देखिए मामला:
( इस वीडियो को आप फुलस्क्रीन (Full Screen) पर भी देख सकते हैं, बस देखने के लिए प्लेयर में मौजूद प्रोग्रेस बार के दायीं ओर स्थित चौकोर बटन पर क्लिक करें। फुलस्क्रीन मोड में से निकलने के लिए अपने कीबोर्ड में एस्केप (Esc) बटन दबाएँ। )
एचटीसी (HTC) ने अपने टच (Touch) सीरीज़ के मोबाइल फोनों में एक नया इंटरफेस निकाला था जिसको उन्होंने नाम दिया था टचफ्लो 3डी (TouchFlo 3D) जिसमें स्क्रीन पर उंगली फिराने पर एक क्यूब (बोले तो घन) उपलब्ध होता है हर तरफ़ कुछ अलग-२ और बारंबार प्रयोग होने वाले शॉर्टकट उपलब्ध होते हैं जिनको अपने अनुसार सैट किया जा सकता है। इससे कई चीज़ों में आसानी रहती है। लेकिन अपने हाल ही में आए फोन टच डॉयमंड (Touch Diamond) और अभी ताज़ा-२ रिलीज़ हुए फोन टच एचडी (Touch HD) में उन्होंने टचफ्लो इंटरफेस का एक अलग रूप निकाला है जिसमें क्यूब नहीं है इसलिए यह दो आयामी इंटरफेस है न कि तीना आयामी।
तो हुआ यूँ कि टचफ्लो 3डी की ही भांति टचफ्लो 2डी इंटरफेस भी लोगों को काफ़ी भा गया और कुछ मोबाइल सॉफ़्टवेयर डेवलपरों ने एचटीसी टच डॉयमंड में से इस इंटरफेस को निकाल लिया और उनको थोड़ा सा इस तरह बदला कि एचटीसी के बाकी टचस्क्रीन फोनों में भी यह लग सके और उसको बीटा रिलीज़ के तौर पर निकाल दिया। मामला बढ़िया लगा तो मैंने भी अपने फोन में लगा के देखने की सोची और आखिरकार लगा लिया। अब लगा लिया तो एक वीडियो भी उतार लिया दिखाने के लिए कि आखिर इसमें ऐसा क्या है!!
वैसे इसके मौसम दिखाने वाले टैब को मैंने अपने वीडियो में ऊपर दिखाया ही है लेकिन उसमें एक और बढ़िया सी चीज़ नहीं दिखा पाया तो उसके लिए यूट्यूब पर निम्न वीडियो मिल गया:
इसमें कूल चीज़ यह दिखती है कि जिस जगह का मौसम आप देख रहे हैं यदि वहाँ बरसात हो रही है तो आपकी स्क्रीन पर भी बूँदे दिखाई पड़ती हैं मौसम देखते समय और गाड़ी के वाइपर की भांति एक वाइपर फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली बूँदों को साफ़ कर देता है!!
और यह टचफ्लो 2डी में इतना ही नहीं है जितना मैंने दिखाया है, मामला और भी काफ़ी है लेकिन मुझे उसकी आवश्यकता नहीं थी तो इसलिए इंस्टॉल नहीं किया – जैसे कि फोटो देखने के लिए एक टैब है जिसमें बस मौसम वाले टैब ही की भांति फोटो को हल्का सा खींच के ऊपर करो तो वह ऊपर से स्क्रीन से निकल जाती है और उसकी जगह नीचे से दूसरी फोटो स्क्रीन पर आ जाती है। ऐसे ही संगीत का भी टैब है जिसमें दाएँ-बाएँ करने पर गाने बदल जाते हैं और एक टैब गूगल मैप्स (Google Maps) का भी है। यह सब मामला मुझे अपने लिए अनावश्यक लगा इसलिए फोन की स्टोरेज मेमोरी बचाने के लिए मैंने इस सब तामझाम को इंस्टॉल नहीं किया।


परसों रात नींद नहीं आ रही थी तो ऐसे ही समय व्यतीत करने के लिए यह कार्टून बना लिया जो कि ठीक ठाक सा बन पड़ा। अब बन गया तो सोचा कि यहाँ ठेल दिया जाए।
यह कार्टून हाथ से अपने मोबाइल फोन पर बनाया(हिन्दी पाठ बाद में कंप्यूटर पर लिखा)। एक दशक से भी अधिक हुआ जब आखिरी बार इस तरह हाथ से चित्रकारी की थी; आठवीं कक्षा के बाद कभी इस तरह मौका नहीं लगा क्योंकि उसके बाद कभी चित्रकला मेरा सबजेक्ट नहीं रहा। उस समय मोटे कागज़ की स्केच बुक (sketch book) में 2बी की पेन्सिल से स्केच (sketch) बनाया जाता था और अब स्टाईलस (stylus) द्वारा पीडीए (PDA) फोन की टचस्क्रीन (touchscreen) पर बनाया! उस समय बनाने के लिए जगह अधिक थी, अब एक छोटी सी स्क्रीन ही है। उस समय दो-तीन तरह की पेन्सिल साथ रखी जाती थी अलग-२ छीली हुई और अब एक स्टाईलस ही है और उसके दबाव की मोटाई को आराम से बदला जा सकता है। वाकई समय कितना बदल गया है!