कुछ अरसा पहले मैंने अपने घर के नज़दीक स्थित ज्ञानी के अड्डे पर हुआ चॉकलेट आईस्क्रीम और नए मुल्लाओं का वाकया बयान किया था (यदि आपने नहीं पढ़ा है तो एक बार अवश्य पढ़ लें, मौज की मौज और कंटेक्सचुअल अर्थ भी समझ आएगा)। उसके अंत में मैंने ज़िक्र एक साहब और कॉन्टीनेन्टल खाने का किया था, आज मन में आया कि वो किस्सा भी बाँच दिया जाए।

कुछ अरसा पहले की बात है, मैं एक बरिस्ता में बैठा एक मित्र की प्रतीक्षा कर रहा था। पास ही की टेबल पर दो संभ्रांत दिखने वाले परिवार बैठे थे। वे लोग क्या बातचीत कर रहे थे यह याद नहीं लेकिन उनमें एक फैशनेबल अंकल अपनी ही उम्र के लगने वाले दूसरे अंकल से वार्तालाप के दौरान बोले कि उनको तो सुबह का नाश्ता कॉन्टीनेन्टल स्टाईल ही पसंद है यानि कि मक्खन लगे टोस्ट, दो अंडों का ऑमलेट और चाय। प्रायः आप किसी भी रेस्तरां/होटल में जाएँगे तो कॉन्टीनेन्टल नाश्ते के नाम पर यही मिलता है। पाँच सितारा होटलों के अतिरिक्त मैंने कहीं भी असली कॉन्टीनेन्टल नाश्ता मिलते नहीं देखा। हो सकता है कि आपकी उत्सुकता हो कि होता क्या है कॉन्टीनेन्टल ब्रेकफास्ट (continental breakfast)। जो नहीं जानते हैं उनके लिए बता देना बेहतर समझता हूँ कि कॉन्टीनेन्टल का अभिप्राय यहाँ पश्चिमी योरोप (ब्रितानिया के अतिरिक्त, मेनलैन्ड योरोप) है। अब मैं उन फैशनेबल अंकल की अक्ल पर तरस इसलिए खा रहा था कि उनको रत्तीभर भी ज्ञान नहीं कि टिपिकल (typical) कॉन्टीनेन्टल ब्रेकफास्ट क्या होता है।
दरअसल कॉन्टीनेन्टल ब्रेकफास्ट हल्का नाश्ता होता है (यदि फुल इंग्लिश/ऑयरिश/स्कॉटिश नाश्ते से तुलना की जाए) – इसमें कॉफ़ी (प्रायः काली), जूस, और क्रॉसौं (croissants) या पेस्ट्री (pastries) होते हैं। यह इंग्लिश ब्रेकफास्ट (english breakfast), ऑयरिश ब्रेकफास्ट (irish breakfast), स्कॉटिश ब्रेकफास्ट (scottish breakfast) अथवा अमेरिकी ब्रेकफास्ट (north american breakfast) जितना फुल नहीं होता।
ऐसे ही लोगों को अंग्रेज़ी नाश्ते के बारे में भी बहुत गलतफहमी रहती है, चाय और टोस्ट को ही अंग्रेज़ी नाश्ता समझते हैं। एक पारम्परिक फुल इंग्लिश ब्रेकफास्ट में निम्न आईटम होती हैं:

वैसे साथ में ब्लैक पुडिंग (खून में पकाया मांस) भी होती है लेकिन यह निश्चित आईटम नहीं होती, जगह-२ पर निर्भर करता है, इंग्लैंड के कुछ भागों में इंग्लिश ब्रेकफास्ट में यह शामिल होती है। इसी तरह साथ में पिसे हुए उबले आलू (mashed potatoes) भी हो सकते हैं।
अब यदि स्कॉटिश ब्रेकफास्ट की बात की जाए तो परंपरागत नाश्ता तो दलिया (porridge) है लेकिन फुल स्कॉटिश ब्रेकफास्ट में अंडे, बेकन, सॉसेज, स्कॉटिश स्टाइल ब्लैक पुडिंग, हैग्गीस (haggis) और पोटैटो स्कोन्स (potato scones) भी आ जाते हैं।
इसी प्रकार अमेरिकी नाश्ते में प्रायः टोस्ट, बेकन, अंडे, हैश ब्राऊन्स (hash browns), और जूस अथवा कॉफी होते हैं। मेरी जानकारी अनुसार इसमें परम्परागत या फुल का कोई चक्कर नहीं होता।
अब इसी कारण मुझे ऐसे होटल वालों पर कोफ़्त होती है कि लिखते कुछ हैं मेनू में और परोसते कुछ और ही हैं।
और उन फैशनेबल अंकल जैसे लोगों की अक्ल पर तरस आता है जो सिर्फ़ नेम ड्रॉपिंग करना ही जानते हैं, जबकि वास्तव में पता धेले का नहीं होता कि क्या कह रहे हैं। न जाने क्यों लोग अपनी अक्ल की सीमा से अधिक शो ऑफ़ (show off) करते हैं। ऐसा करने से वे अपनी ही बेवकूफ़ी ज़ाहिर करने का खतरा मोल लेते हैं, क्योंकि जिसके सामने शो ऑफ़ कर रहे हैं यदि वह जानकार व्यक्ति हुआ तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी शो ऑफ़ करने वाले व्यक्ति की?
अब ऐसे ही ज्ञान जी आईसक्रीम वाली पोस्ट पर अपने साथी अफ़सर की कॉफ़ी वाला किस्सा बताए थे, खामखा उनके साथी अफ़सर की किरकिरी हुई!!
क्रॉसौं की फोटो साभार roboppy तथा इंग्लिश ब्रेकफास्ट की फोटो साभार peasap – दोनों फोटो क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत
….. कटा नहीं – “कथा”, सोच समझ के पढ़िएगा, पुराण नहीं है!! इसलिए बाँचने के लिए भी कुछ अधिक मसौदा नहीं है। वो तो अनूप जी अपने बड्डे का हाल बतलाए कि क्या साजिश वगैरह हुई और कैसे वो जेब ढीली करने से बचे तो लगे हाथ मैंने पूछ लिया कि ये मोबाइल की साजिश क्या कनपुरियों में ही होती है (क्योंकि जीतू भाई के साथ भी हुई इसी महीने) या फिर यह सितंबरी लालाओं के साथ ही होता है। अब यदि कनपुरियों की बात है तो अपन इतने नहीं टेन्शनियाते लेकिन यदि सितंबरी लालाओं पर ही यह मार पड़ती है तो अपना टेन्शनियाना जायज़ है क्योंकि इन्हीं दोनों महानुभावों की ही भांति अपन भी सितंबरी लाल हैं। वैसे यदि अपने साथ साजिश होती तो मोबाइल की न होती, अपना हाल तो यूँ है कि यदि दो-तीन साल में नया मोबाइल फोन ले भी लिया जाए तो माता जी हड़का देती हैं कि काहे खामखा फिजूल खर्च किया जब पुराने मोबाइल पर कॉल सही तरीके से आ जा रही थी!!
वैसे एक रोचक बात यह देखने वाली है कि जीतू भाई, अनूप जी और मेरे जन्मदिन लगातार तीन सप्ताह में एक के बाद एक आते ही हैं, साथ ही सप्ताह के एक ही दिन भी पड़ते हैं, यानि कि ठीक सात-२ दिन के अंतराल के बाद। तो यदि जीतू भाई का जन्मदिन बुधवार को पड़ेगा तो अनूप जी का भी बुधवार को पड़ेगा और मेरा भी बुधवार को ही पड़ेगा, हा हा हा!!
खैर, तो अनूप जी अपने प्रश्न को तो टाल गए, बोले रूपा बनियान के माफ़िक यह भी अंदर की बात है, तुमको न बताएँगे!! और साथ में पूछ लिए कि अपने बारे में बताओ बड्डे कैसा कटा तो अपन सोचे कि चलो एक पोस्ट इसी पर ठेल देते हैं। अब जैसा कि पहले भी बयान किया, आजकल अपनी ट्यूब खाली है, भरने की प्रतीक्षा है और इसी कारण बड़बड़ाने के लिए मसौदा नहीं मिलता है। तो अब यदि कोई चीज़ अपने आप ही चलकर पास आ जाए और बड़बड़ाने का मौका दे तो उस मौके को छोड़ना बहुत ज़ालिमाना स्वभाव हो जाएगा, इसलिए अपन भी थाम लिए दोनों हाथों और पैरों से पकड़कर, कि अब तो बड़बड़ा के ही रहेंगे, चाहे बड़बड़ाने के लिए कुछ गर्म मसाला और चंकी चाट मसाला न हो, चाहे नमक मिर्च से ही काम चलाना पड़े, लेकिन बड़बड़ाएँगे अवश्य, आखिर इस ब्लॉग पर सबसे अधिक बड़बड़ाए ही हैं तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी यदि स्वयं ही चलकर आए मौके को छोड़ दिया जाए!!
हाँ तो अपने बड्डे के बारे में बाँचने के लिए कुछ अधिक नहीं है, साधारण ही दिन बीतता है। सिल्वर जुबली पिछली बार मना लिए थे और इस बार गोल्डन जुबली के लिए लाईन में लग गए हैं। अनूप जी तो बता ही चुके हैं कि वे माशाल्लाह किला फतह करने के निकट हैं, 2013 में वो किला फतह कर लेंगे!!
इधर रात को बारह बजने में आधा घंटा बाकी था, यानि कि ऑफिशियल बड्डे वाला दिन आने में समय था उधर एक अनजान नंबर से फुनवा आया और पूछा गया कि क्या अमित बोल रहे हैं। मैंने उत्तर दिया कि जी हाँ हम ही बोल रहे हैं तो फिर दूसरा प्रश्न पूछा गया कि क्या कल आपका जन्मदिन है। अब मुझे आश्चर्य हुआ कि भई नंबर पहचाना हुआ नहीं है, न ही आवाज़ पहचानी हुई और ये जनाब हमारा जन्मदिन जानते हैं। मैंने पूछा तो नाम सिर्फ़ “पाबला” बताया गया, एक बार को तो दिमाग में आया ही नहीं कि कौन साहब हैं लेकिन फिर कुछ और बात करने पर दिमाग में घंटी बजी कि ये हिन्दी ब्लॉगजगत के श्री बी.एस.पाबला हैं। वे बोले कि मेरे जन्मदिन की शुभकामना देती ब्लॉग पोस्ट लिख लिए हैं लेकिन एक बार कन्फर्म करना बेहतर जाना कि पता तो कर लें कि जन्मदिन कल ही है कि नहीं। मैंने कन्फर्म किया और उन्होंने अग्रिम ही शुभकामनाएँ दे दीं और भविष्य में संपर्क बनाए रखने की बात के साथ वह वार्तालाप समाप्त हुआ। इधर बारह बजे और उधर फेसबुक, ईमेल, मोबाइल लघु संदेश आदि द्वारा मित्रों और परिचितों की शुभकामनाएँ आनी शुरु हो गई।

जन्मदिन अपने यहाँ कोई खास तरीके से नहीं मनाया जाता। बचपन में अवश्य शौक रहा करता था कि अपना जन्मदिन मनाया जाए, लेकिन अम्मा (अपनी दादी जी को मैं और चचेरे भाई यही कहकर संबोधित किया करते थे) ने मना कर रखा था कि अपने यहाँ लड़कों के जन्मदिन नहीं मनाए जाते। तो माता जी मेरा मन रखने के लिए जन्मदिन से पहले दिन टॉफ़ियाँ और पेन्सिल दिलवा देती थीं कि अगले दिन क्लास में सहपाठियों को वह बाँट के बड्डे मना लिया जाए और शाम को घर पर फैमिली डिनर हो जाया करता था जिसमें सभी मामा-मामियाँ और मौसी की शिरकत हो जाया करती थी और अपन भी खुश हो जाते थे कि अपना बड्डे सेलीब्रेट हो गया। चूंकि बड्डे नहीं मनाया जाता इसलिए केक काटने का भी रिवाज़ नहीं, माता जी उसकी जगह सूजी का हलवा बना दिया करती थीं (आटे का हलवा भी अपने को पसंद है लेकिन सूजी का हलवा अधिक पसंद है)।
जब बड़े हो गए तो यह चलन भी धीरे-२ कम होता गया, क्लास में टॉफ़ियाँ बांटना बंद हुआ, कुछ खास मित्रों को कैन्टीन ले जाकर वहाँ समोसे ब्रेड-पकौड़े और पेप्सी की दावत दे दी जाती थी। इसके लिए माता जी अलग से पैसे नहीं देती थीं, अपनी ही जेब से रोकड़ा देना पड़ता था। वह बात अलग है कि बाद में मौका देख पिता जी से वसूली की जाती थी।
पर एक चीज़ जो बचपन से कायम है वह यह कि माता जी मेरे हर जन्मदिन पर मंदिर में ले जाकर पंडित जी द्वारा पूजा करवाती हैं। अब पूजा अर्चना में अपनी ऐसी कोई आस्था है नहीं, जब ईश्वर में ही नहीं है तो ज़ाहिर है कि ईश्वर अर्चना में भी नहीं होगी। लेकिन माता जी का मन रखने के लिए चला जाता हूँ कि यदि इससे उनके मन को शांति मिलती है तो अपने को कोई दिक्कत नहीं क्योंकि अपना कोई नुकसान तो हो नहीं रहा।
तो इस बार का भी बड्डे एज़ यूज़युअल साधारण दिन ही की भांति बीता; मित्रों, परिचितों और परिवार वालों से शुभकामनाएँ और आशीष मिले, मन्दिर में जाकर पूजा करवाई गई और शाम को हर जन्मदिन की भांति पूरी छोले और खीर का भोग लगाया गया।
कॉलेज के समय से ही मेरी कुछ ऐसी प्रवृत्ति हो गई कि जन्मदिन वाले दिवस मैं एकांत और शांत रहना पसंद करता हूँ, कहीं आना जाना नहीं और न ही परिवार के सदस्यों के अतिरिक्त किसी से मिलना जुलना। यार-दोस्त यदि दावत की फरमाईश करते हैं तो अगले दिन या आने वाले सप्ताहांत पर उनको दावत दे दी जाती है, जन्मदिन पर नहीं। ऐसा स्वभाव क्यों हुआ इसका कारण मुझे नहीं पता लेकिन ऐसा ही मन को अच्छा लगता है, वर्ष में एक शांत दिन गारंटी के साथ।
हलवे की फोटो साभार mtsn, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत
जब हम दुनिया में आते हैं तो यह सोच रोते हैं कि हम मूर्खों की इस दुनिया में आ गए।
— विलियम शेक्सपीयर
अंधकार से हमें क्या काम, सूर्यमुखी की ही भांति देखें हम भी प्रकाश की ओर कि वही है उन्नति का मार्ग। बस यही है प्रण इस नए वर्ष का।
पंकज ने बताया कि दूरदर्शन के पचास वर्ष हो गए हैं और वह अपनी स्वर्ण जयंति मना रहा है। इसी के चलते पंकज ने दूरदर्शन के स्वर्ण काल के कुछ लोकप्रिय कार्यक्रमों की सूचि छापी है और कहा कि दूरदर्शन आज अपनी प्रासंगिकता खो रहा।

मैं समझता हूँ कि दूरदर्शन ने आऊट ऑफ़ डेट होना और बोर करना बीस साल पहले ही शुरु कर दिया था लेकिन उस समय लोग इसलिए झेल रहे थे कि निजी चैनल नहीं थे, केबल टीवी नब्बे के दशक में आया और शुरुआती दिनों में महंगा था। लेकिन जैसे-२ उसके दाम नीचे आते गए और लोगों को मज़ा आना शुरु हुआ वैसे-२ उसकी पैठ बढ़ने लगी और दूरदर्शन की ग्राहकी कम होती गई।
दुख की बात यह है कि निजी चैनलों के पास अपनी गुणवत्ता बढ़ा के ग्राहक बढ़ाने के लिए जो मोटिवेशन था (मुनाफ़ा) वह दूरदर्शन के पास नहीं था, सरकारी चैनल है आखिर, नुकसान में भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है, किसी की नौकरी पर थोड़े ही बन आएगी और न ही चैनल बंद होगा।
अस्सी के दशक में दूरदर्शन पर कई लोकप्रिय और कालजयी टीवी सीरियल प्रसारित हुए लेकिन नब्बे के दशक में दूरदर्शन ने आगे बढ़ने के स्थान पर बेकार बदमज़ा टीवी शो ही दिखाए, पैसा खर्च नहीं करना चाहते थे अच्छे सीरियलों पर जो कि फिर निजी चैनलों के पास चले गए। एक कोशिश इन्होंने पुराने लोकप्रिय सीरियलों के पुनः प्रसारण द्वारा भी की लेकिन वह भी खास कामयाब न हुई!!
वाकई अफ़सोस होता है कि वह चैनल जिसकी कभी बाज़ार में 100% पकड़ थी, एकाधिकार था, उसका आज यह हाल है कि कदाचित् ही कोई उसको अपनी इच्छा से देखता होगा!!
फोटो साभार autowitch, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत
कोई दो-ढाई सप्ताह पूर्व जनाब मसिजीवी फेसबुक (Facebook) पर एक टैग अपने को थमा दिए जिसमें पचास सवाल थे जिनका आशय अपने बारे में जानकारी निकलवाना था। फुर्सत में था इसलिए तुरंत दस मिनट में ही टैग को निपटा के वहीं फेसबुक पर ठेल दिया। अब साथी लोग इधर आजकल अपने ब्लॉगों पर बासी माल को नई पैकिंग में पुनः बेच रहे हैं, इधर अपनी भी ट्यूब आजकल खाली है और भरने की प्रतीक्षा है, अनूप जी पहले ही फुनवा पर कह चुके हैं कि फोटू ठेल कर आजकल काम चलाया जा रहा है। इसी के चलते सोचा कि चलो बासी माल न सही लेकिन दूसरी दुकान पर रखा सामान इधर भी रख दें हिन्दी अनुवाद के साथ, छपास पिपासा भी मिटेगी और इधर के ग्राहकों के लिए नया माल भी हो जाएगा!!
तो निम्न हैं वे पचास प्रश्न जो अपने से टैग के चलते पूछे गए थे और जिनका मैंने साफ़गोई से उत्तर दिया था। ध्यान दिया जाए कि सभी उत्तर उसी दिन के हैं जिस दिन टैग का उत्तर दिया था।
प्रश्न: आज सुबह कितने बजे उठे?
उत्तर: रात सोए ही नहीं इसलिए सुबह उठने का मतलब ही नहीं!
प्रश्न: आपको स्टेक कैसे पसंद है?
उत्तर: अभी इसका स्वाद नहीं लिया है, पहला मौका मिलते ही बार-बी-क्यू स्टेक का स्वाद लिया जाएगा।
प्रश्न: सिनेमा पर आखिरी फिल्म कौन सी देखी?
उत्तर: “ड्रैगनबॉल इवोल्यूशन” देखी थी दो सप्ताह पूर्व, वाहियात फिल्म, पैसे की बर्बादी!!
प्रश्न: आपका पसंदीदा टीवी शो कौन सा है?
उत्तर: “Numb3rs” – बहुत ही मस्त शो है। इसमें व्यवहारिक गणित का एक प्रोफेसर अपराध सुलझाने में अमेरिकी एफ़बीआई की सहायता करता है सिर्फ़ गणित का प्रयोग करके!!
प्रश्न: यदि आप विश्व में कहीं भी रह सकें तो कहाँ रहना पसंद करेंगे?
उत्तर: दिल्ली – साथ में एक बंगला और एक 4×4 एसयूवी हो तो और भी मस्त रहेगा!!
प्रश्न: आज सुबह नाश्ते में क्या खाया?
उत्तर: मैगी – दो मिनट में बनने वाले नूडल्स!
प्रश्न: कौन सी पाक-प्रणाली (cuisine) आपकी पसंदीदा है?
उत्तर: एक नहीं है – पसंदीदा की गिनती में – पंजाबी, गुजराती, थाई
प्रश्न: कौन से खाने आपको अप्रिय हैं?
उत्तर: जो कुछ अधिक ही पक जाते हैं, ओवरकुक हो जाते हैं। और गलत ढंग से बनाए मेलजोल भी अप्रिय हैं।
प्रश्न: आपकी पसंदीदा जगह कौन सी है खाने की?
उत्तर: घर ही सबसे उत्तम है, आरामदायक रहता है। बाहर की बात करें तो बर्कोस और सरवण भवन पसंदीदा हैं।
प्रश्न: पसंदीदा ड्रेसिंग (dressing) कौन सी है?
उत्तर: यह उस पर निर्भर करता है जिसकी ड्रेसिंग की बात हो रही है। कितने ही तरह के खाने, पकवान, डेज़र्ट आदि हैं – सब पर अलग-२ ड्रेसिंग जंचती है!
प्रश्न: आप कौन सा वाहन चलाते हैं?
उत्तर: अपनी मोटरसाइकल – करिज़मा आर (Karizma R)
प्रश्न: आपके पसंदीदा कपड़े कौन से हैं?
उत्तर: जीन्स अथवा कार्गोस और एक टीशर्ट (पूरी बाजू की)
प्रश्न: यदि मौका मिला तो आप कहाँ जाना चाहेंगे?
उत्तर: कैलाश मानसरोवर
प्रश्न: कप – आधा खाली या आधा भरा?
उत्तर: आधा भरा
प्रश्न: रिटायर होकर आप कहाँ रहना पसंद करेंगे?
उत्तर: दिल्ली – अपने को इससे बढ़िया कोई जगह नहीं लगती।
प्रश्न: दिन का पसंदीदा समय कौन सा है?
उत्तर: रात एक बजे के बाद का समय – उस समय सब कुछ एकदम शांत होता है।
प्रश्न: आपकी पैदाइश कहाँ की है?
उत्तर: दिल्ली
प्रश्न: कौन सा खेल है जो आप देखना पसंद करते हैं?
उत्तर: क्रिकेट (वन डे और 20-20 दोनों ही), लॉन टेनिस
प्रश्न: आपको क्या लगता है कि कौन आपके टैग का उत्तर नहीं देगा?
उत्तर: पता नहीं
प्रश्न: किस व्यक्ति से आपको टैग के उत्तर की सबसे पहले आशा है?
उत्तर: पता नहीं
प्रश्न: आपको किसके उत्तर की सबसे अधिक जिज्ञासा है?
उत्तर: सभी के
प्रश्न: पक्षियों को देखना (bird watching) पसंद है?
उत्तर: बिलकुल – वैसे कोई खास शौक नहीं है लेकिन मैं कुदरत की कला को निहारना पसंद करता हूँ। पक्षियों को अपने कैमरे से शूट करना भी बेहद पसंद है।
प्रश्न: आप दिन के प्राणी हैं या रात्रि के?
उत्तर: निशाचर
प्रश्न: क्या आपके पास कोई पालतू पशु पक्षी है?
उत्तर: फिलहाल नहीं है
प्रश्न: कोई नई और रोमांचक खबर आप बाँटना चाहेंगे?
उत्तर: हाँ, अभी मैगी खाने जा रहा हूँ और साथ में डीवीडी लगा एक फिल्म का आनंद लिया जाएगा।
प्रश्न: जब आप छोटे थे तो क्या बनना चाहते थे?
उत्तर: बहुत कुछ – चाहतें मौसम के साथ बदलती रहती थी – व्यवहारिक विज्ञान (applied sciences) का एक रिसर्च वैज्ञानिक, अपने दादा जी की भांति वायुसेना में लड़ाकू पॉयलट, वीडियो गेम डिज़ाइनर, इत्यादि इत्यादि।
प्रश्न: आपके बचपन की कौन सी बेहतरीन याद है?
उत्तर: पहली कक्षा में क्लॉस के गुंडे की सुताई – पहली बार कोई उसकी हरकतों के विरुद्ध खड़ा हुआ था और अगले पाँच साल उसने क्लॉस के किसी बच्चे को तंग नहीं किया (कम से कम मेरे सामने)।
प्रश्न: आपको बिल्ली पसंद है या कुकुर?
उत्तर: किसी दिन मैं एक कुकुर पालना चाहूँगा। जब मैं छोटा था तो मेरे नाना-नानी जी यहाँ एक कुकुर था और वह मुझे बहुत प्रिय था, वह मेरा सबसे प्यारा मित्र था।
प्रश्न: क्या आप विवाहित हैं?
उत्तर: खुदा की मेहर है, अभी तक जीवित हैं और अविवाहित हैं!!
प्रश्न: क्या आप सदैव सीटबेल्ट बांधते हैं?
उत्तर: सिर्फ़ तभी जब मैं किसी चलते हुए वाहन में बैठा होता हूँ – जैसे कि गाड़ी, हवाई जहाज़ आदि।
प्रश्न: कभी कार दुर्घटना हुई है?
उत्तर: अभी तक ऐसा दुर्भाग्य नहीं रहा है और न ही रहे तो बढ़िया होगा।
प्रश्न: कोई बात जिससे चिढ़ हो?
उत्तर: मुझे चिढ़ तब होती है जब कोई अपने को डेढ़ स्याना समझ के मूर्खों वाले झूठ मुझसे कहता है जबकि मुझे साफ़ दिख जाता है कि मुझसे झूठ बोला जा रहा है। और हाँ, मुझे उन अयोग्य लोगों से भी चिढ़ होती है जो अपने को अति योग्य दर्शाते हैं।
प्रश्न: पिज़्ज़ा की पसंदीदा टॉपिंग्स?
उत्तर: जलापेनो (jalapeno – एक तीखी मोटी हरी मेक्सिकन मिर्च), काले जैतून, बेबीकॉर्न
प्रश्न: पसंदीदा फूल?
उत्तर: पीला गुलाब
प्रश्न: पसंदीदा आईसक्रीम?
उत्तर: ज्ञानी के अड्डे पर बेल्जियन चॉकोलेट, निरुला के अड्डे पर दिल्ली डिलाईट, कहीं और डॉर्क चॉकोलेट या ब्लैक-करंट आईसक्रीम।
प्रश्न: फास्ट फूड की पसंदीदा जगह?
उत्तर: मैक डॉनल्ड्स, पिज़्ज़ा हट
प्रश्न: ड्राईविंग लाइसेन्स बनवाने की परीक्षा में कितनी बार फेल हुए?
उत्तर: पहली बार में ही झंडे गाड़ दिए थे!!
प्रश्न: आपको आखिरी ईमेल किसने भेजी?
उत्तर: एक स्पैमर ने – सिआलिस बेच रहा था।
प्रश्न: आप कौन सी दुकान में अपने क्रेडिट कार्ड पर मौजूद क्रेडिट लिमिट को खर्च करना चाहेंगे?
उत्तर: जिन भी दुकानों में मैं जाता हूँ उनमें से कोई भी इतने व्यय के लायक नहीं!!
प्रश्न: हाल ही में कोई चीज़ बिना सोचे ऐसे ही अचानक करी?
उत्तर: हाँ, अपने फोटो कलेक्शन का बैकअप लिया!!
प्रश्न: अपनी नौकरी पसंद है?
उत्तर: पिछली वाली पसंद थी, अब नई देख रहे हैं!
प्रश्न: ब्रोकोली?
उत्तर: बिलकुल
प्रश्न: अभी तक मनाई छुट्टियों में पसंदीदा कौन सी रही?
उत्तर: अभी तक की सभी छुट्टियाँ बढ़िया और मस्त रही हैं।
प्रश्न: आखिरी बार किस व्यक्ति के साथ डिनर बाहर किया?
उत्तर: एक मित्र के साथ, एक फोटो शूट से लौटते हुए क्नॉट प्लेस में निज़ाम्स के यहाँ काठी रोल खाया था।
प्रश्न: अभी आप क्या सुन रहे हैं?
उत्तर: यानी (Yanni) की संगीत एल्बम – सेलेब्रेशन ऑफ़ लाइफ़ (Celebration of Life)
प्रश्न: आपका पसंदीदा रंग कौन सा है?
उत्तर: पैसे का रंग!!
उसके अलावा? लाल
प्रश्न: आपके शरीर पर कितने टैटू (tattoo) हैं?
उत्तर: एक भी नहीं और न ही ऐसी कोई तमन्ना है।
प्रश्न: आप कितने लोगों को इस प्रश्नावली के लिए टैग कर रहे हैं?
उत्तर: अभी सोचा नहीं है।
प्रश्न: किस समय आपने यह प्रश्नावली समाप्त की?
उत्तर: एकदम अभी
प्रश्न: कॉफी पीते हैं?
उत्तर: कॉफी? हाँ बिलकुल पीते हैं। कौन सी? मूड पर निर्भर करता है। यदि मुझे नींद भगानी है या थका हुआ हूँ तो एस्प्रेसो के एक या दो शॉट, लाते (latte) जब रिलेक्स मूड में होता हूँ और अमेरिकानो जब किसी मीटिंग में होता हूँ, आदि..
अब चूंकि यह टैग है तो दूसरों को लपेटने का भी नियम है, फेसबुक पर तो छब्बीस लोगों को लपेट दिया था लेकिन यहाँ पर छूट दी जा रही है, यदि किसी को पसंद है तो अपने ब्लॉग पर इन पचास प्रश्नों को अपने उत्तरों के साथ छाप सकता/सकती है।
तो है क्या कोई हिम्मतवाला/हिम्मतवाली?