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August 26th, 2009 at 07:16 am | 3 Comments
Posted In: कतरन

कमल मंदिर….. दिल्ली स्थित बहाई धर्म की इबादत की जगह


August 17th, 2009 at 07:16 am | 2 Comments
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इंडिया गेट….. अमर शहीदों की याद में बना स्मारक


August 10th, 2009 at 07:16 am | 2 Comments
Posted In: कतरन

सुबह सवेरे बेतवा किनारे


August 4th, 2009 at 07:16 am | 1 Comment
Posted In: कतरन

शेर शाह सूरी के दरबार के एक अफ़गान सामंत इसा खान का मकबरा


संपूर्णता…..


August 4th, 2009 at 07:07 am | 7 Comments

कल मैंने नैनोफिक्शन के विषय में लिखा था कि इस विधा में कथा को 55 शब्दों में ही समेटना होता है और उसके कुछ अन्य नियम भी बताए थे। यह नैनोफिक्शन अर्थात्‌ पचपन शब्दिया कथा की विधा में मेरा पहला प्रयास है। एन्सी ने सही कहा था, वाकई कठिन कार्य है पचपन शब्दों में कथा को समेटना।

 

“स्त्री माँ बनने पर ही पूर्ण होती है”, माँ ने युवा होने पर समझाया था। वह माँ नहीं बन सकती थी, जान का खतरा था। पाँच वर्षों से सास उसे ताने दे रही थी।
…..

बेहोश होने से पहले नर्स ने बताया लड़का हुआ है। अब वह संपूर्ण स्त्री थी; चैन से सो सकती थी।

 
 
फोटो साभार paterjt, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत