इस वर्ष के शुरु में मैंने अपनी एक ब्लॉग पोस्ट के चोरी होने के बारे में बताया था कि कैसे अपने को लेखक और पत्रकार और अध्यापक कहने वाले एक व्यक्ति ने मेरे इस ब्लॉग से एक लेख चोरी करके अपने ब्लॉग पर छापा था। अब एक और चोर ने इसी ब्लॉग से एक और लेख को चोरी कर अपने ब्लॉग पर अपने नाम से छापा है।
यह कोई मामूली छोटा मोटा चोर नहीं है, वरन् ऊँचे दर्जे का चोर है। यह व्यक्ति पिछले चोर से भी ऊँचे दर्जे का चोर है। इस वर्ष 6 अप्रैल को मैंने यहाँ इस ब्लॉग पर एक लेख लिखा था इंटेक्स के एक नए फोन के बारे में बताने के लिए – 25 दिन चलती है इस मोबाइल फोन की बैट्री। इस लेख को इस चोर ने अपने ब्लॉग “May I Help You” पर जस का तस चोरी करके यहाँ छाप दिया।
तो आईये मिलते हैं इस चोर बापी से जो कि आरआरअधिकारी.ब्लॉगस्पॉट.कॉम पर मे आई हेल्प यू (May I Help You) नाम का ब्लॉग चलाते हैं, या यूँ कहूँ कि चोर-ब्लॉग चलाते हैं। अपने ब्लॉग के बारे में यह कहते हैं कि यदि किसी को कंप्यूटर संबन्धी समस्या है तो उसका समाधान इनके पास है और अंग्रेज़ी में कहते हैं कि ये लोगों को बताते हैं कि आईटी (IT) के संबन्ध में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। वल्लाह!!
ये लोगों को क्या बताते होंगे? कि चोर ब्लॉग कैसे चलाया जाए? कैसे दूसरों की मेहनत का माल चोरी करके अपना ब्लॉग चलाया जाए?
मैंने अभी कहा कि ये बड़े चोर हैं और चोर ब्लॉग चलाते हैं। तो दो बातें हैं यहाँ, कि ये बड़े चोर कैसे हुए और चोर ब्लॉग क्या होता है। तो जनाब पहले देखते हैं चोर ब्लॉग की परिभाषा। आपने चोर बाज़ार के बारे में तो सुना ही होगा। वह एक ऐसा बाज़ार होता है जहाँ चोरी का सामान खरीद-फ़रोख़्त के लिए रखा होता है। तो ऐसे ही चोर ब्लॉग होता है जहाँ सब माल चोरी का होता है और पाठकों की प्रतीक्षा में होता है। जिस प्रकार चोर दूसरों का माल चोरी करके चोर बाज़ार में बेच देते हैं उसी प्रकार अपने को ब्लॉगर कहने वाले चोर दूसरों के ब्लॉग आदि से लेख वगैरह चुरा के अपने ब्लॉग पर डाल पाठकों को परोसते हैं। ये ऐसे दुखियारे होते हैं जिनको लिखना नहीं आता, सिर्फ़ चोरी करना आता है। अमूमन ये लोग ईज़ी मनी (easy money) की फिराक में होते हैं, यानि कि दूसरों का माल चोरी करके अपने ब्लॉग पर डालो और विज्ञापन लगा दो और उसके बाद मुँह खोल के खड़े हो जाओ कि डॉलरों की बरसात होगी और इनका मुँह उससे भर जाएगा।
अब बात आती है कि ये बड़े चोर कैसे हैं। तो बात यूँ है कि इनके ब्लॉग पर मुझे एक भी लेख ऐसा नहीं दिखा जो इन्होंने कहीं से चोरी न किया हो। मेरे ब्लॉग से चोरी किया है, समाचार पत्रों की वेबसाइट से चोरी किया हुआ है। वेबदुनिया वालों से इनको खास लगाव दिखता है, वहाँ से इन्होंने काफ़ी माल चुरा कर अपने चोर ब्लॉग पर छापा हुआ है। कोई वेबदुनिया वालों को बताओ कि ये चोर उनके माल को अपने नाम से अपने चोर ब्लॉग पर छाप रहा है।
और फिर रांची के एक अख़बार आई नेक्सट (i Next) में ब्लॉगिंग संबन्धी छपे एक लेख में इन्होंने कहा कि इनको बहुत आश्चर्य हुआ कि इनके लिखे एक लेख पर तेरह हज़ार हिट हुए। तेरह हज़ार हिट? लगता है इस चोर को गिनना भी नहीं आता। जब से यह शुरु हुआ है इस चोर ब्लॉग पर आज तक कुल 1300 हिट नहीं हुए और ये तेरह हज़ार हिट की डींग एक लेख पर मार रहे हैं।
और शायद जनाब गलती में चोरी करने को लिखना कह गए, क्योंकि यदि लिखना इस चोर को आता तो फिर चोरी ही क्यों करता।
वो कहते हैं ना कि चोरी में भी अक्ल की आवश्यकता होती है लेकिन लगता है कि ये दिमाग से पैदल चोर हैं। अब देखिए ब्लॉगवाणी को पिंग करने के लिए अपने चोर ब्लॉग पर इन्होंने जो लिंक लगाया है वो अविनाश बाबू के ब्लॉग मोहल्ला से जस का तस चुरा के अपने चोर ब्लॉग पर लगाया हुआ है।
यानि कि इस मूढ़ चोर में इतनी भी समझ नहीं कि जो यह लगा रहा है अपने चोर ब्लॉग पर उसका अर्थ क्या है। और जिसको इतना ज्ञान नहीं वो लोगों की कंप्यूटर और आईटी संबन्धी समस्याओं को दूर करने का दावा करता है, वल्लाह!!
अब कुछ लोग सोचेंगे(और कदाचित् कहेंगे भी) कि मुझे ऐसे बीच बाज़ार इस चोर की इज़्ज़त नहीं उछालनी चाहिए थी, चोर को अपनी गलती सुधारने का मौका देना चाहिए था। तो जानने वाले जानते हैं कि मैंने इस चोर के ब्लॉग पर मेरी चोरी कर छापी पोस्ट पर एक विनम्र टिप्पणी की थी कि यह लेख इन्होंने मेरे ब्लॉग से उठाया है और विनम्र निवेदन किया कि वे उस पोस्ट को अपने ब्लॉग से हटा लें। अब ऐसा नहीं है कि इस चोर ने वह टिप्पणी पढ़ी नहीं, बिलकुल पढ़ी, यकीनन पढ़ी, और अगले ही दिन अपने चोर ब्लॉग पर टिप्पणियों की सुविधा स्थगित कर दी ताकी कोई टिप्पणी न दे पाए और मौजूदा टिप्पणियाँ छुप जाएँ। यानि कि चोर को पता है कि उसने चोरी की है और उसकी चोरी छुपी नहीं रही है!! और फिर ऐसे घुटे हुए चोर की इज़्ज़त ही क्या, ऐसे लोगों से मुझे कोई सहानुभूति नहीं होती। व्यक्ति गलती करता है वो समझ आता है, उसको गलती सुधारने का मौका देना इंसानियत है, लेकिन मौका देने के बाद भी जो न सुधरे उसके साथ ऐसा व्यवहार यथोचित है।
आप भी देख लें कि कहीं आपका माल भी तो नहीं चुरा के छापा हुआ इस चोर बापी ने अपने चोर ब्लॉग पर, क्योंकि कोई भरोसा नहीं हो भी सकता है ऐसा, आखिर चोर ब्लॉग है जहाँ सब माल चोरी का ही है।
मैं धन्यवाद देना चाहूँगा अपने ब्लॉग के उस सजग पाठक को जिन्होंने इस चोरी की सूचना दी। वे कौन हैं यह मैं उनकी प्राइवेसी की खातिर नहीं ज़ाहिर करूँगा।
अपडेट: इस चोर ने अपने चोर ब्लॉग पर चोरी करके छापी मेरी पोस्ट हटा दी है। लेकिन अभी भी वह चोर ब्लॉग ही है क्योंकि बाकी माल अभी भी चोरी का ही है वहाँ जो कि वेबदुनिया आदि से चुरा के डाला हुआ है। अभी इन्होंने तीन दिन पहले जो जीपीएस पर लेख डाला है वह वेबदुनिया से हूबहू चुराया हुआ है जो कि वेबदुनिया पर 30 जुलाई 2008 को छपा था।
लगभग 6 वर्ष पूर्व एक वेब संबन्धी तकनीकी वेबसाइट(जहाँ मैं वेब तकनीक आदि संबन्धी बढ़िया लेख पढ़ने जाया करता था) पर मैंने एक लेख में पढ़ा था कि इंटरनेट पर कॉनटेन्ट इज़ किंग (content is king) यानि कि पढ़ने/देखने/सुनने लायक बढ़िया मसाला ही बादशाह है। ऐसा नहीं है कि यह बात टीवी चैनलों या फिल्मों पर लागू नहीं होती पर वहाँ शाहरुख और आमिर खान के नाम से या बिपाशा अथवा कैटरीना को देखने जाने वाले लोगों की संख्या अच्छी खासी होती है। इंटरनेट पर भी ऐसा है जहाँ प्रतिष्ठित वेबसाइटों के पास नियमित पाठक/दर्शक/श्रोता हैं लेकिन इंटरनेट पर मामला थोड़ा अलग हो जाता है सर्च-इंजनों के कारण जो कि किसी भी व्यक्ति को हज़ारों लाखों करोड़ों वेबसाइटों पर एक क्लिक में माल-मसाला ढूँढने की क्षमता प्रदान करते हैं।
आज अजय द्वारा लिखे लेख प्लानिंग हॉलिडेज़ विद यूज़र जेनरेटिड ट्रैवल कॉनटेन्ट को पढ़ा तो एकाएक ही वह कॉनटेन्ट इज़ किंग वाली बात याद आ गई। लेख में अजय ने बताया कि कैसे आजकल लोग इंटरनेट पर माल ढूँढ तय करते हैं कि घूमने जाने के लिए कौन सी जगह अच्छी है तथा जहाँ वे घूमने जा रहे हैं वहाँ के बारे में जानकारी भी इंटरनेट पर ही ढूँढते हैं। मैं भी इस तरह इंटरनेट पर ढूँढने वाला काम दो वर्षों से कर रहा हूँ और अब यह चलन बढ़ता भी जा रहा है, अधिक लोग इस तरह की सामग्री के लिए भी इंटरनेट की ओर रुख कर रहे हैं। और यह सब माल प्रोफेशनल लेखकों द्वारा असेम्बल किया गया नहीं है वरन् अधिकतर यह माल स्वयं श्रोताओं द्वारा ही जमा किया गया है जो कि अपने-२ अनुभव दूसरों के साथ बाँटते हैं और दूसरों के अनुभवों से लाभ उठाते हैं। यानि कि कम्यूनिटी वाला मामला है कि सब एक दूसरे की सहायता कर रहे हैं।
अब इससे यहाँ एक अलग तरह का बाज़ार गर्मा रहा है, इस तरह का माल जमा करने के अड्डे बनाना, लोगों को आकर्षित करना कि वे आपके अड्डे पर आकर माल जमा करें और फिर विज्ञापन दिखा डॉलर कमाना, वैसे भी गूगल एडसेन्स ने यह सबके लिए काफ़ी आसान कर दिया है। लेकिन चूंकि विज्ञापन लगा माल कमाना आसान होता जा रहा है, बहुत से लोग क्विक मनी (quick money) यानि कि छापा और खर्चा टाइप तुरत-फुरत वाला पैसा कमाने के चक्कर में होते हैं। और वे जल्दी पैसे कैसे बना सकते हैं? जानकारी और माल की इंटरनेट पर कमी नहीं, भिन्न-२ जगहों से माल चोरी किया और उसको अपने अड्डे पर जमा कर पेश कर दिया और लो हो गई तुरत-फुरत आपकी वेबसाइट तैयार। बस अब विज्ञापन लगाओ और बोलो गूगलदेव ज़िन्दाबाद।
इस तरह की वारदातें पहले भी हो चुकी हैं, हिन्दी ब्लॉगजगत में भी कुछेक चोर आए जिन्होंने पहले से स्थापित लोकप्रिय अड्डों से माल उठा अपने अड्डों पर अपने नाम से छापा। मेरा माल भी चोरी हुआ था, भूतकाल में याहू भी इस हरकत में लीन हो चुका है।
बहरहाल, अजय के लिखे लेख में एक नई वेबसाइट(मेरे लिए नई भई) राही.कॉम का पता चला तो मैं पहुँचा उस वेबसाइट पर। जून में हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट जाने का प्रोग्राम है तो सोचा कि इस वेबसाइट पर देखें वहाँ के बारे में कोई सामग्री है कि नहीं। तो वहाँ की जानकारी खोजते-२ मैं पहुँचा इस पन्ने पर जहाँ मुझे कुछ ऐसा माल दिखा:
अब आप पूछेंगे कि इसमें क्या खराबी है? तो जनाब खराबी देखने के लिए हाईलाईट की गई पंक्तियाँ देखें और उनको पढ़ें, आपको लगेगा कि वाक्य अधूरे हैं, जानकारी का बहाव एकदम से रुक जाता है और फिर पता नहीं कहाँ से चल पड़ता है। मुझे भी यह अजीब लगा, और फिर संशय हुआ कि यह माल कहीं से चोरी किया गया है और ठीक से पूरा चोरी कर नहीं छपा है वरन् कुछ भाग जल्दबाज़ी में छूट गए हैं। तो इन पंक्तियों को गूगल पर खोजा तो पहुँचा इस पन्ने पर जहाँ माल पूरा दिखा और विस्तृत दिखा।
एक नज़र दोनों जगह मारने पर पता चल जाता है कि अमुक माल राही.कॉम पर चोरी का है और वह इस दूसरी वेबसाइट से उठाया गया है। चोरी भी किया जल्दबाज़ी में जिस कारण पूरा माल न छाप पाए जो कि चोरी की चुगली करने के लिए काफ़ी था। यदि पूरा कॉपी-पेस्ट मारते तो कदाचित् यह निष्कर्ष निकालना कठिन हो जाता कि किसने किसका माल चोरी किया है लेकिन अधूरी चोरी ने राही.कॉम द्वारा की गई चोरी की पोल खोल दी।
यह सिर्फ़ एक चोरी का उदाहरण है, हो सकता है कि राही.कॉम पर ऐसे ही अन्य बहुत सा माल भी यहाँ वहाँ से चोरी किया हुआ हो। वैसे भी इस तरह माल चोरी कर छापने वाले बहुत हैं, विज्ञापनों की आई बाढ़ और हर किसी के प्रकाशक बन जाने की सुविधा को हर कोई कैश कराना चाहता है इसलिए ईज़ी मनी पाने वाले अनेक राही.कॉम हैं। क्या इस तरह की चोरियों पर लगाम लगाई जा सकती है? यह पूछना ठीक वैसे है जैसे यह पूछना कि क्या वास्तविक संसार के आधुनिक समाज में अपराध समाप्त हो गया है!! ढीठ और घुटे हुए अपराधियों को सिर्फ़ एक हद तक रोका जा सकता है, यह चूहे बिल्ली का खेल है और चूहा यानि कि अपराध आगे है। परन्तु चुप बिलकुल नहीं बैठना चाहिए, राही.कॉम(जो कि यात्रा.कॉम की वेबसाइट है) जैसी वेबसाइटों को बेनक़ाब कर बेइज़्ज़त अवश्य किया जा सकता है जिससे कि साख बिगड़ने के डर से वे चोरी करने से पहले दस बार सोचें!!
कई जगह पढ़ा है और कई लोगों ने बताया है कि यदि आपका माल चोरी होता है तो इसका अर्थ है कि वह अच्छा है क्योंकि घटिया चीज़ को कोई क्यों चुराएगा!! भूतकाल में मेरी फोटुओं की चोरी ने इस बात की ओर तो मेरा ध्यान कर ही दिया कि मैं ठीक-ठाक फोटो लेता हूँ तभी किसी ने चोरी के लायक समझा। अब जब मेरी पोस्ट भी चोरी हो गई तो पता चलता है कि अपन लिखते भी ठीक-ठाक ही हैं तभी किसी ने चोरी की। पिछले वर्ष 2007 में 13 मार्च को मैंने एक पोस्ट छापी थी, समाज के सर्वज्ञ, जिसको कि अजमेरा इंस्टीट्यूट ऑफ़ मीडिया स्टडीज़ नाम के ब्लॉग पर चोरी करके यहाँ छापा गया है।
चोरी करने वाला भी कोई ऐरा गैरा नहीं है। चोरी करने वाले साहब अपने को रवि बहार कहते हैं और पेशे से अपने को कॉलेज अध्यापक, पत्रकार और लेखक बताते हैं, यानि कि ऊँचे दर्जे के चोर हैं।
जब एक अध्यापक जो कि पत्रकार भी हो और लेखक भी तथा वह आपका माल चोरी करे तो आपका सीना गर्व से नहीं फूलेगा? मेरा सीना गर्व से तो नहीं फूला खैर लेकिन तरस अवश्य आया इन साहब पर। लगता है कि ये लेखक चोरी करके ही बने हैं, दूसरों की रचनाओं को बिना अनुमति के चुरा कर अपने नाम से छापने वाले लेखक हैं!!
और अपने विद्यार्थियों को क्या पढ़ाते होंगे? शायद दूसरों का माल कैसे चोरी किया जाता है और उसको कैसे अपने नाम से आगे बेचा जाता है!! तौबा…..!!
आप भी देख लें कि इस हाई-फाई चोर लेखक ने कहीं आपकी पोस्ट आदि भी तो नहीं चुरा ली!!
अपडेट (2008-02-04): अभी देखने पर पता चला है कि इन साहब ने अपने उक्त ब्लॉग पर चोरी कर छापी गई मेरी पोस्ट तो हटा ही दी है और साथ ही उस ब्लॉग पर से तमाम अन्य पोस्ट भी हटा दी हैं।
पिछले भाग से आगे …..
अभी हाल ही में हिन्दी ब्लॉगजगत में पोस्ट आदि की चोरी का मुद्दा उठा था और बहुत से लोगों ने पुरज़ोर इसका विरोध करते हुए इस पर अपने कड़े विचार व्यक्त किए थे। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कुछ लोग जो अपने ब्लॉगों से पोस्ट चोरी होने पर व्यथित और क्रोधित थे(इतने कि उनका वश चलता तो चोर को फांसी पर चढ़ा देते और उसके कपड़े बीच बाज़ार नीलाम कर देते) यदि उनके ब्लॉग देखें जाएँ तो बहुत सा चोरी का माल उनके पास ही मिल जाएगा। क्यों भई, आपका माल चोरी हो तो वह गलत, लेकिन आप किसी का माल चोरी करो तो वह गलत नहीं है? मेरा इरादा किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर उनको सरेआम बेइज़्ज़त करना नहीं है, मैं विनम्र शब्दों में सिर्फ़ यह बताना चाहता हूँ कि जिस तरह आपका लिखा आपका कॉपीराइट है उसी प्रकार किसी अन्य का माल भी उसकी संपत्ति है जिसे आप बिना उस व्यक्ति की आज्ञा के नहीं प्रयोग कर सकते।
खैर यह तो अलग बात है, लेकिन कुछ लोग बड़े बेशर्म भी होते हैं। चोरी जाने में की या अजनाने में, उनको जब चोरी हुए माल का मालिक विनम्र शब्दों में यह कहे कि भई यह मेरा माल है और इसको प्रयोग करने की अनुमति आपने नहीं ली है इसलिए इसको हटा लीजिए तो दो तरह से व्यक्ति पेश आता है:
दूसरी तरह से पेश आने वाले लोगों की तो छोड़ ही दें, उनपर तो खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे वाली कहावत चरितार्थ होती है। इन लोगों को इस बात का शुक्र नहीं होता कि जिसका माल इन्होंने चोरी किया उसने प्यार-मोहब्बत से बोलते हुए इनसे वह माल हटाने को कहा जबकि वह सीधे ही लीगल नोटिस भिजवा के इन पर हर्जाने का मुकदमा भी ठोक सकता था। ऐसे लोग परिपक्व नहीं होते और छोटे बालकों की बुद्धि के होते हैं, इसलिए इन की बात का क्या बुरा मानना। वैसे हाल ही में मेरे साथ भी ऐसा ही वाकया हुआ और मैंने यह सोच ही मेरा माल उड़ाने वाले व्यक्ति के व्यंग्य को जाने दिया कि इससे क्या अपना माथा फोड़ना। वैसे गौरतलब बात यह थी कि अमुक व्यक्ति ने पूरी तरह जानते बूझते हुए मेरा कॉपीराइट नोटिस हटा के मेरे द्वारा ली फोटो प्रयोग की थी और मुझे भोला बन के दिखा रहा था कि उसे नहीं पता क्या हुआ।
खैर, मुख्य है यहाँ पहली तरह के व्यक्ति, जो कि चोरी भी करते हैं और सीनाज़ोरी भी। अब ऐसे व्यक्ति आपके समझाने से नहीं समझेंगे, ये इस गफ़लत में होते हैं कि आप इनका कुछ कर नहीं सकते। लेकिन ऐसा नहीं है, इनका बहुत कुछ बिगड़ सकता है, बस बिगाड़ने की नीयत चाहिए और निम्न तरीकों से इनका जीना दुश्वार कर सकते हैं:
अब यदि चोर आपके देश का निवासी नहीं है तो कचहरी में उसपर मुकदमा करना कदाचित् आपके लिए संभव नहीं होगा लेकिन दूसरा तरीका तो आप अपना ही सकते हैं और कामयाबी मिलने पर आपका कार्य तो हो ही गया, चोर की वेबसाइट/ब्लॉग से आपका माल तो हट ही जाएगा साथ-२ सज़ा के तौर पर उसका अपना माल भी साफ़ हो जाएगा।
तो यदि आप भी सीनाज़ोरी करने वाले लोगों में से हैं तो सावधान हो जाईये, यह सीनाज़ोरी महंगी पड़ सकती है। यदि माल का मालिक आपसे विनम्र निवेदन कर रहा है अपना माल हटाने का तो अपने आपको भाग्यशाली मानिए क्योंकि उसको कोई आवश्यकता नहीं है कि आपसे विनम्र निवेदन करे, वह आपसे डंडे के ज़ोर पर भी बात कर सकता है।
लेकिन एक बात जो बहुत सामान्य है और जिसको अधिकतर लोग व्यवहार में नहीं लाते वह है सामाजिक शिष्टाचार। क्या आप अपने पड़ोसी या किसी परिचित के घर जाते हैं और जो चीज़ आपको पसंद आती है वह आप बिना पूछे ऐसे ही उठा लाते हैं? यदि आप विनम्र होकर अमुक वस्तु को प्रयोग करने की अनुमति माँगे तो प्रायः अनुमति मिल ही जाती है। “प्लीज़” तथा “कृपया” जैसे शब्द बहुत प्रभावशाली होते हैं, इनका वार खाली जाने की बहुत कम संभावना होती है। तो क्यों लोग ऑनलाईन इस शिष्टाचार को भूल जाते हैं। यदि यह समझते हैं कि ऑनलाईन उनको कोई पकड़ नहीं सकता या उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता तो यह सोचना ठीक वैसा है जैसा कि किसी शुतुरमुर्ग का रेत में अपनी मुंडी छुपा सोचना कि उसको कोई देख नहीं सकता।
हाल ही की बात है कि मैं एक विषय पर एकाध लेख लिखने की सोच रहा था तो उससे संबन्धित कुछ ग्राफिक्स (graphics) आदि मुझे लेख में प्रयोग करने थे। अब जिन वेबसाइट पर वे ग्राफिक्स (graphics) थे वहाँ उनको प्रयोग करने संबन्धी कोई जानकारी नहीं थी जिसका यह अर्थ हुआ कि उनको प्रयोग नहीं किया जा सकता। तो इसलिए मैंने उन वेबसाइटों के मालिकों को निजी ईमेल लिख उनसे अनुमति लेना बेहतर समझा, उनको बताया कि किस कार्य के लिए मुझे वे ग्राफिक्स (graphics) चाहिए और उन्होंने बिना हिचके मुझे उन ग्राफिक्स (graphics) को अपने लेख में प्रयोग करने की अनुमति दे दी। यदि वे अनुमति नहीं देते तो मैं जबरन उनके माल को प्रयोग नहीं करने वाला था, उस स्थिति में मैं फिर वैसे ही अन्य ग्राफिक्स (graphics) देखता या फिर स्वयं अपने आप बनाता।
चोरी की बात तो यहाँ तक है कि बड़ी-२ कंपनियाँ तक कान पकड़ जाती हैं आम लोगों के सामने। अभी हाल ही की बात है, यहीं दिल्ली के एक परिचित, जो कि मेरी तरह शौकिया फोटोग्राफ़र है, द्वारा ली एक फोटो को बिना उनकी अनुमति के निकोन (nikon) वालों ने अपने विज्ञापन में छाप दिया था। जैसे ही उस परिचित को पता चला वह चढ़ दौड़ा निकोन (nikon) वालों पर और निकोन (nikon) वाले भी कदाचित् कोई कोर्ट आदि का चक्कर नहीं लगाना चाहते थे इसलिए दोनो पार्टियों ने आपस में ही समझौता कर लिया जिसके तहत निकोन (nikon) वालों ने कुछ हर्जाना आदि देकर अपनी जान छुड़ाई। और इससे पहले एक अन्य प्रसिद्ध हाई-प्रोफाईल मामला तब हुआ था जब लगभग आठ-नौ महीने पहले याहू के मलयालम पोर्टल पर एक ब्लॉगर का चोरी किया लेख पूर्ण रूप में छाप दिया गया था बिना किसी अनुमति के और हल्ला मचने पर याहू ने दोष मढ़ दिया अपने माल के सप्लायर वेबदुनिया पर और सरेआम माफ़ी भी माँगी। रुचिकर बात यह रही कि पढ़ने में आया कि याहू द्वारा माफ़ी माँगने के कुछ ही दिन के भीतर याहू की भारतीय शाखा के कन्टेन्ट हेड (content head) अजय नाम्बियार और मनोरंजन हेड (head of entertainment) नियती सेनगुप्ता ने अपने-२ पदों से इस्तीफ़े दे दिए।
इसलिए सीधी-साधी सलाह यही है कि शिष्टाचार को नहीं भूलना चाहिए। जो लोग शिष्टाचार को औपचारिकता कह दरकिनार करते हैं उनको किसी जंगल में जाकर आदि-मानव की भांति रहना चाहिए क्योंकि सभ्य समाज में रहने लायक वे नहीं लगते। और साथ ही गूगल के मोटो (motto) Do no Evil यानि कि बुरा मत करो को ध्यान में रखिए, बेशक गूगल इसको मानने में अब यकीन न रखे लेकिन आप अवश्य रखिए क्योंकि आप गूगल नहीं हैं और बहुत लोग आपका बहुत कुछ उखाड़ सकते हैं, इसलिए पंगा काहे लें!!
तीन भागों का यह लेख आम जनता के लाभार्थ लिखा गया है और इसको लिखने के पीछे मेरा मकसद किसी से खुन्दक निकालना या किसी पर तंज कसना नहीं है।
पिछले भाग से आगे …..
पिछले भाग पर कुछ शंकाएँ और प्रश्न माननीय पाठकों ने किए जिनके उत्तर तो मैंने वहीं टिप्पणी में दे दिए थे लेकिन यहाँ भी इसलिए छाप रहा हूँ कि जिन्होंने नहीं पढ़े वे लाभ उठा सकें क्योंकि ये कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और शंकाएँ हैं जो कि एकाध को नहीं वरन् कई लोगों को हैं।
मैं तो flickr से ही फोटो लेता हूं। कैसे पता चलेगा कि कोई फोटो पब्लिक डोमेन में है या नहीं।
इसका उत्तर मैंने यूँ दिया:
अनिल जी, फ्लिकर पर कोई फोटो पब्लिक डोमेन में नहीं है, सभी कॉपीराईट के अंतर्गत उनके मालिकों की संपत्ति हैं। लेकिन बहुत लोगों ने फ्लिकर पर अपनी फोटो क्रिएटिव कॉमन्स (creative commons) लाइसेन्स के अंतर्गत रखी हुई हैं जिसके अनुसार आप उनका प्रयोग कर सकते हैं बशर्ते आप लाईसेन्स ले नियमों और शर्तों का पालन करें। आप फ्लिकर पर किसी भी फोटो को क्लिक कर उसके पेज पर पहुँच सकते हैं। वहाँ पर दाहिने ओर साइडबार में “Additional Information” के नीचे फोटो के लाइसेन्स संबन्धी जानकारी होती है। यदि “All rights reserved” लिखा है तो आप बिना अनुमति फोटो का प्रयोग नहीं कर सकते। लेकिन यदि क्रिएटिव कॉमन का ज़िक्र है तो उस पर क्लिक कर लाईसेन्स की शर्तों को पढ़िए और फिर उन शर्तों का पालन करते हुए आप उस फोटो का प्रयोग उसके मालिक की अनुमति के बिना भी कर सकते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में क्रिएटिव कॉमन लाइसेन्स के अंतर्गत अपने माल को डाल उन्होंने आपको प्रयोग करने की अनुमति दे दी है बशर्ते आप लाइसेन्स का पालन करें। मैंने भी इस ब्लॉग पर अपने पिछले कुछ लेखों में फ्लिकर से लिए हुए कुछ फोटो आदि प्रयोग किए हैं लेकिन वे सब क्रिएटिव कॉमन लाइसेन्स के अंतर्गत हैं और लाइसेन्स का मैंने पूर्ण रूप से अपने लेख में पालन किया है।
यह एक महत्वपूर्ण बात है क्योंकि अधिकतर लोग जल्दबाज़ी में अन्यथा अज्ञान के कारण ध्यान नहीं देते और समझते हैं कि गूगल या किसी अन्य सर्च इंजन अथवा फ्लिकर जैसी वेबसाइट पर मौजूद तस्वीर को उठा के प्रयोग कर सकते हैं। जैसा मैंने अनिल जी के प्रश्न का उत्तर दिया, आप फ्लिकर जैसी वेबसाइट अथवा गूगल जैसे सर्च इंजन से फोटो अपने प्रयोग के लिए ले सकते हैं, लेकिन आपको यह देखना पड़ेगा कि आप कौन सी फोटो आदि ले सकते हैं क्योंकि सभी फोटो आदि आप नहीं ले सकते।
इसके बाद रवि रतलामी जी ने पूछा:
मैंने किसी साइट से अर्जुन सिंह या ब्रिटनी का फोटो उठाया (जो कि सेलेब्रिटी हैं, और इनके फोटो सर्वत्र उपलब्ध हैं) तो क्या वो भी चोरी हुई?
जिसका उत्तर मैंने कुछ यूँ दिया:
रवि जी, बात सर्वत्र उपलब्ध होने की नहीं है। मैं यदि अपने घर के सामने वाले बाग़ में मौजूद एक गुलाब की फोटो लेता हूँ तो वह फोटो मेरा माल है। फूल तो सभी के लिए उपलब्ध है, कोई भी उसकी फोटो ले सकता है, जो फोटो लेगा वह फोटो उसका माल है। लेकिन यहाँ बात पब्लिक फिगर (public figure) की हो रही है। कॉपीराइट तो हर हाल में फोटो खींचने वाले का ही है, प्रश्न है कि क्या आप उसे बिना अनुमति प्रयोग कर सकते हैं कि नहीं। जहाँ तक मेरी जानकारी है, पब्लिक फिगर (public figure) या सेलेब्रिटी (celebrity) आदि का कोई फोटो जो हर जगह उपलब्ध है(जैसे प्रोमोशनल माल) उसका प्रयोग आप कर सकते हैं लेकिन यदि मैंने कोई खास फोटो खींचे हैं(फैशन शो में, या फोटोशूट में आदि) तो आप उनका प्रयोग मेरी अनुमति बिना नहीं कर सकते।
उनका अगला प्रश्न था:
और, क्या ये भी चोरी हुई कि किसी फोटो को इंटरनेट से उठाकर उसमें फोटो औजार से कुछ अदला-बदली कर इस्तेमाल कर लिया?
जिस पर मैंने कहा:
जी बिलकुल, यह भी उतना ही संगीन अपराध है जितना कि फोटो या इमेज को उसके मूल रूप में प्रयोग करना। गौरतलब बात है कि अभी मैंने अनिल जी को फ्लिकर पर मौजूद तस्वीरों के बारे में बताते हुए क्रिएटिव कॉमन लाइसेन्स का ज़िक्र किया है वह लाइसेन्स भी हर बार आपको मूल रचना में बदलाव करने की अनुमति नहीं देता। यदि इस लाइसेन्स में no derivatives की शर्त है तो आप मूल रचना में कोई बदलाव नहीं कर सकते।
फिर उन्होंने पूछा:
ये भी बताएँ, कि लीगली, डैमेजेस के तौर पर ऐसी सामग्री के इस्तेमाल करने वाले को क्या समस्या हो सकती है?
जिसके बारे में मैंने बताया:
जिसके कॉपीराइट का उल्लंघन आप कर रहे हैं वह चाहे तो आप पर कॉपीराईट उल्लंघन का मुकदमा ठोक सकता है और हर्जाने का दावा कर सकता है(जो कि लाखों या करोड़ों रुपयों में भी हो सकता है)। दोषी पाए जाने पर अदालत द्वारा तय किए गये हर्जाने को आपको भरना पड़ सकता है, न भरने की स्थिति में जेल भी हो सकती है।
तत्पश्चात उनका प्रश्न था:
क्या वह तब भी चोरी हुई जब उसे साभार सहित कड़ी देते हुए इस्तेमाल किया जा रहा है?
जिसके उत्तर में मैंने कहा:
हो सकती है, तब भी चोरी हो सकती है। फर्ज़ कीजिए कि मैं आपकी गाड़ी उठा के अपने घर ले आता हूँ और उस पर बोर्ड टाँग देता हूँ कि “साभार: रवि रतलामी” तो आप क्या कहेंगे?
किसी का माल बिना उसकी अनुमति जबरन ले आना चोरी ही है, चाहे आप साभार दें अथवा न दें।
फिर उन्होंने शंका व्यक्त की:
रचनाकार समेत बहुत सी साइटों जिनमें कि गिज्मेडो इत्यादि भी है, चित्रों को साभार पुनः प्रकाशित करते हैं (आमतौर पर अनुमति प्राप्त करने का झंझट नहीं मोल लेते) तो इनमें क्या लीगल कॉम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं?
जिसके समाधान के तौर पर मैंने कहा:
बिलकुल हो सकती हैं यदि आपके पास उक्त माल को प्रयोग करने की अनुमति नहीं है। क्रिएटिव कॉमन आदि जैसे लाइसेन्स एक तरह से लिखित अनुमति ही है जो आपको उस माल का प्रयोग करने की छूट देती है यदि आप उसकी शर्तों का पालन करते हैं। लेकिन यदि किसी ने अपने माल की कोई लिखित अनुमति नहीं दी तो आप उसका प्रयोग नहीं कर सकते। गिज़्मोडो आदि ब्लॉग के बारे में पता नहीं कि वे कैसे प्रयोग करते हैं लेकिन यदि अनुमति नहीं है तो प्रयोग गैरकानूनी है और यदि माल का मालिक चाहे तो मुकदमा ठोक सकता है और बहुदा चान्स है कि मालिक मुकदमा जीत भी जाएगा।
क्या अब भी उन चित्रों को जहा से उठाया है उनको श्रेय दे दें?
तो इसके उत्तर में मैंने कहा:
सागर जी, श्रेय देने से काम नहीं बनेगा ना!! पहले देखिए कि जो जिसका माल आपने उठाया है वह किसी लाइसेन्स के अंतर्गत प्रयोग करने की अनुमति देता है कि नहीं। यदि नहीं तो या तो आप लिखित अनुमति(ईमेल भी लिखित अनुमति होती है) ले सकते हैं और यदि आपका मन नहीं है तो मत लीजिए अनुमति लेकिन ऐसा करने पर आपके ऊपर सदैव एक तलवार टंगी रहेगी कि उक्त माल का मालिक कभी भी आपको अदालत ले जा सकता है!!
जारी है अगले भाग में …..