कुछ अरसा पहले मैंने अपने घर के नज़दीक स्थित ज्ञानी के अड्डे पर हुआ चॉकलेट आईस्क्रीम और नए मुल्लाओं का वाकया बयान किया था (यदि आपने नहीं पढ़ा है तो एक बार अवश्य पढ़ लें, मौज की मौज और कंटेक्सचुअल अर्थ भी समझ आएगा)। उसके अंत में मैंने ज़िक्र एक साहब और कॉन्टीनेन्टल खाने का किया था, आज मन में आया कि वो किस्सा भी बाँच दिया जाए।

कुछ अरसा पहले की बात है, मैं एक बरिस्ता में बैठा एक मित्र की प्रतीक्षा कर रहा था। पास ही की टेबल पर दो संभ्रांत दिखने वाले परिवार बैठे थे। वे लोग क्या बातचीत कर रहे थे यह याद नहीं लेकिन उनमें एक फैशनेबल अंकल अपनी ही उम्र के लगने वाले दूसरे अंकल से वार्तालाप के दौरान बोले कि उनको तो सुबह का नाश्ता कॉन्टीनेन्टल स्टाईल ही पसंद है यानि कि मक्खन लगे टोस्ट, दो अंडों का ऑमलेट और चाय। प्रायः आप किसी भी रेस्तरां/होटल में जाएँगे तो कॉन्टीनेन्टल नाश्ते के नाम पर यही मिलता है। पाँच सितारा होटलों के अतिरिक्त मैंने कहीं भी असली कॉन्टीनेन्टल नाश्ता मिलते नहीं देखा। हो सकता है कि आपकी उत्सुकता हो कि होता क्या है कॉन्टीनेन्टल ब्रेकफास्ट (continental breakfast)। जो नहीं जानते हैं उनके लिए बता देना बेहतर समझता हूँ कि कॉन्टीनेन्टल का अभिप्राय यहाँ पश्चिमी योरोप (ब्रितानिया के अतिरिक्त, मेनलैन्ड योरोप) है। अब मैं उन फैशनेबल अंकल की अक्ल पर तरस इसलिए खा रहा था कि उनको रत्तीभर भी ज्ञान नहीं कि टिपिकल (typical) कॉन्टीनेन्टल ब्रेकफास्ट क्या होता है।
दरअसल कॉन्टीनेन्टल ब्रेकफास्ट हल्का नाश्ता होता है (यदि फुल इंग्लिश/ऑयरिश/स्कॉटिश नाश्ते से तुलना की जाए) – इसमें कॉफ़ी (प्रायः काली), जूस, और क्रॉसौं (croissants) या पेस्ट्री (pastries) होते हैं। यह इंग्लिश ब्रेकफास्ट (english breakfast), ऑयरिश ब्रेकफास्ट (irish breakfast), स्कॉटिश ब्रेकफास्ट (scottish breakfast) अथवा अमेरिकी ब्रेकफास्ट (north american breakfast) जितना फुल नहीं होता।
ऐसे ही लोगों को अंग्रेज़ी नाश्ते के बारे में भी बहुत गलतफहमी रहती है, चाय और टोस्ट को ही अंग्रेज़ी नाश्ता समझते हैं। एक पारम्परिक फुल इंग्लिश ब्रेकफास्ट में निम्न आईटम होती हैं:

वैसे साथ में ब्लैक पुडिंग (खून में पकाया मांस) भी होती है लेकिन यह निश्चित आईटम नहीं होती, जगह-२ पर निर्भर करता है, इंग्लैंड के कुछ भागों में इंग्लिश ब्रेकफास्ट में यह शामिल होती है। इसी तरह साथ में पिसे हुए उबले आलू (mashed potatoes) भी हो सकते हैं।
अब यदि स्कॉटिश ब्रेकफास्ट की बात की जाए तो परंपरागत नाश्ता तो दलिया (porridge) है लेकिन फुल स्कॉटिश ब्रेकफास्ट में अंडे, बेकन, सॉसेज, स्कॉटिश स्टाइल ब्लैक पुडिंग, हैग्गीस (haggis) और पोटैटो स्कोन्स (potato scones) भी आ जाते हैं।
इसी प्रकार अमेरिकी नाश्ते में प्रायः टोस्ट, बेकन, अंडे, हैश ब्राऊन्स (hash browns), और जूस अथवा कॉफी होते हैं। मेरी जानकारी अनुसार इसमें परम्परागत या फुल का कोई चक्कर नहीं होता।
अब इसी कारण मुझे ऐसे होटल वालों पर कोफ़्त होती है कि लिखते कुछ हैं मेनू में और परोसते कुछ और ही हैं।
और उन फैशनेबल अंकल जैसे लोगों की अक्ल पर तरस आता है जो सिर्फ़ नेम ड्रॉपिंग करना ही जानते हैं, जबकि वास्तव में पता धेले का नहीं होता कि क्या कह रहे हैं। न जाने क्यों लोग अपनी अक्ल की सीमा से अधिक शो ऑफ़ (show off) करते हैं। ऐसा करने से वे अपनी ही बेवकूफ़ी ज़ाहिर करने का खतरा मोल लेते हैं, क्योंकि जिसके सामने शो ऑफ़ कर रहे हैं यदि वह जानकार व्यक्ति हुआ तो क्या इज़्ज़त रह जाएगी शो ऑफ़ करने वाले व्यक्ति की?
अब ऐसे ही ज्ञान जी आईसक्रीम वाली पोस्ट पर अपने साथी अफ़सर की कॉफ़ी वाला किस्सा बताए थे, खामखा उनके साथी अफ़सर की किरकिरी हुई!!
क्रॉसौं की फोटो साभार roboppy तथा इंग्लिश ब्रेकफास्ट की फोटो साभार peasap – दोनों फोटो क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत
यह आज की बात नहीं है, सालों से ऐसा होता आया है कि सिर्फ़ फैशनेबल लगने के लिए लोग किसी चीज़ का अनुसरण करने लग जाते हैं चाहे वह चीज़ उनकी समझ के दायरे से कोसों दूर हो। लेकिन अभी पिछले कुछ वर्षों में महानगरों में यह चलन कुछ खासा बढ़ते देखा है। जैसे-२ कॉस्मोपॉलिटन (Cosmopolitan) टाइप के समाज का दायरा बढ़ता जा रहा है, जैसे-२ अधिक व्यय करने के सामर्थ्य वाले मध्यम वर्ग का विकास होता जा रहा है वैसे-२ इन भेड़ चाल चलने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। जहाँ पहले एकाध ही कोई नज़र आता था वहीं आजकल ये लोग हर गली नुक्कड़ पर चरने निकले भेड़-बकरियों के झुंड की भांति जुगाली करते मिल जाते हैं।
लेकिन घबराने की कोई बात नहीं, ये आपको नुकसान नहीं पहुँचाते, मात्र अपनी समझ और हरकतों से आपका मनोरंजन करते हैं। हाँ ऐसा अवश्य है कि इनमें से कई स्नॉब (Snob) स्नॉबरी करते भी मिल जाएँगे। लेकिन उन स्नॉब लोगों को यदि एक बार को नज़रअंदाज़ कर दिया जाए तो बाकी की यह जमात अन्य लोगों के लिए सर्कस के जोकर का कार्य करती है। ऐसा नहीं है कि ये लोग उछल-कूद करते मिल जाएँगे, या किसी जानवर आदि का खेल दिखाते मिलेंगे, इनकी हरकतें कुछ मौन मनोरंजन कराती हैं जिसे आपकी बुद्धि ताड़ जाएगी, आप मन ही मन मुस्कुराएँगे लेकिन अपनी मुस्कुराहट ज़ाहिर नहीं करेंगे क्योंकि ऐसा करना सभ्य न माना जाएगा और दूसरे व्यक्ति को यह भान हो गया तो वह आप पर बरस भी सकता है कि आप उसकी खिल्ली उड़ा रहे हैं जबकि कार्य स्वयं वो ऐसा कर रहा हो।
अभी दो-तीन दिन पहले की बात है, मैं घर के पास ही स्थित ज्ञानी के अड्डे (Gianis) पर आईसक्रीम (Ice Cream) लेने गया। वहीं एक युवा जोड़ा आया, नवाब साहब अपनी तूफ़ान-ए-हमदम के साथ चॉकलेट (Chocolate) आईसक्रीम का लुत्फ़ उठाने के तमन्नाई थे। उनकी गुल-ए-गुलज़ार ने कहीं सुना/पढ़ा होगा कि चॉकलेट आईसक्रीम यदि सिनफुल (sinful) न हो तो फिर चॉकलेट आईसक्रीम खाने का लाभ ही क्या। तो बस उन्होंने अपने आफ़ताब-ए-नज़र को अपनी सिन (sin) करने की तमन्ना बताई और साहब आ पहुँचे काऊँटर पर आईसक्रीम के बारे में पूछने। जैसा कि परिचित लोग सभी जानते हैं, खान-पान की जगहों के बारे में और उनके मेनू के बारे में मुझे काफ़ी जानकारी रहती है, कुछ अपने अनुभव से और कुछ साथी लोगों के अनुभव से। तो उन्होंने जब काऊँटर पर बैठे व्यक्ति पर एक असली चॉकलेटी आईसक्रीम की तमन्ना ज़ाहिर की तो आदत से मजबूर मैंने उनको मशवरा थमा दिया कि “बेल्जियन चॉकलेट” आईसक्रीम (Belgian Chocolate Ice Cream) को आज़माएँ, इससे अधिक चॉकलेटी आईसक्रीम ज्ञानी के अड्डे पर नहीं मिलेगी। तो उन साहब और उनकी मल्लिका-ए-जिग़र ने मेरे सुझाव को आज़मा के देखने की चाहत से “बेल्जियन चॉकलेट” आईसक्रीम का सैंपल लिया एक चमच्च में और उसको भी आधा-२ चख के देखा कि जान लें कि आईसक्रीम लेने लायक है कि नहीं। दोनों ने आईसक्रीम को चखते ही ऐसे मुँह बिचका दिया जैसे मानो किसी ने कुनैन की गोली का चूर्ण बना के जबरन उनकी हलक से नीचे उतार दिया हो बिना पानी के!!
क्या हुआ? अब हुआ यूँ कि वे असली चॉकलेटी आईसक्रीम की तमन्ना ज़ाहिर किए थे और मैंने जो आईसक्रीम बताई वह असली चॉकलेट आईसक्रीम माफ़िक ही थी, नाममात्र को मीठा और पूरा चॉकलेट का स्वाद, आहा!!
गुल ने टिप्पणी दी कि बहुत कड़वी है और गुलबानों से तो कुछ कहते ही न बना और वे सिर हिलाते वापस काऊँटर के पास दीवार पर टंगे बड़े मेनू (menu) की ओर आ गए कोई स्ट्रॉबरी आदि की आईसक्रीम लेने। अंत में उन्होंने कौन सी आईसक्रीम के साथ सिन (sin) किया यह मुझे नहीं पता क्योंकि तब तक मेरी खरीदी आईसक्रीम पैक हो गई थी और मैं वहाँ रुकने का वैसे भी कोई तमन्नाई नहीं था।
ये एक नमूना है उस भेड़चाल वाले वर्ग का जिनका चॉकलेट ज्ञान कैडबरी की डेरी मिल्क (Dairy Milk) तक ही सीमित है और जो अमिताभ बच्चन के समझाए समझते हैं कि मिठाई और चॉकलेट में कोई फर्क नहीं है। वैसे अमिताभ अंकल का कहना भी सही है, जब चॉकलेट डेरी मिल्क हो तो वाकई मिठाई और चॉकलेट में कोई फर्क नहीं होता क्योंकि डेरी मिल्क चॉकलेट कम और चीनी अधिक होती है!! असल में चॉकलेट की छवि डिप्रेशन कम करने वाली है, मन में एक नई आशा जनने वाली है लेकिन डेरी मिल्क खा के तो किसी भी थर्टी प्लस को डिप्रेशन हो जाता है कि कमबख्त डॉयबिटीज़ (Diabetes) न हो जाए!!
लेकिन कुछ भी कहो, उस भेड़चाल चलने वाले जोड़े का असली चॉकलेट आईसक्रीम से साक्षात्कार देखना मज़ेदार रहा, अंग्रेज़ी में कहें तो इट वाज़ क्वाइट अम्यूज़िंग।
इन लोगों के व्यवहार पर हँसी इसलिए आती है कि ये लोग जो नहीं हैं वह होने का दिखावा करते हैं और फिर मुँह के बल सबके सामने गिरते हैं। आवश्यकता ही क्या है आपको भेड़चाल चलने की? जो हैं वह अपने आप को दिखाने में लोगों को शर्म क्यों होती है? कदाचित् अपने प्रति किसी हीन भावना (inferiority complex) के कारण।
कुछ समय पहले ऐसे ही एक साहब मिले थे जिनका मामला कॉन्टीनेन्टल खाने का था, वह किस्सा यहाँ पढ़ें।