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Posts Tagged ‘मध्य प्रदेश’


October 9th, 2008 | No Comments
Posted In: कतरन

पश्चिमी मंदिर समूह के पास मौजूद तालाब पर कुछ देर बैठे; रखरखाव के अभाव में तालाब की वाट लगी हुई है।


October 9th, 2008 | 2 Comments
Posted In: कतरन

अभी खजुराहो के पश्चिमी मंदिर समूह पर होने वाले साउण्ड एण्ड लाइट शो को देखकर निकले हैं जो कि पिछली बार की ही भांति भव्य था, देखकर मज़ा आ गया।


देवताओं के ए खामोश नगर …..


June 11th, 2008 | 3 Comments

ऐसे ही पिछले वर्ष छुट्टियों पर दिल्ली से बाहर की गई घुम्मकड़ी के दौरान ली गई तस्वीरें देख रहा था कि फरवरी में ली गई खजुराहो की तस्वीरें दिखाई दीं। एकाएक ही मन जैसे उन पूर्व-मध्यकालीन मंदिरों की उड़ान पर चला गया; उस समय हरिप्रसाद चौरसिया जी की बांसुरी के मधुर संगीत की स्वर लहरियाँ कानों से टकरा मानों जन्नत का सा एहसास करा रहीं थी। जब वहाँ पिछले वर्ष गया था तो पश्चिमी मंदिरों के समूह को देखने हम सुबह सवेरे गए थे, उस समय वहाँ अधिक पर्यटक नहीं थे, मंदिर के अंदर बैठने पर मानों ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सदियाँ बीत गई हों वहाँ बैठे-२ और पता ही नहीं चला, इतनी शांति थी हर ओर कि मन के सभी शोर जैसे उससे डर कर भाग गए थे!!

जब वह सुन्दर और शीतल तंद्रा भंग हुई तो सोचा कि कुछ अलग किया जाए, एकठो स्लाईडशो टाइप अपन भी बना लें तो उस समय खजुराहो में ली गई तस्वीरों में से सबसे बेहतरीन तस्वीरों को जोड़ यह बना डाला। :) स्पीकर अथवा हेडफोन को भी चालू कर यह वीडियो देखें, पार्श्व संगीत बढ़िया है। :tup:

Get the Flash Player to see the wordTube Media Player.

प्रतिबिंब पर जब खजुराहो की एक तस्वीर पोस्ट की थी तो नीरज दादा से साथ में लगाने के लिए यह पंक्तियाँ ली थीं:

ए चंदेलों के जमाने के शहर खजुराहो
देवताओं के ए खामोश नगर खजुराहो
ए तिलिस्मात न जामये खजुराहो
पर तवे रौनके इकबाल कमर खजुराहो

तेरा हर नक्श है पत्थर पै जवानी का उभार
तुझमें महफज है अय्यामें गुजिशता की बहार
सनअते संग तराशी के ऐ मशहूर दयार
मंदिरों से तेरी तारीख का कायम है मयार

यह किसकी रचना है यह तो नीरज दादा को भी नहीं पता लेकिन सुन्दर रचना है यह तो मुझ जैसा (इन मामलों में)गंवार भी कह सकता है! :tup:


खजुराहो और ओरछा – भाग २


April 18th, 2007 | 8 Comments

पिछले भाग से जारी …..


( खजुराहो के पूर्वी भाग में स्थित जैन मंदिर )



( शिल्प कला के उत्कृष्ट नमूने )





( दूल्हा देव मंदिर )



( जावारी मंदिर )



( राम राजा मंदिर – ओरछा के इस मंदिर में राम राजा के रूप में पूजे जाते हैं, भगवान के रूप में नहीं। )



( सुबह सवेरे बेतवा नदी के किनारे )



( इस तस्वीर को लेने के लिए काफ़ी मशक्कत की, नदी के बीचो-बीच चिकने पत्थरों पर से होकर जाना पड़ा। एक अमेरिकन मिला था जाने से पहले जो कि फ़िसलकर गिरते-२ बचा था, उसी ने बताया कि जहाँ वह फ़िसला था वहाँ से अच्छा दृश्य दिखाई दे रहा है। )




( ओरछा का किला )



( जहाँगीर महल – माना जाता है कि ओरछा के किले में उपस्थित इस भव्य महल को ओरछा के राजा वीर सिंह देव प्रथम ने शहंशाह जहाँगीर के स्वागत में बनवाया था। )



( जहाँगीर महल )



( जहाँगीर महल के पीछे से बहती बेतवा नदी )



( ओरछा किले में उपस्थित राजा महल के एक कक्ष की दीवारों पर मौजूद चित्रकारी )



( राजा महल से दिखता ओरछा शहर )



खजुराहो और ओरछा – भाग १


April 3rd, 2007 | 13 Comments

15 फ़रवरी को दिल्ली से निकले और 16 फ़रवरी को खजुराहो पहुँच गए। इस बार यात्रा पर निकले सिर्फ़ मैं और योगेश, दिल्ली से झांसी और झांसी से वापस दिल्ली, बस ये दो ट्रेन की टिकटें पहले से आरक्षित करवाई थीं, इसके अतिरिक्त कहीं कोई बुकिंग नहीं, हम दोनों अपने-२ बैग उठाए चल दिए थे 3 दिन वाले सप्ताहांत की यात्रा पर, कार्यक्रम था खजुराहो और फिर ओरछा घूमने का।

यात्रा का विवरण लिखना हो नहीं पा रहा है, इसलिए प्रस्तुत हैं कुछ तस्वीरें।



( लक्षमण मंदिर )



( कन्द्रिया महादेव )




( मंगतेश्वर महादेव – खजुराहो के प्राचीन हिन्दु मंदिरों में से केवल यह अभी भी कार्यरत है जहाँ भक्तजन पूजा करते हैं। यहाँ पुजारी आपकी पूजा नहीं करवाते, भक्त स्वयं प्रसाद चढ़ा पूजा करते हैं। 16 फ़रवरी को शिवरात्रि थी जब हम लोग यहाँ गए थे। )



( विश्वनाथ मंदिर – खजुराहो के सबसे सुन्दर मंदिरों में से एक )



( विश्वनाथ मंदिर की बाहरी दीवारों पर काम कला का चित्रण )



( कन्द्रिया महादेव और जगदम्बी मंदिर )



( चित्रगुप्त मंदिर का द्वार – यह सूर्य का मंदिर है जिसमें सूर्य को अपने सात अश्वों वाले रथ पर दिखाया गया है )



( जगदम्बी मंदिर के बाहर एक सिंह की प्रतिमा )



( जगदम्बी मंदिर की बाहरी दीवारों पर काम कला का चित्रण )



( योगेश और पृष्ठभूमि में जगदम्बी मंदिर )



( कन्द्रिया महादेव )


अगले भाग में जारी …..


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