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संपूर्णता…..


August 4th, 2009 | 7 Comments

कल मैंने नैनोफिक्शन के विषय में लिखा था कि इस विधा में कथा को 55 शब्दों में ही समेटना होता है और उसके कुछ अन्य नियम भी बताए थे। यह नैनोफिक्शन अर्थात्‌ पचपन शब्दिया कथा की विधा में मेरा पहला प्रयास है। एन्सी ने सही कहा था, वाकई कठिन कार्य है पचपन शब्दों में कथा को समेटना।

 

“स्त्री माँ बनने पर ही पूर्ण होती है”, माँ ने युवा होने पर समझाया था। वह माँ नहीं बन सकती थी, जान का खतरा था। पाँच वर्षों से सास उसे ताने दे रही थी।
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बेहोश होने से पहले नर्स ने बताया लड़का हुआ है। अब वह संपूर्ण स्त्री थी; चैन से सो सकती थी।

 
 
फोटो साभार paterjt, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत