कॉमिक्स पढ़ने वालों, कार्टून अथवा फिल्में आदि देखने वालों में कदाचित् ही ऐसा कोई होगा जिसने बॉब केन (Bob Cane) के प्रसिद्ध शाहकार बैटमैन (Batman) के बारे में न पढ़ा/सुना हो। सुपर हीरो बिरादरी में बहुत ही कम इक्के-दुक्के ऐसे सुपर हीरो हैं जिनके पास कोई सुपर पॉवर नहीं है और बैटमैन उनमें से एक है। यह सुपर हीरो अपनी शारीरिक शक्ति, हाथों की लड़ाई की दक्षता, अपने तेज़ दिमाग और वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से अपराध और अपराधियों के दिलो दिमाग पर हौव्वा बनता है। यही कारण है कि सुपर हीरो जमात में यह मेरा सबसे अधिक मनपसंद सुपर हीरो है।
18 जुलाई को आखिरकार लंबी प्रतीक्षा के बाद क्रिस्टोफर नोलन की बैटमैन शृंखला की अगली फिल्म “द डार्क नाइट” (The Dark Knight) रिलीज़ हुई। यह फिल्म मई में रिलीज़ होनी थी जैसा कि इसके शुरुआती ट्रेलर (trailer) में दिखाया था पर दो माह यह फिल्म लेट हो गई। अब अपने को बहुत बेसब्री से इस फिल्म की प्रतीक्षा थी और इत्तेफ़ाक की बात रही कि जिस दिन यह रिलीज़ हुई उसी दिन दोपहर को लगा कि सांय काल मेरे पास दो-तीन घंटे का खाली समय होगा। तुरंत बुकमाईशो पर देखा कि घर के आसपास यह फिल्म कहाँ लगी है, इत्तेफ़ाक ही रहा कि घर से मात्र 6-7 किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित एक सिनेमा पर यह फिल्म लगी थी और सांय काल के प्रथम शो में कुछ सीटें खाली थीं। बस यह देख अपना दिल गार्डन-२ हो गया और तुरंत फिल्म की टिकट बुक करवा ली।

इस कड़ी की पिछली फिल्म के अंत में जोकर (Joker) का वर्णन आ गया था तो अपेक्षित था कि इस फिल्म में विलेन जोकर होगा जैसे कि पिछली फिल्म में रास-अल-घूल (Ra’s-al-Ghul) था। कहानी एक तरह से वहीं से आगे बढ़ती दिखती है जहाँ पिछली फिल्म में छोड़ी गई थी, यानि कि गॉथम शहर (Gotham City) में अपराध का बोलबाला है और बैटमैन तथा पुलिस में उसका साथी लूटेनेन्ट जिम गॉर्डन (Lieutenant Jim Gordon) अपराध के खिलाफ़ जंग छेड़ देते हैं और माफ़िया बॉसों का जीना दुश्वार कर देते हैं; रात में माफ़िया सरगना बैटमैन के खौफ़ के कारण बाहर नहीं निकलते और दिन में गॉर्डन का डर उन्हें बाहर निकलने नहीं देता। इधर ये दोनों लड़ाई के मामले में जंग छेड़े हुए थे उधर नए-२ डिस्ट्रिक्ट एटोर्नी (District Attorney) बने हार्वी डेन्ट (Harvey Dent) और उसकी सहयोगी तथा ब्रूस वेन (Bruce Wayne) यानि कि बैटमैन की बचपन की मित्र रेचल डॉस (Rachel Dawes) ने कानून की भूमि पर माफ़िया बॉसों का जीना दुश्वार कर रखा होता है क्योंकि पहले की तरह कानून की गिरफ़्त से आराम से छूट जाने वाले अपराधी इन दोनों की बदौलत सीधे जेल जा रहे होते हैं। जहाँ कल तक शहर पर माफ़िया बॉसों की हुकूमत चलती थी वहीं आज उनको बैटमैन, गॉर्डन और डेन्ट से तीन तरफ़ा मार ऐसी पड़ रही होती है कि उनके लिए बचने की कोई जगह नहीं रहती। हालात ऐसे हो जाते हैं कि माफ़िया बॉसों की हालत डेस्परेशन तक पहुँच जाती है और तब रोल आता है जोकर का, एक पागल सिरफिरा मसखरा जुनूनी दयाहीन अपराधी, जो माफ़िया बॉसों की आधी दौलत के बदले बैटमैन को ठिकाने लगाने की पेशकश करता है जिसे माफ़िया बॉस ठुकरा देते हैं क्योंकि कोई भी अपनी आधी दौलत नहीं देना चाहता इस काम के लिए। परन्तु कोई अन्य रास्ता न देख आखिरकार माफ़िया बॉस मान जाते हैं और जोकर को बैटमैन की सुपारी दे डालते हैं। फिर खेल शुरु होता है जोकर का जिसमें वह बैटमैन को आत्मसमर्पण पर मज़बूर करने के लिए पूरे शहर में ज़लज़ला ले आता है जिसमें जान और माल दोनो का ही भारी नुकसान होता है, दहशत का ऐसा नंगा नाच होता है जो कि किसी सुपर हीरो फिल्म में शायद ही दिखाया गया हो, आम लोगों के साथ-२ कई पुलिस वालों, यहाँ तक कि पुलिस कमिश्ननर की भी जान चली जाती है।
पूरा शहर बैटमैन के आत्मसमर्पण के लिए चिल्ला रहा होता है, जहाँ हार्वी डेन्ट शहर का हीरो होता है वहीं लोग बैटमैन को कोस रहे होते हैं कि उसकी वजह से उन सबकी जोकर ने वाट लगाई हुई होती है। एक पल ऐसा आता है कि ब्रूस वेन (Bruce Wayne) आत्मसमर्पण करने की ठान लेता है, उसका वफ़ादार नौकर और सहयोगी अल्फ्रेड उसे समझाता है कि बैटमैन को यह सब सहन करना होगा क्योंकि हालात सुधरने से पहले बुराई की चोटी तक तो पहुँचने ही थे और सवेरा अवश्य होगा। इधर हार्वी डेन्ट भी लोगों को समझा रहा होता है कि बैटमैन को जोकर के हवाले कर देने से कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि डेन्ट ना चाहते हुए भी यह मानता है कि इस तुरत फुरत अपराध के नाश में बैटमैन का बहुत बड़ा अद्वितीय योगदान है। सभी माफ़िया बॉसों आदि को जेल में डालने के लिए डेन्ट ने माफ़िया सरगनाओं के जिस अकाउंटेन्ट की सहायता ली होती है उसका हांगकांग से अपहरण करके बैटमैन ने ही गॉथम की पुलिस को सौंपा होता है, एक ऐसा काम जो उनमें से कोई और नहीं कर सकता था।
फिर क्या होता है? यह तो आप फिल्म देखकर ही जानिए। फिल्म के अंत में जब जोकर पकड़ा जाता है तो वो कुबूल करता है कि बैटमैन को वाकई भ्रष्ट नहीं किया जा सकता, उसको कितना ही उकसा लो कितना ही प्रताड़ित कर लो लेकिन वो ज़ाती तौर पर बदला नहीं लेता और जोकर जैसे मुजरिम की भी जान नहीं लेता।
इस फिल्म में बैटमैन के एक बहुत ही करीबी की मृत्यु हो जाती है, उस करीबी व्यक्ति की जिसने ब्रूस वेन को यह समझाया था कि कानून मरा नहीं है और खुद के लिए बदला लेना और इंसाफ़ करना दो अलग-२ चीज़े हैं, ऐसी बातें जिन्होंने आगे चलकर ब्रूस को बैटमैन बनकर अपराध के खिलाफ़ लड़ने और हर मुजरिम को कानून द्वारा सज़ा दिलवाने के लिए प्रेरित किया।
हार्वी डेन्ट एक मुजरिम बन जाता है, जानने वाले जानते होंगे कि हार्वी डेन्ट ही अपराधी टू फेस (Two Face) होता है। लोगों के हौसले हार्वी डेन्ट की काली करतूतों के कारण पस्त न हो जाएँ इसके लिए बैटमैन कमिश्नर गॉर्डन को इस बात के लिए मना लेता है कि वह डेन्ट द्वारा किए गए खून बैटमैन के सिर मढ़ दे ताकि लोगों के विश्वास और हौसले को ठेस न पहुँचे। और इधर गॉर्डन पुलिस मुख्यालय के ऊपर लगे बैट सिग्नल (Bat Signal) (बैटमैन को मदद के लिए बुलाने का एक ज़रिया) को नष्ट करता है उधर बैटमैन को पकड़ने के लिए पुलिस की तलाश शुरु हो जाती है, जिन पाँच लोगों की हत्याओं का दोष बैटमैन ने अपने ऊपर लिया होता है उसमें दो पुलिस वाले भी होते हैं। इधर पुलिस बैटमैन के पीछे निकलती है उधर गॉर्डन का पुत्र पूछता है कि बैटमैन क्यों भाग गया जब उसने कुछ गलत किया ही नहीं, तो उत्तर में गर्व मिश्रित दुख के साथ गॉर्डन कुबूलता है कि पुलिस अब बैटमैन का पीछा करेगी, वह हीरो नहीं है बल्कि गॉथम शहर का एक संरक्षक है, एक चौकस रखवाला, द डार्क नाइट (the dark knight)।
अमूमन होता है कि फिल्मों के ट्रेलर बहुत बढ़िया होते हैं जो कि फिल्म के बारे में अति उत्साहित कर देते हैं और फिल्म बाद में फुस्स ही निकलती है। लेकिन बैटमैन की इस फिल्म के बारे में मैंने उल्टा ही महसूस किया, इसके ट्रेलरों ने फिल्म के बारे में खास उत्साहित नहीं किया था, फिल्म देखने से पहले मन में एक तरफ़ यह भी आशंका घेरे हुए थी कि कहीं फिल्म फुस्स न निकल जाए जब ट्रेलरों में ही कोई खास दम नहीं था। परन्तु फिल्म ने सारी आशंकाओं को चकनाचूर कर दिया और मैं यह विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि अभी पिछले कुछ वर्षों में बनी सुपर हीरो फिल्मों में यह अभी तक की सबसे बढ़िया फिल्म है। अभी तक सुपर हीरो फिल्मों में स्पाइडरमैन की ही फिल्में टॉप पर थीं लेकिन मैं समझता हूँ कि इस फिल्म ने स्पाइडरमैन की अभी तक की आई तीनों फिल्मों को उठाकर नीचे फेंक दिया है, वे इसके सामने कहीं भी नहीं टिकती। ऑयरन मैन (Iron Man) का तो इससे कोई मुकाबला ही नहीं है और सुपरमैन (Superman) की जो अभी हाल ही में वापसी हुई थी उसका बैटमैन की इस फिल्म से मुकाबला करना इस बैटमैन फिल्म की बेइज़्ज़ती होगी।
कहने की आवश्यकता नहीं कि यह फिल्म दूसरी सुपर हीरो फिल्मों को ही नहीं वरन् अन्य फिल्मों को भी चारों खाने चित्त करती है। और इसका प्रमाण बॉक्स ऑफिस पर इसकी सफ़लता भी है, पहले दिन ही इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस के पूर्व रिकॉर्ड तोड़ डाले और पाँच दिन के अंदर-२ बीस करोड़ डॉलर की कमाई कर डाली।
कलाकारों की बात की जाए तो पिछली फिल्म की भांति इस फिल्म में भी क्रिस्टियन बेल (Christian Bale) ने बैटमैन तथा ब्रूस वेन के किरदार में काफ़ी अच्छा अभिनय किया है। अल्फ्रेड (Alfred) बने माइकल केन (Michael Caine) और लूशियस फ़ॉक्स (Lucius Fox) बने मॉर्गन फ्रीमैन (Morgan Freeman) के अभिनय के तो कहने ही क्या, दोनो मास्टर हैं और फिल्म में अपने किरदारों को मिले कम समय में भी दोनों ने शानदार अभिनय किया है। पुलिस लूटेनेन्ट (और बाद में कमिशनर) गॉर्डन (Lieutenant Gordon) को इस फिल्म में पिछली फिल्म के मुकाबले अभिनय का अधिक स्कोप मिला जिसे पिछली बार ही की तरह गैरी ओल्डमैन (Gary Oldman) ने बखूबी अदा किया है, वह एक बढ़िया अभिनेता हैं।
कई लोग इस फिल्म के बारे में इसलिए भी उत्सुक दिखे क्योंकि यह अभिनेता हीथ लेजर (Heath Ledger) की आखिरी फिल्म है, इस वर्ष जनवरी में हीथ की मृत्यु हो गई। लेकिन मुझे जोकर बने हीथ का अभिनय ऐसा कुछ खास नहीं लगा, जोकर का किरदार काफ़ी पॉवरफुल है और हीथ के साधारण अभिनय ने काफ़ी अधिक गुंजाइश छोड़ दी।
एक अन्य किरदार का अभिनय जो मुझे फालतू लगा वह है रेचल डॉस बनी मैग्गी गायलेनहॉल (Maggie Gyllenhaal) जिसने बिलो पार (below par) अभिनय कर पूरे किरदार की वाट लगा दी।
पिछली फिल्म में रेचल डॉस बनी केटी होम्स (Katie Holmes) ने भी कोई खास अभिनय नहीं किया था पर वह फिर भी मैग्गी के अभिनय के मुकाबले ठीक ठाक ही था। मुख्य किरदारों में एकलौता स्री किरदार और उसकी भी ऐसी वाट लगना – वाकई बहुत अफ़सोसजनक है। लेकिन खुशी की बात है कि इनके बेकार अभिनय से ओवरऑल फिल्म की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा और फिल्म एकदम चकाचक बन पड़ी है।
यदि आप एक अच्छी थ्रिलर फिल्म देखना चाहते हैं जो आपको एक पल के लिए भी चैन से न बैठने दे और पूरे समय उत्सुक और उत्साहित रखे तो यह फिल्म अवश्य देख आईये। मेरे अनुसार यह फिल्म पाँच में से पौने पाँच की रेटिंग की अधिकारी है। जैसे ही इस फिल्म की डीवीडी रिलीज़ होती है वैसे ही तुरंत उसकी एक प्रति मेरे कलेक्शन में जाएगी, यह फिल्म रखने योग्य है।
रेटिंग: 4.75 / 5
ऑयरन मैन (Iron Man) कॉमिक्स का एक काल्पनिक पात्र है जो कि सुपर हीरो है। मारवल कॉमिक्स(वही कॉमिक्स जिसमें स्पाइडरमैन की कॉमिक्स भी प्रकाशित होती हैं) का यह पात्र वर्षों से बच्चों को मोहित करता आ रहा है, इस पर कार्टून सीरियल भी बने। इस तरह के काल्पनिक कॉमिक्स के पात्रों पर बनी हॉलीवुड की फिल्में मुझे खासी पसंद हैं, स्पाइडरमैन भी पसंद आई, बैटमैन भी पसंद आई, और अब हाल ही में यह ऑयरन मैन भी रिलीज़ हुई।
एक शुक्रवार आशीष से पूछा कि चलेगा क्या देखने तो उत्तर मिला कि वो अपनी एक मित्र से भी पूछ लेगा और टिकट खुद ही बुक करवा लेगा, मुझे क्या आपत्ति हो सकती थी तो मैंने कह दिया ठीक है। अगले दिन शनिवार को मैं एक साहब से मिलने क्नॉट प्लेस गया और हम वहाँ केएफ़सी (KFC) में बैठे भोजन के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे कि आशीष बाबू का फुनवा आया और बाबू साहब फरमाए कि तीन टिकट मैं बुक कराऊँ क्योंकि उनके सदाबहार गुड़गाँव में बिजली नहीं है(हैवल्स के पंखे नहीं लगा रखे होंगे)!! एक बार तो मैं झल्ला गया कि मैं घर से बाहर हूँ, पास में लैपटॉप भी नहीं है इंटरनेट कनेक्शन के साथ, कैसे टिकट कराई जाए!!
फिर ध्यान आया कि कुछ समय पहले मैंने बुकमाईशो.कॉम का मोबाइल सॉफ़्टवेयर अपने फोन में डाला था, इंटरनेट कनेक्शन तो मोबाइल में है ही, तो बस तुरंत मोबाइल निकाला और टिकट बुक करा दी।
(इस मोबाइल सॉफ़्टवेयर के बारे में जल्द ही पोस्ट ठेली जाएगी यहाँ पढ़ें) गनीमत थी कि हमारे हिसाब से माकूल समय के शो के लिए सिनेमा में पीछे की कतार में लगभग बीच की तीन सीटें खाली थी जो कि मैंने तुरंत बुक कर दी वर्ना हाउस फुल तो लगभग हो ही गया था!!
सैम रैमी द्वारा निर्देषित स्पाइडरमैन (Spiderman) तथा क्रिस्टोफ़र नोलन द्वारा निर्देषित बैटमैन बिगिन्स (Batman Begins) की ही भांति यह फिल्म भी लगता है निर्देषक जॉन फावेरियू द्वारा एक सीरीज़ की शुरुआत है और इस फिल्म में ऑयरन मैन के बनने की कहानी है।
फिल्म में दर्शाया है कि कैसे हथियार और उनकी टेक्नॉलोजी को विकसित करने वाली कंपनी का बेहतरीन दिमाग वाला एक ऐय्याश अरबपति मालिक ऐय्याशी भरी ज़िंदगी जी रहा होता है जब उसे अफ़ग़ानिस्तान जाकर अमेरिकी सेना को एक नई मिसाइल दिखानी होती है और वहीं उस पर आतंकवादियों द्वारा हमला होता है जिसमें उसी की कंपनी के हथियार प्रयोग किए जाते हैं और वह इस कदर ज़ख्मी हो जाता है कि उसके बचने की संभावना ही नहीं होती लेकिन आतंकवादियों को वह ज़िंदा चाहिए होता है ताकि वे उससे वह मिसाइल बनवा सकें इसलिए उनकी गिरफ़्त में मौजूद एक डॉक्टर उसे जुगाड़ लगा के बचा लेता है, उसके दिल के पास एक इलैक्ट्रोमैग्नेट लगा दी जाती है जिससे बम फटने से उसके खून में मिल गए लोहे के महीन टुकड़े उसके दिल को न भेद सकें। लेकिन अपना हीरो मिसाइल बनाने की जगह कुछ और बना डालता है, एक ऐसा लौह कवच जो उसकी आतंकवादियों की गिरफ़्त से निकलमें में सहायता करेगा।
निकल भागने की कोशिश में वह लौह कवच तो नष्ट हो जाता है लेकिन कहानी के हीरो टोनी स्टॉर्क (Tony Stark) को एक दिशा मिल जाती है और उसके दिमाग में इंजीनियर का कीड़ा कुलबुला उठता है। वापस अमेरिका पहुँच वो इसी काम में लग जाता है। अंत में ऑयरन मैन का जो लाल-सुनहरा कवच बन के तैयार होता है वह बहुत ही मोहक लगता है। फिल्म में अभिनेता रॉबर्ट डाऊनी जूनियर (Robert Downey Jr.) ने अच्छा अभिनय किया है, अन्य सुपर हीरो फिल्मों की तरह एकदम संजीदा किरदार नहीं निभाया है वरन् मज़ाक करने वाला एक खुशमिजाज़ टाइप बंदे का अभिनय किया है। लोकेशन भी इस फिल्म में अभी तक की आई सुपर हीरो फिल्मों से थोड़ा हटकर रही हैं, इसमें न्यू यार्क स्टाइल आसमान छूती इमारतें और उनके बीच गुण्डों से कबड्डी खेलता सुपर हीरो नहीं दिखाया गया है।
ग्वेनेथ पॉल्ट्रो (Gwyneth Paltrow) ने टोनी स्टॉर्क की असिस्टेन्ट पैप्पर पॉट्स (Pepper Potts) का किरदार किया है और एक बार फिर ग्वेन के अभिनय ने निराश ही किया है। वैसे इस फिल्म में ग्वेन को अभिनय के लिए अधिक स्कोप नहीं मिला है तो इसलिए इस बार के खराब अभिनय को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है।
एक चीज़ जो मुझे हॉलीवुड की फिल्मों में अच्छी लगती है वह यह कि वे लोग फिल्म में बढ़िया तकनीक का प्रयोग करते हैं, स्पेशल इफेक्ट्स और साऊंड उच्च क्वालिटी की होती हैं और इस मामले में इस फिल्म ने भी निराश नहीं किया है।
ज़हीन लोगों को इस फिल्म की कहानी में कदाचित् दम न लगे लेकिन सुपर हीरो वाली फिल्में फिर वैसे भी उनके लेवल की नहीं होती हैं। फिल्म के दो मुख्य किरदारों, रॉबर्ट डाऊनी जूनियर और जेफ़ ब्रिजिस (Jeff Bridges) (जो कि विलेन बने हैं), ने अपने पात्रों के साथ नाइंसाफ़ी बिलकुल नहीं की है और दमदार अभिनय किया है। तीसरे मुख्य किरदार ग्वेनेथ पॉल्ट्रो का अभिनय नज़रअंदाज़ किया जा सकता है। एक और किरदार है लेफ्टिनेन्ट कर्नल जिम रोड्स का जिसे टेरेन्स हॉवर्ड (Terrence Howard) ने निभाया है जो कि कहानी में टोनी स्टॉर्क के अज़ीज़ मित्र का किरदार है, इस किरदार में भी काफी दम है जो कि आगे की फिल्मों में दिखाई देगा यदि फिल्में अभी तक की ऑयरन मैन कॉमिक्स की कहानी पर ही चलती हैं तो, फिलहाल इस फिल्म में टेरेन्स को भी अधिक पंख फैलाने का मौका नहीं मिला तो उनके बारे में कुछ कहना जायज़ न होगा।
कुल मिलाकर एक बढ़िया फिल्म है, जिन लोगों को सुपर हीरो वाली और कॉमिक्स किरदारों की फिल्में पसंद हैं उनको अवश्य देखनी चाहिए, ऑयरन मैन के चाहने वालों ने तो अब तक खैर देख ही ली होगी।