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2009 की आखिरी दो ब्लॉगर भेंटवार्ताएँ …..


January 4th, 2010 | 14 Comments
Posted In: Blogger Meetups

पिछले वर्ष 19 दिसंबर वाले सप्ताहांत पर अहमदाबाद से बेंगाणी बंधु दिल्ली आए हुए थे। अहमदाबाद से निकलने से पहले पंकज ने बता दिया था कि दोनों भाई दिल्ली आ रहे हैं किसी पुरस्कार समारोह के लिए तो मैंने तुरंत कह दिया था कि भई फोन नंबर तो तुम्हारे पास है ही तो जब भी समय हो बता देना अपन मिलने आ जाएँगे। अब यह नहीं पता था कि रवि जी भी होंगे साथ में, तो यह बढ़िया संयोग रहा। इधर मज़ेदार बात यह रही कि जीतू भाई भी दो-तीन दिन पहले ही भारत आए थे और बता दिए थे कि भई आ गए हैं मिलने का बनाएँगे मामला। तो इधर मैंने उनको भी खबर कर दी कि मामला बनता दिख रहा है अच्छा खासा। तो 19 दिसंबर को हौज़ खास में उसी ऑडीटोरियम में मिलने का प्रोग्राम बना जिसमें पुरस्कार समारोह आयोजित था। उससे पिछली रात को श्रीश से बात हो रही थी तो यह बात निकल गई कि कल मिलने का प्रोग्राम है इतनी बड़ी हस्तियों से, तो वह भड़क गया कि उसे काहे नहीं न्यौता दिया गया। तो मैंने कहा कि अगले दिन स्कूल की छुट्टी मार, सुबह बस में चढ़ और दोपहर तक पहुँच जाएगा यहाँ दिल्ली, तो वह भी राज़ी हो गया।

तो यूँ हुआ मामला सैट इस ब्लॉगर मीट का। निम्न कुछ फोटो उसी मीट से हैं, फोटो कुछ और भी ली थीं लेकिन वह अच्छी न आईं।


बाएँ से दाएँ:  रवि रतलामी, संजय बेंगाणी



बाएँ से दाएँ:  पंकज बेंगाणी, श्रीश



बाएँ से दाएँ:  पंकज बेंगाणी, डॉ. विपुल जैन (चिट्ठाजगत वाले), श्रीश, रवि रतलामी, संजय बेंगाणी, जीतेन्द्र चौधरी (मेरा पन्ना वाले)



यह पुरस्कार समारोह के बाद का फोटो है, इसमें रवि जी और संजय भाई अपने-२ पुरस्कार की ट्रॉफ़ी पकड़े हुए हैं


तो यह था मामला इन महान हस्तियों से सुसज्जित ब्लॉगर मीट का। अब इससे निपटे थे कि 29 सितंबर की रात मिश्रा जी का फुनवा आ गया कि अगले दिन दिल्ली पहुँच रहे हैं, रात को अमरीका के लिए उड़ेंगे तो उससे पहले मिलने का प्रोग्राम बन जाए तो बढ़िया रहेगा। तो मामला लंच का तय हुआ, जीतू भाई को भी आना था। लेकिन अगले दिन जीतू भाई धोखा देकर पतली गली से निकल लिए, बोले बोत काम हैं खामखा तुम पर वेस्ट करने को टैम नहीं है!! :D उधर मिश्रा जी की इलाहाबाद से गड्डी लेट हो गई। ज्ञान जी नोट कीजिए, माल गाड़ियाँ सरपट भगाने का खमियाज़ा पैसेन्जर ट्रेन से न भरवाईये। :D लंच का समय निकल गया और मिश्रा जी निकल गए अपने एक मित्र के साथ, लंच रीस्केड्यूल (re-schedule) होकर डिनर का प्रोग्राम बना। तो शाम को अपन पहुँचे क्नॉट प्लेस और निर्धारित कैफ़े कॉफ़ी डे में पहुँच विराज गए। समय व्यतीत करने के लिए अपन अपने एस९ (S9) पर गाने सुन रहे थे और एक उपन्यास पढ़ रहे थे। मिश्रा जी अपने को आसानी से दिख जाएँ इसलिए मैं नीचे बैठा था (न कि ऊपरी मंज़िल पर) और शीशे के पार पूरी सड़क नज़र आ रही थी, उधर मिश्रा जी शीशे के पार एकदम सामने खड़े होकर मुझे फोन लगाते हैं कि भई कहाँ हो!! :D तो यूँ मिले मिश्रा जी से और उनके साथ आए उनके मित्र माधवेन्द्र शुक्ला से जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय से कोई घणी हाई फाई चीज़ पढ़ रहे हैं अपने को तो समझ भी न आया कि क्या होता है।


मिश्रा जी के मित्र, श्री माधवेन्द्र शुक्ला



मिश्रा जी


कॉफ़ी के बाद हम लोग रात्रि भोज के लिए निकले, मिश्रा जी को चीनी, जापानी, थाई, मेक्सिकन, अमेरिकी, गुजराती, उत्तर भारतीय, दक्षिण भारतीय आदि सभी विकल्प गिनवा दिए और उन्होंने दक्षिण भारतीय खाने को तरजीह दी, सो हम लोगों ने सरवण भवन में मामला निपटाया।

संजय भाई नोट कर लें, उनका कैमिकल नमस्ते हमने मिश्रा जी को दे दिया था। :D


ब्लॉग – समाज के लिए उनका क्या महत्व है?


February 8th, 2008 | 2 Comments

पिछले माह, 12 जनवरी 2008 को, हुई दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society aka DBNMS) द्वारा आयोजित प्रथम ब्लॉगर भेंटवार्ता काफ़ी सफ़ल रही। बहुत से लोगों ने यह भी हमें बताया कि वह भेंटवार्ता उनके लिए काफ़ी ज्ञानवर्धक रही, उनको कई बातों की जानकारी मिली और अन्य ब्लॉगरों से मिलने का अवसर तो मिला ही। दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society) के पीछे एक उद्देश्य यह भी है कि ब्लॉगर भेंट सिर्फ़ चाय-कॉफी और गपशप तक ही न सीमित रहें बल्कि हम ब्लॉगर लोग जब मिलें तो अलग-२ विषयों पर कुछ सार्थक चर्चा भी करें और एक दूसरे से सीखें भी, इसलिए Be Relevant का नारा लगाया गया था। :)

तो इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए इस माह, 14 फरवरी 2008 को, एक और ब्लॉगर भेंटवार्ता आयोजित की जा रही है। यह पिछली बार की तरह लंबा चौड़ा कार्यक्रम न होगा, मात्र दो घंटे का कार्यकरम सांयकाल में होगा जिस पर ब्लॉगों और समाज के लिए उनके महत्व पर चर्चा की जाएगी। सिलसिलेवार जानकारी निम्न है:

चर्चा का विषय: ब्लॉग और समाज के लिए उनका महत्व
स्थान: गुलमोहर हॉल, इंडिया हैबिटाट सैन्टर (India Habitat Center), लोधी रोड, नई दिल्ली
तिथि: 14 फरवरी 2008
समय: सांयकाल 6:30 से 8:30
रूपरेखा: ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों ने विश्व भर में अपनी एक पहचान कायम की है और भारत में भी यह हो रहा है जैसा कि हालिया पिछले समयकाल में विदित हुआ है। अब इसी पर आगे बढ़ते हुए ब्लॉगर/चिट्ठाकार नागरिक पत्रकार(citizen journalists) की अपनी भूमिका निभाने के लिए क्या कर सकते हैं? इसी पर चर्चा की जाएगी एक संवादात्मक सत्र में जिसको निम्न भागों में विभाजित किया गया है:

  1. उन वाकयों के उदाहरण जहाँ ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों के कारण बदलाव आए हैं
  2. पत्रकारिता के श्रेष्ठ सिद्धांत जिनका ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों पालन कर सकें
  3. कैसे ब्लॉगर/चिट्ठाकार इस सब पर एक साथ कार्य कर सकते हैं

आमंत्रित: इस भेंटवार्ता में सभी आमंत्रित हैं, वे भी जो मौजूदा ब्लॉगर/चिट्ठाकार हैं और वे भी जो ब्लॉगर/चिट्ठाकार बनना चाहते हों और वे भी जो ब्लॉग पाठक हैं।

इस भेंटवार्ता और सभा में भाग लेने का कोई शुल्क नहीं है, केवल आपको समय निकाल इसमें पधारना मात्र है और चर्चा में भाग लेना है क्योंकि यह आपकी अपनी भेंटवार्ता है और अपनी चर्चा है।

यदि अपने आने की पुष्टि/कन्फर्मेशन यहाँ टिप्पणी के रूप में दे देंगे तो हम लोगों को भी अंदाज़ा रहेगा कि कितने साथी लोग शिरकत करने वाले हैं। यदि कन्फर्मेशन नहीं भी देंगे तो भी आपका स्वागत है, इस भेंटवार्ता में शिरकत करने और भाग लेने के लिए कन्फर्मेशन देना अनिवार्य नहीं है। :)

तो मिलेंगे 14 फरवरी 2008 को सांयकाल साढ़े छह बजे लोधी रोड(नई दिल्ली) स्थित इंडिया हैबिटाट सैन्टर (India Habitat Center) के गुलमोहर हॉल में। :)

 
अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें
 


ब्लॉगर भेंटवार्ता टेलीविजन पर …..


February 7th, 2008 | 5 Comments

पिछले माह, 12 जनवरी 2008, हुई दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society aka DBNMS) द्वारा आयोजित प्रथम ब्लॉगर भेंटवार्ता काफ़ी सफ़ल रही। बहुत से साथी ब्लॉगरों और ब्लॉग इच्छुकों और उत्सुकों ने इसमें भाग लेकर इस भेंट को सफ़ल बनाया। अपने हिन्दी ब्लॉगजगत से भी कई बंधुओं ने शिरकत कर मेरी इस सोच को मज़बूत किया कि ब्लॉगर चाहे कैसा हो और चाहे किसी भी भाषा में लिखता हो परन्तु होता वह ब्लॉगर ही है इसलिए हम इस ब्लॉगजगत में क्षेत्र अथवा भाषा के मापदंड पर बंटवारा नहीं करेंगे। :)

मीडिया में भी इस ब्लॉगर भेंटवार्ता को काफ़ी कवरेज मिली और ब्लॉगजगत तथा ब्लॉगरों के बारे में खबर दूर-२ तक पहुँची। इससे अपेक्षित है कि ब्लॉगिंग का मर्ज़ बहुतों को अपनी चपेट में लेगा। :)

भेंटवार्ता से एक दिन पहले अंग्रेज़ी के हिन्दुस्तान टाइम्स की अनुपूरक पत्रिका एचटी सिटी(HT City) के मुख्यपृष्ठ पर भेंटवार्ता संबन्धित यह लेख छपा था। हालांकि इसमें पत्रकार/लेखिका से एक त्रुटि हो गई और अंत में वेबसाइट के पते में वो delhi लगाना भूल गई, असल वेबसाइट www.delhibloggers.in है। एनडीटीवी (NDTV) ने इस पूरी भेंटवार्ता को कवर किया था और पत्रकार गरिमा दत्त ने एनडीटीवी (NDTV) की वेबसाइट पर भेंटवार्ता के अगले दिन यह लेख छापा। सिर्फ़ छापे वाले मीडिया में ही नहीं, टेलीविजन पर भी इसकी कवरेज दिखाई गई।

एनडीटीवी 24×7 (NDTV 24×7) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई विस्तृत कवरेज

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

मीडिया में इस कवरेज का लाभ सीधे ही दिखा। जहाँ कई लोग हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले दिन छपे लेख के कारण भेंटवार्ता में आए वहीं कुछ लोग बाद में एनडीटीवी (NDTV) पर इसकी कवरेज देख कर समूह से जुड़े और अपने ब्लॉग बनाए। भेंटवार्ता के अगले ही दिन एनडीटीवी (NDTV) पर प्रसारित बर्खा दत्त के We The People कार्यक्रम का मुद्दा भी ब्लॉग ही थे। मतलब साफ़ है, मीडिया भी अब खुले रूप से ब्लॉगों पर ध्यान दे रहा है, और यह अच्छा भी है क्योंकि इससे जल्द ही यह भ्रम(जो कि बहुत लोग पाले हुए हैं) टूटेगा कि ब्लॉग मुख्यधारा मीडिया की जगह ले सकते हैं, दोनों एक दूसरे के सहायक/पूरक हो सकते हैं लेकिन दोनों की अपनी-२ पहचान और स्थान है।


निमन्त्रण…..


January 3rd, 2008 | 2 Comments

पिछली पोस्ट में मैंने समस्या, उसके विश्लेषण और उसके समाधान का ज़िक्र किया और इन सब पर थोड़ा प्रकाश डाला। उसी के तहत, समाधान के तौर पर बन रही वेबसाइट के लांच से पहले नई दिल्ली में हम लोग शनिवार 12 जनवरी 2008 को एक आयोजन कर रहे हैं। इस अवसर पर कई जाने माने ब्लॉगर तो उपस्थित रहेंगे ही, मीडिया की भी दल-बल के साथ कवरेज लेने के लिए शिरकत रहेगी। इसको आप एक बड़ी और व्यव्सथित तरीके से आयोजित की गई ब्लॉगर भेंटवार्ता भी समझ सकते हैं।

आप सभी इस अवसर पर सादर आमंत्रित हैं, खाना-पीना आदि सब हमारे ज़िम्मे आपको बस तशरीफ़ लानी होगी। :) आयोजन के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए और अपनी हाज़िरी लगाने के लिए कृपया यहाँ देखें। इसी अवसर पर दिल्ली ब्लॉगर्स समूह की चौथी वर्षगाँठ भी मनाई जाएगी।

हमें खुशी है कि इस आनंदमय अवसर पर माइक्रोसॉफ़्ट भी हमारे साथ एक प्रायोजक (sponsor) के रूप में है। :)


पीओ ठंडा, दूर रखो डंडा …..


July 4th, 2006 | 12 Comments
Posted In: Blogger Meetups

तीर कमान वाले खेमे के छोटे तीर, यानि अपने पंकज बेंगानी, शनिवार को दिल्ली आए। क्या कहा? कौन तीर? कौन पंकज? अरे वही फ़ोटू-शाप सिखाने वाले मास्साब!! हाँ ईब पहचान लिया ना!! :D हाँ तो वो दिल्ली आए थे अपने भाँजे की बारात निकालने, मतबल यार उनकी धर्मपत्नी की बहन के लड़के के विवाह में शिरकत करने। अहमदाबाद से चलने से पहले याहू पर मिले थे पिछले रोज़, बोले भाग रिया हूँ!! तो मैं बोला कि भाग रिये हो तो याहू पर क्या कर रिये हो? मोबाईल वगैरह से गठबंधन किए हैं का!! तो उत्तर दिया कि बस अभी लौह पथ गामिनी पकड़ने के लिए निकल रिये हैं। क्या कहा? लौह पथ गामिनी? अरे ई हिन्दी का बिलाग है, तो अब टिरेन का हिन्दी मा यही तो बोला जाएगा ना!! हाँ तो खैर, अगले दिन(शनिवार को) हमका फ़ोनवा लगाए रहे कि ऊ पहुँच गए हैं, हमार दर्शन करना चाहत हैं। तो हम बोले कि भई अभी तो मुमकिन नाही है, कल वल मिलेंगे। पर फ़िर पुनर्विचार किए और सोचे कि चलो दर्शन दे देते हैं, तबियत से फ़िर मिल लेंगे। तो हम पहुँच गए मिलने, पहले ही कहे दिए थे कि 10 मिनट से अधिक समय नहीं दे पाएँगे। हम पहुँचे तो ऊ भौजाई(अपनी नहीं, हमार, यानि उनकी शरीकेहयात) को ले हमसे मिलने आ गए। तो हम पंकज भाई से हाथ ही मिलाए, और कुछ नहीं मिलाया। ;) तभी पता चला, कि जिस भाँजे के विवाह में आए हैं, ऊ और कोई नहीं बल्कि हमार साथ क्रिकेट खेला मित्र है, बल्ले भई!! तो समय अधिक नहीं था अण्टी में, इसलिए फ़िर लम्बे दर्शन का वर दे हम पतली गली से कट लिए।

बाद में इधर उधर हम भी फ़ुनवा घुमाए, मामला सैट किया और ई तय हुआ कि मंगलवार को वापस लौह पथ गामिनी पकड़ने से पहले श्रद्धालु लोग पंकज भाई के दर्शन कर लें। तो हम बिगुल बजा दिए, कि जिनका फ़ुनवा नहीं लगाए थे ऊ भी अपनी हाज़िरी लगा सकें। और उधर हमार बिगुल की गूँज कानपुर में भी गूँज गई। फ़ुरसतिया जी, जो ताज़े ताज़े ब्लॉगर भेंटवार्ता से दो-चार होकर गुज़रे थे, ऊ घबरा गए और कहे दिए कि दिल्ली वाले अध्याय में फ़िजिकली मौजूद तो ना होंगे पर बातों में रहेंगे। हम भी सनक गए, सोचा कि ई बहुत इतरा रिये हैं, इनका बातों में भी नाही रखेंगे। पर का ऐसा हो सकत है? नाही!! तो आगे की तो पूछो ही मत!! ;)

खैर, पंकज भाई को अगुवा कर मोटरसाईकल पर पीछे टिकाया और कनॉट प्लेस की ओर दौड़ लिए। रास्ते में जगदीश जी को फ़ुनवा लगाए के पूछ लिए कि कहाँ हैं, तो बोले कि बस पहुँचने वाले हैं। मन ही मन उनकी तकदीर से जल भुन के रह गए। जब घर के बाजू से मेट्रो कनॉट प्लेस निकलती हो तो ऐसी तकदीर वाले से कौन नहीं रश्क करेगा!! तो हम वैसे ही हमेशा की तरह लेट हो रहे थे। और ऊपर से सूरज बाऊ इतने मेहरबान कि गर्मी पे गर्मी बरसाए जा रहे थे, उनकी हमें तन्दूरी मानस बनाने की कोशिश जारी थी। पर हम भी ढीठ ठहरे, जैसे तैसे पहुँच गए। पार्क कर तुरत फ़ुरत कैफ़े कॉफ़ी डे की ओर लपक लिए। द्वार के समीप ही जगदीश जी मुस्कुराते हुए विराजे हुए थे, तो केवल हाथ मिलाया और अंदर की ओर सोफ़े की तरफ़ बढ़ लिए। थोड़ी देर इधर उधर की बाते होती रही, तभी एक नौजवान अन्दर आए और नीरज के रूप में अपना परिचय दिया। अब हमने तो साफ़ कह दिया, कि हमे तो बहुत निराशा हुई उन्हें देख। उन्होंने पूछा काहे तो हम बोले कि हम तो किसी बुढ़ऊ की आशा कर रिये थे!! ;) :D

तो बस अब गर्मी कुछ अधिक ही लग री थी। कंजूस मक्खी चूस कैफ़े कॉफ़ी डे वाले, कमबख्त एसी वगैरह कुछ नहीं चला रखा था, इसलिए हम बोले कि कुछ ठंडा मंगाया जाए। नीरज जी तो बोले कि ऊ तो गर्म चाय ही सुड़केंगे, तो हम तो बर्फ़ घुटी हुई स्मूदी मंगा लिए, पंकज और जगदीश जी ने ठंडी कॉफ़ी लेने की सोची। कमबख्त बैरा, हमारे पेय रख ऐसा दुड़की हुआ कि जैसे भूत देख लिया हो। कई बार बुलाया पर “अभी आता हूँ” वाला इशारा कर हर बार कट लिया। टुच्ची सर्विस का कहीं नमूना देखना हो तो इसी कैफ़े में जाईएगा!!

नीरज जी अपने पत्रकारिता के किस्से सुनाने लगे, कुछ गुप्त बातें भी बताई। क्या कहा? कौन सी गुप्त बातें? अब बता दी तो गुप्त काहे रहेंगी!! ;) बहरहाल, फ़िर जब दोबारा उनकी ओर ध्यान गया तो पता चला कि ऊ सृजनशिल्पी से बतिया रहे हैं। अचानक ही फ़ुनवा हमका पकड़ा दिए, तो हम भी उनसे दुआ सलाम कर लिए और आने के लिए कहा, तो बोले कि आधे घंटे तक आ रहे हैं। हम बोले कि इतने में आ जाओ क्योंकि उसके बाद हम दुकान बढ़ा देंगे। उसके बाद हम लोग कुछ और बतियाते रहे। ब्लॉगर भेंटवार्ता का ज़िक्र आया तो नियमित भेंटवार्ता करने का प्रस्ताव दिया गया। हम बोले कि हर महीने रख सकते हैं। फ़ुरसत में फ़ुरसतिया जी को भी याद कर लिया(अब तो प्रसन्न हैं ना?) और उनकी ताज़ी ताज़ी गर्मा गर्म पोस्ट के बारे में भी सुना। बस जाने के लिए उठ ही गए थे कि नीरज जी बाहर से सृजनशिल्पी जी को लिवा लाए, साथ उनके एक मित्र भी आए थे। अपने साथ वो कुछ सरकारी मिठाई ले आए थे, तो ऊ का भोग सभी ने लगाया। बस फ़िर समय हो चला था, तो हम बोले कि एकठौ फ़ोटू वगैरह तो हो जाए, तो उसके लिए सभी बाहर आ गए ताकि पोज़ सही बन सके। :P


( वाएँ से दाएँ: पंकज बेंगानी, सृजनशिल्पी, नीरज दीवान, सृजनशिल्पी के मित्र तथा जगदीश भाटिया )


उसके बाद मैं और पंकज भाई निकल लिए। कदाचित्‌ जगदीश जी भी निकल लिए थे, पर शायद बाकी लोग कुछ देर बतियाने के लिए रूक रहे थे। वापस पहुँच पंकज भाई को उनकी ससुराल में छोड़ा। हमको रूकने के लिए बोल वो अंदर लपक लिए। तभी दुल्हे(वैसे ब्याह सोमवार निपट लिया था) का छोटा भाई दिखा, वो भी अपने साथ छुटपन से खेला हुआ है, तो दुआ सलाम करने वो भी आ गया, हम बोले कि तेरे मौसा को छोड़ने आए हैं, जल्दी में था, सांय मिलने को कह निकल लिया, बात लगता है हमेशा की तरह उसके ऊपर से ऐसे निकल गई जैसे सचिन के ऊपर से ब्रैट ली की बाँऊंसर। तभी भौजाई को लिए पंकज भाई बाहर आए। जैसे कि ऐसे मौकों पर कहा जाता है, भौजाई ने हमको अहमदाबाद आने का न्यौता दिया, तो हम बोले कि गर्मी कम कराओ वहाँ और हम आ जाएँगे। ;) दिल्ली की तो झेली नहीं जाती, अहमदाबाद की कहाँ से झेलेंगे!! :P बस उसके बाद अलविदा कह हम वापस अपने आशियाने की ओर हो लिए।

छोटी ही सही पर यह मुलाकात सभी के साथ बढिया रही। और अभी तो फ़िर मुलाकात होगी, गुलाबी शहर जयपुर इसी सप्ताहांत को जा रिये हैं, वहाँ बड़े तीर संजय भाई से मुलाकात होगी। अब उसके बारे में तो वहाँ से आने के बाद ही लिखेंगे, पहले से कैसे लिख दें, अपना नास्त्रेदमस से दूर दूर का कोई नाता नहीं है!! ;)