अभी पिछले सप्ताह मैंने पोस्ट किया कि कैसे सात प्रयासों बाद टचफ्लो 2डी (TouchFlo 2D) को मोबाइल सही तरीके से स्थापित कर ही लिया तो समीर जी ने कहा कि उनके समझ में तो नहीं आया पर यह मान के चल रहे हैं कि मैं कह रहा हूँ तो कुछ अच्छा ही होगा। इतना विश्वसनीय समझने के लिए उनका बहुत आभार प्रकट करने पर मैंने कहा कि बताएँगे ही नहीं दिखा भी देंगे कि क्या मामला है।
तो यह देखिए मामला:
( इस वीडियो को आप फुलस्क्रीन (Full Screen) पर भी देख सकते हैं, बस देखने के लिए प्लेयर में मौजूद प्रोग्रेस बार के दायीं ओर स्थित चौकोर बटन पर क्लिक करें। फुलस्क्रीन मोड में से निकलने के लिए अपने कीबोर्ड में एस्केप (Esc) बटन दबाएँ। )
एचटीसी (HTC) ने अपने टच (Touch) सीरीज़ के मोबाइल फोनों में एक नया इंटरफेस निकाला था जिसको उन्होंने नाम दिया था टचफ्लो 3डी (TouchFlo 3D) जिसमें स्क्रीन पर उंगली फिराने पर एक क्यूब (बोले तो घन) उपलब्ध होता है हर तरफ़ कुछ अलग-२ और बारंबार प्रयोग होने वाले शॉर्टकट उपलब्ध होते हैं जिनको अपने अनुसार सैट किया जा सकता है। इससे कई चीज़ों में आसानी रहती है। लेकिन अपने हाल ही में आए फोन टच डॉयमंड (Touch Diamond) और अभी ताज़ा-२ रिलीज़ हुए फोन टच एचडी (Touch HD) में उन्होंने टचफ्लो इंटरफेस का एक अलग रूप निकाला है जिसमें क्यूब नहीं है इसलिए यह दो आयामी इंटरफेस है न कि तीना आयामी।
तो हुआ यूँ कि टचफ्लो 3डी की ही भांति टचफ्लो 2डी इंटरफेस भी लोगों को काफ़ी भा गया और कुछ मोबाइल सॉफ़्टवेयर डेवलपरों ने एचटीसी टच डॉयमंड में से इस इंटरफेस को निकाल लिया और उनको थोड़ा सा इस तरह बदला कि एचटीसी के बाकी टचस्क्रीन फोनों में भी यह लग सके और उसको बीटा रिलीज़ के तौर पर निकाल दिया। मामला बढ़िया लगा तो मैंने भी अपने फोन में लगा के देखने की सोची और आखिरकार लगा लिया। अब लगा लिया तो एक वीडियो भी उतार लिया दिखाने के लिए कि आखिर इसमें ऐसा क्या है!!
वैसे इसके मौसम दिखाने वाले टैब को मैंने अपने वीडियो में ऊपर दिखाया ही है लेकिन उसमें एक और बढ़िया सी चीज़ नहीं दिखा पाया तो उसके लिए यूट्यूब पर निम्न वीडियो मिल गया:
इसमें कूल चीज़ यह दिखती है कि जिस जगह का मौसम आप देख रहे हैं यदि वहाँ बरसात हो रही है तो आपकी स्क्रीन पर भी बूँदे दिखाई पड़ती हैं मौसम देखते समय और गाड़ी के वाइपर की भांति एक वाइपर फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली बूँदों को साफ़ कर देता है!!
और यह टचफ्लो 2डी में इतना ही नहीं है जितना मैंने दिखाया है, मामला और भी काफ़ी है लेकिन मुझे उसकी आवश्यकता नहीं थी तो इसलिए इंस्टॉल नहीं किया – जैसे कि फोटो देखने के लिए एक टैब है जिसमें बस मौसम वाले टैब ही की भांति फोटो को हल्का सा खींच के ऊपर करो तो वह ऊपर से स्क्रीन से निकल जाती है और उसकी जगह नीचे से दूसरी फोटो स्क्रीन पर आ जाती है। ऐसे ही संगीत का भी टैब है जिसमें दाएँ-बाएँ करने पर गाने बदल जाते हैं और एक टैब गूगल मैप्स (Google Maps) का भी है। यह सब मामला मुझे अपने लिए अनावश्यक लगा इसलिए फोन की स्टोरेज मेमोरी बचाने के लिए मैंने इस सब तामझाम को इंस्टॉल नहीं किया।
बुडापेस्ट में हवाखोरी करके वापस आए तीन महीने से थोड़ा अधिक समय बीत चुका है। इन तीन महीनों में कहीं हवाखोरी तो छोड़िए, घर से भी अधिक निकलना नहीं हुआ है, दफ़्तर के काम में इतना व्यस्त हो गया कि चार-पाँच घंटे सोना और फिर काम में लग जाना, वीकेन्ड को तो भूल ही जाओ! थोड़ा बहुत समय मिलता तो ब्लॉग नाम का कीड़ा काटता, पढ़ने से अधिक लिखकर अपनी फ्रसट्रेशन (frustration) का इलाज किया जाता। छह महीने के काम को तीन महीने में करना वाकई पागलपन है। अब मामला थोड़ा संयत होने लगा है, कल शाम को सॉफ़्टवेयर में एक और बग (bug) का समाधान निकाला, लेकिन अब आलस्य आ रहा था, घड़ी देखी तो जाना कि रात हो गई है, अब सोमवार को पैबंद (patch) लगाया जाएगा यह सोच बॉस को स्टेटस रिपोर्ट ईमेल करने जा रहा था। मन सोच रहा था कि चलो अब कम से कम दो दिन आराम मिलेगा, वीकेन्ड है कहीं नहीं जाना है इसलिए पूर्ण रूप से आराम किया जाएगा और फिर रविवार शाम को एक बंगाली मित्र ने अपने दौलतखाने पर तशरीफ़ लाने का न्यौता दिया है, वहाँ दुर्गा पूजा के लिए लग चुके पंडाल देखे जाएँगे, फोटू ली जाएँगी, एक से बढ़कर एक सजी धजी बंगाली सुन्दरियाँ होंगी….., तो ले जाएँगे तशरीफ़ वहाँ!!
यह सब सोच मन थोड़ा प्रसन्न था और रिलैक्स मूड में आ रिया था कि तभी मानो यमदूत की भांति बॉस मेसेन्जर (messenger) पर प्रकट हुआ। मैंने सोचा कि चलो ईमेल की ज़हमत बची, अब यहीं इसको स्टेटस ठेल दिया जाए और जान छुड़ाई जाए। लेकिन निर्मम धोबी की भांति बॉस ने मेरी उन निर्मल कल्पनाओं की ऐसी की तैसी कर डाली, कहा कि ये नौटंकी नहीं चलेगी, सप्ताहांत पर बैठो और काम करो। मैंने कहा कि यार दिमाग का दही न करो, तुम साले खुद पिछले तीन माह से बिज़नेस टूर पर हो लेकिन साथ में अपनी गर्लफ्रेन्ड को टाँगे घूम रहे हो, वो बेचारी अपने ऑफिस का काम हमारी तरह रिमोटली (remotely) कर रही है और वो यह भी जानती है कि किसी धोबी की तरह तुम मुझसे कैसे निर्मम व्यवहार करते हो, बेचारी कुछ दिन पहले ही तो मुझसे अफ़सोस ज़ाहिर कर रही थी इस बात का!! कम से कम इतना सोचो कि मेरी तो कोई गर्लफ्रेन्ड भी नहीं है तुम्हारे कारण कि तुम मुझे अपना गधा समझना बंद करो तो मैं कहीं बाहर निकलूँ, सोशलाइज़ (socialise) करूँ तो कुछ बात बनने की संभावना हो।
तो इस बात पर बॉस का दिल थोड़ा पसीजा, जैसे हिन्दु माइथॉलोजी (mythology) में ऋषि मुनि आदि किसी को शाप दे बाद में उसकी अवधि कम कर देते थे उसी तरह बॉस ने फरमाया कि ज़्यादा काम मत करना, पैबन्द लगा के ये मामला फाइनल करो और आगे क्लाइंट को अपडेट खिसकाओ, बाकी काम सोमवार को कर लेंगे।
क्या सोच रहा था और क्या हो गया, अच्छा होता कि मैं पहले ही ईमेल करके निकल लिया होता, ईमेल की ज़हमत बचाने के चक्कर में ये तो मामला उल्टा पड़ गया!! तो बस इसी शॉक (shock) में मैं बैठा था कि ये क्या ऽऽ हो गया ऽऽ कि मन में आया कि अभी थोड़ा समय है, बाद में सोएँगे पहले ज़रा ब्लॉग पढ़ लिए जाएँ!! फीड रीडर में कई सारी बिना पढ़ी पोस्ट जमा हो चुकी थीं, एक-२ कर निपटानी थी। तो इधर ब्लॉग पढ़ रहे थे उधर विनोद मिश्रा चैट पर द्वार खटखटा दिए। न जानने वालों को बता दिया जाए कि विनोद को भी मेरी तरह नारद पर काम करने के लिए जीतू भाई ने बंधुआ मज़दूर की भांति पकड़ा था।
आज बेशक नारद के मामले में हम दोनों ही बेरोज़गार हैं लेकिन अपनी पहचान वहीं से हुई थी। पिछले कुछ समय से विनोद को उसकी कंपनी ने लंदन में पटका हुआ है तो जनाब वहीं इंग्लिस्तान में मौज कर रहे हैं।
बहरहाल, विनोद से काफ़ी समय बाद बात हो रही थी, तो चर्चा विन्डोज़ मोबाइल से शुरु हुई, मैं एचटीसी (HTC) के शीघ्र आने वाले एक झकास से फोन का वीडियो देख रहा था और इधर विनोद ने अपनी विन्डोज़ मोबाइल के प्रति नापसंद ज़ाहिर की जो कि सब खामखा के पूर्वाग्रह पर आधारित है। और इस तरह होते-२ चर्चा डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम पर आ गई, विनोद ने विन्डोज़ को जमकर गालियाँ दी और मैंने विनोद के पसंदीदा मैक और उसकी निर्माता एप्पल को जी भरकर कोसा, हज़ार खामियाँ गिनाई। हम दोनों ही अड़े हुए थे, कोई कॉमन ग्राउँड नहीं मिल रहा था, आखिरकार चर्चा का रूख लिनेक्स पर मुड़ा और कॉमन ग्राउँड मिल गया, यह हम दोनों को पसंद भी है और इसकी जानकारी भी है, तो आगे की चर्चा इसी पर चलती रही। इधर मैं विनोद के साथ चर्चा/बहस आदि करने के साथ-२ ब्लॉग पढ़ने का कार्य भी निपटाता जा रहा था, टिप्पणी देने लायक कुछ लगा नहीं था इसलिए कहीं टिप्पणी नहीं करी, अधिकतर अंग्रेज़ी के ही तकनीकी ब्लॉग थे। फोटोग्राफ़ी वाले ब्लॉग नहीं पढ़े, उनको पढ़ने के लिए थोड़ी और फुर्सत चाहिए। तभी विनोद ने पूछा कि मुझे सोना नहीं है क्या, देखा तो पाया कि साढ़े चार बज गए थे। लो कल्लो बात, ब्लॉग पढ़ने में और बतियाने में ऐसा समय व्यतीत हुआ कि पता ही नहीं चला, सोचा कि चलो अब सो जाएँगे थोड़ी देर में, थोड़े से ब्लॉग और बचे हैं उनको भी निपटा लिया जाए लगे हाथ।
ब्लॉग पोस्ट काफ़ी जमा हो गई थी एक सप्ताह की, लगता है सब्सक्रिप्शन (subscription) और कम करने होंगे, लोग कुछ अधिक ही छापने लगे हैं। छापने में कुछ लगता तो है नहीं, माल-ए-मुफ़्त दिल-ए-बेरहम वाला हिसाब किताब है!! अब जब फीड रीडर की साफ़ सफ़ाई हो गई, ब्लॉग पोस्ट निपटा दी गई तो न जाने मन में क्या खुरक मची, सोचा अभी थोड़ी देर में निद्रा डार्लिंग से मिलेंगे, पहले हिन्दी में अपने नाम को ज़रा गूगलवा पर सर्चिया के देखा जाए कि क्या हालचाल हैं। पुरानी यादें ताज़ा हुई, भूतकाल में हुई मारकुटाई की यादें, अपने लिए शुभचिंतकों द्वारा प्रशंसा में बांधे गए लंबे पुलों की यादें। कुछेक नई बातें पढ़ी जो पहले नोटिस में नहीं आई थी और कुछ ऐसी चीज़ें जो पहले नहीं पढ़ी थी। ऐसे में ही पुराणिक जी का एक कथन पढ़ा एक ब्लॉग पोस्ट पर तो मन में आया कि नहीं यह सत्य नहीं है और इस पर आवाज़ बुलन्द होनी चाहिए।
क्या था वह? बेसब्र न हों जनाब, अगली पोस्ट में उसको ठेला जाएगा साथ ही अपने उनीन्दिया विचार सजगता के साथ परोसे जाएँगे, सब कुछ एक ही शो में देख लेंगे तो कैसे काम बनेगा, कुछ इस गरीब का भी सोचिए!!
अब आप यह पढ़ रहे हैं तो अपन निद्रामग्न हैं, आखिर जब आप सो रहे थे तो हम जाग रहे थे इसलिए अब अपन निद्रा डार्लिंग से रुबरु हैं, हमारा भी कोई हक है आखिर!! बाकी का हाल तो अगली पोस्ट में बाँचा जाएगा। अब यह पोस्ट भी उनीन्दी हालत में ठेली गई है इसलिए कोई आशा निराशा आदि न रखें!!
इधर मेरे मित्र अभिषेक ने मुझे अपने मोबाइल पर हिन्दी दिखाई, उधर अपनी उत्सुक्ता बढ़ गई कि क्या उपाय किया, क्या जुगाड़ लगाया जो ऐसा महान कार्य हुआ और विन्डोज़ मोबाइल पर हिन्दी चली!! बहुत कहने पर आखिरकार अभिषेक ने वह राज़ बता ही दिया कि कैसे यह काम किया और साथ ही अपने ब्लॉग पर भी पोस्ट ठेल दी। उपाय पता लगते ही मैंने भी तुरंत सॉफ़्टवेयर डाऊनलोड कर अपने विन्डोज़ मोबाइल वाले फोन पर इंस्टॉल किया और जब सॉफ़्ट रीसेट (soft reset) होकर फोन दोबारा चालू हुआ तो उस पर हिन्दी दिख रही थी, न केवल दिख रही थी बल्कि लिखी भी जा रही थी। ऐसी बढ़िया हिन्दी लिखी जा रही थी कि मैंने एक पोस्ट मोबाइल पर लिखकर ब्लॉग पर ठेल दी।
यानि हिन्दी दिखती भी चकाचक है और लिखी भी मस्त जाती है, जैसा कि आप निम्न स्क्रीनशॉट (screenshot) में देख सकते हैं।



लेकिन इस सॉफ़्टवेयर में अभी कुछ समस्याएँ हैं।
हिन्दी कैसे गड़बड़ा जाती है यह निम्न स्क्रीनशॉट (screenshot) में देखें:


वैसे इस सॉफ़्टवेयर की सैटिंग में हिन्दी निष्क्रिय करने के बाद आप हिन्दी लिख तो सकते हैं लेकिन मात्राएँ ठीक से नहीं लगा सकते, “इ” की मात्रा अक्षर लिखने के बाद लगाने की जगह पहले लगानी होती है। इससे फोन में तो मामला ठीक दिख जाएगा लेकिन तभी तक जब तक इसकी सैटिंग में हिन्दी निष्क्रिय है, क्योंकि यह मात्रा लगाने का सही तरीका नहीं है।
दो अन्य समस्याएँ जो मैंने नोट करी वह हैं:
अब इन दोनों समस्याओं में पहली समस्या का तो पता नहीं कि वह विन्डोज़ मोबाइल की है कि नहीं, लेकिन दूसरी समस्या यकीनन विन्डोज़ मोबाइल की दिखती है कि उसका क्लिपबोर्ड (clipboard) देवनागरी अक्षरों को भ्रष्ट कर देता है।
इस सॉफ़्टवेयर के द्वारा वैसे हिन्दी में लघु संदेश भी भेजे जा सकते हैं लेकिन लघु संदेश लिखने के लिए सॉफ़्टवेयर की सैटिंग में हिन्दी को निष्क्रिय करना पड़ता है क्योंकि इस सॉफ़्टवेयर में मौजूद गड़बड़ के कारण हिन्दी का विकल्प सक्रिय रहने पर लघु संदेश काम नहीं करते जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है। हिन्दी का विकल्प निष्क्रिय करने पर लघु संदेश टूटी-फूटी हिन्दी में लिख भेजा जा सकता है और हिन्दी सपोर्ट करने वाले दूसरे मोबाइल पर यह टूटी-फूटी हिन्दी में दिखता है।


यह संदेश मैंने अपने विन्डोज़ मोबाइल से अपने (Nokia 7250i) नोकिआ 7250आई पर भेजा जिसमें हिन्दी दिखती है और उसमें जैसा कि अपेक्षित था हिन्दी टूटी फूटी नज़र आई। सही हिन्दी भी नज़र आ सकती है और भेजी जा सकती है, लेकिन उसके लिए इस सॉफ़्टवेयर में हिन्दी के विकल्प को निष्क्रिय करके हिन्दी लिखनी होगी और आपको सही कुँजियाँ दबानी होंगी। ऐसा करने से स्क्रीन पर हिन्दी टूटी फूटी नज़र आएगी लेकिन असल में होगी सही और सही संदेश जाएगा।
मैंने इस सॉफ़्टवेयर के निर्माता को ईमेल लिख के इन समस्याओं के बारे में अवगत करा दिया है, देखते हैं कि वे कब इनको ठीक करते हैं।
हाँ तो अब आप सोच रहे होंगे कि सारी रामायण लिख डाली लेकिन सॉफ़्टवेयर का नाम नहीं बताया, तो वह भी बताए देते हैं। सॉफ़्टवेयर है आएरॉन्स हिन्दी सपोर्ट (Eyron’s Hindi Support) और इसको आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं। इस सॉफ़्टवेयर को डाऊनलोड करने से पहले दो बातों का ध्यान रखें:
मज़ेदार बात यह है कि इस सॉफ़्टवेयर को बनाने वाली कंपनी आएरॉन नाम की एक इज़राइली सॉफ़्टवेयर कंपनी है!!
यह सॉफ़्टवेयर इस दिशा में एक अच्छा कदम है, आशा है कि आगे और भी बढ़िया उपाय सामने आएँगे। तब तक यदि आपके पास विन्डोज़ मोबाइल पर चलने वाला टच स्क्रीन फोन है तो इसका प्रयोग कर आप भी अपने मोबाइल में हिन्दी के मज़े लीजिए और हिन्दी में ब्लॉग पोस्ट लिखिए।
पिछले सप्ताह मेरे मित्र अभिषेक ने अपने विन्डोज़ मोबाइल पर हिन्दी दिखाई, रोमन अक्षरों में नहीं वरन् देवनागरी लिपि में एकदम मस्त चलती हुई। हिन्दी दिख ही नहीं रही थी वरन् इंस्क्रिप्ट (Inscript) टंकण पद्धति का कीबोर्ड भी था जिससे हिन्दी लिखी भी जा सकती थी। पूछने पर अभिषेक ने बताया कि अभी ट्रांसलिटरेशन की व्यवस्था नहीं है यानि कि फोनेटिक कीबोर्ड नहीं चलेगा, इसलिए टंकण करने के लिए फिलहाल इंस्क्रिप्ट सीखनी ही होगी!
मैंने कहा कि देखो अगर हो सके तो ट्रांसलिटरेशन का भी जुगाड़ कराओ, क्या झक मारने के लिए माइक्रोसॉफ़्ट में बड़े साहब हो। तो यह तो भविष्य के गर्भ में है कि ट्रांसलिटरेशन आता है कि नहीं परन्तु अभी तो देवनागरी लिपि का जुगाड़ आ गया वही बड़ी बात है।
और? और यह कि विन्डोज़ मोबाइल का पूरा इंटरफेस हिन्दी में दिख रहा था, क्या तो मेनू और क्या टुडे स्क्रीन, सब हिन्दी में। विन्डोज़ मोबाइल संस्करण 5 से यूनिकोड सपोर्ट तो करता है लेकिन उसमें देवनागरी लिपि के अक्षर न होने के कारण हिन्दी नहीं दिखती। इस बारे में मैंने अपना एचटीसी पी3300 (HTC P3300) उर्फ़ आर्टेमिस (Artemis) लेने पर कुछ सप्ताह पहले लिखा भी था।
अभिषेक ने अभी यह बताया नहीं है कि वह हिन्दी का जुगाड़ कैसे करा पर आशा है कि शीघ्र ही वह तरकीब उगलवा लूँगा और उसके बाद अपने मोबाइल पर ट्राई करके देखूँगा!
उपाय कारगर होते ही इस ब्लॉग द्वारा वह तरकीब सबको बताई जाएगी!

क्या कोई जानता है विन्डोज़ मोबाइल 6 प्रोफेशनल (Windows Mobile 6 Professional) पर हिन्दी चलाने का जुगाड़? परसों ही नया मोबाइल फोन, एचटीसी पी3300 (HTC P3300), लिया है जिसमें विन्डोज़ मोबाइल 6 प्रोफेशनल है पर इंटरनेट एक्सप्लोरर मोबाइल (Internet Explorer Mobile) पर हिन्दी नहीं चल रही, ऑपरा मिनी (Opera Mini) अभी ट्राई नहीं किया में भी नहीं चली, मन में एक आशा थी कि शायद चल जाए जैसे मेरे नोकिआ 7250i में नोकिआ के ब्राउज़र में नहीं चली थी लेकिन ऑपरा मिनी में चल गई थी। मुझे शक है इसमे हिन्दी चलेगी नहीं क्योंकि रीजनल सैटिंग (Regional Settings) में हिन्दी का विकल्प नहीं है, ठीक वैसे ही जैसा मेरे नोकिआ एन70 के साथ था मामला, अन्यथा इंटरनेट एक्सप्लोरर तो यूनिकोड सपोर्ट करता है पर बिना देवनागरी अक्षरों के यूनिकोड जादू से थोड़े ही चलेगा!!
इसका जुगाड़ तो एक यही समझ आता है कि इसके फाँट को किसी दूसरे फाँट से बदल दिया जाए जिसमें देवनागरी के अक्षर भी हों।