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अब होंगे नॉकआऊट मुकाबले


May 20th, 2009 | 7 Comments
Posted In: Sports, खेल

अभी दिल्ली डेयरडेविल्स के रॉयल चैलेन्जर्स बंगलोर से हारने के कारण आईपीएल (IPL) में टीमों की हालत अब रोचक हो गई है। सभी टीमों के एक मैच बाकी हैं और सिर्फ़ तीन टीम ऐसी हैं जो चैन की सांस ले सकती हैं। एक दिल्ली डेयरडेविल्स हैं जो चैन की सांस ले सकते हैं फिलहाल क्योंकि सेमी फाइनल में पहुँच चुके हैं और दूसरी ओर कोलकाता नाईट राईडर्स तथा मुम्बई इंडियंस हैं जो इसलिए चैन की सांस ले सकते हैं कि एक बार फिर सेमी फाइनल में जगह बनाने से पहले ही उनकी हवा निकल गई!! :D बाकी सभी पाँच टीमों में अभी मारा मारी होनी बाकी है और यकीनन अगले चार मैच नॉकआऊट (knockout) मुकाबले जैसे होंगे।

कल के मैच में राजस्थान रॉयल्स का कोलकाता से जीतना आवश्यक है यदि उनको सेमी फाइनल में बर्थ चाहिए। जीतने के बाद उनको प्रार्थना करनी होगी कि उनके बाद वाले मैच में पंजाब हार जाए क्योंकि यदि पंजाब जीत गई तो राजस्थान की भैंस पानी में चली जाएगी। इधर चेन्नई सुपर किंग्स काफ़ी हद तक सुरक्षित हैं क्योंकि यदि वे कल पंजाब से हार गए तो भी सेमी फाइनल में स्थान बना सकते हैं, उनका रन रेट राजस्थान से काफ़ी अच्छा है इसलिए राजस्थान जीतने के बाद चुनौती न दे पाएगा।

उसके बाद परसों का पहला मैच किसी की सेहत पर कोई फर्क न डालेगा, मुम्बई जीत के भी कुछ न उखाड़ लेगी और दिल्ली हार भी गई तो उसका कुछ न बिगड़ेगा। लेकिन उसके बाद वाला मैच पुनः नॉकआऊट (knockout) मुकाबला होगा दक्कन चार्जर्स और रॉयल चैलेन्जर्स बंगलोर के बीच, जो जीता वही सिकन्दर… यानि सेमी फाइनल के अंदर!! :D

मैं क्या चाहता हूँ? मैं चाहता हूँ कि कल राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स जीत जाएँ, कोलकाता बाहर है ही और पंजाब भी बाहर हो जाए। चेन्नई आराम से जीत सकती है यदि तमीज़ से खेले और बचकानी बेवकूफ़ियाँ न करे वरना पंजाब की टीम ढोल बना के बजा देगी उनको। उसके बाद परसों दिल्ली और मुम्बई के मैच को तेल लगाओ, उसके अगले मैच में दक्कन चार्जर्स की जीत होनी चाहिए ताकि बंगलोर भी बाहर हो!! दक्कन चार्जर्स के साथ पिछले कुछ मैचों में दिक्कत ये आ रही है कि उनके बल्लेबाज़ों की जमी जमाई जोड़ी के टूटते ही आने वाले बाकी बल्लेबाज़ों को वापस जाने की जल्दी होती है। अमा उनके डगआऊट में तो न ही प्रीति बैठती है और न ही शिल्पा, जाने की जल्दी काहे होती है यह समझ नहीं आता!! :D नैया पार लगाने की ज़िम्मेदारी फिर रोहित शर्मा पर होती है लेकिन तुरुप का इक्का हर बार नहीं चल सकता जैसा कि पिछले मैच में इरफ़ान पठान ने साबित किया था!! इसलिए ये लोग भी तमीज़ से खेलें तो सेमी फाइनल तक आराम से जा सकते हैं।

कुछ दिन पहले रमण कौल जी ने ट्विट्टर पर पूछा था कि दर्शक आईपीएल (IPL) में किसी टीम को अपनी श्रद्धा के लायक कैसे समझते हैं तो मैंने उत्तर दिया था कि मैं तो पंजाब और बंगलोर की टीम के अतिरिक्त सभी को पसंद करता हूँ और मुकाबलों का मज़ा लेता हूँ।

पंजाब और बंगलोर भी बाहर हो जाएँ तो अपने को खुशी होगी, क्योंकि सिर्फ़ प्रीति और ब्रेट ली की खातिर तो पंजाब को सपोर्ट नहीं न करेंगे और बंगलोर की चीयरलीडर्स अपने को अब भी पसंद नहीं:D कोलकाता ने तो इस बार भी मुँह कसैला कर दिया और मुम्बई पुनः ज़रा सी झलक दिखला के रह गई!! :tdown:

 
यदि आपको क्रिकेट अथवा आईपीएल (IPL) में रूचि नहीं है तो आप निम्न पोस्टों में मेरी घुम्मकड़ी के दौरान लिए गए कुछ फोटो देखिए। यदि क्रिकेट अथवा आईपीएल (IPL) में रूचि है तो भी इन पोस्टों को देख सकते हैं, कोई मनाही नहीं है!! :D वैसे ये सभी फोटो जब लिए गए थे उस समय अपने को फोटू लेने की कोई खास अक्ल नहीं थी, अब भी नहीं है लेकिन तब से अब तक कुछ तो ज्ञान में इजाफ़ा हुआ है! ;)

  1. एक बार देखो ….. हज़ार बार देखो …..
  2. दोबारा देखो ….. बार-बार देखो …..
  3. देखो देखो …..इनको भी देखो …..
  4. सफ़र जारी है …..

April 29th, 2009 | 6 Comments

हज़ार समझदार देखे, मैककलम भी देखा!! पता नहीं क्या सोचकर गांगुली की जगह उसको कप्तान बनाया। एक तो कोलकाता नाईट राईडर्स टीम वैसे ही माशाल्लाह है जो जीत के निकट पहुँचती नहीं और जो कभी जीत के निकट पहुँच जाए तो कप्तान मैककलम अपने धर्मात्मा होने का परिचय देते हुए विपक्षी टीम को मैच उपहार में दे देते हैं। कुछ दिन पहले सुपर ओवर में मेन्डिस से गेंदबाज़ी करवा के राजस्थान रॉयल्स को मैच उपहार में दे दिया था और अभी रॉयल चैलेन्जर्स बंगलोर की चैम्पियन टीम को मैच क्रिस गेल की मार्फ़त तश्तरी में सजा के दे दिया!! यकीन नहीं आता कि कोई इतना दिलदार भी हो सकता है!! :roll:

और लगता है कोच जॉन ब्यूकैनन अभी ऑस्ट्रेलियाई टीम से हटाए जाने के सदमे से ही नहीं उबरे हैं। वैसे ऐसी चैम्पियन टीम और धर्मात्मा कप्तान के होते कोच क्या कर लेगा यदि वह कुछ करना ही न चाहता हो?!! सारे ऑस्ट्रेलियाई कोच ऐसे घस्सी होते हैं क्या? पहले चैपल और अब ब्यूकैनन!! :roll: गांगुली बाबू भी सोच रहे होंगे कि न जाने उनकी कुंडली में ऑस्ट्रेलिया दोष कब समाप्त होगा, पहले चैपल राहू बन भिनभिनाया और अब ब्यूकैनन केतु बना है!! :roll:


आईपीएल में कुकुर…..


April 20th, 2009 | 6 Comments


परसों आईपीएल (IPL) का दूसरा संस्करण दक्षिण अफ्रीका में शुरु हुआ, पहला मैच था मुम्बई इंडियंस (Mumbai Indians) और चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) के बीच। लेकिन मैच के बीच में रोचक वाकया यह हुआ कि मुम्बई इंडियंस की बल्लेबाज़ी चल रही थी और इसी बीच एक काला कुकुर (आम भाषा में बोले तो… कुत्ता) मैदान में भागता हुआ आ गया। अब चूंकि कुकुर के गले में लाल पट्टा बंधा था इसलिए वह आवारा तो नहीं था, ज़ाहिर सी बात है कि किसी का पालतू था, लेकिन उसकी मालकिन कहीं नज़र नहीं आई।

अब कुकुर आ गया सो आ गया, ई मा कौन सी बड़ी बात है। बड़ी बात अपने को यह लगी कि उस कुकुर के कारण दस बारह मिनट खेल रूका रहा, पहले पाँच मिनट तो किसी को समझ न आ रहा था कि किया क्या जाए। इस मामले में अपना इंडिया बढ़िया है, यदि कोई कुकुर मैदान में आ जाता है तो उसके पीछे दो हवलदार भी दौड़ते हुए आ जाते हैं और डंडा वगैरह देकर पाँच मिनट में कुकुर को मैदान से बाहर कर देते हैं और खेल पुनः आरंभ हो जाता है। लेकिन दक्षिण अफ्रीका में मैदान पर लगता है पुलिसिए या सिक्योरिटी वाले होते नहीं और होते हैं तो उनको सिचुएशन हैन्डल करना नहीं आता। कुकुर मैदान पर इधर उधर टहलता रहा लेकिन किसी को समझ न आ रहा था कि क्या किया जाए। इसी बीच सुपर किंग्स के कप्तान धोनी ने कुकुर को गेंद दिखाई कि कदाचित्‌ गेंद लपकने के लिए कुकुर मैदान से बाहर चला जाए लेकिन कुकुर को गेंद में कोई रूचि नहीं थी!! ;)

आखिरकार एक स्पेशलिस्ट मोहतरमा आईं और कुकुर को बिस्कुट खिलाए गए और यह रिश्वत लेने के बाद ही कुकुर महाराज टले और खेल आरंभ हुआ!! लो कल्लो बात, इनएफिशियेन्सी (Inefficiency) की भी कोई हद होती है, जो काम यहाँ एक डंडे में हो जाता वो काम करने के लिए वहाँ कितने झंझट!! भारतीय क्रिकेट बोर्ड को चाहिए कि दक्षिण अफ्रीका के मैदान कर्मचारियों के लिए सेमिनार आदि करवाए जिसमें ट्रेनिंग दी जाए कि मैदान में यदि कुकुर अथवा कोई और अवांछनीय जीव आ जाए तो उसको कैसे बाहर कर सिचुएशन को कम समय में एफिशियेन्टली (Efficiently) और किफ़ायती रूप से कंट्रोल में लाया जाए। :D

साथ ही यदि कुकुर की मालकिन मिले तो बोर्ड को चाहिए कि उस पर मुकदमा ठोके। अब बताओ यह कहाँ कि रीत हुई कि मैच दिखाने कुकुर को साथ ले आए और फिर उसके बाद उसको पागल सांड की भांति छुट्टा छोड़ दिया इधर-उधर भटकने के लिए!!

 
इधर कुछ पुरानी पोस्ट देख रहा था तो पिछली यात्राओं के ट्रेवलॉग दिखे, यादें ताज़ा हो गई। तो ऐसी एक यात्रा का ट्रेवलॉग आप भी देखें।

  1. मुक्तेश्वर – भाग १
  2. मुक्तेश्वर – भाग २
  3. मुक्तेश्वर – भाग ३
  4. मुक्तेश्वर – भाग ४

 
 
कुकुर का मूल चित्र साभार: जूलियन


मैं कप्तान बनना चाहता हूँ…..


June 2nd, 2008 | 3 Comments

युवराज कप्तान बनना चाहते हैं - टीम में जगह पक्की करने का एक उपाय यह भी

अभी एकाध दिन पहले आईपीएल के एक मैच के दौरान टीवी पर चैनल पलट रहा था तो किसी समाचार चैनल पर सुना कि युवराज सिंह ने कहा है कि वे भारतीय टीम के कप्तान बनना चाहते हैं, लेकिन उनकी धोनी से कोई प्रतियोगिता नहीं है!! लो कर लो बात, मौजूदा कप्तान कुंबले और धोनी हैं – टैस्ट टीम के कप्तान अनिल कुंबले और एक-दिवसीय तथा ट्वन्टी-२ के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी!! कैसे युवराज कप्तान बनने की इच्छा ज़ाहिर कर रहे हैं बिना प्रतियोगिता के? या वे कहना चाहते हैं कि धोनी नहीं वरन्‌ कुंबले की जगह वे लेना चाहते हैं?

अब क्या कहें, यह खबर सुन हंसी ही छूट गई। चार दिन की चाँदनी और फिर काली रातों जैसे इस खिलाड़ी का टीम में तो स्थान पक्का है नहीं और ये शेखचिल्ली कप्तान बनने के ख़्वाब देख रहे हैं!! :roll: लेकिन फिर समझ आया, यह सारा मामला भारतीय टीम में जगह पक्की करने का ही तो है!! अब एक बार कप्तान बन गए तो फिर थोड़े ही कोई टीम से निकालेगा, और ना ही टीम में स्थान बनाने के लिए नए रंगरूटों के मुकाबले बार-२ अपनी परफॉर्मेन्स दिखानी पड़ेगी, बस एक ही बार में जम के बैठ जाएँगे!! ना जी ना, कठिनाई से तो उस मनहूस कोच चैपल और गले की हड्डी बने कप्तान द्रविड़ से छुटकारा मिला, इस साँप को इतनी जल्दी दूसरा छछूंदर नहीं निगलना!! धोनी भईया ही बढ़िया कप्तानी कर रहे हैं और आपके मुकाबले न केवल अच्छा खेलते भी हैं वरन्‌ कप्तान भी अच्छे हैं, आप तो प्रीति दी टीम ही संभालो जिसकी आखिरकार फटे गुब्बारे माफ़िक हवा धोनी भईया की टीम ने निकाल दी!! :D


May 2nd, 2008 | 2 Comments

आज दिल्ली डेयरडेविल्स भिड़ेंगे चेन्नई सुपर किंग्स से। सौ टके का सवाल ये है कि क्या डेयरडेविल्स रोक पाएँगे सबको रौंदते चले आ रहे सुपर किंग्स के विजय रथ को? क्या आज सुपर किंग्स की हार का खाता खुलेगा या डेयरडेविल्स का नाम भी रौंदी गई टीमों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा? पहले मैच के बाद डेयरडेविल्स से अभी तक सभी तीनों मैच जीते हैं और सुपर किंग्स ने तो अभी पराजय का मुँह देखा ही नहीं है!! मैग्रा बनाम मुरली तथा वीरु बनाम माही की भिंड़त देखने वाली होगी!!


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