अभी पिछले सप्ताह मैंने पोस्ट किया कि कैसे सात प्रयासों बाद टचफ्लो 2डी (TouchFlo 2D) को मोबाइल सही तरीके से स्थापित कर ही लिया तो समीर जी ने कहा कि उनके समझ में तो नहीं आया पर यह मान के चल रहे हैं कि मैं कह रहा हूँ तो कुछ अच्छा ही होगा। इतना विश्वसनीय समझने के लिए उनका बहुत आभार प्रकट करने पर मैंने कहा कि बताएँगे ही नहीं दिखा भी देंगे कि क्या मामला है।
तो यह देखिए मामला:
( इस वीडियो को आप फुलस्क्रीन (Full Screen) पर भी देख सकते हैं, बस देखने के लिए प्लेयर में मौजूद प्रोग्रेस बार के दायीं ओर स्थित चौकोर बटन पर क्लिक करें। फुलस्क्रीन मोड में से निकलने के लिए अपने कीबोर्ड में एस्केप (Esc) बटन दबाएँ। )
एचटीसी (HTC) ने अपने टच (Touch) सीरीज़ के मोबाइल फोनों में एक नया इंटरफेस निकाला था जिसको उन्होंने नाम दिया था टचफ्लो 3डी (TouchFlo 3D) जिसमें स्क्रीन पर उंगली फिराने पर एक क्यूब (बोले तो घन) उपलब्ध होता है हर तरफ़ कुछ अलग-२ और बारंबार प्रयोग होने वाले शॉर्टकट उपलब्ध होते हैं जिनको अपने अनुसार सैट किया जा सकता है। इससे कई चीज़ों में आसानी रहती है। लेकिन अपने हाल ही में आए फोन टच डॉयमंड (Touch Diamond) और अभी ताज़ा-२ रिलीज़ हुए फोन टच एचडी (Touch HD) में उन्होंने टचफ्लो इंटरफेस का एक अलग रूप निकाला है जिसमें क्यूब नहीं है इसलिए यह दो आयामी इंटरफेस है न कि तीना आयामी।
तो हुआ यूँ कि टचफ्लो 3डी की ही भांति टचफ्लो 2डी इंटरफेस भी लोगों को काफ़ी भा गया और कुछ मोबाइल सॉफ़्टवेयर डेवलपरों ने एचटीसी टच डॉयमंड में से इस इंटरफेस को निकाल लिया और उनको थोड़ा सा इस तरह बदला कि एचटीसी के बाकी टचस्क्रीन फोनों में भी यह लग सके और उसको बीटा रिलीज़ के तौर पर निकाल दिया। मामला बढ़िया लगा तो मैंने भी अपने फोन में लगा के देखने की सोची और आखिरकार लगा लिया। अब लगा लिया तो एक वीडियो भी उतार लिया दिखाने के लिए कि आखिर इसमें ऐसा क्या है!!
वैसे इसके मौसम दिखाने वाले टैब को मैंने अपने वीडियो में ऊपर दिखाया ही है लेकिन उसमें एक और बढ़िया सी चीज़ नहीं दिखा पाया तो उसके लिए यूट्यूब पर निम्न वीडियो मिल गया:
इसमें कूल चीज़ यह दिखती है कि जिस जगह का मौसम आप देख रहे हैं यदि वहाँ बरसात हो रही है तो आपकी स्क्रीन पर भी बूँदे दिखाई पड़ती हैं मौसम देखते समय और गाड़ी के वाइपर की भांति एक वाइपर फोन की स्क्रीन पर दिखने वाली बूँदों को साफ़ कर देता है!!
और यह टचफ्लो 2डी में इतना ही नहीं है जितना मैंने दिखाया है, मामला और भी काफ़ी है लेकिन मुझे उसकी आवश्यकता नहीं थी तो इसलिए इंस्टॉल नहीं किया – जैसे कि फोटो देखने के लिए एक टैब है जिसमें बस मौसम वाले टैब ही की भांति फोटो को हल्का सा खींच के ऊपर करो तो वह ऊपर से स्क्रीन से निकल जाती है और उसकी जगह नीचे से दूसरी फोटो स्क्रीन पर आ जाती है। ऐसे ही संगीत का भी टैब है जिसमें दाएँ-बाएँ करने पर गाने बदल जाते हैं और एक टैब गूगल मैप्स (Google Maps) का भी है। यह सब मामला मुझे अपने लिए अनावश्यक लगा इसलिए फोन की स्टोरेज मेमोरी बचाने के लिए मैंने इस सब तामझाम को इंस्टॉल नहीं किया।
माइक्रोब्लॉगिंग? लो अब आप सोचने लग गए होंगे कि यह क्या नया शगूफ़ा आ गया!! अभी तो ब्लॉगिंग, और वह भी यूनिकोडित हिन्दी ब्लॉगिंग और उसके बाद हिन्दी मोब्लॉगिंग (Moblogging), के सदमे से ही न उबरे थे, अब यह नई आफ़त कहाँ से आ गई!!
तो आईये पहले ज़रा फटाफट जानते हैं कि यह माइक्रोब्लॉगिंग (Micro Blogging) आखिर है क्या। विकिपीडिया के अनुसार:
Micro-blogging is a form of blogging that allows users to write brief text updates (usually 140 characters) and publish them, either to be viewed by anyone or by a restricted group which can be chosen by the user. These messages can be submitted by a variety of means, including text messaging, instant messaging, email, or the web.
इसका यदि हिन्दी में अनुवाद किया जाए तो कुछ ऐसा होगा:
माइक्रोब्लॉगिंग ब्लॉगिंग का एक ऐसा रूप है जिसमें ब्लॉगर द्वारा एक संक्षिप्त पोस्ट (अमूमन 140 अक्षरों में) लिखकर छापी जाती है जो कि आम जनता अथवा कुछ चुनिन्दा लोगों के पढ़ने के लिए होती है। यह संदेश भिन्न माध्यमों द्वारा पोस्ट किए जा सकते हैं जैसे कि इंटरनेट चैट (chat) सेवा द्बारा, ईमेल द्वारा, अथवा विश्व व्यापी वेब (World Wide Web) द्वारा।
यानि कि यह भी ब्लॉगिंग का ही एक रूप है। पर आप सोच रहे होंगे कि इसमें और जो ब्लॉगिंग आप करते हैं उसमें क्या फर्क है? फर्क यह है कि इसमें आप पुराण नुमा पोस्ट छापने की जगह महज़ कुछ पंक्तियों में ही काम निपटा लेते हैं, कुछ-२ कहिए तो मोबाइल के लघु संदेश (SMS) की भांति।
मैं जानता हूँ कि अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें कौन सी नई बात है, आलोक भाई तो कब से यही करते आ रहे हैं!! उनकी बात छोड़िए, मुझे पता है कि वे बहुत समय से माइक्रोब्लॉगिंग करते आ रहे हैं। मैं यह भी जानता हूँ कि अब आप क्या सोच रहे हैं। खबरदार जो किसी ने फुरसतिया – लघु संस्करण की बात की तो, यदि पोस्ट छोटी हो जाएगी तो पता कैसे चलेगा कि फुरसतिया प्रकाशन का माल है, अनूप जी की लंबी पोस्ट पढ़ने का अपना अलग मज़ा है!!
आपको कोई हक नहीं है यह सोच प्रसन्न होने का कि फुरसतिया पर अब 140 अक्षरों की पोस्ट छपा करेंगी!!
परन्तु आप सोच में पड़ रहे होंगे कि यह नया शगूफ़ा काहे पालें, नॉर्मल ब्लॉगिंग तो संभल नहीं रही है तो यह एक अलग आफ़त काहे गले बाँधें!! क्यों? भई आप यह नहीं समझ रहे कि इसको भी अपनी ब्लॉगिंग और ब्लॉग में ही समाहित कर सकते हैं आप, कैसे यह आप पर निर्भर है, तरीके तो बहुत हैं और जो पहले से ही प्रयोग में नहीं हो रहे हैं उन तरीकों को आप ईजाद कर लें।
क्या कभी आपके साथ ऐसा नहीं होता कि एक लंबी चौड़ी पोस्ट छापने के मूड में न हों लेकिन फिर भी कुछ विचार मन में कुलबुला रहा हो, कुछ छापने का कीड़ा काट रहा हो? मैं जानता हूँ कि मैं अकेला ऐसा नहीं हूँ, दुनिया के इतने भी अच्छे दिन नहीं आए!!
तो ऐसे समय में पूरी महाभारत छापने से अच्छा यह होता है कि आप एकाध पंक्तियाँ छाप के छपास पीड़ा से मुक्ति पाएँ और फिर बाकी आवश्यक कार्यों में लगें, आखिर ब्लॉगिंग के आगे भी जहान है!!
अभी बीते मई में उत्तर भारत का पहला ब्लॉगकैम्प दिल्ली में हुआ था। इस कैम्प में साथी ब्लॉगर अभिषेक बक्शी ने एक सत्र लिया था जिसका शीर्षक था – Micro-blogging – Life, and everything else… in 140 characters – जिसका स्लाईडशो (Slideshow) निम्न है:
यह स्लाईडशो अंग्रेज़ी में है और हो सकता है कि इससे सब कुछ समझ न आए, परन्तु एक अंदाज़ा मात्र तो हो ही जाएगा। अभिषेक के सत्र का असल जादू उनके समझाने में था न कि स्लाईडशो में!!
कल ज्ञान जी बोले कि भई ट्विट्टर और एक लाईना पोस्ट पल्ले नहीं पड़ती हैं, क्या गोरखधंधा है!! तो मैंने सोचा कि एक पोस्ट और ठेल दी जाए इस विषय में तो किसी का कुछ घटेगा नहीं, वृद्धि ही होगी।
तो साहबान, यह माइक्रोब्लॉगिंग कोई नई चीज़ नहीं है जैसा कि लोग समझने की भूल कर देते हैं, यह कई वर्षों से विद्यमान है; हाँ इसको यह नाम माइक्रोब्लॉगिंग का अभी हाल ही में मिला है और पिछले एक वर्ष में ही यह परवान चढ़ी है। परन्तु यह कई वर्षों से मौजूद है और लोग इनको प्रयोग करते आ रहे हैं, फर्क इतना है कि मैं और बहुत से आदिम काल के ब्लॉगर इनको असाईड्स (Asides) के नाम से जानते आए हैं जहाँ यह सामान्य ब्लॉग पर ही छाप दी जाती थी आम बड़े साइज़ की पोस्ट के बीच में अथवा ब्लॉग के दाएँ-बाएँ लगी पट्टी में। वर्डप्रैस वाले मैट (Matt) ने इसको वर्डप्रैस ब्लॉग में लगाने का नुस्खा चार वर्ष पहले छापा था। सिक्स अपार्ट (Six Apart) के अनिल भी काफी समय से असाईड्स छापते आ रहे हैं, आजकल वे ट्विट्टर पर स्थानांतरित हो गए हैं।
आजकल माइक्रोब्लॉगिंग के लिए अलग से प्लैटफॉर्म है, अलग सेवाएँ हैं। कौन सी? निम्न कुछ सेवाएँ जो मुझे पता हैं:
इनके अतिरिक्त भी अन्य सेवाएँ हो सकती हैं, मुझे तो इन्हीं के बारे में पता है। हर किसी की अपनी खूबियाँ हैं और खामियाँ हैं, मैं उस सब में नहीं जा रहा। मैं स्वयं ट्विट्टर का प्रयोग करता हूँ, आप किस सेवा का प्रयोग करते हैं और आपको कौन सी सेवा आकर्षित करती है यह पूरी तरह आप पर निर्भर है। इंटरनेट पर थोड़ा खोजेंगे तो इनके कंपेरिज़न चार्ट (Comparison Chart), समीक्षाएँ (Reviews) आदि सब मिल जाएगा।
यदि आप इनमें से किसी सेवा का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं अथवा सोच रहे हैं कि क्यों एक और वेबसेवा को गले बाँधा जाए तो आप अपने मौजूदा ब्लॉग पर ही चालू हो सकते हैं, क्या फर्क पड़ता है, मसला तो चार पंक्तियाँ छापने से ही है!!
यदि आप वर्डप्रैस का प्रयोग करते हैं तो इसके लिए वर्डप्रैस वाली कंपनी ऑटोमैट्टिक (Automattic) ने प्रोलोग (Prologue) नामक एक थीम (theme) भी निकाली हुई है जिसको प्रयोग कर आप स्वयं अपना माइक्रोब्लॉग चला सकते हैं यदि आप अलग से ऐसा कुछ करने के इच्छुक हैं और अपने मौजूदा ब्लॉग में माइक्रोब्लॉगिंग को समाहित नहीं करना चाहते हैं। आप यह थीम मुफ़्त में डाउनलोड कर अपने सर्वर पर वर्डप्रैस इंस्टॉल कर लगा सकते हैं या फिर आप मुफ़्ती सेवा वर्डप्रैस.कॉम पर नया ब्लॉग बना उसमें इस थीम को लगा के भी काम चला सकते हैं।
माइक्रोब्लॉगिंग का एक लाभ यह है कि चूंकि यह लघु पोस्ट होती है अमूमन तीन-चार पंक्तियों या उससे कम की, तो इसको आप कई माध्यमों से कर सकते हैं। जैसे मैं ट्विट्टर प्रयोग करता हूँ तो उस पर मोबाइल द्वारा पोस्ट करने के लिए मैंने ट्वोबाइल (Twobile) नामक फोकट का सॉफ़्टवेयर अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल किया हुआ है। इससे पहले मैं सिम्बिअन वाले फोन पर विडसैट्स (Widsets) में उपलब्ध एक विजेट द्वारा और बाद में ट्विटताए (Twittai) द्वारा ट्विट्टर पर छपाई करता रहा हूँ। विडसैट्स और ट्विटताए, दोनों ही जावा आधारित फोकटी सॉफ़्टवेयर हैं और भिन्न मोबाइल फोन पर इंस्टॉल हो सकते हैं। ट्वोबाइल सिर्फ़ विन्डोज़ मोबाइल पर चलने वाला फोकटी सॉफ़्टवेयर है। यदि आप कोई सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल नहीं करना चाहते या नहीं कर सकते तो आप ट्विट्टर की मोबाइल वेबसाइट पर सीधे लॉगिन करके भी छाप सकते हैं। यही नहीं, ट्विट्टर लघु संदेश (SMS) भेज के छापने की भी सुविधा देता है, परन्तु उनके भारतीय नंबर में कुछ लफड़ा था हाल ही में और ग्लोबल नंबर उनका लंदन का है जहाँ एक लघु संदेश भेजने के तीन-चार रुपए प्रति संदेश लग सकते हैं। ट्विट्टर ही की भांति अन्य सेवाएँ भी मोबाइल आदि द्वारा पोस्ट करने की सुविधा प्रदान कराती होंगी, मुझे उनके बारे में पक्की जानकारी नहीं है।
ट्विट्टर पर एक कमी मुझे यह खली थी कि यदि ब्लॉगनुमा कुछ छापा है तो उस पर वहीं टिप्पणियाँ पाने की व्यवस्था नहीं है, कदाचित् क्योंकि ट्विट्टर की शुरुआत कुछ अलग मकसद के तहत हुई थी, दुनिया को बताने के लिए कि आप फलाने वक्त क्या कर रहे हैं, न कि माइक्रोब्लॉगिंग में घसीटे जाने के लिए। वैसे वेबसेवा वाले किसी भी सेवा का आरंभ तो कुछ और सोच के करते हैं परन्तु अंतपंत उसका प्रयोग कई प्रकार से होता है, कुछ ऐसे भी प्रकार जिनका निर्माताओं ने सोचा भी न था।
आजकल बहुत से लोग ट्विट्टर का प्रयोग पब्लिक चैटरूम (public chatroom) की भांति करते हैं। यदि आप कभी याहू आदि के पब्लिक चैटरूम्स में गए हैं तो आपको ट्विट्टर का माहौल हो सकता है पराया न लगे।
तो जैसा कि मैंने कहा, ट्विट्टर पर पोस्ट छापने के बाद उसी के नीचे टिप्पणियाँ करने की व्यवस्था नहीं है, हालांकि आप अपने ट्विट्टर खाते से किसी अन्य की ट्विट्टर पोस्ट का उत्तर दे सकते हैं। जाएकू, जिसे कि कुछ समय पहले गूगल ने खरीद लिया था, पर यह टिप्पणियों की सुविधा शुरु से ही है लेकिन जब तक मेरा उस तक पहुँचना हुआ उस पर नए खातों का कार्य स्थगित हो चुका था। अभी हाल ही में नए खाते फिर से खुलने आरंभ हुए हैं लेकिन अभी भी आप आमंत्रित किए जाने पर ही वहाँ खाता खोल सकते हैं। तो मैंने सोचा कि अपना कार्य स्वयं कर सकने की क्षमता होने के बाद भी इन नामुराद सेवाओं का मुँह क्यों तका जाए, तो मैंने अपने हिन्दी ट्विट्टर पर छपी पोस्ट अपने इस ब्लॉग में छापने का जुगाड़ लगाया और अब हिन्दी वाले ट्विट्टर पर कुछ छापते ही वह माल तुरंत यहाँ इस ब्लॉग पर स्वतः ही छप जाता है। उसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई यह एक अलग लेख में बताऊँगा।
चूंकि मैं ट्विट्टर का ही प्रयोग करता हूँ तो उसी के बारे में बता सकता हूँ। ट्विट्टर पर ब्राऊज़र में उसकी वेबसाइट खोल के ही नहीं बल्कि कई अन्य तरीकों से भी पोस्ट किया जा सकता है। इसके लिए डेस्कटॉप सॉफ़्टवेयर भी उपलब्ध हैं जिनमें से एक है ट्वहिर्ल जिसे मैं भी प्रयोग करता हूँ। ट्विट्टर के लिए कई तरह के टूल आदि हैं जिनके बारे में आप यहाँ और यहाँ जान सकते हैं। इन टूल्स में कई मोबाइल फोन के लिए भी हैं; किसी भी टूल को डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में अवश्य पढ़ लें कि वह किस प्लैटफॉर्म के लिए है और करता क्या है। इंटरनेट पर थोड़ा खोजेंगे तो अन्य सेवाओं के लिए भी टूल मिल जाएँगे लेकिन आज की तारीख में ट्विट्टर सबसे बड़ी माइक्रोब्लॉगिंग सेवा है।
कुछ साथी हिन्दी ब्लॉगर भी ट्विट्टर पर डेरा डाले हुए हैं – जगदीश जी, मिश्रा जी, विपुल जी, जीतू भाई, रवि जी, पंकज बाबू, संजय भाई, देबू दा, आलोक भाई, मसिजीवी – इतनों के बारे में ही पता है। परन्तु ये सभी लोग वहाँ सुस्त पड़े हैं, मौसमी छपाई करते हैं परन्तु वह भी कुछ ही करते हैं जैसे कि मिश्रा जी, विपुल जी, देबू दा और आलोक भाई, बाकी सब तो मौसमी छपाई भी नहीं करते!! करो भाई लोगों, कुछ तो छपाई करो!!
आशा है कि अब आपको माइक्रोब्लॉगिंग के बारे में थोड़ी उत्सुक्ता जागी होगी (यदि पहले से ही नहीं थी), थोड़ा ज्ञानार्जन किया होगा (यदि पहले से नहीं था) और इस विधा में भी अपने हाथ आज़माने के लिए लालयित होंगे (यदि ऑलरेडी नहीं आज़मा रहे हैं)। यदि ट्विट्टर के बारे में और पढ़ना चाहते हैं तो जीतू भाई इस पर एक पोस्ट ठेल चुके हैं और रवि जी भी छाप चुके हैं, अवश्य पढ़िएगा। जीतू भाई ने तो बकायदा कई प्रयोग बताएँ हैं ट्विट्टर के जिसमें इस सेवा को लगाया जा सकता है। वे प्रयोग अन्य सेवाओं को इस्तेमाल करके भी किए जा सकते हैं इसलिए इसको सिर्फ़ ट्विट्टर का ही अधिपत्य न समझें।
तो बताईये, कब आरंभ कर रहे हैं आप माइक्रोब्लॉगिंग?
इधर मेरे मित्र अभिषेक ने मुझे अपने मोबाइल पर हिन्दी दिखाई, उधर अपनी उत्सुक्ता बढ़ गई कि क्या उपाय किया, क्या जुगाड़ लगाया जो ऐसा महान कार्य हुआ और विन्डोज़ मोबाइल पर हिन्दी चली!! बहुत कहने पर आखिरकार अभिषेक ने वह राज़ बता ही दिया कि कैसे यह काम किया और साथ ही अपने ब्लॉग पर भी पोस्ट ठेल दी। उपाय पता लगते ही मैंने भी तुरंत सॉफ़्टवेयर डाऊनलोड कर अपने विन्डोज़ मोबाइल वाले फोन पर इंस्टॉल किया और जब सॉफ़्ट रीसेट (soft reset) होकर फोन दोबारा चालू हुआ तो उस पर हिन्दी दिख रही थी, न केवल दिख रही थी बल्कि लिखी भी जा रही थी। ऐसी बढ़िया हिन्दी लिखी जा रही थी कि मैंने एक पोस्ट मोबाइल पर लिखकर ब्लॉग पर ठेल दी।
यानि हिन्दी दिखती भी चकाचक है और लिखी भी मस्त जाती है, जैसा कि आप निम्न स्क्रीनशॉट (screenshot) में देख सकते हैं।



लेकिन इस सॉफ़्टवेयर में अभी कुछ समस्याएँ हैं।
हिन्दी कैसे गड़बड़ा जाती है यह निम्न स्क्रीनशॉट (screenshot) में देखें:


वैसे इस सॉफ़्टवेयर की सैटिंग में हिन्दी निष्क्रिय करने के बाद आप हिन्दी लिख तो सकते हैं लेकिन मात्राएँ ठीक से नहीं लगा सकते, “इ” की मात्रा अक्षर लिखने के बाद लगाने की जगह पहले लगानी होती है। इससे फोन में तो मामला ठीक दिख जाएगा लेकिन तभी तक जब तक इसकी सैटिंग में हिन्दी निष्क्रिय है, क्योंकि यह मात्रा लगाने का सही तरीका नहीं है।
दो अन्य समस्याएँ जो मैंने नोट करी वह हैं:
अब इन दोनों समस्याओं में पहली समस्या का तो पता नहीं कि वह विन्डोज़ मोबाइल की है कि नहीं, लेकिन दूसरी समस्या यकीनन विन्डोज़ मोबाइल की दिखती है कि उसका क्लिपबोर्ड (clipboard) देवनागरी अक्षरों को भ्रष्ट कर देता है।
इस सॉफ़्टवेयर के द्वारा वैसे हिन्दी में लघु संदेश भी भेजे जा सकते हैं लेकिन लघु संदेश लिखने के लिए सॉफ़्टवेयर की सैटिंग में हिन्दी को निष्क्रिय करना पड़ता है क्योंकि इस सॉफ़्टवेयर में मौजूद गड़बड़ के कारण हिन्दी का विकल्प सक्रिय रहने पर लघु संदेश काम नहीं करते जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है। हिन्दी का विकल्प निष्क्रिय करने पर लघु संदेश टूटी-फूटी हिन्दी में लिख भेजा जा सकता है और हिन्दी सपोर्ट करने वाले दूसरे मोबाइल पर यह टूटी-फूटी हिन्दी में दिखता है।


यह संदेश मैंने अपने विन्डोज़ मोबाइल से अपने (Nokia 7250i) नोकिआ 7250आई पर भेजा जिसमें हिन्दी दिखती है और उसमें जैसा कि अपेक्षित था हिन्दी टूटी फूटी नज़र आई। सही हिन्दी भी नज़र आ सकती है और भेजी जा सकती है, लेकिन उसके लिए इस सॉफ़्टवेयर में हिन्दी के विकल्प को निष्क्रिय करके हिन्दी लिखनी होगी और आपको सही कुँजियाँ दबानी होंगी। ऐसा करने से स्क्रीन पर हिन्दी टूटी फूटी नज़र आएगी लेकिन असल में होगी सही और सही संदेश जाएगा।
मैंने इस सॉफ़्टवेयर के निर्माता को ईमेल लिख के इन समस्याओं के बारे में अवगत करा दिया है, देखते हैं कि वे कब इनको ठीक करते हैं।
हाँ तो अब आप सोच रहे होंगे कि सारी रामायण लिख डाली लेकिन सॉफ़्टवेयर का नाम नहीं बताया, तो वह भी बताए देते हैं। सॉफ़्टवेयर है आएरॉन्स हिन्दी सपोर्ट (Eyron’s Hindi Support) और इसको आप यहाँ से डाऊनलोड कर सकते हैं। इस सॉफ़्टवेयर को डाऊनलोड करने से पहले दो बातों का ध्यान रखें:
मज़ेदार बात यह है कि इस सॉफ़्टवेयर को बनाने वाली कंपनी आएरॉन नाम की एक इज़राइली सॉफ़्टवेयर कंपनी है!!
यह सॉफ़्टवेयर इस दिशा में एक अच्छा कदम है, आशा है कि आगे और भी बढ़िया उपाय सामने आएँगे। तब तक यदि आपके पास विन्डोज़ मोबाइल पर चलने वाला टच स्क्रीन फोन है तो इसका प्रयोग कर आप भी अपने मोबाइल में हिन्दी के मज़े लीजिए और हिन्दी में ब्लॉग पोस्ट लिखिए।
ये तो कमाल हो गया जी, मोबाइल पर हिन्दी चल रही है एकदम मस्त तरीके से और मैं यह ब्लाग पोस्ट अपने विन्डोज मोबाइल से लिख रहा हूँ।
इसका मतलब यह है कि अब हिन्दी की ब्लाग पोस्ट भी विन्डोज मोबाइल से लिखी जा सकेगी। नोकिआ के तीसरे संस्करण वाले सिम्बिअन मोबाइल में हिन्दी चलती थी लेकिन उसमे हिन्दी लिखने के लिए मोबाइल की भाषा बदलनी पडती थी। साथ ही एक समस्या यह थी कि कुंजीपटल का भान नहीं था और अंदाजे से काम करना पडता था। यहाँ इस विन्डोज मोबाइल पर कुँजीपटल स्क्रीन पर ही दिख जाता है इसलिए अधिक दिक्कत नहीं होती।
एक समस्या जो इस साफ्टवेयर में दिख रही है वह यह है कि इसमें नुक्ता लगाने का कोई साधन नहीं है।
पिछले सप्ताह मेरे मित्र अभिषेक ने अपने विन्डोज़ मोबाइल पर हिन्दी दिखाई, रोमन अक्षरों में नहीं वरन् देवनागरी लिपि में एकदम मस्त चलती हुई। हिन्दी दिख ही नहीं रही थी वरन् इंस्क्रिप्ट (Inscript) टंकण पद्धति का कीबोर्ड भी था जिससे हिन्दी लिखी भी जा सकती थी। पूछने पर अभिषेक ने बताया कि अभी ट्रांसलिटरेशन की व्यवस्था नहीं है यानि कि फोनेटिक कीबोर्ड नहीं चलेगा, इसलिए टंकण करने के लिए फिलहाल इंस्क्रिप्ट सीखनी ही होगी!
मैंने कहा कि देखो अगर हो सके तो ट्रांसलिटरेशन का भी जुगाड़ कराओ, क्या झक मारने के लिए माइक्रोसॉफ़्ट में बड़े साहब हो। तो यह तो भविष्य के गर्भ में है कि ट्रांसलिटरेशन आता है कि नहीं परन्तु अभी तो देवनागरी लिपि का जुगाड़ आ गया वही बड़ी बात है।
और? और यह कि विन्डोज़ मोबाइल का पूरा इंटरफेस हिन्दी में दिख रहा था, क्या तो मेनू और क्या टुडे स्क्रीन, सब हिन्दी में। विन्डोज़ मोबाइल संस्करण 5 से यूनिकोड सपोर्ट तो करता है लेकिन उसमें देवनागरी लिपि के अक्षर न होने के कारण हिन्दी नहीं दिखती। इस बारे में मैंने अपना एचटीसी पी3300 (HTC P3300) उर्फ़ आर्टेमिस (Artemis) लेने पर कुछ सप्ताह पहले लिखा भी था।
अभिषेक ने अभी यह बताया नहीं है कि वह हिन्दी का जुगाड़ कैसे करा पर आशा है कि शीघ्र ही वह तरकीब उगलवा लूँगा और उसके बाद अपने मोबाइल पर ट्राई करके देखूँगा!
उपाय कारगर होते ही इस ब्लॉग द्वारा वह तरकीब सबको बताई जाएगी!