RSS

Posts Tagged ‘tips’


हनीमून की दुविधा …..


July 16th, 2009 | 14 Comments

नहीं, मैं अपनी बात नहीं कर रहा हूँ।

हुआ यूँ कि अभी हाल ही में एक परिचित ने पूछा कि मधुचंद्र यानि कि हनीमून (honeymoon) के लिए कौन सी जगह बढ़िया रहेगी यदि 5 दिन 6 रात अथवा 6 दिन 7 रात का प्रोग्राम हो और डेढ़ लाख तक का कुल बजट हो। अब यह सुन मैं सोच में पड़ गया, इस बजट में भारत का कार्यक्रम भी हो सकता है तथा इतने रोकड़ में विदेशी मामला भी सैट हो सकता है। पर पंगा ये है कि इतनी जगह हैं कि समझ नहीं आ रहा कि किसको शॉर्टलिस्ट (shortlist) किया जाए, ताकि एकाध जगह सुझाई जा सकें।

भारत में ही देखें तो उत्तर में कश्मीर (Kashmir) है, लद्दाख (Laddakh) छोड़ भी दें तो नीचे राजस्थान में उदयपुर (Udaipur) और कुंभलगढ़ (Kumbhalgarh) हैं, पूर्व में सिक्किम (Sikkim) है। और कुछ नहीं तो उदयपुर में ठाठ से देवीगढ़ पैलेस में टिका जा सकता है और उदयपुर में सप्ताह भर मधुचंद्र मनाया जा सकता है, जयपुर में राम बाग पैलेस है। :D कर्नाटक में भारत के स्कॉटलैंड के नाम से प्रसिद्ध कूर्ग (Coorg) है जहाँ ऑरेन्ज काऊंटी (Orange County) का बढ़िया रिसॉर्ट (resort) भी है। फिर तमिल नाडू में कूनूर (Coonoor) और ऊटी (Ooty) जैसी बढ़िया जगह हैं जहाँ बढ़िया रिसॉर्ट (resort) भी हैं। केरला में अल्लेप्पी (Alleppey) और मुन्नार (Munnar) हैं। और फिर यदि टापू और समुद्र का मज़ा लेना है तो अंडमान निकोबार (Andaman Nicobar) द्वीप हैं। लक्षद्वीप (Lakshadweep) है लेकिन वहाँ मामला इतना कोई खास नहीं है, ऐसा पढ़ने/सुनने में आया है। और फिर गोआ (Goa) के रूप में भीड़ भाड़ वाली जगह तो है ही जहाँ हर कोई चला ही जाता है, मधुचंद्र के लिए उपयुक्त जगह नहीं है लेकिन फिर भी विकल्प के तौर पर रखने में पैसे थोड़े ही लगते हैं!!

अब यदि विदेशी मधुचंद्र स्पॉट के रूप में देखें तो इधर एशिया में पड़ोसी देश नेपाल (Nepal) और भूटान (Bhutan) के अतिरिक्त सिंगापुर (Singapore) है, ट्रूली एशिया यानि कि मलेशिया (Malaysia) है, थाईलैंड (Thailand) है, मालदीव (Maldives) है। बाली (Bali) भी है, यह जुदा बात है कि इंडोनेशिया (Indonesia) में कब क्या गड़बड़ हो जाए पता नहीं रहता। विकल्प के तौर पर सेशल्स (Seychelles) भी है लेकिन वह थोड़ा महंगा सौदा हो जाएगा और बजट को दो लाख तक बढ़ाना पड़ जाएगा। अफ़्रीका में मॉरिशस (Mauritius) काफ़ी उत्तम और हॉट स्पॉट है, साथ ही मिस्र (Egypt) को भी कंसिडर किया जा सकता है (दंपति की निजी अभिरुचि के अनुरूप)। योरोप में रोम (Rome) इतने बजट में हो जाएगा, पैरिस (Paris) भी हो जाएगा, थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे करके स्विट्ज़रलैंड (Switzerland) भी हो सकता है।

वैसे ग्रीस (Greece) और साइप्रस (Cyprus) भी बढ़िया जगह हैं लेकिन पॉलिटिकल अनरेस्ट आदि के कारण इन जगहों को ज़रा सावधानी से ही चुनना चाहिए, अन्यथा साइप्रस (Cyprus) तो पर्यटन के मामले में काफ़ी लोकप्रिय जगह है।

अब बॉटम लाइन यह है कि यदि राजसी ठाठ चाहिए तो भारत बेहतर रहेगा क्योंकि किसी भी विदेशी स्थल पर इतने बजट में राजसी ठाठ मिलना आसान नहीं है अलबत्ता कठिन अथवा नामुमकिन अवश्य है। और यदि राजसी ठाठ महत्वपूर्ण या आवश्यक नहीं हैं तो फिर इनमें से किसी भी जगह को चुना जा सकता है, हर मौसम आदि के अनुरूप जगह हैं।

लेकिन दुविधा वही है कि इतनी सारी जगहों में से एक-दो जगह कैसे शॉर्टलिस्ट की जाएँ? यही सोच विचार किया जा रहा है।

आपका क्या विचार है? यदि तीन जगह शॉर्टलिस्ट करनी हों तो कौन सी की जाएँ?
 
अपडेट: भई लोग बाग़ हलकान हो रहे हैं इसलिए बताए दें कि आखिरकार मित्र को चार जगह बता दी गई हैं शॉर्टलिस्ट करके:

  1. मॉरिशस (Mauritius)
  2. मालदीव (Maldives)
  3. अंडमान निकोबार (Andaman Nicobar)
  4. कूर्ग (Coorg)

और साथ ही यह भी कह दिया है कि यदि राजसी ठाठ चाहिए और कुछ नहीं तो चार-पाँच दिन का प्रोग्राम बनाएँ और उदयपुर में देवीगढ़ पैलेस में रह लें।

अपना काम निपट गया, अब इन जगहों में से किस जगह को चुनना है यह मित्र और उसकी होने वाली शरीक-ए-हयात की सिरदर्दी है। ;)

 
 
फोटो साभार केटी फ्रीलैन्ड और शीना पामेला, क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स के अंतर्गत


एक अदद कैमरे की चाह…..


June 1st, 2009 | 13 Comments

सभी लोग हर चीज़ का ज्ञान नहीं रखते, ऑलराऊंडर अति दुर्लभ (या विलुप्त) प्रजाति है, हम जैसे आम जन एक-दो चीज़ों का ही ज्ञान डिटेल में रख पाते हैं।

camera

अभी कुछ दिन पहले एक परिचित बोले कि डिजिटल कैमरा लेने की सोच रहे हैं। अभी तक वे फिल्म वाला कोडेक (Kodak) चला रहे थे, अब डिजिटल होना चाहते हैं, फिल्म में झंझट बहुत है और बारंबार फिल्म डालनी पड़ती है। मुझसे बोले कि यार तुम बड़ा सा औकात वाला कैमरा लिए हुए हो, जानकारी भी रखते हो तो एक कैमरा हमें भी सुझाओ।

मैंने उनसे पूछा बजट कितना है तो वे बोले कि बारह-तेरह हज़ार तक है। मैंने कहा कि कुछ बढ़ाने की गुंजाइश है क्या तो वे बोले कि तुम इतने में ही बढ़िया सा कैमरा करवाओ। तो मैंने उनको समझाया कि कैमरे के साथ एक मेमोरी कार्ड भी लेना होगा (दो ले लें तो बेहतर है) जिसमें फोटो स्टोर होती है, एक बार की इंवेस्टमेन्ट होती है, फिल्म की भांति बार-२ नहीं बदलना होता। उन्होंने पूछा कि यह कितने का आता है तो मैंने कहा आने को तो घस्सी से घटिया ऐं-वैं कार्ड तीन-चार सौ में आ जाते हैं लेकिन सैनडिस्क (Sandisk) का कार्ड लें तो बेहतर होगा, 4GB का अल्ट्रा २ (Ultra II) वाला कार्ड हज़ार-ग्यारह सौ का आ जाएगा और यदि उससे बेहतर एक्सट्रीम ३ (Extreme III) चाहिए तो वह तकरीबन दो हज़ार का आ जाएगा। बाकी रहा कैमरा तो वह स्लिम-ट्रिम छरहरी काया का चाहिए या डील-डौल वाला भी चलेगा। तो इस पर उत्तर मिला कि स्लिम-ट्रिम चाहिए, देखने में भी अच्छा हो और काम भी बढ़िया करे। मैंने पूछा कि कहाँ से ले रहे हैं तो बोले इससे क्या फर्क पड़ता है, तो मैंने बताया कि यहीं से लेंगे तो रिटेल में अमूमन कैमरे आदि महंगे मिलते हैं, अमेरिका या दुबई से लेंगे तो सस्ता मिल जाएगा। तो वे बोले कि अमेरिका में फलाना रिश्तेदार है जो अगले महीने आने वाला है, उसी के हाथ मंगवा लिया जाएगा।

Panasonic Lumix DMC-TZ5
Panasonic Lumix DMC-TZ5

सब बात एनालाइज़ (analyse) करने के बाद मैंने उनसे कहा कि पैनासोनिक ल्यूमिक्स टीज़ेड5 (Panasonic Lumix TZ5) ले लें, बजट के हिसाब से वही सबसे बढ़िया कैमरा है। पिछले साल आया था, बढ़िया कैमरा है और तकरीबन पौने तीन-तीन सौ डॉलर में आ जाएगा। नौ मेगापिक्सल का कैमरा है जिसमें 10x का ऑप्टिकल ज़ूम (optical zoom) है, पैनासोनिक की बढ़िया ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइज़ेशन (optical image stabilization) है और लेएका(leica) का लेन्स लगा है, 28mm वाइड एंगल (wide angle) से लेकर 280mm टेलीफोटो (telephoto) तक जाता है।

पैनासोनिक का नाम सुन के उन्होंने मुँह बिचकाया, बोले उनका एक मित्र प्रोफेशनल फोटोग्राफ़र है, अपना फोटो स्टूडियो चलाता है और उसके अनुसार प्रोफेशनल फोटोग्राफ़र कैनन (canon) और निकोन (nikon) को ही पसंद करते हैं क्योंकि वे ही सबसे बढ़िया कैमरे बनाते हैं। मैंने उनके मित्र की पोल खोलना ठीक न समझा, उनका मित्र है तो कदाचित्‌ उनको अपने मित्र के बारे में ऐसा सुनना अच्छा न लगता अन्यथा ऐसे फोटो स्टूडियो वाले प्रोफेशनल फोटोग्राफ़रों के बारे में मैं क्या राय/विचार रखता हूँ उनसे इन साहब को अवश्य परिचित करवाता। ;) तो उनको मैंने सिर्फ़ इतना कहा कि आप प्रोफेशनल नहीं हैं वरन्‌ डिजिटल कैमरों के मामले में नए हैं, इसलिए प्रोफेशनल लोग क्या इस्तेमाल करते हैं वो छोड़िए और वह देखिए जो आपके लिए उत्तम है, क्योंकि प्रोफेशनल वालों के प्रोफेशनल कैमरे बहुत महँगे आते हैं और काफ़ी बड़े होते हैं।

Panasonic Lumix DMC-FZ50
Panasonic Lumix DMC-FZ50

दाम और आकार की बात सुन परिचित महोदय सीधे हो गए और लेवल पर आ गए। :D पैनासोनिक को लेकर वे अभी भी संशय में थे तो मैंने बताया कि फालतू कंपनी नहीं है, पहले इनके कैमरे कोई अधिक नहीं पूछता था लेकिन पिछले कुछ समय से ये एक के बाद एक हिट और धाकड़ आईटम निकाल रहे हैं। वे पूछ बैठे कि तुमने कौन सा कैमरा लिया हुआ है तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि मेरा भी पैनासोनिक है (Panasonic Lumix FZ50), पिछले दो वर्ष से इस्तेमाल कर रहा हूँ और बढ़िया कैमरा है।

अब उनका संशय दूर हुआ तो वे उस बात पर आए जो मैंने पहले कही थी और वे उसको तभी से पूछने को बेचैन नज़र आ रहे थे। बोले कि दो मेमोरी कार्ड लेने का क्या लाभ जैसा कि तुमने कुछ देर पहले बतलाया। तो मैंने कहा कि दो कार्ड लेने का यह लाभ रहता है कि मानो एक खराब हो गया तो दूसरा तो चलता रहेगा। इस पर वे बोले कि कार्ड की वारंटी तो आती होगी तो उस पर बदल जाएगा। मैंने कहा कि वारंटी में जब बदलेगा तो बदलेगा, लेकिन यदि कार्ड छुट्टियाँ मनाते हुए खराब हो गया तो बाकी के फोटो कैसे खींचे जाएँगे? और यदि कार्ड खराब हो गया और अगले दिन छुट्टियाँ मनाने निकलना है तो कैसे फोटो लेंगे? और यदि कार्ड वारंटी के बाद खराब हुआ तो खड़े पैर कहाँ से दूसरा कार्ड जुगाड़ेंगे? इस पर बात उनके पल्ले पड़ गई और बैकअप कार्ड का महत्व उनको समझ आ गया। साथ ही मैंने कहा कि कोई आवश्यक नहीं है कि दो कार्ड लें, यदि बजट नहीं है तो एक ही ले लें और बैकअप कार्ड बाद में ले लें जब बजट बने, मैंने भी ऐसा ही किया था, शुरुआत में एक कार्ड लिया और बाद में ही दूसरा लिया था।

इतनी चर्चा और ज्ञान के बाद उनको डिजिटल कैमरे की तस्वीर ज़रा साफ़ नज़र आने लगी और धन्यवाद अदा कर वे घर की ओर बढ़ गए, कदाचित्‌ अपने रिश्तेदार को कैमरा खरीदने के लिए कहने!! :D

 
यदि आप भी ऐसी किसी दुविधा में हैं कैमरा खरीदने के विषय में तो मैंने कुछ समय पहले डिजिटल कैमरों पर सरल शब्दों में चार भागों में एक लेख लिखा था, कदाचित्‌ उसे पढ़ आपका ज्ञानवर्धन होगा और आप बेहतर निर्णय ले सकेंगे। :tup:

  1. डिजिटल कैमरा …..
  2. डिजिटल कैमरा ….. – भाग २
  3. डिजिटल कैमरा ….. – भाग ३
  4. डिजिटल कैमरा ….. – भाग ४

 
 
कैमरे का कार्टून चित्र साभार: एवराल्डो कोएलहो


माइक्रोब्लॉगिंग का फंडा फॉर डमीज़…..


September 22nd, 2008 | 15 Comments

माइक्रोब्लॉगिंग? लो अब आप सोचने लग गए होंगे कि यह क्या नया शगूफ़ा आ गया!! अभी तो ब्लॉगिंग, और वह भी यूनिकोडित हिन्दी ब्लॉगिंग और उसके बाद हिन्दी मोब्लॉगिंग (Moblogging), के सदमे से ही न उबरे थे, अब यह नई आफ़त कहाँ से आ गई!!

तो आईये पहले ज़रा फटाफट जानते हैं कि यह माइक्रोब्लॉगिंग (Micro Blogging) आखिर है क्या। विकिपीडिया के अनुसार:

Micro-blogging is a form of blogging that allows users to write brief text updates (usually 140 characters) and publish them, either to be viewed by anyone or by a restricted group which can be chosen by the user. These messages can be submitted by a variety of means, including text messaging, instant messaging, email, or the web.

इसका यदि हिन्दी में अनुवाद किया जाए तो कुछ ऐसा होगा:

माइक्रोब्लॉगिंग ब्लॉगिंग का एक ऐसा रूप है जिसमें ब्लॉगर द्वारा एक संक्षिप्त पोस्ट (अमूमन 140 अक्षरों में) लिखकर छापी जाती है जो कि आम जनता अथवा कुछ चुनिन्दा लोगों के पढ़ने के लिए होती है। यह संदेश भिन्न माध्यमों द्वारा पोस्ट किए जा सकते हैं जैसे कि इंटरनेट चैट (chat) सेवा द्बारा, ईमेल द्वारा, अथवा विश्व व्यापी वेब (World Wide Web) द्वारा।

यानि कि यह भी ब्लॉगिंग का ही एक रूप है। पर आप सोच रहे होंगे कि इसमें और जो ब्लॉगिंग आप करते हैं उसमें क्या फर्क है? फर्क यह है कि इसमें आप पुराण नुमा पोस्ट छापने की जगह महज़ कुछ पंक्तियों में ही काम निपटा लेते हैं, कुछ-२ कहिए तो मोबाइल के लघु संदेश (SMS) की भांति।

मैं जानता हूँ कि अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें कौन सी नई बात है, आलोक भाई तो कब से यही करते आ रहे हैं!! उनकी बात छोड़िए, मुझे पता है कि वे बहुत समय से माइक्रोब्लॉगिंग करते आ रहे हैं। मैं यह भी जानता हूँ कि अब आप क्या सोच रहे हैं। खबरदार जो किसी ने फुरसतिया – लघु संस्करण की बात की तो, यदि पोस्ट छोटी हो जाएगी तो पता कैसे चलेगा कि फुरसतिया प्रकाशन का माल है, अनूप जी की लंबी पोस्ट पढ़ने का अपना अलग मज़ा है!! ;) आपको कोई हक नहीं है यह सोच प्रसन्न होने का कि फुरसतिया पर अब 140 अक्षरों की पोस्ट छपा करेंगी!! :twisted:

परन्तु आप सोच में पड़ रहे होंगे कि यह नया शगूफ़ा काहे पालें, नॉर्मल ब्लॉगिंग तो संभल नहीं रही है तो यह एक अलग आफ़त काहे गले बाँधें!! क्यों? भई आप यह नहीं समझ रहे कि इसको भी अपनी ब्लॉगिंग और ब्लॉग में ही समाहित कर सकते हैं आप, कैसे यह आप पर निर्भर है, तरीके तो बहुत हैं और जो पहले से ही प्रयोग में नहीं हो रहे हैं उन तरीकों को आप ईजाद कर लें।

क्या कभी आपके साथ ऐसा नहीं होता कि एक लंबी चौड़ी पोस्ट छापने के मूड में न हों लेकिन फिर भी कुछ विचार मन में कुलबुला रहा हो, कुछ छापने का कीड़ा काट रहा हो? मैं जानता हूँ कि मैं अकेला ऐसा नहीं हूँ, दुनिया के इतने भी अच्छे दिन नहीं आए!! ;) तो ऐसे समय में पूरी महाभारत छापने से अच्छा यह होता है कि आप एकाध पंक्तियाँ छाप के छपास पीड़ा से मुक्ति पाएँ और फिर बाकी आवश्यक कार्यों में लगें, आखिर ब्लॉगिंग के आगे भी जहान है!! ;)

अभी बीते मई में उत्तर भारत का पहला ब्लॉगकैम्प दिल्ली में हुआ था। इस कैम्प में साथी ब्लॉगर अभिषेक बक्शी ने एक सत्र लिया था जिसका शीर्षक था – Micro-blogging – Life, and everything else… in 140 characters – जिसका स्लाईडशो (Slideshow) निम्न है:

यह स्लाईडशो अंग्रेज़ी में है और हो सकता है कि इससे सब कुछ समझ न आए, परन्तु एक अंदाज़ा मात्र तो हो ही जाएगा। अभिषेक के सत्र का असल जादू उनके समझाने में था न कि स्लाईडशो में!!

कल ज्ञान जी बोले कि भई ट्विट्टर और एक लाईना पोस्ट पल्ले नहीं पड़ती हैं, क्या गोरखधंधा है!! तो मैंने सोचा कि एक पोस्ट और ठेल दी जाए इस विषय में तो किसी का कुछ घटेगा नहीं, वृद्धि ही होगी। ;)

तो साहबान, यह माइक्रोब्लॉगिंग कोई नई चीज़ नहीं है जैसा कि लोग समझने की भूल कर देते हैं, यह कई वर्षों से विद्यमान है; हाँ इसको यह नाम माइक्रोब्लॉगिंग का अभी हाल ही में मिला है और पिछले एक वर्ष में ही यह परवान चढ़ी है। परन्तु यह कई वर्षों से मौजूद है और लोग इनको प्रयोग करते आ रहे हैं, फर्क इतना है कि मैं और बहुत से आदिम काल के ब्लॉगर इनको असाईड्स (Asides) के नाम से जानते आए हैं जहाँ यह सामान्य ब्लॉग पर ही छाप दी जाती थी आम बड़े साइज़ की पोस्ट के बीच में अथवा ब्लॉग के दाएँ-बाएँ लगी पट्टी में। वर्डप्रैस वाले मैट (Matt) ने इसको वर्डप्रैस ब्लॉग में लगाने का नुस्खा चार वर्ष पहले छापा था। सिक्स अपार्ट (Six Apart) के अनिल भी काफी समय से असाईड्स छापते आ रहे हैं, आजकल वे ट्विट्टर पर स्थानांतरित हो गए हैं।

आजकल माइक्रोब्लॉगिंग के लिए अलग से प्लैटफॉर्म है, अलग सेवाएँ हैं। कौन सी? निम्न कुछ सेवाएँ जो मुझे पता हैं:

इनके अतिरिक्त भी अन्य सेवाएँ हो सकती हैं, मुझे तो इन्हीं के बारे में पता है। हर किसी की अपनी खूबियाँ हैं और खामियाँ हैं, मैं उस सब में नहीं जा रहा। मैं स्वयं ट्विट्टर का प्रयोग करता हूँ, आप किस सेवा का प्रयोग करते हैं और आपको कौन सी सेवा आकर्षित करती है यह पूरी तरह आप पर निर्भर है। इंटरनेट पर थोड़ा खोजेंगे तो इनके कंपेरिज़न चार्ट (Comparison Chart), समीक्षाएँ (Reviews) आदि सब मिल जाएगा।

यदि आप इनमें से किसी सेवा का प्रयोग नहीं करना चाहते हैं अथवा सोच रहे हैं कि क्यों एक और वेबसेवा को गले बाँधा जाए तो आप अपने मौजूदा ब्लॉग पर ही चालू हो सकते हैं, क्या फर्क पड़ता है, मसला तो चार पंक्तियाँ छापने से ही है!! :) यदि आप वर्डप्रैस का प्रयोग करते हैं तो इसके लिए वर्डप्रैस वाली कंपनी ऑटोमैट्टिक (Automattic) ने प्रोलोग (Prologue) नामक एक थीम (theme) भी निकाली हुई है जिसको प्रयोग कर आप स्वयं अपना माइक्रोब्लॉग चला सकते हैं यदि आप अलग से ऐसा कुछ करने के इच्छुक हैं और अपने मौजूदा ब्लॉग में माइक्रोब्लॉगिंग को समाहित नहीं करना चाहते हैं। आप यह थीम मुफ़्त में डाउनलोड कर अपने सर्वर पर वर्डप्रैस इंस्टॉल कर लगा सकते हैं या फिर आप मुफ़्ती सेवा वर्डप्रैस.कॉम पर नया ब्लॉग बना उसमें इस थीम को लगा के भी काम चला सकते हैं।

माइक्रोब्लॉगिंग का एक लाभ यह है कि चूंकि यह लघु पोस्ट होती है अमूमन तीन-चार पंक्तियों या उससे कम की, तो इसको आप कई माध्यमों से कर सकते हैं। जैसे मैं ट्विट्टर प्रयोग करता हूँ तो उस पर मोबाइल द्वारा पोस्ट करने के लिए मैंने ट्वोबाइल (Twobile) नामक फोकट का सॉफ़्टवेयर अपने मोबाइल फोन में इंस्टॉल किया हुआ है। इससे पहले मैं सिम्बिअन वाले फोन पर विडसैट्स (Widsets) में उपलब्ध एक विजेट द्वारा और बाद में ट्विटताए (Twittai) द्वारा ट्विट्टर पर छपाई करता रहा हूँ। विडसैट्स और ट्विटताए, दोनों ही जावा आधारित फोकटी सॉफ़्टवेयर हैं और भिन्न मोबाइल फोन पर इंस्टॉल हो सकते हैं। ट्वोबाइल सिर्फ़ विन्डोज़ मोबाइल पर चलने वाला फोकटी सॉफ़्टवेयर है। यदि आप कोई सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल नहीं करना चाहते या नहीं कर सकते तो आप ट्विट्टर की मोबाइल वेबसाइट पर सीधे लॉगिन करके भी छाप सकते हैं। यही नहीं, ट्विट्टर लघु संदेश (SMS) भेज के छापने की भी सुविधा देता है, परन्तु उनके भारतीय नंबर में कुछ लफड़ा था हाल ही में और ग्लोबल नंबर उनका लंदन का है जहाँ एक लघु संदेश भेजने के तीन-चार रुपए प्रति संदेश लग सकते हैं। ट्विट्टर ही की भांति अन्य सेवाएँ भी मोबाइल आदि द्वारा पोस्ट करने की सुविधा प्रदान कराती होंगी, मुझे उनके बारे में पक्की जानकारी नहीं है।

ट्विट्टर पर एक कमी मुझे यह खली थी कि यदि ब्लॉगनुमा कुछ छापा है तो उस पर वहीं टिप्पणियाँ पाने की व्यवस्था नहीं है, कदाचित्‌ क्योंकि ट्विट्टर की शुरुआत कुछ अलग मकसद के तहत हुई थी, दुनिया को बताने के लिए कि आप फलाने वक्त क्या कर रहे हैं, न कि माइक्रोब्लॉगिंग में घसीटे जाने के लिए। वैसे वेबसेवा वाले किसी भी सेवा का आरंभ तो कुछ और सोच के करते हैं परन्तु अंतपंत उसका प्रयोग कई प्रकार से होता है, कुछ ऐसे भी प्रकार जिनका निर्माताओं ने सोचा भी न था। :D आजकल बहुत से लोग ट्विट्टर का प्रयोग पब्लिक चैटरूम (public chatroom) की भांति करते हैं। यदि आप कभी याहू आदि के पब्लिक चैटरूम्स में गए हैं तो आपको ट्विट्टर का माहौल हो सकता है पराया न लगे। ;) तो जैसा कि मैंने कहा, ट्विट्टर पर पोस्ट छापने के बाद उसी के नीचे टिप्पणियाँ करने की व्यवस्था नहीं है, हालांकि आप अपने ट्विट्टर खाते से किसी अन्य की ट्विट्टर पोस्ट का उत्तर दे सकते हैं। जाएकू, जिसे कि कुछ समय पहले गूगल ने खरीद लिया था, पर यह टिप्पणियों की सुविधा शुरु से ही है लेकिन जब तक मेरा उस तक पहुँचना हुआ उस पर नए खातों का कार्य स्थगित हो चुका था। अभी हाल ही में नए खाते फिर से खुलने आरंभ हुए हैं लेकिन अभी भी आप आमंत्रित किए जाने पर ही वहाँ खाता खोल सकते हैं। तो मैंने सोचा कि अपना कार्य स्वयं कर सकने की क्षमता होने के बाद भी इन नामुराद सेवाओं का मुँह क्यों तका जाए, तो मैंने अपने हिन्दी ट्विट्टर पर छपी पोस्ट अपने इस ब्लॉग में छापने का जुगाड़ लगाया और अब हिन्दी वाले ट्विट्टर पर कुछ छापते ही वह माल तुरंत यहाँ इस ब्लॉग पर स्वतः ही छप जाता है। उसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई यह एक अलग लेख में बताऊँगा।

चूंकि मैं ट्विट्टर का ही प्रयोग करता हूँ तो उसी के बारे में बता सकता हूँ। ट्विट्टर पर ब्राऊज़र में उसकी वेबसाइट खोल के ही नहीं बल्कि कई अन्य तरीकों से भी पोस्ट किया जा सकता है। इसके लिए डेस्कटॉप सॉफ़्टवेयर भी उपलब्ध हैं जिनमें से एक है ट्वहिर्ल जिसे मैं भी प्रयोग करता हूँ। ट्विट्टर के लिए कई तरह के टूल आदि हैं जिनके बारे में आप यहाँ और यहाँ जान सकते हैं। इन टूल्स में कई मोबाइल फोन के लिए भी हैं; किसी भी टूल को डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में अवश्य पढ़ लें कि वह किस प्लैटफॉर्म के लिए है और करता क्या है। इंटरनेट पर थोड़ा खोजेंगे तो अन्य सेवाओं के लिए भी टूल मिल जाएँगे लेकिन आज की तारीख में ट्विट्टर सबसे बड़ी माइक्रोब्लॉगिंग सेवा है।

कुछ साथी हिन्दी ब्लॉगर भी ट्विट्टर पर डेरा डाले हुए हैं – जगदीश जी, मिश्रा जी, विपुल जी, जीतू भाई, रवि जी, पंकज बाबू, संजय भाई, देबू दा, आलोक भाई, मसिजीवी – इतनों के बारे में ही पता है। परन्तु ये सभी लोग वहाँ सुस्त पड़े हैं, मौसमी छपाई करते हैं परन्तु वह भी कुछ ही करते हैं जैसे कि मिश्रा जी, विपुल जी, देबू दा और आलोक भाई, बाकी सब तो मौसमी छपाई भी नहीं करते!! करो भाई लोगों, कुछ तो छपाई करो!! :) :tup:

आशा है कि अब आपको माइक्रोब्लॉगिंग के बारे में थोड़ी उत्सुक्ता जागी होगी (यदि पहले से ही नहीं थी), थोड़ा ज्ञानार्जन किया होगा (यदि पहले से नहीं था) और इस विधा में भी अपने हाथ आज़माने के लिए लालयित होंगे (यदि ऑलरेडी नहीं आज़मा रहे हैं)। यदि ट्विट्टर के बारे में और पढ़ना चाहते हैं तो जीतू भाई इस पर एक पोस्ट ठेल चुके हैं और रवि जी भी छाप चुके हैं, अवश्य पढ़िएगा। जीतू भाई ने तो बकायदा कई प्रयोग बताएँ हैं ट्विट्टर के जिसमें इस सेवा को लगाया जा सकता है। वे प्रयोग अन्य सेवाओं को इस्तेमाल करके भी किए जा सकते हैं इसलिए इसको सिर्फ़ ट्विट्टर का ही अधिपत्य न समझें। :tup:

 
तो बताईये, कब आरंभ कर रहे हैं आप माइक्रोब्लॉगिंग? :cool:


समाचारपत्र की कतरन बनाने का जुगाड़


August 29th, 2008 | 7 Comments
Posted In: Uncategorized

पिछले सप्ताह इंटरनेट पर ऐसे ही विचरते हुए एक ऑनलाईन टूल का पता मिला। क्या करता है ये टूल? यह टूल समाचारपत्र की कतरन बनाता है। बस आप किसी भी समाचार पत्र का नाम डालिए, तारीख डालिए, खबर का शीर्षक डालिए और खबर डाल दीजिए, और बटन पर क्लिक कीजिए, बस हो गया काम और तैयार हो जाएगी आपकी समाचारपत्र की कतरन। जैसे मैंने एक कतरन बनाई, यह देखिए:


यह एकदम मुफ़्त टूल है और यहाँ उपलब्ध है। यह टूल तकरीबन एक साल पुराना है। इसी टूल से प्रेरणा पाकर एक और टूल आया जिसका नाम है गैट क्लिप्पिंग्स (Get Clippings) जिसके द्वारा दो तरह की कतरन बनती हैं।



पहले वाले टूल के मुकाबले मुझे इस गैट क्लिप्पिंग्स वाले टूल द्वारा बनाई गई कतरनें पसंद नहीं आई, सीधे तौर पर नकली लगती हैं। पर एक विकल्प के रुप में है, जिसको प्रयोग करना हो करे। :) परन्तु ध्यान रहे, ये दोनों टूल सिर्फ़ रोमन अक्षर ही दिखाते हैं, यानि कि इन पर अपनी देवनागरी लिपि के अक्षर नहीं चलेंगे।

टूल बनाने वाले इन लोगों की सभी प्रयोक्ताओं से दरख्वास्त होती है कि किसी कतरन में असली समाचारपत्र के नाम का प्रयोग न किया जाए जो कि एक वाजिब अनुरोध है और आपको किसी असली समाचारपत्र के नाम का प्रयोग करना भी नहीं चाहिए क्योंकि यह कानूनी रूप से और मौलिक रूप से अनुचित है।


स्क्रीनकॉस्ट कैसे बनाएँ…..


July 28th, 2008 | 10 Comments

पिछली पोस्ट में स्वामी जी ने पूछा कि पोस्ट में लगाई गई स्क्रीनकॉस्ट (screencast) कैसे बनाई और यही संजय भाई ने भी पूछा। तो मैंने सोचा कि इसको भी यहाँ पोस्ट के रुप में ठेल देते हैं ताकि अन्य लोगों को भी पता चल सके।

स्क्रीनशॉट लेने के तो बहुत से टूल उपलब्ध हैं, मुफ़्त भी और कमर्शियल (commercial) भी, लेकिन स्क्रीन पर आप जो कुछ करें उसका वीडियो टाइप कुछ बन जाए ऐसा जुगाड़ अमूमन आपको ऐसे सॉफ़्टवेयरों में नहीं मिलेगा।

स्क्रीन-रिकॉर्डिंग के दो तरीके आप प्रयोग में ला सकते हैं; या तो अपने वीडियो कैमरे आदि से स्क्रीन पर आप जो कुछ कर रहे हैं उसकी रिकॉर्डिंग करें अथवा फिर कोई सॉफ़्टवेयर प्रयोग करें। ;)

स्क्रीन-रिकॉर्डिंग (screen recording) करने के लिए एक से अधिक सॉफ़्टवेयर मिल जाएँगे जिनमें सबसे अधिक प्रचलित टेकस्मिथ का कैमटासिया स्टूडियो है लेकिन यह एक कमर्शियल सॉफ़्टवेयर है और इसके लिए आपको अंटी से 300 डॉलर ढीले करने पड़ेंगे। यह सिर्फ़ एक स्क्रीन-रिकॉर्डर ही नहीं वरन्‌ और भी बहुत कुछ है। परन्तु यदि आप रोकड़ा नहीं खर्चना चाहते हैं तो मुफ़्त के जुगाड़ के रुप में आपके पास दो विकल्प हैं:

  1. जिंग (Jing)
  2. विंक (Wink)

जिंग भी टेकस्मिथ वालों का ही जुगाड़ है लेकिन अभी यह परीक्षण के दौर में है इसलिए आप इसको फोकट में प्रयोग कर सकते हैं और साथ ही आपको स्क्रीनकॉस्ट.कॉम पर 2GB की स्टोरेज फोकट मिलती है इसके साथ ताकि आप अपनी स्क्रीनकॉस्ट वहाँ अपलोड कर किसी के साथ भी बाँट सकें।

विंक एक पुराना सॉफ़्टवेयर है जिसको मैं पिछले साल भर से प्रयोग कर रहा हूँ। जिंग विन्डोज़ तथा मैक के लिए उपलब्ध है और विंक विन्डोज़ और लिनक्स के लिए उपलब्ध है।

रही बात वीडियो की तो मैं स्क्रीनकॉस्ट को फ्लैश वीडियो में परिवर्तित कर लेता हूँ और फिर उसको ऑर्काइव.ऑर्ग (archive.org) पर अपलोड कर देता हूँ जहाँ कोई भी वीडियो और ऑडियो आदि अपलोड कर सकता है बशर्ते वह आपका अपना माल हो और आप उसको क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेन्स (Creative Commons License) के अंतर्गत अथवा पब्लिक डोमेन (Public Domain) में देने के लिए तैयार हों। तो फ्लैश वीडियो बना के वहाँ अपलोड करने के बाद उसको अपने ब्लॉग पर आराम से दिखा सकते हैं। ना तो वीडियो को होस्ट करने के लिए आपको सर्वर स्पेस की चिन्ता और न ही बैन्डविड्थ (bandwidth) की टेन्शन क्योंकि वह तो ऑर्काइव.ऑर्ग वालों की प्रयोग होगी। यहाँ वीडियो दिखाने के लिए मैं वर्डप्रैस के वर्डट्यूब (WordTube) प्लगिन का प्रयोग करता हूँ।

आशा है कि यह जानकारी किसी न किसी के काम की साबित होगी। :tup:


Pages: 12345